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सुहागिन या विधवा By Kishanlal Sharma

"थप। थप-------दरवाजे पर पड़ने वाली दस्तको ने राधा की नींद में विघ्न डाला था।कौन हो सकता है इतनी रात को? यह सोचती हुई वह दरवाजे तक आयी थी।दरवाजा खोलने से पहले उसने पूछा था,"कौन...

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Reborn to be Loved By Mini

Let's begin…

आरवी ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों को पूरा करने में गुज़ार दी थी। सात साल की करी मेहनत के बाद, वो आखिरकार एक सक्सेसफुल डॉक्टर बन गई थी। उसकी लाईफ एकदम सही चल...

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रात के ग्यारह बजे By Rajesh Maheshwari

आत्म कथ्य नारी ईश्वर की इस सृष्टि की संचालन कर्ता भी है और इसकी गतिशीलता का आधार भी। नारी से मेरा तात्पर्य जीव-जन्तु पेड़-पौधों में उपस्थित नारी तत्व से भी है। मानव के संदर्भ...

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त्रिखंडिता By Ranjana Jaiswal

जिंदगी राजनीति प्रेरित है और यह राजनीति सत्ता की राजनीति है, जो चारों तरफ व्याप्त है | परिवार हो या पास-पड़ोस | राज्य हो या समाज | प्रदेश हो या देश | गाँव हो या कस्बा| स्त्री हो या...

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खाली कमरा By Ratna Pandey

मुरली संघर्ष की उस राह पर चल रहा था, जिस राह पर हर रोज़ उसके सामने यह चुनौती होती कि आज कितना सामान वह बेच पाया। इस राह पर मेहनत के साथ ही बहुत धैर्य की भी ज़रूरत थी क्योंकि यहाँ क...

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दतिया की बुंदेला क्षत्राणी रानी सीता जू By Ravi Thakur

विंध्याचल पर्वत की लघु एवं उच्च श्रृंखलाओं, वनोपवन, अरण्यक उपत्यकाओं में विस्तारित, गंगा , यमुना, सिंध , नर्मदादि , पावन सलिलाओं की पुण्य धाराओं से आप्लावित पुलिंद धरा, अनादि काल स...

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अमलतास के फूल By Neerja Hemendra

वो एक वामा हैं मोबाइल फोन की घंटी बजी। मैं उठ कर नम्बर देखती हूँ। यह नम्बर चन्दा चाची का है। आज लम्बे अरसे बाद उनका फोन आया है। मैं उत्सुकतावश तीव्र गति से फोन रिसीव करती हूँ। मेरे...

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अपने साथ मेरा सफ़र By Prabodh Kumar Govil

मुझे अपने आरंभिक दिनों से ही ऐसा लगता था कि समाज के कुछ लोग मेरे मन पर बहुत असर डालते हैं। मैं ये कभी समझ नहीं पाता था कि किसी - किसी व्यक्ति से मैं इतना क्यों प्रभावित हो रहा हूं?...

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Rebirth in Novel Villanes By Aaliya khan

“आलीज़ा, जल्दी चलो! मगरिब का वक़्त हो गया है।”
ज़ायरा की आवाज़ फिर कमरे में गूंजी, लेकिन आलीज़ा को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था। वो अपने बिस्तर पर अधलेटी, गहरी निगाहों से किताब के...

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देवों की घाटी उत्तराखंड By BALRAM AGARWAL

जो व्यक्ति जितना ज्यादा घूमता है, वह उतना ही ज्यादा अनुभवी भी होता है। इसलिए बालकों में बचपन से ही यात्राओं में रुचि लेने की आदत डालनी चाहिए। यात्राएँ उनको अनुभवी और जिज्ञासु द...

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वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप ‌। By Manish Kumar Singh

वीणापाणि नमन है तुमको, मेरे कंठ में कर लो वास।देकर ज्ञान पुंज हे माता, निमिष में संशय कर दो नाश।।हे गौरी-शिव शंकर के सुत, मुझ अज्ञानी का ध्यान करो।कर दो विवेक की वर्षा अब, और प्रभु...

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त्रिधा By आयुषी सिंह

मेरी प्यारी त्रिधा,कैसी हो ? उम्मीद है पहले से बेहतर होगी। समझ नहीं आ रहा इतने सालों बाद क्या बोलूं, क्या लिखूं, क्या पूछूं...... तुम्हारा फोन नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट सब बन्...

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सच सामने आना अभी बाकी है By Kishanlal Sharma

ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना 31 दिसम्बर 1600 में इंग्लैंड में हुई थी।यह कम्पनी भारत मे व्यापार करना चाहती थी।इस कम्पनी को भारत के साथ व्यापार करने की 21 वर्ष के लिए छूट महारानी ने...

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मज़बूर By Shrikar Dixit

ये कहानी एक ऐसे मजदूर की है,जो अपने परिवार के साथ घर से बहुत दूर काम की तलाश में जाता है,अचानक से लॉकडाउन होने की वजह से कमाई और आवागमन के सारे रास्ते बंद हो जाने के कारण कुछ दिनों...

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गुम हूं तुम्हारे इश्क़ में By ARUANDHATEE GARG मीठी

एक लड़की आलथी - पालथी मारकर , टी - शर्ट और हैरम पहने , अपनी स्टडी डेस्क की चेयर पर बैठी , बेचैनी से अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ताक रही थी । दूध से सफेद गोरे गाल , काली और बड़ी - बड़...

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प्रेम विवाह By Rajesh Rajesh

जिस रेलवे जंक्शन पर मधु अपनी मां और छोटे भाई के साथ अपने गांव के लिए रेल पकड़ने आती है, उस रेलवे जंक्शन पर हमेशा सन्नाटा छाया रहता था उस छोटे रेलवे जंक्शन पर यात्री नाम मात्र के लि...

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प्यार का खेल By निखिल ठाकुर

5 जनवरी 2020 की बात थी तो निखिल अपने दोस्त टाले को उसके नम्बर में मैसेज करता है...क्योंकि निखिल ने उसे कुछ पैसे दिये थे और अब उसे कुछ पैसों की जरूरत थी तो इसलिए वह अपने दोस्त टाले...

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बदलाव ज़रूरी है By Pallavi Saxena

एक स्त्री अपने सुहाग का जोड़ा पहने अपने बंद कमरे में मध्यम सी रौशनी में खुद को आईने में देख कर आँसू बाह रही है. बार-बार उसका हाथ सिंदूर और मंगल सूत्र की और बढ़ता है लेकिन उसमें इतनी...

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तू जाने ना... By Priyanca N

एक वैल एजुकेटेड रिप्यूटेड सिंघानिया परिवार, जिसके सभी सदस्य किसी हायर पोस्ट पर हैं। सोसाइटी में अच्छी रेपुटेशन के साथ हस्ता खेलता सुखी परिवार जिसका छोटा बेटा कार्निश जो एक राइटर बन...

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इंद्रधनुष सतरंगा By Mohd Arshad Khan

हिलमिल मुहल्ले को लोग अजायब घर कहते हैं। इसलिए कि यहाँ जितने घर हैं, उतनी तरह के लोग हैं। अलग पहनावे, अलग खान-पान, अलग संस्कार, अलग बोली-बानी और अलग धर्म-वर्ण के। सचमुच, यह मुहल्ला...

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बस अब और नहीं! By Saroj Prajapati

भाग- 1 विद्या सदन आज फूलों व सजा था और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था।। द्वार पर सजा वंदनवार व घर के अंदर बाहर लगा सुंदर सा शामियाना विद्या सदन में हर आने वाले मेहमान का स्वागत क...

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आँच By Dr. Suryapal Singh

आँच अठारह सौ सत्तावन के संघर्ष की पृष्ठभूमि को उकेरता उपन्यास यह उपन्यास ? इक्कीसवीं सदीं का दूसरा दशक। उदारीकरण के बढ़ते क़दम। भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण एशियाई बाज़ारों को आच्छादित करन...

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गुनहगार By Kishanlal Sharma

अंततः माया मर गयी।उसकी लाश दो दिन तक अस्पताल में लावारिस पड़ी रही। लेकिन उसे लेने के लिए कोई नही आया।आखिर अस्पताल वालों को ही उसके क्रियाकर्म की व्यस्था करनी पड़ी।
माया अनाथ नही थी।...

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रात के ग्यारह बजे के बाद By Rajesh Maheshwari

राकेश और गौरव गहन सदमे की स्थिति में थे उन्हें विश्वास नही हो रहा था कि उनका मित्र आनंद अब इस दुनिया में नही हैं। राकेश ने गौरव से कहा कि मानव जीवन बहुमूल्य होता है क्योंकि यही हमा...

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एक लड़की सबके साथ वो सब करती By Mister Rakesh

एक लड़की की, जो सबकी नज़रों में कुछ और थी... लेकिन खुद के लिए कुछ और।

---

दिल्ली की तंग गलियों के बीच, जहां लोग दूसरों की ज़िंदगी को अपने खाली वक्त का मज़ा समझते हैं, वहीं रह...

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प्यार के लिए By Ashish Kumar Trivedi

(1) सुज़ैन की कैब अपार्टमेंट में दाखिल हुई। उसने सीट पर पड़ा अपना बैग निकाला। पेमेंट करके लिफ्ट की तरफ बढ़ गई। लिफ्ट से अपने फ्लोर पर पहुँच कर उसने फ्लैट का दरवाज़ा खोला। दरवाज़ा ख...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

नरेन्‍द्र उत्‍सुक एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्‍य सत्‍ता से साक्षात्‍कार होता रहा। परमहंस सन्‍तों की जिन पर अपार कृपा रही।

सोमवती 7 सितम्‍बर 1994 को मैं...

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मृगतृष्णा By Saroj Verma

घना वन, पुष्पों और लताओं से सुशोभित बड़े-बडे, हरे-भरे और सुंदर वृक्ष, प्राय: वन्य जीव ऐसे ही निर्भीकता से स्वच्छंद विचरण करते हुए दिखाई दे जाएंगे,ये स्थान है अरण्य वन___ यहां अरण्य...

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वो श्याम सलोनी By Anshika

वो एकटक बगीचे के फूलों को निहार रही थी रंग रूप पर उसने कभी खुद से ध्यान ही नहीं दिया था क्योंकि उसने हमेशा अपने पापा से यही सुना था की बच्चे इंसान का मन साफ होना चाहिए रंग और खुबसू...

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लौट आओ अमारा By शिखा श्रीवास्तव

यूँ तो अभी कृष्ण-पक्ष की समाप्ति में दो दिन बचे हुए थे और चंद्रमा अपनी बहुत ही हल्की छाया में तारों के साथ धीमी-धीमी रोशनी फैलाते हुए आसमान में चहलकदमी कर रहा था लेकिन फिर भी अपने...

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जनजीवन By Rajesh Maheshwari

इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,

मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम।

रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,

विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।

कर...

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इंडियन By Dikshadixit

आज मैं एक ऐसी कहानी लिख रही हूं, जो एक अनाथ छोटी बच्ची के जीवन से जुड़ी है, जो रहती तो एक बड़े ही अमीर पढ़े लिखे परिवार में है। पर सबके होते हुए भी उसका कोई नही होता। उस कहानी के क...

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अपनी अपनी ज़िंदगी By S Sinha

( यह कहानी एक औरत जो कम उम्र में विधवा हो जाती है उसकी और उसकी बेटी के रिश्ते के बारे में है … )



Part -1 अपनी अपनी ज़िंदगी



“ देखिये मैं 18 साल की हो गयी हूँ...

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मंजिल अपनी अपनी By Awantika Palewale

मोहन खासते-खासते बोला दरवाजा खोलो सूरज बेटा।
चंदा एकदम बौखला गई उसको लगा इस वक्त कौन आया होगा।

मोहन बोला मैं चाचा मोहन आया हूं।
चंदा झलाए हुए स्वर में कहा अच्छा-अच्छा रुको कपड...

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अदृश्य पीया By Sonam Brijwasi

सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है।
आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा।
कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...

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फ्रैंड जोन - प्यार की खट्टी-मीठी कहानी By Saurabh kumar Thakur

दिल्ली परिवहन निगम की बस में बैठा सत्यम ना जाने अपनी किस चिंता में मग्न था, पहली बार दिल्ली आया था न तो बहुत सारी चीजों के बारे में जानकारी थी नहीं ।
और साथ में कई अलग प्रकार की च...

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पूर्णता की चाहत रही अधूरी By Lajpat Rai Garg

पूर्णता की चाहत रही अधूरी लाजपत राय गर्ग समर्पण स्मृति शेष मामा श्री वज़ीर चन्द मंगला को जो कॉलेज के समय में मेरी छुट-पुट रचनाओं के प्रथम श्रोता रहे तथा जिनकी प्रेरणा सफलता की सीढ़...

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मोनालिसा: एक रहस्यमयी कृति की अद्भुत गाथा By Lokesh Dangi

मोनालिसा (Mona Lisa) विश्व की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग्स में से एक है, जिसे महान इतालवी कलाकार लियोनार्डो दा विंची ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया था। यह पेंटिंग आज फ्रांस के पेर...

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भारत By नन्दलाल सुथार राही

भारत की विविधताओं एवं यहाँ की संस्कृति पर एक काव्य ग्रंथ जिसमें अलग-अलग कविताओं का संग्रह है। जिसकी शुरुआत "भारत" कविता से कर रहा हूँ । आशा है आप इस रचना को उचित प्रोत्साहन...

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे.

मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...

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मुश्कान By Mehul Pasaya

' हमारी फैमिली के मेम्बर्स भी कमल करते है जो करना चाहिये वो तो करते नही और जो नही करना चाहिये वो कर देते है पता नही कब सुधरेंगे ये लोग हद है '

" अरे मेहुल क्यू गुस्स...

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आ क्यू की सच्ची कहानी By Lu Xun

कई बरस से आ क्यू की सच्ची कहानी लिखने की सोच रहा था, किन्तु उसे लिख डालने की इच्छा होते हुए भी मन में दुविधा बनी थी। इससे स्पष्ट हो जाता है कि मैं उन लोगों में नहीं, जो लेखन से गौर...

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विदा रात By Kishanlal Sharma

सर्दियों के मौसम की एक बेहद ठंडी रात।रात केे बारह बज चुके थे। बरखा के सास श्वसुर और ननद कब के अपने अपने कमरों में सो चुके थे।बरखा भी इस समय तक रोज़ सो जाती थी।लेकिन आज उसकी आँख...

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भय और आडम्बर का प्रचार By Lakshmi Narayan Panna

मर गया पत्थर-दिल इन्शान( यह लेख लेखक के जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं , लेखक के भीतर व्याप्त भय और भ्रम के विभिन्न दृश्यों को चित्रत करता है । लेखक का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या स...

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बड़ी माँ By Kishore Sharma Saraswat

‘हमारी पृथ्वी सौर-मण्डल का एक बहुत ही विचित्र ग्रह है। इसकी संरचना भगवान ने मानो स्वयं अपने हाथों से प्राणी जगत की उत्पति एवं उत्थान हेतु की है। इस ग्रह की सुन्दर संरचना में प्रकृत...

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दो आशिक़ अन्जाने By Satyadeep Trivedi

रात के ढाई बज रहे हैं। पूरनमासी का चाँद सूरज को न्यौता देकर छिपने की तैयारी में है। ट्रक का स्पीडोमीटर अस्सी से सौ के बीच डोल रहा है। हवा में सिहरन है जिसकी अनुभूति से ट्रक का खलास...

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Luck by chance again !! By zeba Praveen

कहते हैं किस्मत ऐसी चीज़ हैं जिसे हर रोज़ खुद ही लिखना पड़ता हैं, खुद की मेहनत से उसे अपने जीवन में लाना पड़ता हैं, यूँ कहे हमारा आज का किया हुआ कार्य कल किस्मत के रूप में हमारे सामने...

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Dastane - ishq By Tanya Gauniyal

बडा़ सा बंगला , पेड़ पौधो से घिरा हुआ ।एक बडा़ सा गेट जहा से एक लड़का , जिसकी उम्र पंद्रा से सोलह साल, होंगी । वो बेसूद सा होकर अंदर आया और बगंले के अंदर गया ।उसने चारो तरफ अपनी नज...

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वेदान्त 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

1. प्रारंभिक स्वरूप
परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है।
यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है,
मंत्रोच्चार औ...

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पीताम्बरी By Meena Pathak

घर में उत्सव जैसा माहौल था सभी के चेहरों पर उत्साह झलक रहा था बड़की चाची. रामपुर वाली चाची, पचरूखिया वाली चाची, सभी दोगहा में जा कर द्वार पर बैठे युवक को झाँक-झाँक देख कर निहाल...

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सुहागिन या विधवा By Kishanlal Sharma

"थप। थप-------दरवाजे पर पड़ने वाली दस्तको ने राधा की नींद में विघ्न डाला था।कौन हो सकता है इतनी रात को? यह सोचती हुई वह दरवाजे तक आयी थी।दरवाजा खोलने से पहले उसने पूछा था,"कौन...

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Reborn to be Loved By Mini

Let's begin…

आरवी ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों को पूरा करने में गुज़ार दी थी। सात साल की करी मेहनत के बाद, वो आखिरकार एक सक्सेसफुल डॉक्टर बन गई थी। उसकी लाईफ एकदम सही चल...

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रात के ग्यारह बजे By Rajesh Maheshwari

आत्म कथ्य नारी ईश्वर की इस सृष्टि की संचालन कर्ता भी है और इसकी गतिशीलता का आधार भी। नारी से मेरा तात्पर्य जीव-जन्तु पेड़-पौधों में उपस्थित नारी तत्व से भी है। मानव के संदर्भ...

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त्रिखंडिता By Ranjana Jaiswal

जिंदगी राजनीति प्रेरित है और यह राजनीति सत्ता की राजनीति है, जो चारों तरफ व्याप्त है | परिवार हो या पास-पड़ोस | राज्य हो या समाज | प्रदेश हो या देश | गाँव हो या कस्बा| स्त्री हो या...

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खाली कमरा By Ratna Pandey

मुरली संघर्ष की उस राह पर चल रहा था, जिस राह पर हर रोज़ उसके सामने यह चुनौती होती कि आज कितना सामान वह बेच पाया। इस राह पर मेहनत के साथ ही बहुत धैर्य की भी ज़रूरत थी क्योंकि यहाँ क...

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दतिया की बुंदेला क्षत्राणी रानी सीता जू By Ravi Thakur

विंध्याचल पर्वत की लघु एवं उच्च श्रृंखलाओं, वनोपवन, अरण्यक उपत्यकाओं में विस्तारित, गंगा , यमुना, सिंध , नर्मदादि , पावन सलिलाओं की पुण्य धाराओं से आप्लावित पुलिंद धरा, अनादि काल स...

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अमलतास के फूल By Neerja Hemendra

वो एक वामा हैं मोबाइल फोन की घंटी बजी। मैं उठ कर नम्बर देखती हूँ। यह नम्बर चन्दा चाची का है। आज लम्बे अरसे बाद उनका फोन आया है। मैं उत्सुकतावश तीव्र गति से फोन रिसीव करती हूँ। मेरे...

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अपने साथ मेरा सफ़र By Prabodh Kumar Govil

मुझे अपने आरंभिक दिनों से ही ऐसा लगता था कि समाज के कुछ लोग मेरे मन पर बहुत असर डालते हैं। मैं ये कभी समझ नहीं पाता था कि किसी - किसी व्यक्ति से मैं इतना क्यों प्रभावित हो रहा हूं?...

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Rebirth in Novel Villanes By Aaliya khan

“आलीज़ा, जल्दी चलो! मगरिब का वक़्त हो गया है।”
ज़ायरा की आवाज़ फिर कमरे में गूंजी, लेकिन आलीज़ा को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था। वो अपने बिस्तर पर अधलेटी, गहरी निगाहों से किताब के...

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देवों की घाटी उत्तराखंड By BALRAM AGARWAL

जो व्यक्ति जितना ज्यादा घूमता है, वह उतना ही ज्यादा अनुभवी भी होता है। इसलिए बालकों में बचपन से ही यात्राओं में रुचि लेने की आदत डालनी चाहिए। यात्राएँ उनको अनुभवी और जिज्ञासु द...

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वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप ‌। By Manish Kumar Singh

वीणापाणि नमन है तुमको, मेरे कंठ में कर लो वास।देकर ज्ञान पुंज हे माता, निमिष में संशय कर दो नाश।।हे गौरी-शिव शंकर के सुत, मुझ अज्ञानी का ध्यान करो।कर दो विवेक की वर्षा अब, और प्रभु...

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त्रिधा By आयुषी सिंह

मेरी प्यारी त्रिधा,कैसी हो ? उम्मीद है पहले से बेहतर होगी। समझ नहीं आ रहा इतने सालों बाद क्या बोलूं, क्या लिखूं, क्या पूछूं...... तुम्हारा फोन नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट सब बन्...

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सच सामने आना अभी बाकी है By Kishanlal Sharma

ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना 31 दिसम्बर 1600 में इंग्लैंड में हुई थी।यह कम्पनी भारत मे व्यापार करना चाहती थी।इस कम्पनी को भारत के साथ व्यापार करने की 21 वर्ष के लिए छूट महारानी ने...

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मज़बूर By Shrikar Dixit

ये कहानी एक ऐसे मजदूर की है,जो अपने परिवार के साथ घर से बहुत दूर काम की तलाश में जाता है,अचानक से लॉकडाउन होने की वजह से कमाई और आवागमन के सारे रास्ते बंद हो जाने के कारण कुछ दिनों...

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गुम हूं तुम्हारे इश्क़ में By ARUANDHATEE GARG मीठी

एक लड़की आलथी - पालथी मारकर , टी - शर्ट और हैरम पहने , अपनी स्टडी डेस्क की चेयर पर बैठी , बेचैनी से अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ताक रही थी । दूध से सफेद गोरे गाल , काली और बड़ी - बड़...

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प्रेम विवाह By Rajesh Rajesh

जिस रेलवे जंक्शन पर मधु अपनी मां और छोटे भाई के साथ अपने गांव के लिए रेल पकड़ने आती है, उस रेलवे जंक्शन पर हमेशा सन्नाटा छाया रहता था उस छोटे रेलवे जंक्शन पर यात्री नाम मात्र के लि...

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प्यार का खेल By निखिल ठाकुर

5 जनवरी 2020 की बात थी तो निखिल अपने दोस्त टाले को उसके नम्बर में मैसेज करता है...क्योंकि निखिल ने उसे कुछ पैसे दिये थे और अब उसे कुछ पैसों की जरूरत थी तो इसलिए वह अपने दोस्त टाले...

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बदलाव ज़रूरी है By Pallavi Saxena

एक स्त्री अपने सुहाग का जोड़ा पहने अपने बंद कमरे में मध्यम सी रौशनी में खुद को आईने में देख कर आँसू बाह रही है. बार-बार उसका हाथ सिंदूर और मंगल सूत्र की और बढ़ता है लेकिन उसमें इतनी...

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तू जाने ना... By Priyanca N

एक वैल एजुकेटेड रिप्यूटेड सिंघानिया परिवार, जिसके सभी सदस्य किसी हायर पोस्ट पर हैं। सोसाइटी में अच्छी रेपुटेशन के साथ हस्ता खेलता सुखी परिवार जिसका छोटा बेटा कार्निश जो एक राइटर बन...

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इंद्रधनुष सतरंगा By Mohd Arshad Khan

हिलमिल मुहल्ले को लोग अजायब घर कहते हैं। इसलिए कि यहाँ जितने घर हैं, उतनी तरह के लोग हैं। अलग पहनावे, अलग खान-पान, अलग संस्कार, अलग बोली-बानी और अलग धर्म-वर्ण के। सचमुच, यह मुहल्ला...

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बस अब और नहीं! By Saroj Prajapati

भाग- 1 विद्या सदन आज फूलों व सजा था और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था।। द्वार पर सजा वंदनवार व घर के अंदर बाहर लगा सुंदर सा शामियाना विद्या सदन में हर आने वाले मेहमान का स्वागत क...

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आँच By Dr. Suryapal Singh

आँच अठारह सौ सत्तावन के संघर्ष की पृष्ठभूमि को उकेरता उपन्यास यह उपन्यास ? इक्कीसवीं सदीं का दूसरा दशक। उदारीकरण के बढ़ते क़दम। भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण एशियाई बाज़ारों को आच्छादित करन...

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गुनहगार By Kishanlal Sharma

अंततः माया मर गयी।उसकी लाश दो दिन तक अस्पताल में लावारिस पड़ी रही। लेकिन उसे लेने के लिए कोई नही आया।आखिर अस्पताल वालों को ही उसके क्रियाकर्म की व्यस्था करनी पड़ी।
माया अनाथ नही थी।...

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रात के ग्यारह बजे के बाद By Rajesh Maheshwari

राकेश और गौरव गहन सदमे की स्थिति में थे उन्हें विश्वास नही हो रहा था कि उनका मित्र आनंद अब इस दुनिया में नही हैं। राकेश ने गौरव से कहा कि मानव जीवन बहुमूल्य होता है क्योंकि यही हमा...

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एक लड़की सबके साथ वो सब करती By Mister Rakesh

एक लड़की की, जो सबकी नज़रों में कुछ और थी... लेकिन खुद के लिए कुछ और।

---

दिल्ली की तंग गलियों के बीच, जहां लोग दूसरों की ज़िंदगी को अपने खाली वक्त का मज़ा समझते हैं, वहीं रह...

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प्यार के लिए By Ashish Kumar Trivedi

(1) सुज़ैन की कैब अपार्टमेंट में दाखिल हुई। उसने सीट पर पड़ा अपना बैग निकाला। पेमेंट करके लिफ्ट की तरफ बढ़ गई। लिफ्ट से अपने फ्लोर पर पहुँच कर उसने फ्लैट का दरवाज़ा खोला। दरवाज़ा ख...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

नरेन्‍द्र उत्‍सुक एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्‍य सत्‍ता से साक्षात्‍कार होता रहा। परमहंस सन्‍तों की जिन पर अपार कृपा रही।

सोमवती 7 सितम्‍बर 1994 को मैं...

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मृगतृष्णा By Saroj Verma

घना वन, पुष्पों और लताओं से सुशोभित बड़े-बडे, हरे-भरे और सुंदर वृक्ष, प्राय: वन्य जीव ऐसे ही निर्भीकता से स्वच्छंद विचरण करते हुए दिखाई दे जाएंगे,ये स्थान है अरण्य वन___ यहां अरण्य...

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वो श्याम सलोनी By Anshika

वो एकटक बगीचे के फूलों को निहार रही थी रंग रूप पर उसने कभी खुद से ध्यान ही नहीं दिया था क्योंकि उसने हमेशा अपने पापा से यही सुना था की बच्चे इंसान का मन साफ होना चाहिए रंग और खुबसू...

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लौट आओ अमारा By शिखा श्रीवास्तव

यूँ तो अभी कृष्ण-पक्ष की समाप्ति में दो दिन बचे हुए थे और चंद्रमा अपनी बहुत ही हल्की छाया में तारों के साथ धीमी-धीमी रोशनी फैलाते हुए आसमान में चहलकदमी कर रहा था लेकिन फिर भी अपने...

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जनजीवन By Rajesh Maheshwari

इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,

मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम।

रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,

विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।

कर...

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इंडियन By Dikshadixit

आज मैं एक ऐसी कहानी लिख रही हूं, जो एक अनाथ छोटी बच्ची के जीवन से जुड़ी है, जो रहती तो एक बड़े ही अमीर पढ़े लिखे परिवार में है। पर सबके होते हुए भी उसका कोई नही होता। उस कहानी के क...

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अपनी अपनी ज़िंदगी By S Sinha

( यह कहानी एक औरत जो कम उम्र में विधवा हो जाती है उसकी और उसकी बेटी के रिश्ते के बारे में है … )



Part -1 अपनी अपनी ज़िंदगी



“ देखिये मैं 18 साल की हो गयी हूँ...

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मंजिल अपनी अपनी By Awantika Palewale

मोहन खासते-खासते बोला दरवाजा खोलो सूरज बेटा।
चंदा एकदम बौखला गई उसको लगा इस वक्त कौन आया होगा।

मोहन बोला मैं चाचा मोहन आया हूं।
चंदा झलाए हुए स्वर में कहा अच्छा-अच्छा रुको कपड...

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अदृश्य पीया By Sonam Brijwasi

सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है।
आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा।
कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...

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फ्रैंड जोन - प्यार की खट्टी-मीठी कहानी By Saurabh kumar Thakur

दिल्ली परिवहन निगम की बस में बैठा सत्यम ना जाने अपनी किस चिंता में मग्न था, पहली बार दिल्ली आया था न तो बहुत सारी चीजों के बारे में जानकारी थी नहीं ।
और साथ में कई अलग प्रकार की च...

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पूर्णता की चाहत रही अधूरी By Lajpat Rai Garg

पूर्णता की चाहत रही अधूरी लाजपत राय गर्ग समर्पण स्मृति शेष मामा श्री वज़ीर चन्द मंगला को जो कॉलेज के समय में मेरी छुट-पुट रचनाओं के प्रथम श्रोता रहे तथा जिनकी प्रेरणा सफलता की सीढ़...

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मोनालिसा: एक रहस्यमयी कृति की अद्भुत गाथा By Lokesh Dangi

मोनालिसा (Mona Lisa) विश्व की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग्स में से एक है, जिसे महान इतालवी कलाकार लियोनार्डो दा विंची ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया था। यह पेंटिंग आज फ्रांस के पेर...

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भारत By नन्दलाल सुथार राही

भारत की विविधताओं एवं यहाँ की संस्कृति पर एक काव्य ग्रंथ जिसमें अलग-अलग कविताओं का संग्रह है। जिसकी शुरुआत "भारत" कविता से कर रहा हूँ । आशा है आप इस रचना को उचित प्रोत्साहन...

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे.

मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...

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मुश्कान By Mehul Pasaya

' हमारी फैमिली के मेम्बर्स भी कमल करते है जो करना चाहिये वो तो करते नही और जो नही करना चाहिये वो कर देते है पता नही कब सुधरेंगे ये लोग हद है '

" अरे मेहुल क्यू गुस्स...

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आ क्यू की सच्ची कहानी By Lu Xun

कई बरस से आ क्यू की सच्ची कहानी लिखने की सोच रहा था, किन्तु उसे लिख डालने की इच्छा होते हुए भी मन में दुविधा बनी थी। इससे स्पष्ट हो जाता है कि मैं उन लोगों में नहीं, जो लेखन से गौर...

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विदा रात By Kishanlal Sharma

सर्दियों के मौसम की एक बेहद ठंडी रात।रात केे बारह बज चुके थे। बरखा के सास श्वसुर और ननद कब के अपने अपने कमरों में सो चुके थे।बरखा भी इस समय तक रोज़ सो जाती थी।लेकिन आज उसकी आँख...

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भय और आडम्बर का प्रचार By Lakshmi Narayan Panna

मर गया पत्थर-दिल इन्शान( यह लेख लेखक के जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं , लेखक के भीतर व्याप्त भय और भ्रम के विभिन्न दृश्यों को चित्रत करता है । लेखक का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या स...

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बड़ी माँ By Kishore Sharma Saraswat

‘हमारी पृथ्वी सौर-मण्डल का एक बहुत ही विचित्र ग्रह है। इसकी संरचना भगवान ने मानो स्वयं अपने हाथों से प्राणी जगत की उत्पति एवं उत्थान हेतु की है। इस ग्रह की सुन्दर संरचना में प्रकृत...

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दो आशिक़ अन्जाने By Satyadeep Trivedi

रात के ढाई बज रहे हैं। पूरनमासी का चाँद सूरज को न्यौता देकर छिपने की तैयारी में है। ट्रक का स्पीडोमीटर अस्सी से सौ के बीच डोल रहा है। हवा में सिहरन है जिसकी अनुभूति से ट्रक का खलास...

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Luck by chance again !! By zeba Praveen

कहते हैं किस्मत ऐसी चीज़ हैं जिसे हर रोज़ खुद ही लिखना पड़ता हैं, खुद की मेहनत से उसे अपने जीवन में लाना पड़ता हैं, यूँ कहे हमारा आज का किया हुआ कार्य कल किस्मत के रूप में हमारे सामने...

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Dastane - ishq By Tanya Gauniyal

बडा़ सा बंगला , पेड़ पौधो से घिरा हुआ ।एक बडा़ सा गेट जहा से एक लड़का , जिसकी उम्र पंद्रा से सोलह साल, होंगी । वो बेसूद सा होकर अंदर आया और बगंले के अंदर गया ।उसने चारो तरफ अपनी नज...

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वेदान्त 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

1. प्रारंभिक स्वरूप
परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है।
यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है,
मंत्रोच्चार औ...

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पीताम्बरी By Meena Pathak

घर में उत्सव जैसा माहौल था सभी के चेहरों पर उत्साह झलक रहा था बड़की चाची. रामपुर वाली चाची, पचरूखिया वाली चाची, सभी दोगहा में जा कर द्वार पर बैठे युवक को झाँक-झाँक देख कर निहाल...

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