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  • गुमनाम - एपिसोड 1

    अनामिका और अविनाश दोनों उस पहाड़ी के किनारे टूटी हुई रेलिंग के पास खड़े डूबते हु...

  • रामेसर की दादी - 1

    रामेसर अब गाँव का भोला-सा लड़का नहीं रहा। समय ने उसे माँजा, अनुभवों ने उसे गढ़ा,...

  • बाबा भाग 1

    बाबा भाग 1 लेखक राज फुलवरेविट्ठल पाटिल अब उम्र के उस पड़ाव पर आ चुके थे, जहाँ शर...

  • बेजुबान इश्क - (सीजन 2)

    जब खामोशी ने सवाल पूछा पाँच साल बाद…मुंबई अब भी वही थी—भागती हुई, शोर से भरी हुई...

  • कशिश - ए अहसास वह प्यार का - 1

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  • मीठे नमकीन दलिया

                                                      मीठे नमकीन दलिया  1 . इसिडुडु ...

  • Dont Look Behind the Mirror - Part 1

    ---कहानी - गाँव नहीं, भूतों का भंडारमैं हूँ रोहन शेखर, मैं 10वीं जमात का छात्र ह...

  • खामोशी की धुन - 1

    अध्याय १: धूल, पुरानी किताबें और एक अजनबी आवाज़अम्बरपुर शहर में समय जैसे सुस्तान...

  • ‎समर्पण से आंगे - 1

    ‎part - 1‎‎सुबह के छह बज रहे थे।‎शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज...

  • उजाले की राह

    उत्तराखंड के छोटे से शहर कोटद्वार में अमन का बचपन एक साधारण लेकिन स्नेहभरे माहौल...

पहले कदम का उजाला By सीमा जैन 'भारत'

रामायण और महाभारत के काल से शुरू करें तो हमारे पास अमर, सम्रद्ध साहित्य है। हमारा जीवन कहीं न कहीं इन्हीं दोनों महाकाव्यों से जुड़ा है। या यूँ कहें कि जीवन में इन दोनों से अलग कोई क...

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सरहद By Kusum Bhatt

चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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लिविंग विथ डाय By Makvana Bhavek

आज साकुरा नाम कि एक हाईस्कूल स्टूडेन्ट का फिनरल होता है जहा उसके सारे दोस्त आये होते है लेकिन उसीका एक क्लासमेट हारुकि वहा नहि गया होता वो अपने रूम में उसने किया अपना आखरी मैसेज दे...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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हनुमान शतक- समीक्षा एवं पद्य By Ram Bharose Mishra

हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...

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शब्दों का बोझ By DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR

जब कोई चीज़ को बार-बार बोलना पड़े, फिर इन सब का मतलब शून्य हो जाता है।

कई बार लगता है कि मैं शब्दों का गुलाम हूँ। हर भावना को, हर चोट को, हर उम्मीद को शब्दों में पिरोना पड़ता है...

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लिखी हुई इबारत ( लघुकथा संग्रह ) By Jyotsana Kapil

1 - चुनौती जूनागढ़ रियासत में जबसे वार्षिक गायन प्रतियोगिता की घोषणा हुई थी संगीत प्रेमियों में हलचल मच गई थी। उस्ताद ज़ाकिर खान और पंडित ललित शास्त्री दोनों ही बेजोड़ गायक थ...

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समय का दौर By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

काव्य संकलन - समय का दौर वेदराम प्रजापति मनमस्त सम्पर्क सूत्र. गायत्री शक्ति...

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रहे तेरी दुआ मुझ पर By MASHAALLHA KHAN

ये कहानी एक काल्पनिक कहानी है  इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही है ये कहानी केवल मनोरंजन के लिए है इसमे बताये गये सभी किरदार
काल्पनिक है . . . .
लेखक -MASHAALLHA

ये इस क...

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कभी यादो मे आओ By Vartika reena

ये गाना कार में तेज आवाज में बज रहा था । और वो कार पेड़ से लड़कर खड़ी थी । बोनट खुल चुका था और उसमें से धुएं निकल रहे थे । ड्राइविंग सीट पर बैठी औरत दर्द से चिल्ला रही थी । उसने अप...

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दोस्ती से परिवार तक By Akash Saxena "Ansh"

Brief intro-राहुलविकास-राहुल के पिता।सुुशीला-राहुल की माँ।रियाअविनााश-रिया के पिता।राधा-रिया की माँ ।रीमा-रिया की बहन।मनीषदीपक-मनीष के पिता।सिया-मनीष की माँ।_______________________...

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इश्क - एक नशा By Krishna Kaveri K.K.

नैना ने अपने घर का हर एक कोना याद कर लिया था कि कौन सी चीज कहां पे रखी है।

बाहर जाने के समय वो छड़ी का इस्तेमाल करती है। लगभग 11 साल पहले एक एक्सीडेंट में नैना ने अपनी आँखों की र...

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BTH (Behind The Hill) By Aisha Diwan Naaz

परिंदों का झुंड सर के ऊपर से फड़फड़ाते हुए गुज़र रहा था। कड़ाके की ठंड में घने धुंध में वे उड़ते हुए तो नहीं दिख रहे थे लेकिन उनके पंखों की आवाज़ बेला को अपने सिपाही साथ होने का और...

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अंतर्निहित By Vrajesh Shashikant Dave

आठ वर्ष पूर्व :-

दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...

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हमनशीं । By Shwet Kumar Sinha

"इतनी जरूरी मीटिंग और ऊपर से लेट हो गया। आज तो मेरी खैर नहीं। पक्का आज तो मुझपर शामत आने वाली है और बॉस से गालियां खाने को मिलेंगी।" – अपनी अम्मी को बोलता हुआ रफ़ीक़ घर से बा...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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अधूरे इश्क की पूरी दास्तान By Nirali Ahir

खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...

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मेरी कविता संग्रह By Prahlad Pk Verma

?????????????? अब हम भी इश्क दोबारा करेंगे उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगेहम कभी तो फिर से मोहब्बत करेंगेमाना दिल में जख्म अभी ताजा हैकभी तो ये जख्म भी भरेंगेअब हम भी इश्क...

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दो दिलों का मिलन By Lokesh Dangi

शांतिपूर्ण बाग के बीच में लगे हुए झूलों पर हवा का हल्का-हल्का झोंका आ रहा था। आस-पास के पेड़-पौधे अपनी हरी-हरी पत्तियों को झटकते हुए इस खुशनुमा मौसम का स्वागत कर रहे थे। बाग में दू...

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अंश, कार्तिक, आर्यन By Renu Chaurasiya

पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था।

उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था।

उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...

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अधूरा सच By Gaurav Pathak

अजीब रात

रात का सन्नाटा कुछ अलग ही था। शहर की गलियों में हल्की धुंध तैर रही थी। स्ट्रीट लाइट की टिमटिमाती पीली रोशनी इस धुंध को और रहस्यमयी बना रही थी। हवा ठंडी थी, लेकिन उस ठंड...

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मिलन पुर By Mehul Pasaya

अरे बाजू हटो रे सब लोग वरना एक्सिडेंट हो जाएगा फिर कहना मत देख कर नहीं चलाते गाड़ी हाहहा

अरे ओ भाई इतनी ठंड इतनी गर्मी वाली बात किसको सुना रहे हो जाओ ना अपने रास्ते पे जहा जाना...

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यासमीन By गायत्री शर्मा गुँजन

यासमीन रमजान के दिनों में बिना कुछ खाये पिये यासमीन घर के सारे काम करती , झाड़ू पोछा बर्तन और खाना बनाकर स्कूल जाने के लिए खुद को तैयार करना । एक मध्यमवर्गीय परिवार से होने के बावजू...

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बाते अधूरी सी... By Priyanka Taank Bhati

मई का महीना था, रात काफी हो चुकी थी यही कोई लगभग रात के साढ़े ग्यारह बजे होंगे, सिद्धार्थ सड़क पर चला जा रहा था, तभी उसे कही से डॉगी के भौंकने की आवाज सुनाई दी, आवाज सुनते ही उसके...

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Love or Love By Unknown

दोस्ती थी... लेकिन प्यार नहीं।
शादी थी... मगर असली नहीं।
आख़िर क्यों करनी पड़ी शौबो को एक नकली शादी?
क्या था राज़ जिमी और शौबो के बीच?
और कौन था वो... जिसके आने से सब कुछ बदल ग...

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इश्कियां (पहला प्यार) By Anchal Gupta

मुंबई का एक जाना माना क्लब... illusion में लोगो की भीड़ जमी हुई थी और वो लोग लगातार हूटिंग कर रहे थे। इस वक्त वहा पर सिर्फ कलरफुल लाइट जल रही थी जो माहोल को अलग ही बना रही थी।
तभी...

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अनामिका By R B Chavda

सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...

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नारीयोत्तम नैना By Jitendra Shivhare

"क्या मैं जान सकता हूं आपको पोलिटीशियन से क्या परेशानी है? आपको उनसे दिक्कत क्या है?" एमएलए जितेंद्र ठाकुर ने नैना से पुछा। "पोलिटीशियन झुठ बहुत बोलते है?" नैना ने...

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आदमी का शिकार By Abha Yadav

भारत से लंदन जाने वाले विमान पर ,चालक का नियंत्रण समाप्त हो गया था. सभी यात्रियों के चेहरे पर परेशानी की रेखाएं खिंच आई थीं. यात्रियों की आशा भरी निगाहें चालक पर टिकी थीं....

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बिकोज़.. ईट्ज़ कॉम्प्लिकेटेड By Keyur Patel

शाम के करीब 8 बजे हैं..
बारिश का सुहाना मौसम है.. हवा चल रही है.. हमेशा की तरह भारी बारिश हो रही है..भूमि की सुगंध इसे और अधिक सुंदर बना रही है..रेलगाड़ी को केरल के पास स्टेशन पर...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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महाराणा सांगा By Praveen Kumrawat

भारत के इतिहास में यदि राजपूताना की वीरगाथाओं का स्वर्णिम अध्याय न होता तो इसकी वैसी भव्यता न होती, जैसी आज है। यहाँ की धरती भले ही वर्षा की बूँदों के लिए तरसती रही हो, परंतु सत्ता...

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स्वप्न--भुलाए नही भूलता By Kishanlal Sharma

पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल By Mallika Mukherjee

देश विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की जायेगी। इस विभाजन ने सिर्फ सरहदें ही नहीं खींचीं, बल्कि सामाजिक समरसता और साझा संस्कृति की विरासत...

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वर्जित व्योम में उड़ती स्त्री By Ranjana Jaiswal

यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...

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तुम मुझे इत्ता भी नहीं कह पाये? By harshad solanki

सिमला के बाहर बेहद खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बनी पगडण्डी पर चलते हुए राहुल की अचानक किसी से टक्कर हो गई. इस टक्कर से राहुल स्वयं दो कदम पीछे लड़खड़ा गया. जल्दी से वह खुद संभला, फिर उसन...

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चुन्नी By Krishna Chaturvedi

अध्याय - एकॐ भूर् भुवः स्वःतत् सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्…बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।इन श्लोको के साथ गुर...

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सफर से पहले ही By Kishanlal Sharma

सूरज कब का दूर क्षितिज में ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।आसमान से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर दिया था।प्लेटफॉर्म नम्बर पांच के अंतिम छो...

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बागी आत्मा By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...

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खाली हाथ By Ratna Pandey

सूरज और नताशा का इकलौता बेटा अरुण विवाह के दस वर्ष के पश्चात नताशा के गर्भ में आया था। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर भगवान के आगे माथा टेका था, ना जाने कितनी मानता रखी थीं। तब...

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साजिशो का सिलसिला By Aarti Garval

दिल्ली की ठंडी जनवरी की रात में, नैना कपूर का पेंटहाउस सुर्खियों में था। पुलिस की गाड़ियां, मीडिया और बहुत सारे लोगों की भीड़ उस आलीशान इमारत के बाहर खड़ी थीं। अभिनेत्री नैना कपूर,...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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दर्द से जीत तक By Renu Chaurasiya

नवंबर का महीना था।

आसमान से हल्की-हल्की बारिश गिर रही थी। बूंदों की नमी में ठंड और भी तेज़ लग रही थी।

चारों ओर हरियाली छाई हुई थी, जैसे धरती ने हरे रंग की चादर ओढ़ ली हो।...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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एक कदम बदलाव की ओर By Lokesh Dangi

उत्तर भारत के एक छोटे से गांव में एक अजीब सी खामोशी थी, जिसमें किसी प्रकार के बदलाव की कोई संभावना दिखाई नहीं देती थी। यह गांव अपनी पारंपरिक संस्कृति और मान्यताओं के कारण जाना जाता...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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क्या यही प्यार है By Deepak Bundela Arymoulik

क्या यही प्यार है.....? क्लास नॉर्सरी से आठवीं तक की पढ़ाई में काफ़ी नियम और क़ानून थे, वजह ये थी कि स्कूल स्वामी दीपनंद जी का था जिन्होंने समाज में अपनी छवि महान साध्विक जीवन जी कर ब...

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पहले कदम का उजाला By सीमा जैन 'भारत'

रामायण और महाभारत के काल से शुरू करें तो हमारे पास अमर, सम्रद्ध साहित्य है। हमारा जीवन कहीं न कहीं इन्हीं दोनों महाकाव्यों से जुड़ा है। या यूँ कहें कि जीवन में इन दोनों से अलग कोई क...

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सरहद By Kusum Bhatt

चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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लिविंग विथ डाय By Makvana Bhavek

आज साकुरा नाम कि एक हाईस्कूल स्टूडेन्ट का फिनरल होता है जहा उसके सारे दोस्त आये होते है लेकिन उसीका एक क्लासमेट हारुकि वहा नहि गया होता वो अपने रूम में उसने किया अपना आखरी मैसेज दे...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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हनुमान शतक- समीक्षा एवं पद्य By Ram Bharose Mishra

हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...

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शब्दों का बोझ By DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR

जब कोई चीज़ को बार-बार बोलना पड़े, फिर इन सब का मतलब शून्य हो जाता है।

कई बार लगता है कि मैं शब्दों का गुलाम हूँ। हर भावना को, हर चोट को, हर उम्मीद को शब्दों में पिरोना पड़ता है...

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लिखी हुई इबारत ( लघुकथा संग्रह ) By Jyotsana Kapil

1 - चुनौती जूनागढ़ रियासत में जबसे वार्षिक गायन प्रतियोगिता की घोषणा हुई थी संगीत प्रेमियों में हलचल मच गई थी। उस्ताद ज़ाकिर खान और पंडित ललित शास्त्री दोनों ही बेजोड़ गायक थ...

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समय का दौर By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

काव्य संकलन - समय का दौर वेदराम प्रजापति मनमस्त सम्पर्क सूत्र. गायत्री शक्ति...

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रहे तेरी दुआ मुझ पर By MASHAALLHA KHAN

ये कहानी एक काल्पनिक कहानी है  इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही है ये कहानी केवल मनोरंजन के लिए है इसमे बताये गये सभी किरदार
काल्पनिक है . . . .
लेखक -MASHAALLHA

ये इस क...

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कभी यादो मे आओ By Vartika reena

ये गाना कार में तेज आवाज में बज रहा था । और वो कार पेड़ से लड़कर खड़ी थी । बोनट खुल चुका था और उसमें से धुएं निकल रहे थे । ड्राइविंग सीट पर बैठी औरत दर्द से चिल्ला रही थी । उसने अप...

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दोस्ती से परिवार तक By Akash Saxena "Ansh"

Brief intro-राहुलविकास-राहुल के पिता।सुुशीला-राहुल की माँ।रियाअविनााश-रिया के पिता।राधा-रिया की माँ ।रीमा-रिया की बहन।मनीषदीपक-मनीष के पिता।सिया-मनीष की माँ।_______________________...

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इश्क - एक नशा By Krishna Kaveri K.K.

नैना ने अपने घर का हर एक कोना याद कर लिया था कि कौन सी चीज कहां पे रखी है।

बाहर जाने के समय वो छड़ी का इस्तेमाल करती है। लगभग 11 साल पहले एक एक्सीडेंट में नैना ने अपनी आँखों की र...

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BTH (Behind The Hill) By Aisha Diwan Naaz

परिंदों का झुंड सर के ऊपर से फड़फड़ाते हुए गुज़र रहा था। कड़ाके की ठंड में घने धुंध में वे उड़ते हुए तो नहीं दिख रहे थे लेकिन उनके पंखों की आवाज़ बेला को अपने सिपाही साथ होने का और...

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अंतर्निहित By Vrajesh Shashikant Dave

आठ वर्ष पूर्व :-

दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...

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हमनशीं । By Shwet Kumar Sinha

"इतनी जरूरी मीटिंग और ऊपर से लेट हो गया। आज तो मेरी खैर नहीं। पक्का आज तो मुझपर शामत आने वाली है और बॉस से गालियां खाने को मिलेंगी।" – अपनी अम्मी को बोलता हुआ रफ़ीक़ घर से बा...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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अधूरे इश्क की पूरी दास्तान By Nirali Ahir

खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...

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मेरी कविता संग्रह By Prahlad Pk Verma

?????????????? अब हम भी इश्क दोबारा करेंगे उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगेहम कभी तो फिर से मोहब्बत करेंगेमाना दिल में जख्म अभी ताजा हैकभी तो ये जख्म भी भरेंगेअब हम भी इश्क...

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दो दिलों का मिलन By Lokesh Dangi

शांतिपूर्ण बाग के बीच में लगे हुए झूलों पर हवा का हल्का-हल्का झोंका आ रहा था। आस-पास के पेड़-पौधे अपनी हरी-हरी पत्तियों को झटकते हुए इस खुशनुमा मौसम का स्वागत कर रहे थे। बाग में दू...

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अंश, कार्तिक, आर्यन By Renu Chaurasiya

पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था।

उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था।

उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...

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अधूरा सच By Gaurav Pathak

अजीब रात

रात का सन्नाटा कुछ अलग ही था। शहर की गलियों में हल्की धुंध तैर रही थी। स्ट्रीट लाइट की टिमटिमाती पीली रोशनी इस धुंध को और रहस्यमयी बना रही थी। हवा ठंडी थी, लेकिन उस ठंड...

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मिलन पुर By Mehul Pasaya

अरे बाजू हटो रे सब लोग वरना एक्सिडेंट हो जाएगा फिर कहना मत देख कर नहीं चलाते गाड़ी हाहहा

अरे ओ भाई इतनी ठंड इतनी गर्मी वाली बात किसको सुना रहे हो जाओ ना अपने रास्ते पे जहा जाना...

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यासमीन By गायत्री शर्मा गुँजन

यासमीन रमजान के दिनों में बिना कुछ खाये पिये यासमीन घर के सारे काम करती , झाड़ू पोछा बर्तन और खाना बनाकर स्कूल जाने के लिए खुद को तैयार करना । एक मध्यमवर्गीय परिवार से होने के बावजू...

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बाते अधूरी सी... By Priyanka Taank Bhati

मई का महीना था, रात काफी हो चुकी थी यही कोई लगभग रात के साढ़े ग्यारह बजे होंगे, सिद्धार्थ सड़क पर चला जा रहा था, तभी उसे कही से डॉगी के भौंकने की आवाज सुनाई दी, आवाज सुनते ही उसके...

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Love or Love By Unknown

दोस्ती थी... लेकिन प्यार नहीं।
शादी थी... मगर असली नहीं।
आख़िर क्यों करनी पड़ी शौबो को एक नकली शादी?
क्या था राज़ जिमी और शौबो के बीच?
और कौन था वो... जिसके आने से सब कुछ बदल ग...

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इश्कियां (पहला प्यार) By Anchal Gupta

मुंबई का एक जाना माना क्लब... illusion में लोगो की भीड़ जमी हुई थी और वो लोग लगातार हूटिंग कर रहे थे। इस वक्त वहा पर सिर्फ कलरफुल लाइट जल रही थी जो माहोल को अलग ही बना रही थी।
तभी...

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अनामिका By R B Chavda

सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...

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नारीयोत्तम नैना By Jitendra Shivhare

"क्या मैं जान सकता हूं आपको पोलिटीशियन से क्या परेशानी है? आपको उनसे दिक्कत क्या है?" एमएलए जितेंद्र ठाकुर ने नैना से पुछा। "पोलिटीशियन झुठ बहुत बोलते है?" नैना ने...

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आदमी का शिकार By Abha Yadav

भारत से लंदन जाने वाले विमान पर ,चालक का नियंत्रण समाप्त हो गया था. सभी यात्रियों के चेहरे पर परेशानी की रेखाएं खिंच आई थीं. यात्रियों की आशा भरी निगाहें चालक पर टिकी थीं....

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बिकोज़.. ईट्ज़ कॉम्प्लिकेटेड By Keyur Patel

शाम के करीब 8 बजे हैं..
बारिश का सुहाना मौसम है.. हवा चल रही है.. हमेशा की तरह भारी बारिश हो रही है..भूमि की सुगंध इसे और अधिक सुंदर बना रही है..रेलगाड़ी को केरल के पास स्टेशन पर...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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महाराणा सांगा By Praveen Kumrawat

भारत के इतिहास में यदि राजपूताना की वीरगाथाओं का स्वर्णिम अध्याय न होता तो इसकी वैसी भव्यता न होती, जैसी आज है। यहाँ की धरती भले ही वर्षा की बूँदों के लिए तरसती रही हो, परंतु सत्ता...

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स्वप्न--भुलाए नही भूलता By Kishanlal Sharma

पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल By Mallika Mukherjee

देश विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की जायेगी। इस विभाजन ने सिर्फ सरहदें ही नहीं खींचीं, बल्कि सामाजिक समरसता और साझा संस्कृति की विरासत...

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वर्जित व्योम में उड़ती स्त्री By Ranjana Jaiswal

यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...

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तुम मुझे इत्ता भी नहीं कह पाये? By harshad solanki

सिमला के बाहर बेहद खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बनी पगडण्डी पर चलते हुए राहुल की अचानक किसी से टक्कर हो गई. इस टक्कर से राहुल स्वयं दो कदम पीछे लड़खड़ा गया. जल्दी से वह खुद संभला, फिर उसन...

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चुन्नी By Krishna Chaturvedi

अध्याय - एकॐ भूर् भुवः स्वःतत् सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्…बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।इन श्लोको के साथ गुर...

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सफर से पहले ही By Kishanlal Sharma

सूरज कब का दूर क्षितिज में ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।आसमान से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर दिया था।प्लेटफॉर्म नम्बर पांच के अंतिम छो...

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बागी आत्मा By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...

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खाली हाथ By Ratna Pandey

सूरज और नताशा का इकलौता बेटा अरुण विवाह के दस वर्ष के पश्चात नताशा के गर्भ में आया था। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर भगवान के आगे माथा टेका था, ना जाने कितनी मानता रखी थीं। तब...

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साजिशो का सिलसिला By Aarti Garval

दिल्ली की ठंडी जनवरी की रात में, नैना कपूर का पेंटहाउस सुर्खियों में था। पुलिस की गाड़ियां, मीडिया और बहुत सारे लोगों की भीड़ उस आलीशान इमारत के बाहर खड़ी थीं। अभिनेत्री नैना कपूर,...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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दर्द से जीत तक By Renu Chaurasiya

नवंबर का महीना था।

आसमान से हल्की-हल्की बारिश गिर रही थी। बूंदों की नमी में ठंड और भी तेज़ लग रही थी।

चारों ओर हरियाली छाई हुई थी, जैसे धरती ने हरे रंग की चादर ओढ़ ली हो।...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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एक कदम बदलाव की ओर By Lokesh Dangi

उत्तर भारत के एक छोटे से गांव में एक अजीब सी खामोशी थी, जिसमें किसी प्रकार के बदलाव की कोई संभावना दिखाई नहीं देती थी। यह गांव अपनी पारंपरिक संस्कृति और मान्यताओं के कारण जाना जाता...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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क्या यही प्यार है By Deepak Bundela Arymoulik

क्या यही प्यार है.....? क्लास नॉर्सरी से आठवीं तक की पढ़ाई में काफ़ी नियम और क़ानून थे, वजह ये थी कि स्कूल स्वामी दीपनंद जी का था जिन्होंने समाज में अपनी छवि महान साध्विक जीवन जी कर ब...

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