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प्यार ऐसा भी By सीमा बी.

मेरी कहानी का शीर्षक पढ़ कर आप सब सोच रहे होगें की लो एक और प्रेम कहानी!!
मैं आप सब से सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि ये है तो प्रेम पर कैसा?? वो आप पर छोड़ता हूँ।

मैं प्रकाश ह...

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THEY SAID IT By CHHATRA PAL VERMA

रीतिकालीन दरबारी कवि “बिहारी” ने शृंगार रस से ओत-प्रोत सात सौ दोहों की रचना की थी, जिसे “बिहारी सतसई” नाम से जाना जाता है, जिसके बारे में लोकगाथा है-

‘सतसैया के दोहरे, ज्यों नाव...

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अमर प्रेम By Pallavi Saxena

जीवन मरण के बारे में सोचते हुए हमेशा मन उलझ जाता है चारों ओर बस सवाल ही सवाल नज़र आते हैं मगर उत्तर कहीं नज़र नहीं आता। क्या है यह आत्मा, दिल दिमाग या फिर कुछ और क्या वाकई कुछ लोग मर...

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पश्चाताप. By Ruchi Dixit

"पश्चाताप " यह रचना मैने प्रतिलिपि पर वेवसीरीज के तौर पर लिखी थी जिसे अब बिना परिवर्तित करे मै उपन्यास की रूप मातृभारती पर देने जा रही हूँ | प्रतिलिपि पर मैने इसे दस भागो...

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छुटकी दीदी By Madhukant

पात्र परिचय -

सलोनी - छुटकी दीदी

भाग्या - बड़ी बहन

ज्योत्सना - माँ

अमर - भाग्या का पति

देवी सहाय - नाना

शारदा देवी - नानी

सीताराम - माँ का चचेरा भाई

सुकांत...

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दो दिलों की कहानी प्यार By Ishani

To कहानी की शुरू होने से पहले मैं आप सबको कहानी के बारे में छोटा सा ट्रेलर or charter ka intro देना चाहूंगी कि is कहानी ki किस तरह से मेरे द्वारा शुरुआत होती है तथा किस तरह से यह आ...

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हम कैसे आगे बढे By Rajesh Maheshwari

यह घटना मगध की है। मगध के एक छोटे से राज्य के राजा की कोई सन्तान नहीं थी। जब वे वृद्धावस्था के करीब पहुँचे तथा उन्हें लगा कि उनके जीवन का सूर्य अब अस्ताचल के करीब जा रहा है और सन्त...

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गुड़िया... By Lotus

टेलिफोन की घंटी बजती है एक आदमी इन्फेक्टर की वर्दी पहने हुए पुलिस थाने मे बैठा होता है टेलिफोन की घंटी सुनकर वो फोन उठाता है फोन पर बात करने के बाद वह पुलिस थाने से दो हेंड कांस्टे...

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जंगल By Neeraj Sharma

"चलो " राहुल ने कहा... "बैठो, अगर तुम आयी हो, तो मेमसाहब अजली ऐसा करो " चुप हो गया राहुल।जॉन को एक टक देख कर बोलता हुआ बोला, "अजली ------"फिर चुप हो गया।&#3...

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मुजरिम या मुलजिम? By anita bashal

" एक 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या। क्या हो रहा है हमारे देश में? क्या ऐसे मुजरिम को सजा ए मौत देना चाहिए या नहीं? लेकिन आप यहां देख ही रहे हैं कि कुछ लोग इसे मु...

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जीवन ऊट पटाँगा By Neelam Kulshreshtha

ज़िंदगी होती है बेतरतीब, बड़ी ऊट पटाँग, थोड़ी सी बेढब, थोड़ी सी खट्टी मीठी, हंसी और आँसुओं की पोटली, अकल्पनीय बातें आपके रास्ते में फेंकती आपको बौखलाती हुई, ठगती हुई --अपनी तरह से भूल...

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Dream Love By Hanika

हाय! कितना हैंडसम लड़का है। हे भगवान! बस एक बार मिलादो प्लीज।
हनिका जो की मिडिल क्लास फैमिली से है। जो खुद से ही बातें कर रही होती है। वो जिस लड़के की बात कर रही होती है, वो कोई...

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तेरे शहर के मेरे लोग By Prabodh Kumar Govil

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...

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मुझे न्याय चाहिए By Pallavi Saxena

शारीरिक विकलांगता किसी का मुंह नहीं देखती ना ही किसी में कोई लिंग भेद ही करती है. यहाँ मैं विकलांगता शब्द का प्रयोग कर रही हूँ जो देखने, पढ़ने, सुनने, आदि में कठोर शब्द है बहुत से ल...

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इस दश्‍त में एक शहर था By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्‍वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्‍त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...

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जीवन मंत्र 99 By Mahendra Sharma

व्यवसाय की सफलता के लिए व्यवसाय के नियमों को सीखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये नियम व्यवसाय को नियंत्रित करने वाले संचालन, बाधाओं और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को परिभाषित करते हैं। य...

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एक मुट्ठी इश़्क By Saroj Verma

एक मुट्ठी इश्क़...!!--भाग(१) सरकारी अस्पताल का कमरा,कमरे मे पडे़,सफ़ेद रंग के आठ दस बिस्तर और उन्हीं बिस्तरों में से एक बिस्तर जीनत का भी हैं, महीनों से बिस्तर पर लेटे लेटे ऊब चुकी...

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OUT OF CONTROL By Raaj

आज भी रोज की तरह रात के 1 बजे रोबर्ट दरवाजा खटखटा रहा था। उतने मैं घरके अंदर टोबी के भोकने की आवाज़ आने लगी ।टोबी ने जेरी की थोडी फटी हुई पेंट को मुह में रखकर खिंच र...

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दूरी न रहे कोई By Kishanlal Sharma

"क्या लेंगे आप?"तुम कौन हो?" दरमियाने कद की युवती को अपने साामने खड़ा देखकर राजन बोला था।"मैं इस बार मे नौकरी करती हूँ"वह औरत बोली,"वेटर हूँ।"औरत होकर...

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घर की मुर्गी By AKANKSHA SRIVASTAVA

अक्सर ससुराल में नई बहू के आते ही उसे जिम्मेदारी के नाम पर अकेले ही हजारों कामो के लिए सौप दिया जाता हैं। बिना यह सोचें कि वह अभी इस घर मे नयी है। हर लड़की को मायके की आजादी से निकल...

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स्वतन्त्र  सक्सेना के विचार By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

बराबरी का सपना
स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना भारत के मध्‍य में बसा बुंदेलखण्‍ड, विध्‍याचल पर्वत व इसके बीच बहने वालीं नदियां इसकी शोभा हैं। कवि ने इसकी सीमा इन शब्‍दों में बांधी है-...

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कौन है ख़लनायक By Ratna Pandey

कभी कभी हम जीवन में ऐसे दो राहे पर आकर रुक जाते हैं कि समझ ही नहीं आता कि अब किधर जायें। ऐसे ही दो राहे पर खड़ी थी रुपाली जिसके एक तरफ़ प्रियांशु था और दूसरी तरफ़ अजय। उनमें से कौन उस...

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जादू जैसा तेरा प्यार By anirudh Singh

रात के आठ बजे भी गोवा के सेंट मरियम ऑडिटोरियम में आज जबरदस्त चहल पहल थी,आखिर हो भी क्यों न...दौर था यूथ्स 'आइकॉन ऑफ इंडिया' अवार्ड्स प्रोग्राम का....देश भर के सैकड़ो युवा उध...

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बेशक इश्क By Vandana thakur

" यह जो हल्का हल्का सुरूर है,, मेरा इश्क , मेरा फितूर है,,, यह जो हल्का,,,!!!! कहते हुए वो लडका अचानक रूक गया । उसकी आंखो से बेतहांशा,,, दर्द के साथ एक नमी उभर आयी । वो लडका एक...

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Devil's King or Queen By neha

(एक घर के बाहर का सीन दिखाया जाता है जो देखने में काफी खूबसूरत और बड़ा दिखाई दे रहा था)

माही: अरे वा क्या सुंदर घर है (माही एक डिलीवरी गर्ल है वह यहां पर एक डिलीवरी पार्सल देने...

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दस्तक दिल पर By Sanjay Nayak Shilp

आज से एक कहानी श्रृंखला शुरू कर रहा हूँ, ये वो कहानी है जिसने मुझे लंबी कहानियों को लिखने की क्षमता प्रदान की थी और कहानीकार से उपन्यास कार बनने को प्रोत्साहित किया
"दस्तक दिल...

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जहाँ चाह हो राह मिल ही जाती है By Ratna Pandey

सेठ हीरा लाल अपनी पत्नी गायत्री के साथ रोज़ की ही तरह आज भी प्रातः काल सैर पर निकले थे। बारिश के दिन थे, बहुत ही खूबसूरत मौसम, ठंडी पवन, शरीर और मन को लुभा रही थी। प्रातः के लगभग पा...

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ये तुम्हारी मेरी बातें By Preeti

"सुनो, कहां हो तुम"?

"सुबह घर से निकलते वक्त बता कर आया था , भूल गई "?

"सीधे सीधे जवाब देने में दिक्कत है क्या कोई "?

"आज अचानक से मेरी जासूसी...

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अधूरी मुलाकात... By Sonali Rawat

कुछ मुलाकातों की भी अपनी ही एक अलग किस्मत होती है जो एक तय मुकाम पर ही आकर रुकती है ।

ऐसी मुलाकातें जाने कब, कहां और कैसे हो जाएं, ये न तो हम जानते है और न ही वो जो इससे होकर गु...

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भीतर का जादू By Mak Bhavimesh

उम्ब्रालूना के एकांत द्वीप पर, जहाँ आपस में जुड़ी परछाइयाँ अनकहे रहस्य समेटे हुए थीं, एक मनोरम कहानी सामने आती हैं। इसके किनारे, कोमल उतार-चढ़ाव और एक रहस्यमय समुद्र के प्रवाह से द...

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सत्य ना प्रयोगों By Miss Chhoti

गांधीजी के बारे मे हर कोई जानता है पर बहोत कम लोग होंगे जिन्होंने उनकी आत्मकथा को पुरा पढ़ा होगा। इस लिए हम आपके लिए ये कहानी लेके आये है। गांधीजी के जीवन के कुछ मजेदार और दुःख प्र...

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वो इश्क जो अधूरा था By Ashish Dalal

कुछ प्रेम कहानियाँ ज़मीन पर शुरू होकर आसमान में बिखर जाती हैं।
कुछ, मौत के बाद भी नहीं मिटती है ।
ये कहानी है एक ऐसे प्यार की, जो अधूरा रह गया…
और एक ऐसी रूह की, जो अब अधूरी नही...

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लबसना वाला प्यार By Manisha Agarwal

अंशिका के घर का सीन इतनी चिंता क्यों कर रही हो जो भी होगा अच्छा ही होगा मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम्हारा बेस्ट रिजल्ट आएगा। मां लगातार बोले जा रही है, पर अंशिका की नजर अपने लैपटॉप...

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92 गर्लफ्रेंड्स By Rajesh Maheshwari

आत्मकथ्य आज पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर हमारा युवावर्ग दिग्भ्रमित होकर अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों को भूलता जा रहा है। आज नारी को सिर्फ विषय भोग की वस्तु समझा जान...

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रिश्ता चिट्ठी का By Preeti

मौसम का मिज़ाज बदल रहा यहाँ! ठण्ड अपने पूरे शबाब पर है।
वहां मौसम के क्या हाल? गर्मी के कहर से छुटकारा मिला क्या?मौसम ने जितनी आहिस्ता करवट ली है उतनी ही आहिस्ता आहिस्ता मेरे जीवन...

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प्यार की निशानी By Saroj Prajapati

मंगला जैसे ही सुबह स्कूल पहुंची उसे स्टाफ रूम में एक महिला बैठी हुई दिखाई दी। ध्यान से देखने पर वह उसे पहचानते हुए बोली “तुम तो मंजू हो ना!”
उसने भी हैरानी से मंगला की ओर देखते हु...

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आधार By Krishna Kant Srivastava

आचरण व संस्कार मानवीय नैतिक मूल्यों की दो ऐसी अनमोल निधियाँ हैं, जिनके बिना मानव के सामाजिक जीवन का अस्तित्व खतरे में जान पड़ता है। मानवीय नैतिक मूल्यों का अनुकरण न करना मनुष्य के...

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कर्तव्य By Asha Saraswat

व्यक्ति को अपने जीवन में माता-पिता,भाई -बहन का ध्यान रखना चाहिए; जब शादी हो जाये तो जीवन पर्यंत जीवन साथी का पूरा ध्यान और भरणपोषण करना चाहिए।जब बच्चे हों तो उनकी पूरी ज़िम्मेदारी...

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हम दिल दे चुके सनम By Gulshan Parween

रात के तकरीबन 4:00 बज रहे थे, हर तरफ गहरी खामोशी छाई हुई थी। ठंड परने की वजह से सभी अपने-अपने बिस्तर में दुबके के हुए थे, कि अचानक अलार्म की आवाज ने चारों तरफ की खामोशी को तोड़ दिय...

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प्रेम दीवानी आत्मा By Rakesh Rakesh

आयु में अपने से दो वर्ष बड़ी पड़ोस में रहने वाली अंकिता को जब उसके कॉलेज में साथ पढ़ने वाला विक्रम बोलता है "आप गुलाबी साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो" तो उसकी यह बात सुनक...

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साथी By Pallavi Saxena

यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और सिर्फ़ मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई है। कहानी में दर्शाए गए पात्र , संस्थाएं और घटनाएं काल्पनिक है। इनका उपयोग दृश्यों, पात्रों और घटनाओं को न...

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बन्धन By Saroj Verma

आइए ठाकुर साहब!! पधारिए, कहिए क्या लेना चाहते हैं? दुकान के मालिक सेठ मगनलाल ने ठाकुर राघव प्रताप सिंह से पूछा!! बस,सेठ जी कुछ कम्बल खरीदने है, गरीबों में बांटने के लिए,सर्...

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प्रतिशोध- By Saroj Verma

दूर पहाड़ों के बीच बसा एक राज्य जिसका नाम पुलस्थ है, धन-धान्य से परिपूर्ण, जहां की प्रजा के मुंख पर सदैव प्रसन्नता वास करती है,उस राज्य के राजा है हर्षवर्धन,जो आज पड़ोसी राज्य के र...

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तर्ज़नी से अनामिका तक By Rajesh Maheshwari

उपरोक्त स्वरचित कविताएँ मेरे जीवन का आधार हैं और इनकी भावनाएँ मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मानव अपने जीवन की पहली श्वांस से मृत्यु की अंतिम श्वांस तक संघर्षरत् रहकर अपनी कल्पनाओं...

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चोलबे ना By Rajeev Upadhyay

चच्चा खीस से एकमुस्त लाल-पीला हो भुनभुनाए जा रहे थे मगर बोल कुछ भी नहीं रहे थे। मतलब एकदम चुप्प! बहुत देर तक उनका भ्रमर गान सुनने के बाद जब मेरे अन्दर का कीड़ा कुलबुलाने लगा। अन्त म...

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इश्क फरामोश By Pritpal Kaur

आसिफ बड़ी देर से बेचैनी के साथ ऑपरेशन थिएटर के बाहर चहल कदमी कर रहा था. अब तक तो खबर मिल जानी चाहिए थी. देर क्यूँ हो रही है? कही कोई गड़बड़ तो नहीं? ये हस्पताल बहुत बेकार है. इतना तो...

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मैं पापन ऐसी जली! By Saroj Verma

सात सुरों के मेल को सरगम कहा जाता है,ये एक ऐसी ही लड़की की कहनी है जिसका नाम सरगम है,जिसका जीवन उसके नाम की तरह संगीतमय था जो स्वरबद्ध और तालबद्ध था लेकिन फिर उसके जीवन के सुरो का त...

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बेटी की अदालत By Ratna Pandey

18 साल की स्वीटी के सामने एक बहुत ही विकट समस्या थी। वह समस्या थी मम्मी या पापा किसके साथ उसे अपना आगे का जीवन बिताना है। उसकी मम्मी अलका और पापा गौरव के बीच रोज़ होते झगड़ों के कार...

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प्लेटफार्म पर खड़ी औरत By Kishanlal Sharma

वह साहित्य का शौकीन कभी नही रहा।उपन्यास और मैगज़ीन को वह छूता तक नही था।कभी कभी समाचारों के लिए अखबार पर सरसरी नज़र जरूर डाल लेता था।
साहित्य से चाहे उसे एलर्जी हो पर एक साहित्यकार...

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कांट्रैक्टर By Arpan Kumar

सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति और कार्यनीति का अखाड़ा ही तो। एन.आई.सी....

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प्यार ऐसा भी By सीमा बी.

मेरी कहानी का शीर्षक पढ़ कर आप सब सोच रहे होगें की लो एक और प्रेम कहानी!!
मैं आप सब से सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि ये है तो प्रेम पर कैसा?? वो आप पर छोड़ता हूँ।

मैं प्रकाश ह...

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THEY SAID IT By CHHATRA PAL VERMA

रीतिकालीन दरबारी कवि “बिहारी” ने शृंगार रस से ओत-प्रोत सात सौ दोहों की रचना की थी, जिसे “बिहारी सतसई” नाम से जाना जाता है, जिसके बारे में लोकगाथा है-

‘सतसैया के दोहरे, ज्यों नाव...

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अमर प्रेम By Pallavi Saxena

जीवन मरण के बारे में सोचते हुए हमेशा मन उलझ जाता है चारों ओर बस सवाल ही सवाल नज़र आते हैं मगर उत्तर कहीं नज़र नहीं आता। क्या है यह आत्मा, दिल दिमाग या फिर कुछ और क्या वाकई कुछ लोग मर...

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पश्चाताप. By Ruchi Dixit

"पश्चाताप " यह रचना मैने प्रतिलिपि पर वेवसीरीज के तौर पर लिखी थी जिसे अब बिना परिवर्तित करे मै उपन्यास की रूप मातृभारती पर देने जा रही हूँ | प्रतिलिपि पर मैने इसे दस भागो...

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छुटकी दीदी By Madhukant

पात्र परिचय -

सलोनी - छुटकी दीदी

भाग्या - बड़ी बहन

ज्योत्सना - माँ

अमर - भाग्या का पति

देवी सहाय - नाना

शारदा देवी - नानी

सीताराम - माँ का चचेरा भाई

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दो दिलों की कहानी प्यार By Ishani

To कहानी की शुरू होने से पहले मैं आप सबको कहानी के बारे में छोटा सा ट्रेलर or charter ka intro देना चाहूंगी कि is कहानी ki किस तरह से मेरे द्वारा शुरुआत होती है तथा किस तरह से यह आ...

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हम कैसे आगे बढे By Rajesh Maheshwari

यह घटना मगध की है। मगध के एक छोटे से राज्य के राजा की कोई सन्तान नहीं थी। जब वे वृद्धावस्था के करीब पहुँचे तथा उन्हें लगा कि उनके जीवन का सूर्य अब अस्ताचल के करीब जा रहा है और सन्त...

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गुड़िया... By Lotus

टेलिफोन की घंटी बजती है एक आदमी इन्फेक्टर की वर्दी पहने हुए पुलिस थाने मे बैठा होता है टेलिफोन की घंटी सुनकर वो फोन उठाता है फोन पर बात करने के बाद वह पुलिस थाने से दो हेंड कांस्टे...

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जंगल By Neeraj Sharma

"चलो " राहुल ने कहा... "बैठो, अगर तुम आयी हो, तो मेमसाहब अजली ऐसा करो " चुप हो गया राहुल।जॉन को एक टक देख कर बोलता हुआ बोला, "अजली ------"फिर चुप हो गया।&#3...

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मुजरिम या मुलजिम? By anita bashal

" एक 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या। क्या हो रहा है हमारे देश में? क्या ऐसे मुजरिम को सजा ए मौत देना चाहिए या नहीं? लेकिन आप यहां देख ही रहे हैं कि कुछ लोग इसे मु...

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जीवन ऊट पटाँगा By Neelam Kulshreshtha

ज़िंदगी होती है बेतरतीब, बड़ी ऊट पटाँग, थोड़ी सी बेढब, थोड़ी सी खट्टी मीठी, हंसी और आँसुओं की पोटली, अकल्पनीय बातें आपके रास्ते में फेंकती आपको बौखलाती हुई, ठगती हुई --अपनी तरह से भूल...

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Dream Love By Hanika

हाय! कितना हैंडसम लड़का है। हे भगवान! बस एक बार मिलादो प्लीज।
हनिका जो की मिडिल क्लास फैमिली से है। जो खुद से ही बातें कर रही होती है। वो जिस लड़के की बात कर रही होती है, वो कोई...

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तेरे शहर के मेरे लोग By Prabodh Kumar Govil

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...

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मुझे न्याय चाहिए By Pallavi Saxena

शारीरिक विकलांगता किसी का मुंह नहीं देखती ना ही किसी में कोई लिंग भेद ही करती है. यहाँ मैं विकलांगता शब्द का प्रयोग कर रही हूँ जो देखने, पढ़ने, सुनने, आदि में कठोर शब्द है बहुत से ल...

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इस दश्‍त में एक शहर था By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्‍वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्‍त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...

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जीवन मंत्र 99 By Mahendra Sharma

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एक मुट्ठी इश़्क By Saroj Verma

एक मुट्ठी इश्क़...!!--भाग(१) सरकारी अस्पताल का कमरा,कमरे मे पडे़,सफ़ेद रंग के आठ दस बिस्तर और उन्हीं बिस्तरों में से एक बिस्तर जीनत का भी हैं, महीनों से बिस्तर पर लेटे लेटे ऊब चुकी...

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OUT OF CONTROL By Raaj

आज भी रोज की तरह रात के 1 बजे रोबर्ट दरवाजा खटखटा रहा था। उतने मैं घरके अंदर टोबी के भोकने की आवाज़ आने लगी ।टोबी ने जेरी की थोडी फटी हुई पेंट को मुह में रखकर खिंच र...

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दूरी न रहे कोई By Kishanlal Sharma

"क्या लेंगे आप?"तुम कौन हो?" दरमियाने कद की युवती को अपने साामने खड़ा देखकर राजन बोला था।"मैं इस बार मे नौकरी करती हूँ"वह औरत बोली,"वेटर हूँ।"औरत होकर...

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घर की मुर्गी By AKANKSHA SRIVASTAVA

अक्सर ससुराल में नई बहू के आते ही उसे जिम्मेदारी के नाम पर अकेले ही हजारों कामो के लिए सौप दिया जाता हैं। बिना यह सोचें कि वह अभी इस घर मे नयी है। हर लड़की को मायके की आजादी से निकल...

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स्वतन्त्र  सक्सेना के विचार By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

बराबरी का सपना
स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना भारत के मध्‍य में बसा बुंदेलखण्‍ड, विध्‍याचल पर्वत व इसके बीच बहने वालीं नदियां इसकी शोभा हैं। कवि ने इसकी सीमा इन शब्‍दों में बांधी है-...

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कौन है ख़लनायक By Ratna Pandey

कभी कभी हम जीवन में ऐसे दो राहे पर आकर रुक जाते हैं कि समझ ही नहीं आता कि अब किधर जायें। ऐसे ही दो राहे पर खड़ी थी रुपाली जिसके एक तरफ़ प्रियांशु था और दूसरी तरफ़ अजय। उनमें से कौन उस...

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जादू जैसा तेरा प्यार By anirudh Singh

रात के आठ बजे भी गोवा के सेंट मरियम ऑडिटोरियम में आज जबरदस्त चहल पहल थी,आखिर हो भी क्यों न...दौर था यूथ्स 'आइकॉन ऑफ इंडिया' अवार्ड्स प्रोग्राम का....देश भर के सैकड़ो युवा उध...

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बेशक इश्क By Vandana thakur

" यह जो हल्का हल्का सुरूर है,, मेरा इश्क , मेरा फितूर है,,, यह जो हल्का,,,!!!! कहते हुए वो लडका अचानक रूक गया । उसकी आंखो से बेतहांशा,,, दर्द के साथ एक नमी उभर आयी । वो लडका एक...

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Devil's King or Queen By neha

(एक घर के बाहर का सीन दिखाया जाता है जो देखने में काफी खूबसूरत और बड़ा दिखाई दे रहा था)

माही: अरे वा क्या सुंदर घर है (माही एक डिलीवरी गर्ल है वह यहां पर एक डिलीवरी पार्सल देने...

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दस्तक दिल पर By Sanjay Nayak Shilp

आज से एक कहानी श्रृंखला शुरू कर रहा हूँ, ये वो कहानी है जिसने मुझे लंबी कहानियों को लिखने की क्षमता प्रदान की थी और कहानीकार से उपन्यास कार बनने को प्रोत्साहित किया
"दस्तक दिल...

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जहाँ चाह हो राह मिल ही जाती है By Ratna Pandey

सेठ हीरा लाल अपनी पत्नी गायत्री के साथ रोज़ की ही तरह आज भी प्रातः काल सैर पर निकले थे। बारिश के दिन थे, बहुत ही खूबसूरत मौसम, ठंडी पवन, शरीर और मन को लुभा रही थी। प्रातः के लगभग पा...

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ये तुम्हारी मेरी बातें By Preeti

"सुनो, कहां हो तुम"?

"सुबह घर से निकलते वक्त बता कर आया था , भूल गई "?

"सीधे सीधे जवाब देने में दिक्कत है क्या कोई "?

"आज अचानक से मेरी जासूसी...

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अधूरी मुलाकात... By Sonali Rawat

कुछ मुलाकातों की भी अपनी ही एक अलग किस्मत होती है जो एक तय मुकाम पर ही आकर रुकती है ।

ऐसी मुलाकातें जाने कब, कहां और कैसे हो जाएं, ये न तो हम जानते है और न ही वो जो इससे होकर गु...

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भीतर का जादू By Mak Bhavimesh

उम्ब्रालूना के एकांत द्वीप पर, जहाँ आपस में जुड़ी परछाइयाँ अनकहे रहस्य समेटे हुए थीं, एक मनोरम कहानी सामने आती हैं। इसके किनारे, कोमल उतार-चढ़ाव और एक रहस्यमय समुद्र के प्रवाह से द...

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सत्य ना प्रयोगों By Miss Chhoti

गांधीजी के बारे मे हर कोई जानता है पर बहोत कम लोग होंगे जिन्होंने उनकी आत्मकथा को पुरा पढ़ा होगा। इस लिए हम आपके लिए ये कहानी लेके आये है। गांधीजी के जीवन के कुछ मजेदार और दुःख प्र...

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वो इश्क जो अधूरा था By Ashish Dalal

कुछ प्रेम कहानियाँ ज़मीन पर शुरू होकर आसमान में बिखर जाती हैं।
कुछ, मौत के बाद भी नहीं मिटती है ।
ये कहानी है एक ऐसे प्यार की, जो अधूरा रह गया…
और एक ऐसी रूह की, जो अब अधूरी नही...

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लबसना वाला प्यार By Manisha Agarwal

अंशिका के घर का सीन इतनी चिंता क्यों कर रही हो जो भी होगा अच्छा ही होगा मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम्हारा बेस्ट रिजल्ट आएगा। मां लगातार बोले जा रही है, पर अंशिका की नजर अपने लैपटॉप...

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92 गर्लफ्रेंड्स By Rajesh Maheshwari

आत्मकथ्य आज पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर हमारा युवावर्ग दिग्भ्रमित होकर अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों को भूलता जा रहा है। आज नारी को सिर्फ विषय भोग की वस्तु समझा जान...

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रिश्ता चिट्ठी का By Preeti

मौसम का मिज़ाज बदल रहा यहाँ! ठण्ड अपने पूरे शबाब पर है।
वहां मौसम के क्या हाल? गर्मी के कहर से छुटकारा मिला क्या?मौसम ने जितनी आहिस्ता करवट ली है उतनी ही आहिस्ता आहिस्ता मेरे जीवन...

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प्यार की निशानी By Saroj Prajapati

मंगला जैसे ही सुबह स्कूल पहुंची उसे स्टाफ रूम में एक महिला बैठी हुई दिखाई दी। ध्यान से देखने पर वह उसे पहचानते हुए बोली “तुम तो मंजू हो ना!”
उसने भी हैरानी से मंगला की ओर देखते हु...

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आधार By Krishna Kant Srivastava

आचरण व संस्कार मानवीय नैतिक मूल्यों की दो ऐसी अनमोल निधियाँ हैं, जिनके बिना मानव के सामाजिक जीवन का अस्तित्व खतरे में जान पड़ता है। मानवीय नैतिक मूल्यों का अनुकरण न करना मनुष्य के...

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कर्तव्य By Asha Saraswat

व्यक्ति को अपने जीवन में माता-पिता,भाई -बहन का ध्यान रखना चाहिए; जब शादी हो जाये तो जीवन पर्यंत जीवन साथी का पूरा ध्यान और भरणपोषण करना चाहिए।जब बच्चे हों तो उनकी पूरी ज़िम्मेदारी...

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हम दिल दे चुके सनम By Gulshan Parween

रात के तकरीबन 4:00 बज रहे थे, हर तरफ गहरी खामोशी छाई हुई थी। ठंड परने की वजह से सभी अपने-अपने बिस्तर में दुबके के हुए थे, कि अचानक अलार्म की आवाज ने चारों तरफ की खामोशी को तोड़ दिय...

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प्रेम दीवानी आत्मा By Rakesh Rakesh

आयु में अपने से दो वर्ष बड़ी पड़ोस में रहने वाली अंकिता को जब उसके कॉलेज में साथ पढ़ने वाला विक्रम बोलता है "आप गुलाबी साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो" तो उसकी यह बात सुनक...

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साथी By Pallavi Saxena

यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और सिर्फ़ मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई है। कहानी में दर्शाए गए पात्र , संस्थाएं और घटनाएं काल्पनिक है। इनका उपयोग दृश्यों, पात्रों और घटनाओं को न...

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बन्धन By Saroj Verma

आइए ठाकुर साहब!! पधारिए, कहिए क्या लेना चाहते हैं? दुकान के मालिक सेठ मगनलाल ने ठाकुर राघव प्रताप सिंह से पूछा!! बस,सेठ जी कुछ कम्बल खरीदने है, गरीबों में बांटने के लिए,सर्...

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प्रतिशोध- By Saroj Verma

दूर पहाड़ों के बीच बसा एक राज्य जिसका नाम पुलस्थ है, धन-धान्य से परिपूर्ण, जहां की प्रजा के मुंख पर सदैव प्रसन्नता वास करती है,उस राज्य के राजा है हर्षवर्धन,जो आज पड़ोसी राज्य के र...

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तर्ज़नी से अनामिका तक By Rajesh Maheshwari

उपरोक्त स्वरचित कविताएँ मेरे जीवन का आधार हैं और इनकी भावनाएँ मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मानव अपने जीवन की पहली श्वांस से मृत्यु की अंतिम श्वांस तक संघर्षरत् रहकर अपनी कल्पनाओं...

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चोलबे ना By Rajeev Upadhyay

चच्चा खीस से एकमुस्त लाल-पीला हो भुनभुनाए जा रहे थे मगर बोल कुछ भी नहीं रहे थे। मतलब एकदम चुप्प! बहुत देर तक उनका भ्रमर गान सुनने के बाद जब मेरे अन्दर का कीड़ा कुलबुलाने लगा। अन्त म...

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इश्क फरामोश By Pritpal Kaur

आसिफ बड़ी देर से बेचैनी के साथ ऑपरेशन थिएटर के बाहर चहल कदमी कर रहा था. अब तक तो खबर मिल जानी चाहिए थी. देर क्यूँ हो रही है? कही कोई गड़बड़ तो नहीं? ये हस्पताल बहुत बेकार है. इतना तो...

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मैं पापन ऐसी जली! By Saroj Verma

सात सुरों के मेल को सरगम कहा जाता है,ये एक ऐसी ही लड़की की कहनी है जिसका नाम सरगम है,जिसका जीवन उसके नाम की तरह संगीतमय था जो स्वरबद्ध और तालबद्ध था लेकिन फिर उसके जीवन के सुरो का त...

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बेटी की अदालत By Ratna Pandey

18 साल की स्वीटी के सामने एक बहुत ही विकट समस्या थी। वह समस्या थी मम्मी या पापा किसके साथ उसे अपना आगे का जीवन बिताना है। उसकी मम्मी अलका और पापा गौरव के बीच रोज़ होते झगड़ों के कार...

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प्लेटफार्म पर खड़ी औरत By Kishanlal Sharma

वह साहित्य का शौकीन कभी नही रहा।उपन्यास और मैगज़ीन को वह छूता तक नही था।कभी कभी समाचारों के लिए अखबार पर सरसरी नज़र जरूर डाल लेता था।
साहित्य से चाहे उसे एलर्जी हो पर एक साहित्यकार...

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कांट्रैक्टर By Arpan Kumar

सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति और कार्यनीति का अखाड़ा ही तो। एन.आई.सी....

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