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आओ चलें परिवर्तन की ओर.... By Anil Sainger

आज से करीब बीस-इक्कीस साल पहले कॉलेजिस में लड़कियां बहुत कम हुआ करती थीं और इसी कारण वह हमेशा आकर्षण का केंद्र रहती थीं | उस ज़माने में कॉलेजिस में रैगिंग एक आम बात थी और कॉलेज प्रशा...

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नियति ...can’t change by anybody By PRATIK PATHAK

शीर्षक: नियति ...can’t change by anybody लेखक: प्रतीक पाठक कहानी के किरदार :1) डॉ.अमित नायक – प्रोफेसर 2) मालिनी - डॉ.अमित नायक की सहायक 3) रंगनाथ उर्फ रंगा - डॉ.अमित नायककी कॉ...

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सजना साथ निभाना By Saroj Verma

फ़रवरी की हल्की ठंड!!
सेठ धरमदास का हवेलीनुमा मकान जो उनके दादा जी ने बनवाया था,समय के साथ-साथ मकान में भी आधुनिक परिवर्तन किए गए,नये बाथरूम बनाए गए, सहूलियत के हिसाब से उसमें फेर...

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The Mystery of the Blue Eye's By Pretty Poision

आज मै फिर से पसीने से लथपत जाग गई । वही नीली आखें आज भी मुझे डराने ओर घबराने पर मजबुर कर देती है।

मै सोफ़िया बोरिंग सी नॉवेल की दुनिया मे ज़ीने वाली लड़की हुँ। मुझे पता नहीं मेरे म...

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प्रेम न हाट बिकाय By DrPranava Bharti

कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...

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कोरोना प्यार है By Jitendra Shivhare

*"मैं* तुम जैसे लड़को को बहुत अच्छे से जानती हूं, जो जानबूझकर लड़कीयों की मोपेट को टक्कर मारते है।" चंचला दहाड़ रही थी। सड़क पर भीड़ जमा होने लगी।

"देखीये मैडम! अनजान...

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खाली हाथ वाली अम्मा By Prabodh Kumar Govil

वैसे नाम तो मेरा पप्पू है पर अब पप्पू कम लोग कहते हैं मुझे, क्योंकि मैं बड़ा हो गया हूं और इतने बड़े लड़के को पप्पू कहना शायद लोगों को अजीब सा लगता हो, इसलिए पिछले कुछ सालों से लोग...

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छुट-पुट अफसाने By Veena Vij

वक़्त की ग़र्द में लिपटा काफ़ी कुछ छूट जाता है, अगर उसे याद का जामा पहना के बांध न लिया जाए। पिछली सदी में चालीस के दशक की बातें हैं, जब मैं कुछ महीनों की थी । पापा लाहौर में उस वक...

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गोधूलि By Priyamvad

उस साल ऋतुएं थोड़ा पहले आ गयीं थीं। इतना पहले कि वसंत अभी कोहरे में ही था। इसकी सफेदी और ठंडी नमी ने पेड़ों के पीले पत्तों को गिरने से रोक रखा था। बुलबुलों के गलों के रंग भी अभी सुर्...

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निर्वाण. By Saroj Verma

निर्वाण इसका अर्थ होता है मोक्ष,इस संसार में सभी मोक्ष पाना चाहते हैं किन्तु उसका जरिया कौन और क्या होगा? ये कह पाना मुश्किल है,मोक्ष परम अभीष्ट एवं परम पुरूषार्थ को कहा गया है,मोक...

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अमावस्या में खिला चाँद By Lajpat Rai Garg

एक पंक्ति में बनी कई सरकारी इमारतों में से एक में स्थित उच्च शिक्षा विभाग के मुख्यालय में पदस्थ उच्च पदाधिकारी प्रवीर कुमार ने अपने कक्ष में आकर अपनी मेज़ पर पहले से रखी फ़ाइलों मे...

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मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

आज की इस भयावह चकाचौंध में भारत की पावन धरती से मानवी के बहुत सारे सच्‍चे चेहरे गायब और अनदिखे से हो रहे हैं, उन्‍हीं की खोज में यह काव्‍य संकलन ‘मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या ?’...

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डोर टू डोर कैंपेन By Prabodh Kumar Govil

दुनिया भर में लोग कुत्ते पालने का शौक़ सबसे ज़्यादा रखते हैं। हज़ारों नस्लों के छोटे - बड़े डॉगी इंसानों के पसंदीदा मित्र बन कर उनके पालतू के रूप में उनके साथ रहते थे। इन कुत्तों म...

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भ्रम By Surbhi Goli

भाग - 1'तुम उस कमरे के पास क्या कर रही हो? पता है न, वहां क्या है? भूल कर भी वहां कदम मत रखना समझी तुम? वरना यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। मेरी बात मानने में ही भलाई है, याद...

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आस्था का धाम काशी बाबा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

जीवन की सार्थकता के लिये,संत-भगवन्त के श्री चरणोंका आश्रय,परम आवष्यक मान

कर, श्री सिद्ध-सिद्द्येश्वर महाराज की तपो भूमि के आँगन मे यशोगान,जीवन तरण-तारण हेतु

अति आवश्यक मानकर...

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शाकुनपाॅंखी By Dr. Suryapal Singh

यह इक्कीसवीं शती का प्रारंभ है। पूर्व और पश्चिम की विकास यात्रा में नव उदारीकरण की लहलहाती फसल के बीच इंच इंच घिसटती मानवता । उद्यमिता के नए प्रारूपों के बीच व्यष्टि की बंधक होती ह...

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दो रास्ते By S Sinha

“ आज मौसम बहुत अच्छा है , छुट्टी का दिन भी है . क्या आपको कभी बाहर घूमने का मन नहीं करता है ? दिन रात घर में घुस कर बैठे रहते हैं . आपके सारे दोस्तों का भी यही कहना है . “ एक...

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चुनिंदा लघुकथाएँ By Lajpat Rai Garg

माँ, माँ होती है आज राकेश जल्दी तैयार होकर वृद्धाश्रम पहुँचा। आज उसकी माँ का 80वाँ जन्मदिन है। उसने माँ के चरर्णस्पर्श किये, उनका मुँह मीठा करवाया। आशीर्वाद लिया। पूछा - ‘माँ, कोई...

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में समय हूँ ! By Keval

रुको राजन ,क्या तुम अक्षरवंशिका के सम्राट अभय हो ?"

"कौन हो तुम , ओर हमारे पथ में आकर हमें नाम से बुलाने का दंड जानते हो ?"

"तुम्हारा क्रोध ही तुम्हारे निर्दोष...

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तेरे सुर और मेरे गीत By S Sinha

सुनील सैन फ्रांसिस्को से हवाई द्वीप के क्रूज शिप पर इंजीनियर था . सैन फ्रांसिस्को पोर्ट से निकलने के बाद करीब 18 दिन बाद हवाई द्वीप से वह वापस आया करता था . सैन फ्रांसिस्को से...

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प्लीज मुझे जानें दीजिए By Siya

एक लड़की एक अंधेरे कमरे में बेहोश पड़ी थी, जब उसे होश आता है तो इधर उधर देखने लगी चिल्लाने लगी कोई है कोई है पर किसी की आवाज नहीं आती, वो बैठ जाती है और सोचती है |

वो कार ड्राइव...

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अथ गूँगे गॉंव की कथा By ramgopal bhavuk

होली के अवसर पर खेतों में मसूर उखाड़ने का कार्य तेजी से शुरू हो गया था ।

आज मौजी जल्दी ही जाग गया था। यों तो रोज ही जल्दी जागना पड़ता है, पर होली के दिन की उमंग और भी जल्दी...

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आखेट महल By Prabodh Kumar Govil

एकआखेट महल के परकोटे के सामने आज सुबह से ही चहल-पहल थी। बड़ी मोटर अभी-अभी आकर लौट चुकी थी। ट्रकों में भरकर ढेर सारे कामगार लाये गये थे। परकोटे के किनारे-किनारे महल के एक ओर के हिस्...

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भरोसा--अनोखी प्रेम कथा By Kishanlal Sharma

"वाह--ब्यूटीफुल-अतिसुन्दर-बेमिसाल",बाएं हाथ मे लगी मेहंदी को देखकर प्रफ्फुलित होते हुए दाया हाथ आगे करते हुए रीना बोली,"राजेश देखेगा तो खुश हो जाएगा।""राजेश कौन?""हसबेंड--मेेरा प...

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साहेब सायराना By Prabodh Kumar Govil

कहते हैं कि अपनी जवानी में हर कोई ख़ूबसूरत होता है। जवानी इंसान की ज़िन्दगी में एक बार आने वाला वो मौसम है जो जिस्म के पोर- पोर को फूल की तरह खिलाकर एक शोख चटक के तड़के से खुशबूदार...

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जंग-ए-जिंदगी By radha

जंग-ए-जीवन भाग-1पैरो में काले रंग के मजबूत जूते पहने हुए, काला रंग का कुर्ता और पायजामा भी काला।सिर पर पगड़ी भी काले रंग की पहनी हुई एक डाकूरानी अपने कक्ष से बाहर आई।अपने दोनों हाथ...

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राधारमण वैद्य-आधुनिक भारतीय शिक्षा की चुनौतियाँ By राजनारायण बोहरे

जहाँ तक शिक्षा में आमूल परिवर्तन की बात है, वह बहुत कठिन कार्य है, क्योंकि इसमें पर्याप्त श्रम, समय, धन और अन्वेषणों की आवश्यकता है। पहले शिक्षक बदले, तब शिक्षा बदले। एकाएक आमूल पर...

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विविधा By Yashvant Kothari

बात होली की हो और कविता, शेरो-शायरी की चर्चा न हो, यह कैसे संभव हैं ? होली का अपना अंदाज है, और कवियों ने उसे अपने रंग में ढाला है। जाने माने शायर नजीर अकबराबादी कहते हैं:

जब...

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भरोसा By Gajendra Kudmate

सुबह का समय है, थंडी थंडी हवा चल रही है. चिडिया के शोर से सारा गाँव जाग गया है. सर सर आवाज के साथ बुधिया का आगमन हो गया है. हाँ! बुधिया, हमारी नायिका , हमारी यह कहानी एक गांव कि है...

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आख़िर वह कौन था By Ratna Pandey

इस कहानी के पहले सीजन में आपने पढ़ा कि सुशीला एक सोलह वर्ष की गरीब मजदूर की बेटी थी। उसकी माँ एक बिल्डिंग पर काम करते समय, गिर कर स्वर्ग सिधार गई थी। पिता तो पहले ही स्वर्ग सिधार चु...

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मां कब आयेगी By Dikshadixit

ये बात उस वक्त की है जब मीठी सात वर्ष की है। उसके घर में बहुत से लोग है, वो घर में सबकी लाडली है ।पर समय सबके साथ अजीबो-गरीब खेल खेलता रहता है, कुछ इसी तरह मीठी के साथ भी हुआ। मीठी...

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पार - महेश कटारे By राज बोहरे

जान–पहचानी गैल पर पैर अपने–आप इच्छित दिशा को मुड़ जाते थे। हरिविलास आगे था–पीछे कमला, उसके पीछे अपहरण किया गया लड़का तथा गैंग के तीन सदस्य और थे, यानी कुल छह जने। जिस समय वे ठिकाने स...

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यादों के झरोखों से-निश्छल प्रेम By Asha Saraswat

छोटे-छोटे बल्बों की झालरों से घर और दरवाज़े झिलमिला रहे थे ।जैसे हर नन्हा बल्ब दुल्हन की ख़ुशी का इज़हार कर रहा हो।मैं उन्हें निहारकर उनमें अपनी मॉं के हंसते मुस्कुराते चेहरे को मह...

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क्या सच में तुझे आगे बढ़ना है .. By Pari Boricha

यदि आप सच में आगे बढ़ना चाहते हैं,तो फिर आपको इस दूनियाँ की कोई ताकत नहीं रोक सकतीं, ये मैं कहती हूँ ! लेकिन, तकलीफ़ यह है कि, इन्सान आगे बढ़ नहीं पाता है ; सिर्फ अपनी ही सोच की वज...

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The Risky Love By Pooja Singh

पुराने किले में हलचल.....

गामाक्ष के जाते ही सब तरफ सन्नाटा छा जाता है, , सब बेसुध इधर उधर पड़े थे किसी को कोई होश नहीं यहां क्या हो गया,।।।

अब आगे.............

रात के तीन...

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आख़िर वह कौन था - सीजन 3 By Ratna Pandey

इस कहानी के पहले सीजन में आपने पढ़ा कि सुशीला एक सोलह वर्ष की गरीब मजदूर की बेटी थी। उसकी माँ एक बिल्डिंग पर काम करते समय, गिर कर स्वर्ग सिधार गई थी। पिता तो पहले ही स्वर्ग सिधार चु...

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कोरोना - एक प्रेम कहानी By Neha Sharma

अचानक से खिड़की की तरफ से आई बॉल के कारण टेबल पर रखा पानी का गिलास टूट जाता है। पास ही सोफे पर बैठी लिली, जो अपना प्रोजेक्ट बनाने में व्यस्त थी, गिलास के टूटने की आवाज सुनकर भौहें...

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बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब By Pradeep Shrivastava

भाग -१ काशी नगरी के पॉश एरिया में उनका अत्याधुनिक खूबसूरत मकान है। जिसके पोर्च में उन की बड़ी सी लग्जरी कार खड़ी होती है। एक छोटा गार्डेन नीचे है, तो उससे बड़ा पहले फ्लोर पर है। जहां...

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एहिवात By नंदलाल मणि त्रिपाठी

जीवन बड़ा कठिन है एक एक सांस के लिए संघर्ष कभी जंगली जानवरों का भय कभी मौसम कि मार कभी कुदरत का कहर कभी भूख भय पल प्रहर हांफती कांपती जिंदगी माई तू तो कहती है कि अपने कबीले के देवता...

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परती जमीन By Raushan Pathak

परती जमीन एक कहानी है जिसमे इस बात को दर्शाया गया है, की लोभ सिर्फ अहित करता है लोभ से ग्रसित लोग सर्व सपन्न होने के बाद भी जीवन में और ज्यादा के लोभ में अपना और अपने समाज का अह...

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दिल से दिल तक By Sonali Rawat

‘‘हर्ष,अब क्या होगा?’’ आभा ने कराहते हुए पूछा. उस की आंखों में भय साफसाफ देखा जा सकता था. उसे अपनी चोट से ज्यादा आने वाली परिस्थिति को ले कर घबराहट हो रही थी.

‘‘कुछ नहीं होगा… म...

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मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

(काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 1. सरस्वती बंदना (मॉं शारदे) मॉं शारदे! मृदु सार दे!!, सबके मनोरथ सार दै!!! झंकृत हो, मृदु वीणा मधुर, मॉं शारदे, वह प्यार दे।। अज्ञान त...

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त्रियाची By prashant sharma ashk

अंतरिक्ष में सबसे सुंदर ग्रह अगर कोई है तो शायद पृथ्वी ही है। यहां जीवन है और कई रंग भी है। अंतरिक्ष के कई रहस्य भी है। अभी यह पता नहीं है कि पृथ्वी के अलावा किसी ग्रह पर जीवन है य...

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जिसे समझा मामूली वह निकला करोड़पति By ABHISHEK

मंत्रों का गूंजता उच्चारण हो रहा था। आर्यन और अवंतिका एक-दूसरे को वरमाला पहना रहे थे।

आर्यन, एक साधारण लेकिन आत्मसम्मान से भरा युवक, और अवंतिका, जो पैसे और रुतबे को ही सबसे बड़ा...

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बंद खिड़कियाँ By S Bhagyam Sharma

“बंद खिड़कियां" सदियों से चले आ रहे पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों के अहं और दंभ के कारण स्त्रियों के प्रति दुर्व्यवहार और अत्याचार तथा स्त्री के विरोध की कहानी है । यह कहानी एक...

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चिकनी मिट्टी की प्रेमिका By Rajesh Rajesh

"राज बेटा आप दस दिनों से जिस लड़की की पेंटिंग बना रहे थे, वह मेरी बेटी रत्ना नहीं थी, बल्कि रत्ना की बहन माया थी।" रत्ना की विधवा मां बताती है
"मैं कुछ समझ नहीं पा रहा...

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अकेले ही आना By Ratna Pandey

छोटे से गाँव में रहने वाली शुभांगी सोलह वर्ष की हो गई थी। उसका अंग-अंग मानो सुंदरता की परिभाषा गढ़ रहा हो। चेहरे पर उगते सूरज जैसी लालिमा, पूनम की चाँदनी जैसा बदन पर निखार, ऐसा लगत...

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त्रीलोक - एक अद्भुत कहानी By Sanaya

( उपन्यास )1. एक बहुत बढ़ा बंगला था बिलकुल एक आलीशान हवेली की तरह। उस बंगलाके आगे बड़े बड़े पोस्टर लगेहुवे थे। वो पोस्टर लड़कीकी थी जो की एक हीरोइन की है। उस पोस्टरके ठीक नीचेकी तरफ...

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वो जो किताबों में लिखा था By nk....

धूल में छिपा भविष्यआरव को किताबों से मोहब्बत थी।नहीं, वो मोहब्बत जो लोग शायरी में कहते हैं—बल्कि वो मोहब्बत जो सांस लेने जितनी जरूरी होती है। उसका ज़्यादातर समय पुराने किताबों की द...

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काश्मिरी पंडित By Nikita Patil

काश्मिरी पंडित धीरज और उनकी नववधू शालू ने अपनी शादी के बाद काश्मीर जाने का फैसला किया। धीरज ने शालू के साथ हनीमून मनाने की सोची थी, और इसलिए वे दोनों धीरज के गांव में जा रहे थे। धी...

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आओ चलें परिवर्तन की ओर.... By Anil Sainger

आज से करीब बीस-इक्कीस साल पहले कॉलेजिस में लड़कियां बहुत कम हुआ करती थीं और इसी कारण वह हमेशा आकर्षण का केंद्र रहती थीं | उस ज़माने में कॉलेजिस में रैगिंग एक आम बात थी और कॉलेज प्रशा...

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नियति ...can’t change by anybody By PRATIK PATHAK

शीर्षक: नियति ...can’t change by anybody लेखक: प्रतीक पाठक कहानी के किरदार :1) डॉ.अमित नायक – प्रोफेसर 2) मालिनी - डॉ.अमित नायक की सहायक 3) रंगनाथ उर्फ रंगा - डॉ.अमित नायककी कॉ...

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सजना साथ निभाना By Saroj Verma

फ़रवरी की हल्की ठंड!!
सेठ धरमदास का हवेलीनुमा मकान जो उनके दादा जी ने बनवाया था,समय के साथ-साथ मकान में भी आधुनिक परिवर्तन किए गए,नये बाथरूम बनाए गए, सहूलियत के हिसाब से उसमें फेर...

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The Mystery of the Blue Eye's By Pretty Poision

आज मै फिर से पसीने से लथपत जाग गई । वही नीली आखें आज भी मुझे डराने ओर घबराने पर मजबुर कर देती है।

मै सोफ़िया बोरिंग सी नॉवेल की दुनिया मे ज़ीने वाली लड़की हुँ। मुझे पता नहीं मेरे म...

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प्रेम न हाट बिकाय By DrPranava Bharti

कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...

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कोरोना प्यार है By Jitendra Shivhare

*"मैं* तुम जैसे लड़को को बहुत अच्छे से जानती हूं, जो जानबूझकर लड़कीयों की मोपेट को टक्कर मारते है।" चंचला दहाड़ रही थी। सड़क पर भीड़ जमा होने लगी।

"देखीये मैडम! अनजान...

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खाली हाथ वाली अम्मा By Prabodh Kumar Govil

वैसे नाम तो मेरा पप्पू है पर अब पप्पू कम लोग कहते हैं मुझे, क्योंकि मैं बड़ा हो गया हूं और इतने बड़े लड़के को पप्पू कहना शायद लोगों को अजीब सा लगता हो, इसलिए पिछले कुछ सालों से लोग...

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छुट-पुट अफसाने By Veena Vij

वक़्त की ग़र्द में लिपटा काफ़ी कुछ छूट जाता है, अगर उसे याद का जामा पहना के बांध न लिया जाए। पिछली सदी में चालीस के दशक की बातें हैं, जब मैं कुछ महीनों की थी । पापा लाहौर में उस वक...

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गोधूलि By Priyamvad

उस साल ऋतुएं थोड़ा पहले आ गयीं थीं। इतना पहले कि वसंत अभी कोहरे में ही था। इसकी सफेदी और ठंडी नमी ने पेड़ों के पीले पत्तों को गिरने से रोक रखा था। बुलबुलों के गलों के रंग भी अभी सुर्...

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निर्वाण. By Saroj Verma

निर्वाण इसका अर्थ होता है मोक्ष,इस संसार में सभी मोक्ष पाना चाहते हैं किन्तु उसका जरिया कौन और क्या होगा? ये कह पाना मुश्किल है,मोक्ष परम अभीष्ट एवं परम पुरूषार्थ को कहा गया है,मोक...

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अमावस्या में खिला चाँद By Lajpat Rai Garg

एक पंक्ति में बनी कई सरकारी इमारतों में से एक में स्थित उच्च शिक्षा विभाग के मुख्यालय में पदस्थ उच्च पदाधिकारी प्रवीर कुमार ने अपने कक्ष में आकर अपनी मेज़ पर पहले से रखी फ़ाइलों मे...

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मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

आज की इस भयावह चकाचौंध में भारत की पावन धरती से मानवी के बहुत सारे सच्‍चे चेहरे गायब और अनदिखे से हो रहे हैं, उन्‍हीं की खोज में यह काव्‍य संकलन ‘मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या ?’...

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डोर टू डोर कैंपेन By Prabodh Kumar Govil

दुनिया भर में लोग कुत्ते पालने का शौक़ सबसे ज़्यादा रखते हैं। हज़ारों नस्लों के छोटे - बड़े डॉगी इंसानों के पसंदीदा मित्र बन कर उनके पालतू के रूप में उनके साथ रहते थे। इन कुत्तों म...

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भ्रम By Surbhi Goli

भाग - 1'तुम उस कमरे के पास क्या कर रही हो? पता है न, वहां क्या है? भूल कर भी वहां कदम मत रखना समझी तुम? वरना यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। मेरी बात मानने में ही भलाई है, याद...

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आस्था का धाम काशी बाबा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

जीवन की सार्थकता के लिये,संत-भगवन्त के श्री चरणोंका आश्रय,परम आवष्यक मान

कर, श्री सिद्ध-सिद्द्येश्वर महाराज की तपो भूमि के आँगन मे यशोगान,जीवन तरण-तारण हेतु

अति आवश्यक मानकर...

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शाकुनपाॅंखी By Dr. Suryapal Singh

यह इक्कीसवीं शती का प्रारंभ है। पूर्व और पश्चिम की विकास यात्रा में नव उदारीकरण की लहलहाती फसल के बीच इंच इंच घिसटती मानवता । उद्यमिता के नए प्रारूपों के बीच व्यष्टि की बंधक होती ह...

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दो रास्ते By S Sinha

“ आज मौसम बहुत अच्छा है , छुट्टी का दिन भी है . क्या आपको कभी बाहर घूमने का मन नहीं करता है ? दिन रात घर में घुस कर बैठे रहते हैं . आपके सारे दोस्तों का भी यही कहना है . “ एक...

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चुनिंदा लघुकथाएँ By Lajpat Rai Garg

माँ, माँ होती है आज राकेश जल्दी तैयार होकर वृद्धाश्रम पहुँचा। आज उसकी माँ का 80वाँ जन्मदिन है। उसने माँ के चरर्णस्पर्श किये, उनका मुँह मीठा करवाया। आशीर्वाद लिया। पूछा - ‘माँ, कोई...

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में समय हूँ ! By Keval

रुको राजन ,क्या तुम अक्षरवंशिका के सम्राट अभय हो ?"

"कौन हो तुम , ओर हमारे पथ में आकर हमें नाम से बुलाने का दंड जानते हो ?"

"तुम्हारा क्रोध ही तुम्हारे निर्दोष...

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तेरे सुर और मेरे गीत By S Sinha

सुनील सैन फ्रांसिस्को से हवाई द्वीप के क्रूज शिप पर इंजीनियर था . सैन फ्रांसिस्को पोर्ट से निकलने के बाद करीब 18 दिन बाद हवाई द्वीप से वह वापस आया करता था . सैन फ्रांसिस्को से...

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प्लीज मुझे जानें दीजिए By Siya

एक लड़की एक अंधेरे कमरे में बेहोश पड़ी थी, जब उसे होश आता है तो इधर उधर देखने लगी चिल्लाने लगी कोई है कोई है पर किसी की आवाज नहीं आती, वो बैठ जाती है और सोचती है |

वो कार ड्राइव...

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अथ गूँगे गॉंव की कथा By ramgopal bhavuk

होली के अवसर पर खेतों में मसूर उखाड़ने का कार्य तेजी से शुरू हो गया था ।

आज मौजी जल्दी ही जाग गया था। यों तो रोज ही जल्दी जागना पड़ता है, पर होली के दिन की उमंग और भी जल्दी...

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आखेट महल By Prabodh Kumar Govil

एकआखेट महल के परकोटे के सामने आज सुबह से ही चहल-पहल थी। बड़ी मोटर अभी-अभी आकर लौट चुकी थी। ट्रकों में भरकर ढेर सारे कामगार लाये गये थे। परकोटे के किनारे-किनारे महल के एक ओर के हिस्...

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भरोसा--अनोखी प्रेम कथा By Kishanlal Sharma

"वाह--ब्यूटीफुल-अतिसुन्दर-बेमिसाल",बाएं हाथ मे लगी मेहंदी को देखकर प्रफ्फुलित होते हुए दाया हाथ आगे करते हुए रीना बोली,"राजेश देखेगा तो खुश हो जाएगा।""राजेश कौन?""हसबेंड--मेेरा प...

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साहेब सायराना By Prabodh Kumar Govil

कहते हैं कि अपनी जवानी में हर कोई ख़ूबसूरत होता है। जवानी इंसान की ज़िन्दगी में एक बार आने वाला वो मौसम है जो जिस्म के पोर- पोर को फूल की तरह खिलाकर एक शोख चटक के तड़के से खुशबूदार...

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जंग-ए-जिंदगी By radha

जंग-ए-जीवन भाग-1पैरो में काले रंग के मजबूत जूते पहने हुए, काला रंग का कुर्ता और पायजामा भी काला।सिर पर पगड़ी भी काले रंग की पहनी हुई एक डाकूरानी अपने कक्ष से बाहर आई।अपने दोनों हाथ...

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राधारमण वैद्य-आधुनिक भारतीय शिक्षा की चुनौतियाँ By राजनारायण बोहरे

जहाँ तक शिक्षा में आमूल परिवर्तन की बात है, वह बहुत कठिन कार्य है, क्योंकि इसमें पर्याप्त श्रम, समय, धन और अन्वेषणों की आवश्यकता है। पहले शिक्षक बदले, तब शिक्षा बदले। एकाएक आमूल पर...

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विविधा By Yashvant Kothari

बात होली की हो और कविता, शेरो-शायरी की चर्चा न हो, यह कैसे संभव हैं ? होली का अपना अंदाज है, और कवियों ने उसे अपने रंग में ढाला है। जाने माने शायर नजीर अकबराबादी कहते हैं:

जब...

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भरोसा By Gajendra Kudmate

सुबह का समय है, थंडी थंडी हवा चल रही है. चिडिया के शोर से सारा गाँव जाग गया है. सर सर आवाज के साथ बुधिया का आगमन हो गया है. हाँ! बुधिया, हमारी नायिका , हमारी यह कहानी एक गांव कि है...

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आख़िर वह कौन था By Ratna Pandey

इस कहानी के पहले सीजन में आपने पढ़ा कि सुशीला एक सोलह वर्ष की गरीब मजदूर की बेटी थी। उसकी माँ एक बिल्डिंग पर काम करते समय, गिर कर स्वर्ग सिधार गई थी। पिता तो पहले ही स्वर्ग सिधार चु...

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मां कब आयेगी By Dikshadixit

ये बात उस वक्त की है जब मीठी सात वर्ष की है। उसके घर में बहुत से लोग है, वो घर में सबकी लाडली है ।पर समय सबके साथ अजीबो-गरीब खेल खेलता रहता है, कुछ इसी तरह मीठी के साथ भी हुआ। मीठी...

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पार - महेश कटारे By राज बोहरे

जान–पहचानी गैल पर पैर अपने–आप इच्छित दिशा को मुड़ जाते थे। हरिविलास आगे था–पीछे कमला, उसके पीछे अपहरण किया गया लड़का तथा गैंग के तीन सदस्य और थे, यानी कुल छह जने। जिस समय वे ठिकाने स...

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यादों के झरोखों से-निश्छल प्रेम By Asha Saraswat

छोटे-छोटे बल्बों की झालरों से घर और दरवाज़े झिलमिला रहे थे ।जैसे हर नन्हा बल्ब दुल्हन की ख़ुशी का इज़हार कर रहा हो।मैं उन्हें निहारकर उनमें अपनी मॉं के हंसते मुस्कुराते चेहरे को मह...

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क्या सच में तुझे आगे बढ़ना है .. By Pari Boricha

यदि आप सच में आगे बढ़ना चाहते हैं,तो फिर आपको इस दूनियाँ की कोई ताकत नहीं रोक सकतीं, ये मैं कहती हूँ ! लेकिन, तकलीफ़ यह है कि, इन्सान आगे बढ़ नहीं पाता है ; सिर्फ अपनी ही सोच की वज...

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The Risky Love By Pooja Singh

पुराने किले में हलचल.....

गामाक्ष के जाते ही सब तरफ सन्नाटा छा जाता है, , सब बेसुध इधर उधर पड़े थे किसी को कोई होश नहीं यहां क्या हो गया,।।।

अब आगे.............

रात के तीन...

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आख़िर वह कौन था - सीजन 3 By Ratna Pandey

इस कहानी के पहले सीजन में आपने पढ़ा कि सुशीला एक सोलह वर्ष की गरीब मजदूर की बेटी थी। उसकी माँ एक बिल्डिंग पर काम करते समय, गिर कर स्वर्ग सिधार गई थी। पिता तो पहले ही स्वर्ग सिधार चु...

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कोरोना - एक प्रेम कहानी By Neha Sharma

अचानक से खिड़की की तरफ से आई बॉल के कारण टेबल पर रखा पानी का गिलास टूट जाता है। पास ही सोफे पर बैठी लिली, जो अपना प्रोजेक्ट बनाने में व्यस्त थी, गिलास के टूटने की आवाज सुनकर भौहें...

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बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब By Pradeep Shrivastava

भाग -१ काशी नगरी के पॉश एरिया में उनका अत्याधुनिक खूबसूरत मकान है। जिसके पोर्च में उन की बड़ी सी लग्जरी कार खड़ी होती है। एक छोटा गार्डेन नीचे है, तो उससे बड़ा पहले फ्लोर पर है। जहां...

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एहिवात By नंदलाल मणि त्रिपाठी

जीवन बड़ा कठिन है एक एक सांस के लिए संघर्ष कभी जंगली जानवरों का भय कभी मौसम कि मार कभी कुदरत का कहर कभी भूख भय पल प्रहर हांफती कांपती जिंदगी माई तू तो कहती है कि अपने कबीले के देवता...

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परती जमीन By Raushan Pathak

परती जमीन एक कहानी है जिसमे इस बात को दर्शाया गया है, की लोभ सिर्फ अहित करता है लोभ से ग्रसित लोग सर्व सपन्न होने के बाद भी जीवन में और ज्यादा के लोभ में अपना और अपने समाज का अह...

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दिल से दिल तक By Sonali Rawat

‘‘हर्ष,अब क्या होगा?’’ आभा ने कराहते हुए पूछा. उस की आंखों में भय साफसाफ देखा जा सकता था. उसे अपनी चोट से ज्यादा आने वाली परिस्थिति को ले कर घबराहट हो रही थी.

‘‘कुछ नहीं होगा… म...

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मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

(काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 1. सरस्वती बंदना (मॉं शारदे) मॉं शारदे! मृदु सार दे!!, सबके मनोरथ सार दै!!! झंकृत हो, मृदु वीणा मधुर, मॉं शारदे, वह प्यार दे।। अज्ञान त...

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त्रियाची By prashant sharma ashk

अंतरिक्ष में सबसे सुंदर ग्रह अगर कोई है तो शायद पृथ्वी ही है। यहां जीवन है और कई रंग भी है। अंतरिक्ष के कई रहस्य भी है। अभी यह पता नहीं है कि पृथ्वी के अलावा किसी ग्रह पर जीवन है य...

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जिसे समझा मामूली वह निकला करोड़पति By ABHISHEK

मंत्रों का गूंजता उच्चारण हो रहा था। आर्यन और अवंतिका एक-दूसरे को वरमाला पहना रहे थे।

आर्यन, एक साधारण लेकिन आत्मसम्मान से भरा युवक, और अवंतिका, जो पैसे और रुतबे को ही सबसे बड़ा...

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बंद खिड़कियाँ By S Bhagyam Sharma

“बंद खिड़कियां" सदियों से चले आ रहे पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों के अहं और दंभ के कारण स्त्रियों के प्रति दुर्व्यवहार और अत्याचार तथा स्त्री के विरोध की कहानी है । यह कहानी एक...

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चिकनी मिट्टी की प्रेमिका By Rajesh Rajesh

"राज बेटा आप दस दिनों से जिस लड़की की पेंटिंग बना रहे थे, वह मेरी बेटी रत्ना नहीं थी, बल्कि रत्ना की बहन माया थी।" रत्ना की विधवा मां बताती है
"मैं कुछ समझ नहीं पा रहा...

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अकेले ही आना By Ratna Pandey

छोटे से गाँव में रहने वाली शुभांगी सोलह वर्ष की हो गई थी। उसका अंग-अंग मानो सुंदरता की परिभाषा गढ़ रहा हो। चेहरे पर उगते सूरज जैसी लालिमा, पूनम की चाँदनी जैसा बदन पर निखार, ऐसा लगत...

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त्रीलोक - एक अद्भुत कहानी By Sanaya

( उपन्यास )1. एक बहुत बढ़ा बंगला था बिलकुल एक आलीशान हवेली की तरह। उस बंगलाके आगे बड़े बड़े पोस्टर लगेहुवे थे। वो पोस्टर लड़कीकी थी जो की एक हीरोइन की है। उस पोस्टरके ठीक नीचेकी तरफ...

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वो जो किताबों में लिखा था By nk....

धूल में छिपा भविष्यआरव को किताबों से मोहब्बत थी।नहीं, वो मोहब्बत जो लोग शायरी में कहते हैं—बल्कि वो मोहब्बत जो सांस लेने जितनी जरूरी होती है। उसका ज़्यादातर समय पुराने किताबों की द...

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काश्मिरी पंडित By Nikita Patil

काश्मिरी पंडित धीरज और उनकी नववधू शालू ने अपनी शादी के बाद काश्मीर जाने का फैसला किया। धीरज ने शालू के साथ हनीमून मनाने की सोची थी, और इसलिए वे दोनों धीरज के गांव में जा रहे थे। धी...

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