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एबॉन्डेण्ड By Pradeep Shrivastava

एबॉन्डेण्ड - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 इसे आप कहानी के रूप में पढ़ रहे हैं, लेकिन यह एक ऐसी घटना है जिसका मैं स्वयं प्रत्यक्षदर्शी रहा हूं। चाहें तो आप इसे एक रोचक रिपोर्ट भी कह सकते...

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अल्हड़ लड़की गीता By Shiv Shanker Gahlot

आप अकेले नहीं जो किसी खूबसूरत लड़की से प्यार करना चाहते हैं । कोई बिरला ही होगा जिसे ये चाहत न हो । पर ये वास्तव मे आधा सच है । आप किसी भी खूबसूरत लड़की से प्यार करने को तैयार हो ज...

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सरजमीं By Saroj Verma

सरजमीं ,मुल्क,वतन,मातृभूमि,इन सब नामों से स्वदेश को सम्बोधित किया जाता है,कहते हैं जो देश पर फिद़ा होता है उसका नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाता है,अपने मुल्क के वास्ते शहीद हो ज...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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रिश्तो की कश्मकश By Naaz Zehra

जल्दी करो बहुत देर हो रही है पाता नहीं सुबह से क्या कर रहे थे जो अब इतना समय लग रहा है अरे आज ही हमें बारात लेकर निकलना है,,, और कितना समय लगाओगे जल्दी करो सुबह समझा रहीं हूं अपनी...

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पिया बसंती रे! By Saroj Prajapati

भाग-1 छुट्टी का दिन था। खुशी अपने टेरेस गार्डन में पौधों की निराई गुड़ाई में लगी हुई थी। चंपा का पौधा जो उसने सर्दियों से पहले लगाया था। बसंत का मौसम आते ही उसमें व उसके साथ साथ दू...

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ब्रम्हदैत्य By mayur pokale

रात के 12 बज चुके थे, एक टेबल लैंप जल रहा था और रिया अभी भी पढ़ाई में व्यस्त थी; क्योंकि कल से उसके बीकॉम के फाइनल ईयर के एग्जाम्स शुरू होने वाले थे, रिया की मां सुनीता और छोटा भाई...

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डायरी ::कल्पना से परे जादू का सच By Swati Grover

यास्मिन ने देखा कि उसके चारों ओर बहुत डरावने चेहरे हैं । सभी लाल-काल-पीले मुँह वाले लोग उसकी तरफ बढ़ रहें हैं और उसके आसपास घेरा-सा बनता जा रहा हैं। वह ज़ोर से चिल्लाई बचाओं!!!! तभी...

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मॉटरनी का बुद्धु By सीमा बी.

"मॉटर जी खाना लग गया है, आप जल्दी से आ जाओ हम दोनो को बहुत जोरों की भूख लगी है", आवाज सुनकर भूपेंद्र जी ने जल्दी से अपनी किताब बंद की और डायनिंग टेबल पर पहुँच गए, जहाँ उनका...

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स्वतन्त्र सक्सेना की कहानियां - बद्री विशाल By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्वतन्त्र सक्सेना एक परिपक्व और विचारशील रचनाकार हैं, वे निबन्ध लेखक और कहानीकार हैं। उनकी कहानी जमीन से जुड़ी रहती हैं जो रोचक और विश्वसनीय भी होती हैं। भाषा पर उनका असाधारण अधिका...

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BTH (Behind The Hill) By Aisha Diwan Naaz

परिंदों का झुंड सर के ऊपर से फड़फड़ाते हुए गुज़र रहा था। कड़ाके की ठंड में घने धुंध में वे उड़ते हुए तो नहीं दिख रहे थे लेकिन उनके पंखों की आवाज़ बेला को अपने सिपाही साथ होने का और...

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बात बिगड़ी है कुछ इस तरह By vishvnath yadav

हैलो मेरा नाम विकेश है मैं एक इंजीनियर हू और एक कंपनी में जॉब करता हु,
मैं कोई राइटर नही हू इसीलिए अगर मुझ से कोई गलती होजाए तो कृपीय माफ कर दीजिएगा ??
मैं अपने जीवन का एक छोटा स...

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प्रेम - मेरे प्यार की शुरूआत By alaywritss

मेरे प्यार की शुरूआत कुछ इस तरह हुई की में कक्षा 10 के बाद मेरी स्कूल बदल गई और कक्षा 11 में मुझे एक लड़की पसंद आती हैं। वो बहुत ही सुंदर थी , उसकी सुंदरता कहूं तो यूं थी की वो एकद...

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बाते अधूरी सी... By Priyanka Taank Bhati

मई का महीना था, रात काफी हो चुकी थी यही कोई लगभग रात के साढ़े ग्यारह बजे होंगे, सिद्धार्थ सड़क पर चला जा रहा था, तभी उसे कही से डॉगी के भौंकने की आवाज सुनाई दी, आवाज सुनते ही उसके...

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​मेरा प्यार By mamta

दरिया, परिंदे और वो अजनबी

​अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...

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Super Villain Series By parth Shukla

स्थान: उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों के बीच छुपा एक अजीबोगरीब घाटी — “त्रि-गह्वर”
काल: कलियुग का वह समय जब धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था…

हिमालय की गोद में एक घाटी थी, जो न त...

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सरहद By Kusum Bhatt

चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...

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दो दिलों का मिलन By Lokesh Dangi

शांतिपूर्ण बाग के बीच में लगे हुए झूलों पर हवा का हल्का-हल्का झोंका आ रहा था। आस-पास के पेड़-पौधे अपनी हरी-हरी पत्तियों को झटकते हुए इस खुशनुमा मौसम का स्वागत कर रहे थे। बाग में दू...

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नज़र से दिल तक By Payal Author

कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा मोड़ आता है जहाँ सबकुछ पहले जैसा रहते हुए भी अचानक अलग लगने लगता है।कहानी है अनाया की — एक मासूम-सी लड़की, जिसके सपनों में सिर्फ़ एक ही ख्वाब था — डॉक्ट...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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Rebirth ...! By Reshma Janwekar

      अस्पताल में दवाओं का गंध हमेशा बना रहता था | और रक्तांश खुराना को इससे हमेशा से नफ़रत थी लेकिन इस वक्त वह उस गंध को मेहसूस नही कर पा रहा था |     रक्तांश इस वक्त वीआईपी वार्ड...

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हडसन तट का ऐरा गैरा By Prabodh Kumar Govil

हडसन नदी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह अत्यंत तेज़ वेग से बहती थी। और तो और, इसे मौसम के साथ बदलना भी खूब आता था। जाड़ों के मौसम में जब तेज़ हिमपात होता तो यहां ठंडे पानी में बर्फ़...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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फिर से By Ambalika Sharma

यह कहानी एक लड़की रिया के बारे मे है जिसकी जिंदगी मे नवीन प्यार की बहार ले आता है उसे यकीन नही होता के कोई उसे इतना प्यार भी कर सकता है जब रिया नवीन से जीवन भर का साथ मांगती है त...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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तुम मेरी आखिरी सांस हो By kajal jha

खामोश हवेली का रहस्य
रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...

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बागी आत्मा By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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चंद्रिका एक नन्हीं जादूगरनी By Pooja Singh

ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके।
चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...

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काली किताब. By Shailesh verma

शैली: रहस्य, थ्रिलर, अलौकिक

अध्याय 1: पुरानी गलियों का रहस्य

लखनऊ की पुरानी चौक बाज़ार में कई गलियाँ ऐसी हैं जो मानो समय के साथ थम गई हों। एक ऐसी ही गली है — “क़ाफ़िला गली”,...

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मासूम गंगा के सवाल By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...

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झंझावात में चिड़िया By Prabodh Kumar Govil

गोरा - चिट्टा, गोल - मटोल, आंखों से मुस्कराता सा खड़ा था।
पड़ोस की कोठी में काम करने वाली बूढ़ी औरत बोल पड़ी - काला टीका दे दो माथे पर!
- अरे नहीं - नहीं! ऊपर से नीचे तक बस वो टी...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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महाराजा रणजीत सिंह By Sudhir Sisaudiya

आदिकाल से ही भारत देश में, जीवन के हर क्षेत्र में, असाधारण व्यक्तियों का प्रादुर्भाव होता रहा है। हमारा इतिहास ऐसे महान लोगों के नामों से भरा पड़ा है; जिनकी कला, साहित्य, राजनीति,...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल By Mallika Mukherjee

देश विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की जायेगी। इस विभाजन ने सिर्फ सरहदें ही नहीं खींचीं, बल्कि सामाजिक समरसता और साझा संस्कृति की विरासत...

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हंसता क्यों है पागल By Prabodh Kumar Govil

कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...

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किरदार By Priya Saini

माँ का सपना बस पूरा ही होने वाला था, दो दिन बाद अंजुम की शादी जो थी। माँ ने अंजुम की शादी के लिए न जाने कितने खुआब बुन रखे थे। सब शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। माँ सब कुछ अंजु...

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स्वप्न--भुलाए नही भूलता By Kishanlal Sharma

पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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वर्जित व्योम में उड़ती स्त्री By Ranjana Jaiswal

यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...

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नागमणि By Vijay Sharma Erry

कुछ सच इतने गहरे, इतने रहस्यमयी होते हैं कि ज़िन्दगी की सारी परतें उधेड़ कर रख देते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई छुपी है एक लड़की – तन्वी – की आँखों में। बचपन की एक घटना ने उसकी किस्मत बद...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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पहली झलक:- आर्यन से मुलाकात By Silent Writer AK

होम थिएटर में ये वाला गाना चल रहा है, और साथ में एक लड़का ये गाना गाते हुए तैयार हो रहा है। तैयार होकर वो नीचे आता है वह पर उसे उसके पापा (राजवीर जी) की आवाज सुनाई देती है।

राजव...

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काश आप कमीने होते ! By uma (umanath lal das)

पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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अनामिका By R B Chavda

सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...

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जीवन सरिता नोंन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मानव सभ्‍यता के इतिहास में पंचमहल धरती का अपना एक अनूठा गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। पूर्व सताब्‍दियों के साथ अष्‍टमी सताब्‍दी भी नवीन अनुभूति के, कई पन्‍ने पलटती दिखीं है।महाकवि भवभूत...

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एबॉन्डेण्ड By Pradeep Shrivastava

एबॉन्डेण्ड - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 इसे आप कहानी के रूप में पढ़ रहे हैं, लेकिन यह एक ऐसी घटना है जिसका मैं स्वयं प्रत्यक्षदर्शी रहा हूं। चाहें तो आप इसे एक रोचक रिपोर्ट भी कह सकते...

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अल्हड़ लड़की गीता By Shiv Shanker Gahlot

आप अकेले नहीं जो किसी खूबसूरत लड़की से प्यार करना चाहते हैं । कोई बिरला ही होगा जिसे ये चाहत न हो । पर ये वास्तव मे आधा सच है । आप किसी भी खूबसूरत लड़की से प्यार करने को तैयार हो ज...

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सरजमीं By Saroj Verma

सरजमीं ,मुल्क,वतन,मातृभूमि,इन सब नामों से स्वदेश को सम्बोधित किया जाता है,कहते हैं जो देश पर फिद़ा होता है उसका नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाता है,अपने मुल्क के वास्ते शहीद हो ज...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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रिश्तो की कश्मकश By Naaz Zehra

जल्दी करो बहुत देर हो रही है पाता नहीं सुबह से क्या कर रहे थे जो अब इतना समय लग रहा है अरे आज ही हमें बारात लेकर निकलना है,,, और कितना समय लगाओगे जल्दी करो सुबह समझा रहीं हूं अपनी...

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पिया बसंती रे! By Saroj Prajapati

भाग-1 छुट्टी का दिन था। खुशी अपने टेरेस गार्डन में पौधों की निराई गुड़ाई में लगी हुई थी। चंपा का पौधा जो उसने सर्दियों से पहले लगाया था। बसंत का मौसम आते ही उसमें व उसके साथ साथ दू...

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ब्रम्हदैत्य By mayur pokale

रात के 12 बज चुके थे, एक टेबल लैंप जल रहा था और रिया अभी भी पढ़ाई में व्यस्त थी; क्योंकि कल से उसके बीकॉम के फाइनल ईयर के एग्जाम्स शुरू होने वाले थे, रिया की मां सुनीता और छोटा भाई...

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डायरी ::कल्पना से परे जादू का सच By Swati Grover

यास्मिन ने देखा कि उसके चारों ओर बहुत डरावने चेहरे हैं । सभी लाल-काल-पीले मुँह वाले लोग उसकी तरफ बढ़ रहें हैं और उसके आसपास घेरा-सा बनता जा रहा हैं। वह ज़ोर से चिल्लाई बचाओं!!!! तभी...

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मॉटरनी का बुद्धु By सीमा बी.

"मॉटर जी खाना लग गया है, आप जल्दी से आ जाओ हम दोनो को बहुत जोरों की भूख लगी है", आवाज सुनकर भूपेंद्र जी ने जल्दी से अपनी किताब बंद की और डायनिंग टेबल पर पहुँच गए, जहाँ उनका...

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स्वतन्त्र सक्सेना की कहानियां - बद्री विशाल By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्वतन्त्र सक्सेना एक परिपक्व और विचारशील रचनाकार हैं, वे निबन्ध लेखक और कहानीकार हैं। उनकी कहानी जमीन से जुड़ी रहती हैं जो रोचक और विश्वसनीय भी होती हैं। भाषा पर उनका असाधारण अधिका...

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BTH (Behind The Hill) By Aisha Diwan Naaz

परिंदों का झुंड सर के ऊपर से फड़फड़ाते हुए गुज़र रहा था। कड़ाके की ठंड में घने धुंध में वे उड़ते हुए तो नहीं दिख रहे थे लेकिन उनके पंखों की आवाज़ बेला को अपने सिपाही साथ होने का और...

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बात बिगड़ी है कुछ इस तरह By vishvnath yadav

हैलो मेरा नाम विकेश है मैं एक इंजीनियर हू और एक कंपनी में जॉब करता हु,
मैं कोई राइटर नही हू इसीलिए अगर मुझ से कोई गलती होजाए तो कृपीय माफ कर दीजिएगा ??
मैं अपने जीवन का एक छोटा स...

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प्रेम - मेरे प्यार की शुरूआत By alaywritss

मेरे प्यार की शुरूआत कुछ इस तरह हुई की में कक्षा 10 के बाद मेरी स्कूल बदल गई और कक्षा 11 में मुझे एक लड़की पसंद आती हैं। वो बहुत ही सुंदर थी , उसकी सुंदरता कहूं तो यूं थी की वो एकद...

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बाते अधूरी सी... By Priyanka Taank Bhati

मई का महीना था, रात काफी हो चुकी थी यही कोई लगभग रात के साढ़े ग्यारह बजे होंगे, सिद्धार्थ सड़क पर चला जा रहा था, तभी उसे कही से डॉगी के भौंकने की आवाज सुनाई दी, आवाज सुनते ही उसके...

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​मेरा प्यार By mamta

दरिया, परिंदे और वो अजनबी

​अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...

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Super Villain Series By parth Shukla

स्थान: उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों के बीच छुपा एक अजीबोगरीब घाटी — “त्रि-गह्वर”
काल: कलियुग का वह समय जब धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था…

हिमालय की गोद में एक घाटी थी, जो न त...

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सरहद By Kusum Bhatt

चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...

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दो दिलों का मिलन By Lokesh Dangi

शांतिपूर्ण बाग के बीच में लगे हुए झूलों पर हवा का हल्का-हल्का झोंका आ रहा था। आस-पास के पेड़-पौधे अपनी हरी-हरी पत्तियों को झटकते हुए इस खुशनुमा मौसम का स्वागत कर रहे थे। बाग में दू...

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नज़र से दिल तक By Payal Author

कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा मोड़ आता है जहाँ सबकुछ पहले जैसा रहते हुए भी अचानक अलग लगने लगता है।कहानी है अनाया की — एक मासूम-सी लड़की, जिसके सपनों में सिर्फ़ एक ही ख्वाब था — डॉक्ट...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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Rebirth ...! By Reshma Janwekar

      अस्पताल में दवाओं का गंध हमेशा बना रहता था | और रक्तांश खुराना को इससे हमेशा से नफ़रत थी लेकिन इस वक्त वह उस गंध को मेहसूस नही कर पा रहा था |     रक्तांश इस वक्त वीआईपी वार्ड...

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हडसन तट का ऐरा गैरा By Prabodh Kumar Govil

हडसन नदी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह अत्यंत तेज़ वेग से बहती थी। और तो और, इसे मौसम के साथ बदलना भी खूब आता था। जाड़ों के मौसम में जब तेज़ हिमपात होता तो यहां ठंडे पानी में बर्फ़...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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फिर से By Ambalika Sharma

यह कहानी एक लड़की रिया के बारे मे है जिसकी जिंदगी मे नवीन प्यार की बहार ले आता है उसे यकीन नही होता के कोई उसे इतना प्यार भी कर सकता है जब रिया नवीन से जीवन भर का साथ मांगती है त...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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तुम मेरी आखिरी सांस हो By kajal jha

खामोश हवेली का रहस्य
रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...

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बागी आत्मा By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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चंद्रिका एक नन्हीं जादूगरनी By Pooja Singh

ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके।
चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...

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काली किताब. By Shailesh verma

शैली: रहस्य, थ्रिलर, अलौकिक

अध्याय 1: पुरानी गलियों का रहस्य

लखनऊ की पुरानी चौक बाज़ार में कई गलियाँ ऐसी हैं जो मानो समय के साथ थम गई हों। एक ऐसी ही गली है — “क़ाफ़िला गली”,...

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मासूम गंगा के सवाल By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...

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झंझावात में चिड़िया By Prabodh Kumar Govil

गोरा - चिट्टा, गोल - मटोल, आंखों से मुस्कराता सा खड़ा था।
पड़ोस की कोठी में काम करने वाली बूढ़ी औरत बोल पड़ी - काला टीका दे दो माथे पर!
- अरे नहीं - नहीं! ऊपर से नीचे तक बस वो टी...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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महाराजा रणजीत सिंह By Sudhir Sisaudiya

आदिकाल से ही भारत देश में, जीवन के हर क्षेत्र में, असाधारण व्यक्तियों का प्रादुर्भाव होता रहा है। हमारा इतिहास ऐसे महान लोगों के नामों से भरा पड़ा है; जिनकी कला, साहित्य, राजनीति,...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल By Mallika Mukherjee

देश विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की जायेगी। इस विभाजन ने सिर्फ सरहदें ही नहीं खींचीं, बल्कि सामाजिक समरसता और साझा संस्कृति की विरासत...

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हंसता क्यों है पागल By Prabodh Kumar Govil

कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...

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किरदार By Priya Saini

माँ का सपना बस पूरा ही होने वाला था, दो दिन बाद अंजुम की शादी जो थी। माँ ने अंजुम की शादी के लिए न जाने कितने खुआब बुन रखे थे। सब शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। माँ सब कुछ अंजु...

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स्वप्न--भुलाए नही भूलता By Kishanlal Sharma

पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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वर्जित व्योम में उड़ती स्त्री By Ranjana Jaiswal

यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...

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नागमणि By Vijay Sharma Erry

कुछ सच इतने गहरे, इतने रहस्यमयी होते हैं कि ज़िन्दगी की सारी परतें उधेड़ कर रख देते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई छुपी है एक लड़की – तन्वी – की आँखों में। बचपन की एक घटना ने उसकी किस्मत बद...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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पहली झलक:- आर्यन से मुलाकात By Silent Writer AK

होम थिएटर में ये वाला गाना चल रहा है, और साथ में एक लड़का ये गाना गाते हुए तैयार हो रहा है। तैयार होकर वो नीचे आता है वह पर उसे उसके पापा (राजवीर जी) की आवाज सुनाई देती है।

राजव...

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काश आप कमीने होते ! By uma (umanath lal das)

पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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अनामिका By R B Chavda

सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...

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जीवन सरिता नोंन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मानव सभ्‍यता के इतिहास में पंचमहल धरती का अपना एक अनूठा गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। पूर्व सताब्‍दियों के साथ अष्‍टमी सताब्‍दी भी नवीन अनुभूति के, कई पन्‍ने पलटती दिखीं है।महाकवि भवभूत...

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