सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का व खिलाने का बहुत शौक था, कस्बे के लोग सेठ को अक्सर खाना कैसा बना हैं, चेक करवाने के लिए बुलाते थे,व्यापारी सेठ तन मन से आयोजन को सफल बनाने में भी पूरा सहयोग करते थे.सेठ तीन भाइयों में सबसे बड़े थे सबके अपने अपने मकान व दुकान थी, ईश्वर का सभी भाइयों पर पूरा आशीर्वाद था.सेठ ने अपने बड़े बेटे की शादी बड़े ही धूम धाम से मनाई और कुछ समय के बाद, सेठ ने अपनी बेटी की भी शादी कर दी, समय गुजरता रहा, घर में ख़ुशी का माहौल था.सेठ का बेटा अपनी माँ को अपनी पत्नी के साथ अस्पताल ले जाता हैं.सेठ की पत्नी अपने बेटे से बोली बेटा मुझे बड़ी बेचनी हो रही हैं, बहू की तकलीफ़ देखी नहीं जा रही हैं.पता नहीं क्या होगा, बेटा अपनी माँ से बोला जो भी होगा सही होगा और ख़ुशियाँ ही आयेंगी चाहें बेटा हो या बेटी, और घर में खुशियों के रूप में बेटी ने जन्म लिया और सेठ के बेटे ने अपनी बेटी का नाम बाद में ख़ुशी ही रखा.परिवार में जब से ख़ुशी आई हैं घर खुशियों से भरा हैं सेठ के व्यापार को आज २०-२५ लोग संभाल रहें हैं अब ख़ुशी बीटियाँ इतनी बड़ी हो गई हैं, पापा ख़ुशी के लिए एक बेटा ढूँढ रहें हैं.इसमें क़स्बे का नाम बदला हुआ हैं सिर्फ़ ये एक सच की कहानी हैं, मेरे मित्र की बताई हुई हैं एक दिन अचानक मित्र से पूछ लिया तुमने अपनी बेटी का नाम ख़ुशी क्यों रखा उसने मुझे ये सब बताया,और बताते हुए ज़ोर ज़ोर से रोने लगा, मेरी भी आँखे भर आई,रोते हुए बोला कुछ समय बाद अपने घर चली जाएगी मेरी बेटी “ख़ुशी “चुकी मेरा मित्र( छोटा भाई) मुझे अब सब पता हैं.सच में जब से ख़ुशी बीटियाँ आई हैं परिवार में खुशियाँ ही खुशियाँ लाईं हैं.बिटिया मतलब खुशियों से भरा परिवार.
लेखक परिचय:19 पुस्तकें हाथ से अलग अलग तरीके से दर्पण छवि में विश्व में भारत का नाम करने वाले “मिरर इमेज मैन ऑफ़ इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध पीयूष गोयल २० वी व २१ वी पुस्तक हाथ से लिख रहें हैं.पीयूष गोयल की १३ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, १४ वी पुस्तक पर काम चल रहा हैं.पीयूष गोयल इसके अलावा २२ sqr फीट की लूडो व ६०० कैरिकेचर्स ३*२ फीट के फ्रेम पर बना चुके हैं,कुछ न कुछ अनोखा करने वाले पीयूष गोयल १० हज़ार से ज़्यादा विद्यार्थियों को मोटीवेट कर चुके हैं.वैसे तो पीयूष २००३ से मोटिवेशन में हैं पर २०१२ से पूर्ण रूप से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहें हैं.उन्होंने बताया की सन् २०१२ में गांधी पॉलिटेक्निक, मुजफ्फरनगर ने Alumini आयोजन में बुलाया ( यही से मैंने डिप्लोमा यांत्रिकी में किया था),यहाँ मुझे मंच पर बोलने का मौक़ा मिला, पहले बार डर भी लग रहा था पर ३०-३५ मिनट बोला और मेरे भय निकल गया.मुझे उसी दिन महसूस हो गया कि क्यों न विधार्थियों को मोटीवेट किया जाये.उस दिन से लेकर आज तक विद्यार्थियों को निशुल्क मोटीवेट कर रहा हूँ.पीयूष ने पूछने पर बताया की आप निशुल्क मोटिवेशन क्यों करते हैं ,बहुत से मोटिवेशन स्पीकर पैसे लेकर मोटीवेट का काम कर रहें हैं,पहली बात मैं विद्यार्थियों को मोटिवेशन का काम करता हूँ, किसी प्रोफेशनल या बिजनेसमैन को मोटीवेट नहीं कर रहा हूँ, विद्यार्थियों मेरे मोटिवेशन से सफल हो जाये यही मेरी कमाई हैं.दूसरा मैं पुण्य और दुआ कमाने आया हूँ, जो दुनिया के किसी बाज़ार में नहीं मिलती, या कमानी पड़ती हैं.उन्होंने बताया की मेरा पहला वाक्य ये होता हैं”पूरी दुनिया नतीजे को सलाम करती हैं, प्रयास करने वाले की कभी हार नहीं होती हैं, मैं जब तक प्रयास करता रहूँगा तब तक मैं सफल ना हो जाऊँ, क्यूँकि हारना मेरी डिक्शनरी में नहीं हैं और काश मैं लिखता नहीं हूँ.और दूसरी लाइन ये होती हैं “ सपने आपके अपने हैं और आप अपनों के अपने हैं आपके सपने आपके तो हैं ही, आपके मम्मी पापा के भी हैं, उन सपनों को दिल से लगा लो और दिमाग से पूरा कर दो, और इसी जन्म में पूरा कर दो क्यूँकि ये जिंदगी मिलेंगी ना दुबारा”, और जो करते हैं मम्मी पापा से प्यार मेहनत से नहीं करते इनकार.पीयूष ने बताया की ये कुछ ऐसा शानदार विचार हैं जो आपकी सोच को नकारात्मकता से सकारात्मकता की और लें जाएँगी.पीयूष ने ये भी बताया की हम आने वाली पीढ़ियों को या समाज को क्या देने जा रहें हैं, याद रखना आने वाली पीढ़ियाँ हम से सवाल करेंगी कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिया किया क्या हैं?मैं तो अपने अच्छे विचारों से विद्यार्थियों की तरक्की देखना चाहता हूँ.
पीयूष गोयल
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