Srushthi - 2 in Hindi Love Stories by Radha books and stories PDF | सृष्टि - 2

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सृष्टि - 2

सृष्टि साधारण सी लड़की है जो अपने भाई के साथ शहर मे एक रेंट के घर मे रहती है जिससे वो अपनी पढ़ाई कम्पलीट कर सके। उसके माता पिता छोटे से गांव मे रहते है वो कॉलेज के साथ साथ पार्ट टाइम जॉब करके अपना गुजारा करती है

आज उसकी मुलाक़ात मंदिर परिसर मे एक अजनबी से हुई इसके बाद वो अपने घर गयी और बाद मे कॉलेज से सीधा अपने काम कि जगह  निकल गयी। सृष्टि एक रेस्टोरेंट मे कॉलेज के बाद वेटर कि जॉब करती है वहां उसे काम करते करते कुछ दिन ही हुए है वहां का मालिक बहुत सख्त ईमानदार और अनुशासनप्रिय है उसके विपरीत उसका एकलौता बेटा बहुत बिगाड़ा हुआ है कहते है कि वो जितना दिखने मे हैंडसम है उतना ही बिगाड़ा हुआ है उसे अनुशासन सिखाने के लिए मालिक ने आज से उसे होटल मे आने को कहा है इसलिये आज वो आएगा कुछ भी हो आज मुझे टाइम से पहुंचना होगा।

  मै दौड़ते भागते होटल से कुछ दूर पहुंची ही थी कि सामने से तेज़ रफ़्तार से एक कार मेरे सामने आके रुकी। डर के कारण मेने अपनी आँखे बंद कर ली उसमे से जीन्स और टी-शर्ट पर जैकेट पहने पतला दुबला और 6 फुट लम्बा लड़का बाहर निकला वो निकलते ही मेरे सामने आके खड़ा हो गया और जोर से चिल्लाके बोला - दिखाई नहीं देता है क्या, जो कार के सामने आके खड़ी हो गयी मरने का इतना शौक है तो कही और जाकर मरो। उसकी आवाज़ सुन कर जैसे ही मेने अपनी आँखे खोली तो देखा की वो गुस्से से मुझे ही देख रहा है मैने भी बिना कुछ सोचे समझे गुस्से मे बोल दिया कि तुम्हें तो सब दिखाई देता है ना तो एक इंसान दिखाई नहीं दिया क्या, या फिर अपनी ही अकड़ मे आसमान को देख कर गाड़ी चलाते हो।

उसने बोला - कितनी नक़चिड़ी हो मुझसे बहस कर रही हो

सृष्टि - हो तो तु एक इंसान ही ना, जिसमे अकल नाम कि कोई चीज नहीं है।

- मुझे अभी तमाशा नहीं चाहिए वरना तुम्हें बताता कि मै क्या कर सकता हुँ

मै कुछ बोल पाती उससे पहले ही वो नज़र गुमा कर होटल के अंदर चला गया। मेने दरवाजे कि तरफ देखा तो वहाँ सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि वो मालिक का बेटा है। ये सुनते ही मेरे तो होस उड़ गए कि अब क्या करूंगी मै, गुस्से मै इतना बोल तो दिया लेकिन अब मेरा क्या होगा। डरते डरते अंदर गयी और छिपते छिपाते मैंने आधा समय तो बिता लिया वहां मेरी एक साथी ने मुझे बताया कि उसका नाम वेद है। रेस्टोरेंट मे उसका ध्यान नहीं है कैसे भी करके वो यहाँ से निकलना चाहता है। मैंने भी सुकून कि सांस ली कि वो ज्यादा दिन नहीं रहेगा। तभी रेस्टोरेंट मे कुछ लड़को का झुण्ड अंदर प्रवेश किया। सभी अच्छी फैमिली से थे एक टेबल पर जाकर बैठ गए। उनमे से एक लड़के ने कॉल लगाया और किसी को बोला कि आओ, हम आ गए है तभी वेद अंदर से बाहर आया और उनकी तरफ जाने लगा रास्ते मे उसकी नज़र मुझ पर गयी मुझे देखकर पहले तो उसे आश्चर्य हुआ फिर नकली और सैतानी स्माइल देकर चला गया मैने सोचा अब तो गयी मै।

वेद उनके पास जाकर बोला - मैंने बोला था ना कि यहाँ मत आना, मेरी पहले ही लगी पड़ी है पापा को पता लग गया तो तुम सब कि सकल भी नहीं देख पाउँगा।

-- हमारी सकल को क्यों देखेगा तू, हमें देखने वाली हमारी गर्लफ्रेंड है तुम्हारी गन्दी नज़रो कि जरूरत नहीं है 

-- मेरा मतलब कभी मिलने नहीं देंगे।

- तुमसे मिलने के गंदे शौक भी नहीं रखते है हम।

- तूम यहां क्यों आये हो।

- यहां कि सबसे बेस्ट चीज लेकर आओ। जिसे खाते ही जन्नत के दर्शन हो जाये।

- चूहें मारने कि दवा मिला कर ले आउ।

- तुम अपने सारे कस्टमर्स को ये ही देते हो।

- कभी जरूरत पड़ी नहीं, लगता है आज काम आ जाएगी।

- ठीक है फिर उसे तुम ही खा लेना हमारी और तुम्हारे लिए ट्रीट। और हमारे लिए ये ये ( एक लम्बी सी लिस्ट के साथ ) ले आना। 

- ले आऊंगा,उसके बाद शांति से चले जाना, प्लीज।

- तुम्हें क्या लगता है हम घोड़े गधो कि तरह उछलते हुए जायेंगे।

- तुम्हारी मर्ज़ी हो जैसे जाना लेकिन पापा को कुछ पता चला ना तो तुम सब नर्क मे मिलना मुझसे।

- गुस्सा क्यों करते हो हम कुछ नहीं करेंगे 

- पहले ये ( बिल दिखाते हुए ) पैसे दो।

- मजाक है क्या, अपने दोस्त के रेस्टोरेंट  मे पैसे देकर उसकी इंसल्ट थोड़ी करेंगे।

- हे भगवान, ऐसे दोस्त किसी को ना दे।

- तुम्हें मिले है ना, तो खुश रहो।

वेद काउंटर पर आकर आर्डर देकर वापिस चला जाता है। और वहाँ उसके दोस्त गप्पे मार रहे थे सब एक दूसरों से बाते कर रहे थे और खुल कर हसीं ठिटोली कर रहे थे।

तभी वहा एक लड़की दरवाजे से अंदर आयी वो बहुत गबरायी हुई थी एकदम मॉडर्न और खूबसूरत थी। वह उनकी टेबल के पास से गुजर रही थी तभी वेद के दोस्तों मे से किसी एक का हाथ उसके हाथ मे लिए हुए पर्स से टकराया, जिससे इसका पर्स निचे गिर गया। पर्स मे रखा सारा सामान बिखर गया वो घबराते हुई निचे झुकी। वो लड़का भी सॉरी बोलते बोलते निचे झुका और सारा सामान इकठ्ठा किया लेकिन मुझे बहुत अजीब लगा कि वो लड़के ने उस लड़की कि तरफ एक बार भी नज़र उठा कर नहीं देखा और बिना छुए थोड़ी दूर से उसकी मदद कर दी और फिर अपनी बातो मे लग गया 

उसे देख पता चल गया कि ये ग्रुप इतना बुरा भी नहीं है लड़कियों कि इज्जत करना तो जानता है। कुछ देर मे आर्डर तैयार हुआ पूरी टेबल सजी हुई थी कही भी जगह खाली नही थी। तभी अचानक से मकान मालिक आ गए और आते ही उनकी नज़र भरी हुई टेबल और उन सब लड़को पर गयी उन लड़को को देख उनके चेहरे पर गुस्सा साफ देख रहा था।

उनमे से एक वेद के पापा को देख घबराते हुई उठ खड़ा हुआ और बिना कुछ पूछे बोल पड़ा - अंकल जी, हमें वेद ने बुलाया था उसने कहा था कि तुम सब को लेकर आ जाओ, पापा को ऐसे तंग करेंगे कि फिर कभी मुझे होटल आने को नहीं बोलेंगे और इसके बदले मे तुम्हें बहुत सारा खाना फ्री खिलाऊंगा। उसकी बात सुन मालिक गुस्से मे अंदर गए और उनके जाने के बाद उसने चैन कि सांस ली लेकिन सब दोस्तों को पता चल गया कि अब बम फटने वाला है उससे पहले चलते है उन्होंने जल्दी जल्दी खाने को पैक करवाया और लेकर चले गए। और उन्हें मै बस देखती रह गई। 5 मिनट्स मे छूमंतर हो गए वेद चिल्लाते हुई बाहर आया पर वहां कोई नहीं था।

जो भी हो यहाँ जो कुछ भी हुआ उसे देख मुझे मज़ा बहुत आया एन्जॉय किया। और आज का दिन ऐसे ही निकल गया।

क्रमशः  .........