Haunted Road - 2 in Hindi Horror Stories by Vedant Kana books and stories PDF | Haunted Road - 2

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Haunted Road - 2

गाड़ी के अंदर सन्नाटा ऐसा था जैसे किसी ने सारी आवाजें निगल ली हों। बिंदु की नजरें पीछे की सीट पर जमी थीं। जहां सुधीर होना चाहिए था वहां अब वह आकृति बैठी थी। उसका चेहरा आधा अंधेरे में छुपा था और आधा बिजली की चमक में दिख रहा था। वह चेहरा सुधीर जैसा ही था लेकिन आंखों में कोई भाव नहीं था। सिर्फ खालीपन और ठंडक।

वैशाली ने डरते डरते पीछे मुड़कर देखा और उसका गला सूख गया। वह चीखना चाहती थी लेकिन आवाज बाहर ही नहीं आ रही थी। अजय ने कांपते हाथों से गाड़ी की चाबी घुमाई। इंजन से बस एक कमजोर सी आवाज निकली और फिर सब शांत। बाहर बारिश अब भी गिर रही थी लेकिन उसकी आवाज दूर होती जा रही थी जैसे गाड़ी किसी और ही जगह खड़ी हो।

पीछे बैठी वह आकृति धीरे से हंसी। वह हंसी इंसानी नहीं थी, जैसे किसी टूटे हुए गले से हवा निकल रही हो। उसने बहुत धीमी आवाज में कहा, तुम लोग भी यहीं रहोगे। जैसे हम सब रहे। सुधीर की आवाज में बोले गए उन शब्दों ने चारों के दिल चीर दिए।

बिंदु ने हिम्मत जुटाकर भगवान का नाम लेना शुरू किया। तभी गाड़ी के शीशों पर खून जैसे लाल धब्बे उभरने लगे। वे धब्बे बह नहीं रहे थे बल्कि धीरे धीरे फैल रहे थे। बाहर खड़ी सफेद आकृतियां अब पास आ चुकी थीं। उनके पैर जमीन से ऊपर थे और उनके शरीर हवा में हल्के से हिल रहे थे।

अचानक पीछे बैठी आकृति ने बिंदु का हाथ पकड़ लिया। उसका स्पर्श बर्फ जैसा ठंडा था। बिंदु चीख पड़ी और उसी पल बिजली इतनी तेज चमकी कि पूरी सड़क साफ दिख गई। उस रोशनी में चारों ने देखा कि गाड़ी अब सड़क पर नहीं बल्कि उसी पुराने हादसे वाली जगह पर खड़ी है। चारों तरफ टूटी हुई बैलगाड़ी के टुकड़े बिखरे थे और जमीन पर पुराने हड्डियों के ढेर पड़े थे।

अजय को अब सब समझ आ गया। यह सड़क समय में फंसी हुई थी। जो भी यहां रुकता वह उसी हादसे का हिस्सा बन जाता। वह चिल्लाकर बोला कि हमें गाड़ी छोड़कर भागना होगा। लेकिन जैसे ही उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की, बाहर से किसी ने उसे पकड़ लिया। सफेद हाथों की पकड़ बहुत मजबूत थी।

पीछे की सीट से सुधीर की आवाज फिर आई, अब बिल्कुल पास से। उसने कहा, भागकर कहां जाओगे। यह रास्ता हमें छोड़ता नहीं। वैशाली ने देखा कि सामने के शीशे में अब उनका ही प्रतिबिंब बदल रहा है। उनके चेहरे पीले हो रहे थे और आंखें धीरे धीरे काली।

तभी अचानक बारिश रुक गई। सन्नाटा इतना गहरा हो गया कि दिल की धड़कन सुनाई देने लगी। बाहर की सभी आकृतियां एक साथ गाड़ी की तरफ झुकीं। उनके मुंह खुले और अंदर सिर्फ अंधेरा था। उसी अंधेरे से एक आवाज आई, अब अगली बारी तुम्हारी है।

गाड़ी की लाइट अपने आप बंद हो गई। अंदर घुप अंधेरा छा गया। आखिरी बार जो आवाज सुनाई दी वह बिंदु की टूटी हुई चीख थी और फिर सब कुछ शांत। लेकिन सड़क के मोड़ पर खड़ा पुराना पेड़ आज भी गीला है, जैसे किसी ने अभी अभी वहां से गुजरने की कोशिश की हो।

सुबह होने पर गांव के कुछ लोग उस सड़क से गुजर रहे थे। रात की बारिश के बाद हवा में अजीब सी ठंडक थी। तभी उनकी नजर सड़क किनारे खड़ी उस पुरानी गाड़ी पर पड़ी। गाड़ी की हालत ठीक थी, जैसे किसी ने उसे जानबूझकर वहीं खड़ा कर दिया हो। गांव वालों ने पास जाकर आवाज लगाई लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। हिम्मत करके जब दरवाजा खोला गया तो अंदर कोई नहीं था। न अजय, न वैशाली, न बिंदु और न ही सुधीर। सीटें भीगी हुई थीं लेकिन खून का एक भी निशान नहीं था।

गांव वालों ने सोचा शायद चारों रात में किसी और रास्ते से लौट गए होंगे। लेकिन तभी एक बूढ़े आदमी की नजर गाड़ी के शीशे पर पड़ी। अंदर की तरफ उंगलियों से लिखा था, हम यहीं हैं। उसकी लिखावट ताजी लग रही थी जैसे अभी अभी लिखी गई हो। बूढ़े का चेहरा उतर गया। उसने सबको उस जगह से दूर चलने को कहा।

उसी शाम गांव के मंदिर में दीप जलाए गए और पुजारी ने बताया कि यह वही सड़क है जो हर कुछ सालों में अपनी कुर्बानी मांगती है। जो लोग डर को मजाक समझते हैं, यह रास्ता उन्हें हमेशा के लिए अपना बना लेता है। किसी ने पूछा कि फिर वे चारों कहां गए। पुजारी ने भारी आवाज में कहा, वे कहीं नहीं गए, वे इसी सड़क का हिस्सा बन गए हैं।

उस रात एक चरवाहा उस सड़क से गुजर रहा था। अंधेरा घना था और चांद बादलों में छुपा हुआ था। अचानक उसे सड़क किनारे चार परछाइयां खड़ी दिखीं। वे बहुत शांत थीं, बिल्कुल स्थिर। जैसे ही वह पास आया, बिजली चमकी और उसे चार चेहरे साफ दिखे। अजय, वैशाली, बिंदु और सुधीर। सबके चेहरे सफेद थे और आंखें काली। उनके कपड़े गीले थे और पैरों के नीचे जमीन नहीं थी।

चारों एक साथ बोले, यहां मत रुकना। लेकिन उनकी आवाज में चेतावनी नहीं, बुलावा था। चरवाहा डर के मारे भाग खड़ा हुआ। पीछे मुड़कर उसने देखा तो सड़क फिर से खाली थी। लेकिन हवा में हंसी गूंज रही थी।

आज भी जब बारिश की रात में कोई उस सड़क से गुजरता है तो गाड़ी की खिड़की पर किसी के हाथ की आवाज आती है। लोग कहते हैं कि यह सड़क अब भी अधूरी है। उसे और साथ चाहिए। और शायद अगली कहानी किसी और की होगी।