Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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द्वितिय महायुद्ध - भाग 2 By Siddhesh Chaudhari

रुग्णालयाच्या त्या अंधाऱ्या खोलीतून जेव्हा अ‍ॅडॉल्फ हिटलर बाहेर पडला, तेव्हा त्याच्यासमोर एक भकास जर्मनी उभा होता. ज्या देशासाठी त्याने पहिल्या महायुद्धात आपल्या प्राणाची बाजी लावल...

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पापा का स्कूटर By Chandni choudhary

पापा का स्कूटरबचपन से लेकर आज तक मैंने पापा को एक स्कूटर के साथ देखा है—वही स्कूटर, जो उनके लिए केवल आने-जाने का साधन नहीं था, बल्कि उनके जीवन की अनेक यादों का साथी था। वह उनका सबस...

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अंग्रेजी स्कूल By Jeetendra

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अ...

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अतूट मैत्री By Anuja Dharane

कोकणातील हिरवाईने नटलेल्या देवगाव नावाच्या छोट्याशा गावात चार जिवलग मित्र राहत होते—आदित्य, विराज, रोहन आणि समीर.चौघेही एकाच शाळेत शिकत होते. त्यांची मैत्री अगदी लहानपणापासूनची होत...

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બારણું જે ક્યારેય બંધ ન થયું By Aloka Patel

ગામના છેડે એક જૂનું ઘર હતું.ઘર બહુ મોટું નહોતું, પણ એની ઓસરી વિશાળ હતી. ઓસરીની સામે તુલસીનો ક્યારો અને બાજુમાં લીમડાનું મોટું ઝાડ. ઘરની દીવાલો પર સમયના નિશાન હતા, છતાં એ ઘરમાં પ્રવ...

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ચાની એક પ્યાલી By Aloka Patel

એક એવી વાર્તા, જેમાં ચાની સુગંધ સાથે સંબંધોની ગરમાહટ પણ છે.સવારના છ વાગ્યા હતા.બહાર હજી સૂરજ પૂરો ઊગ્યો નહોતો. આકાશમાં હળવો કેસરી રંગ ફેલાઈ રહ્યો હતો. ગલીમાં દૂધવાળાની સાયકલની ઘંટડ...

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માનવ સબ્ન્ધોની એક અનિવાર્ય સત્યતા - 2 By shifa

ગઈ રાતે થોડું મોડું થઈ ગયું સોવામાં અને કાલે મારે વેલુ જવાનું હતું કોલેજ એટલે હું તરતજ સુવાનું પ્રયત્ન કર્યો પરંતુ ઊંઘ આવી નહીં આશરે ત્રણ વાગ્યે મને ઊંધ આવી બા ૬ વાગે ઉઠાડવા આવ્યા...

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बंद घर और हमारे पूर्वज By Vandna Sharma

रक्षाबंधन से 10 दिन पहले विनीता ने अपनी जेठानी सरिता को फोन किया - "नमस्ते भाभी। क्या प्रोग्राम है आपका रक्षाबंधन पर। कहां बंधवाओगी राखी।" फोन के उस पार से विनीता की आवाज आई - "गां...

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गुढ By Mahendra Patil

आयुष्यात काही क्षण असे येतात, जे आपल्याला पूर्णपणे हादरवून टाकतात. प्राध्यापकाची नोकरी, शिस्तीचे वातावरण आणि रोजचे रुटीन यामध्ये रमलेल्या माझ्या आयुष्यात नेमकी अशीच एक घटना घडली. इ...

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भूल गया नाम By Virendra Devangan

85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम क्या है? वह अपना नाम जो भूल गए थे।इसके पहले भी वे हालांकि चश्मा, घड़ी, पेन और न जाने क्या-क्या भूल च...

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ভালোবাসা By Sohagi Baski

তোমার আমার এক রাস্তায় প্রথম দেখা হয়েছিল। সেদিনের সেই পথটা হয়তো অন্য সবার কাছে আর পাঁচটা সাধারণ রাস্তার মতোই ছিল, কিন্তু রাবিয়া নূরের কাছে সেই পথটা হয়ে গিয়েছিল তার জীবনের সবচেয়ে গুর...

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तिरंगे की कीमत By InkImagination

15 अगस्त की सुबह थी।पूरा शहर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। कहीं स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ चल रही थीं, तो कहीं दुकानों और घरों पर तिरंगे लगे हुए थे।गली में देशभक्ति...

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स्त्री हूँ मैं By Chandni choudhary

स्त्री हूँ मैंस्त्री हूँ मैं, नारी हूँ मैं,देवी हूँ मैं, शक्ति हूँ मैं।महिला हूँ मैं इस धरा की,जग-जीवन की जननी हूँ मैं।कौन मुझे पराजित कर पाएगा?देख ले, हे मेरे पतन के अभिलाषी!मैं न...

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જૂનું સ્કૂટર By Aloka Patel

વર્ષો પછી આજે નિરવ પોતાના જૂના ઘરે પાછો આવ્યો હતો.શહેરની મોટી ઈમારતો, ચમકતી ગાડીઓ અને ભાગદોડભરી જિંદગી વચ્ચે ક્યાંક તે પોતાનું બાળપણ પાછળ છોડી આવ્યો હતો. નોકરી, પૈસા, જવાબદારીઓ અને...

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દોસ્ત - 2 By Surubha Jadeja

                           હા હું પણ અવીસ જ પણ ઘરેથી રજા લેવી પડે બોલી સાગર સુકેતુ સામે હસ્યો તુ કહે તો કાકા પાસે હું આવું સુકેતુ એ સાગર સામે જોયું એ હસવા લાગ્યો અરે ના આ ખાલી ફોર્...

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काज-प्रयोजन By Deepak sharma

  यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,” टेलिफ़ोन के दूसरे सिरे से आवाज़ आई, “आप के...

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जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है By Vandna Sharma

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस...

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आखिरी कोशिश - 1 By Subhan Khan

आखिरी कोशिशEpisode 1 — एक छोटा-सा सपनागाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।आरव बारहवीं कक्षा...

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લાકડાના પાટિયાંવાળા હીંચકાની કિંમત By Aloka Patel

ગામના છેવાડે એક જૂનું, પણ ખૂબ જ સુંદર ઘર હતું. ઘર મોટું નહોતું, પણ એની ઓસરી બહુ વિશાળ હતી. ઓસરીની વચ્ચે બે મજબૂત થાંભલા વચ્ચે એક જૂનો લાકડાના પાટિયાંવાળો હીંચકો લટકતો હતો.એ હીંચકો...

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शेवटची फेरी By DS The Writer

शेवटची फेरीएक रहस्यमय कादंबरी---अध्याय १ — मध्यरात्रीचा फोनरात्रीचे बारा वाजून सत्तावीस मिनिटे झाली होती.पुण्यात पाऊस जोरात कोसळत होता. खिडकीच्या काचेवर पडणाऱ्या थेंबांचा आवाज सोडल...

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ગંગામાં નાહવાથી પાપ નથી ધોવાતા By Aloka Patel

વારાણસીના ગંગા ઘાટ પર સવારનો સમય હતો. સૂર્યની કિરણો ગંગાના પાણી પર સોનેરી ચાદર પાથરી રહી હતી. ઘાટ પર ભક્તોની ભીડ હતી. કોઈ પૂજા કરતું હતું, કોઈ દીવો વહાવતું હતું અને કોઈ ગંગામાં ડૂબ...

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પોતાનો રસ્તો ખુદ બનાવવો By shifa

સમયનો અદભુત શિલ્પી: એક નવો ઈતિહાસએક નાના અને શાંત ગામમાં 'આયુષ' નામનો એક યુવાન રહેતો હતો. આયુષના વિચારો અને સપનાં આજના સમય કરતાં બિલકુલ અલગ હતા. એ હંમેશાં કંઈક એવું નવું અન...

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व्यापाराची नवी दिशा By Mayuresh Patki

जगाच्या अर्थव्यवस्थेत बदलाचे वारे वेगाने वाहत आहेत. एकेकाळी देशांतर्गत बाजारपेठेच्या बळावर विकास साधण्याचा प्रयत्न करणारा भारत आता जागतिक व्यापाराच्या केंद्रस्थानी स्थान निर्माण कर...

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പ്രാന്ത് By jijimol

ഒരു അലറിക്കരച്ചിലും, കാലിലെ ചങ്ങലയും ഇല്ലാതെ തന്നെ ‘പ്രാന്തി’ എന്ന് മുദ്രകുത്തപ്പെട്ടവളായിരുന്നു അവൾ.ആരോടും ഒന്നും മിണ്ടാതെ, എങ്ങോട്ടോ നോക്കി, കടലിലേക്ക് കണ്ണും നട്ടിരുന്ന അവളെ നോക...

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20 जुलाई 2026 - जंतर-मंतर की वह दोपहर By InkImagination

20 जुलाई 2026 — जंतर-मंतर की वह दोपहर"यह कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। पात्र और संवाद काल्पनिक हैं।"20 जुलाई 2026 सुबह 5:40 बजे वाराणसी जंक्शन"बेटा, वहाँ संभलकर रहना..."माँ...

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વડીલે જિંદગી કાઢી નાખી By Aloka Patel

હા, આ વિષય પર એક ભાવુક અને હૃદયસ્પર્શી વાર્તા લખું છું—જેમાં એક વડીલ આખી જિંદગી ઘર, માન-મર્યાદા અને પરિવાર માટે પોતાનું જીવન અર્પી દે છે, પરંતુ નવી પેઢી તેમના ત્યાગને સમજી શકતી નથી...

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भिकारी ( भाग १ ) By suchitra gaikwad Sadawarte

     सुहाला आज कॉलेज मधून निघताना नेहमीपेक्षा उशिर झाला होता. तिची बस निघून गेली होती . पुढील बस एक - दीड तासानंतर होती . इतका वेळ बसस्टॉप वर बसून वाट पाहण्यापेक्षा तिला स्टेशनवर ब...

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ઉધારનો બોજ - સ્વતંત્રતાની સવાર By Rainy Den

અમદાવાદ. શુક્રવારની રાત. વિહાન પાંત્રીસ વર્ષનો હતો. તે આઈટી કંપનીમાં સારી નોકરી કરતો હતો. દર મહિને પચાસ હજારનો પગાર આવતો હતો. ઑફિસમાં બધા તેને સફળ અને અનુભવી માણસ સમજતા હતા. બ્રૅન્...

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వర్షం కురిసిన రాత్రి - 2 By Abdul Sattar

ఎపిసోడ్ 1 ని అందరూ చదివేరు. అనగా ఎపిసోడ్ 1 కేశవ కుక్క పిల్లని పెంచుకోవాలని ఇంట్లో వాళ్ళ అందరిని చాలా బ్రతిమిలాడుతారు. తరువాత కేశవ కుక్క పిల్లని పెంచుకోవడం కోసం ఇంట్లో వాళ్ళు ఒప్పుక...

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महानगर में स्वर्ग की तालाश By Anant Dhish Aman

— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ सुना और पढ़ा ही है?— हाँ, सच कह रहा हूँ। महानगर में रहने आया हूँ—पढ़ने और खूब बड़ा इंसान बनन...

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खेल के पार By Deepak sharma

                 मेरे मन में उस डर का बीज शायद तभी रोपा गया था, जब पिछले दिनों पापा मेरे ग्यारहवें जन्मदिन पर मेरे लिए ‘क्लूडो&rs...

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माँ का प्यार By tanu

यह बात वर्ष 2021 की है। उन दिनों मैं बिहार में थी और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई के बीच जीवन बहुत साधारण ढंग से चल रहा था। तभी हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ शादी का निमंत्...

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सजा.....बिना कसूर की - 10 By Soni shakya

यह 13 साल पहले वाली भूमि नहीं थी।13 साल पहले वह मासूम थी किसी हैवान से लडने की ताकत नहीं थी उसमें पर अब...अब वह एक सशक्त  नारी है कोमल थी पर कमजोर नहीं थी।आकाश को  यु अपनी और झपटते...

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अधीन राज्य By Deepak sharma

                   इस मकान को उषा अपना अधीन राज्य मान कर चलती है और हम परिवार वालों को अपनी प्रजा।         &nb...

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ભાડે આપેલું સુખ - 4 By Aloka Patel

અધ્યાય ૪તો જે કોઈ આ ડાયરી વાંચે…”કાવ્યાને બચાવી લેજો.⸻કાવ્યાની આંખોમાંથી આંસુ વહેવા લાગ્યા.“એ મને ઓળખતી પણ નહોતી… છતાં મારી ચિંતા કરતી હતી.”એટલામાં…ડાયરીમાંથી એક નાનું કવર નીચે પડ્...

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औपचारिकता भरे रिश्ते By Vandna Sharma

औपचारिकता भरे रिश्तेसोहन ऑफिस जाते हुए उदास लग रहा था। उसकी आँखों में वो उदासी साफ झलक रही थी जिसे वो छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसकी धर्मपत्नी मीना एक अध्यापिका थी। पति-पत्नी का र...

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कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 By Anamika

एक बार की बात है। एक छोटे से शहर में रहता था एक परिवार। उनके घर में किसी भी चीज की कमी नहीं थी। वह एक छोटा सा परिवार था उसमें केवल पति-पत्नी और उनका एक बेटा रहा करता था । पति का ना...

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प्रेम धरो By Deepak sharma

                   वाराणसी से कोई मिलने आया? अपने अभिवादन के साथ ही उषा पिता से पूछ बैठी । बल्लियों उछल रहे अपने दिल को और संभालना...

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AVREE Kahan Gaya By Anmol Mishra

……कुछ लिखने का मन है पता नहीं क्या लिखूँ but लिखना है। — ohkkkkkk, अभी नींद आ रही है but आज रात सोना नहीं है और एक बात है कि I love myself the most butttttt मुझे नहीं पता क्यों मैं...

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શિક્ષક: ફરજનો યોદ્ધા કે આરોપી By Anuradha

આજનો મારો વિષય એક શિક્ષકની વ્યથા સાથે જોડાયેલો છે...ઘણા સમયથી સમાજના એક મોટા વર્ગ તરફથી શિક્ષકો અંગે વિવિધ પ્રકારની સમીક્ષાઓ અને ટિપ્પણીઓ સાંભળવા મળે છે. ક્યારેક એવું કહેવામાં આવે...

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दोस्ती By Vandna Sharma

बाजार की एक दुकान के शीशे में रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड चमक रहे थे। सीमा ठिठक गई। उसने दो सुंदर ब्रेसलेट खरीदे और बैग में रख लिए। घर जाने का मन नहीं था तो पास के पार्क में एक खाली...

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जैसी करनी वैसी भरनी By Devendra Kumar

जैसी करनी वैसी भरनी सुन कर बड़ा दुःख हुआ था कि  मेरा एक पुराना सहयोगी राकेश  सोलंकी  दिल्ली के मैक्स  हॉस्पिटल के आई सी यू में काफी सीरियस हालत में भर्ती कराया गया है . एक दूसरा  पु...

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એક ટીપું - એક જીવન By Rainy Den

એક ટીપું — એક જીવન  પહાડ ક્યારેય કોઈની રાહ જોતો નથી. વિક્રમ આ વાત જાણતો હતો. છતાં આજે એ ત્યાં હતો — થાકેલો, હારેલો, ખાલી. ત્રણ વર્ષની મહેનત, એક સ્વપ્ન, અને છેલ્લે — નિષ્ફળતા. બિઝને...

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कर्मपथ – आत्मा की पुकार By Skp divine

कर्मपथ – आत्मा की पुकारभाग–1 : एक नई सुबहसूरज की पहली किरणें गाँव के खेतों पर बिखर रही थीं। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू थी और मंदिर की घंटियों की ध्वनि वातावरण को पवित्र बना रही...

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અહંશૂન્ય By priyanshi bhuva

અહંશૂન્ય(અહંકાર ઓગળીને શૂન્ય થઈ જવો)કોઈપણ દેશમાં ભણતરનું મહત્વ શું હોય છે. તેની ચર્ચા કોલેજના કેમ્પસમાં થઈ રહી હતી. આ કેમ્પસમાં ફ્રેન્ડસનું એક ગ્રુપ હતું. આ ગ્રુપના કુલ 7 મેમ્બર હત...

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भूख By Rinki Singh

दिसंबर के अंतिम सप्ताह की वह रात हड्डियाँ जमा देने वाली थी। ठंड ऐसी कि लगता था नसों में दौड़ता हुआ खून भी कहीं रुक-रुक कर चल रहा हो। चारों ओर कोहरा इस तरह पसरा था, मानो धरती ने सफ़...

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द्वितिय महायुद्ध - भाग 2 By Siddhesh Chaudhari

रुग्णालयाच्या त्या अंधाऱ्या खोलीतून जेव्हा अ‍ॅडॉल्फ हिटलर बाहेर पडला, तेव्हा त्याच्यासमोर एक भकास जर्मनी उभा होता. ज्या देशासाठी त्याने पहिल्या महायुद्धात आपल्या प्राणाची बाजी लावल...

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पापा का स्कूटर By Chandni choudhary

पापा का स्कूटरबचपन से लेकर आज तक मैंने पापा को एक स्कूटर के साथ देखा है—वही स्कूटर, जो उनके लिए केवल आने-जाने का साधन नहीं था, बल्कि उनके जीवन की अनेक यादों का साथी था। वह उनका सबस...

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अंग्रेजी स्कूल By Jeetendra

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अ...

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अतूट मैत्री By Anuja Dharane

कोकणातील हिरवाईने नटलेल्या देवगाव नावाच्या छोट्याशा गावात चार जिवलग मित्र राहत होते—आदित्य, विराज, रोहन आणि समीर.चौघेही एकाच शाळेत शिकत होते. त्यांची मैत्री अगदी लहानपणापासूनची होत...

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બારણું જે ક્યારેય બંધ ન થયું By Aloka Patel

ગામના છેડે એક જૂનું ઘર હતું.ઘર બહુ મોટું નહોતું, પણ એની ઓસરી વિશાળ હતી. ઓસરીની સામે તુલસીનો ક્યારો અને બાજુમાં લીમડાનું મોટું ઝાડ. ઘરની દીવાલો પર સમયના નિશાન હતા, છતાં એ ઘરમાં પ્રવ...

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ચાની એક પ્યાલી By Aloka Patel

એક એવી વાર્તા, જેમાં ચાની સુગંધ સાથે સંબંધોની ગરમાહટ પણ છે.સવારના છ વાગ્યા હતા.બહાર હજી સૂરજ પૂરો ઊગ્યો નહોતો. આકાશમાં હળવો કેસરી રંગ ફેલાઈ રહ્યો હતો. ગલીમાં દૂધવાળાની સાયકલની ઘંટડ...

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માનવ સબ્ન્ધોની એક અનિવાર્ય સત્યતા - 2 By shifa

ગઈ રાતે થોડું મોડું થઈ ગયું સોવામાં અને કાલે મારે વેલુ જવાનું હતું કોલેજ એટલે હું તરતજ સુવાનું પ્રયત્ન કર્યો પરંતુ ઊંઘ આવી નહીં આશરે ત્રણ વાગ્યે મને ઊંધ આવી બા ૬ વાગે ઉઠાડવા આવ્યા...

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बंद घर और हमारे पूर्वज By Vandna Sharma

रक्षाबंधन से 10 दिन पहले विनीता ने अपनी जेठानी सरिता को फोन किया - "नमस्ते भाभी। क्या प्रोग्राम है आपका रक्षाबंधन पर। कहां बंधवाओगी राखी।" फोन के उस पार से विनीता की आवाज आई - "गां...

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गुढ By Mahendra Patil

आयुष्यात काही क्षण असे येतात, जे आपल्याला पूर्णपणे हादरवून टाकतात. प्राध्यापकाची नोकरी, शिस्तीचे वातावरण आणि रोजचे रुटीन यामध्ये रमलेल्या माझ्या आयुष्यात नेमकी अशीच एक घटना घडली. इ...

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भूल गया नाम By Virendra Devangan

85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम क्या है? वह अपना नाम जो भूल गए थे।इसके पहले भी वे हालांकि चश्मा, घड़ी, पेन और न जाने क्या-क्या भूल च...

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ভালোবাসা By Sohagi Baski

তোমার আমার এক রাস্তায় প্রথম দেখা হয়েছিল। সেদিনের সেই পথটা হয়তো অন্য সবার কাছে আর পাঁচটা সাধারণ রাস্তার মতোই ছিল, কিন্তু রাবিয়া নূরের কাছে সেই পথটা হয়ে গিয়েছিল তার জীবনের সবচেয়ে গুর...

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तिरंगे की कीमत By InkImagination

15 अगस्त की सुबह थी।पूरा शहर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। कहीं स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ चल रही थीं, तो कहीं दुकानों और घरों पर तिरंगे लगे हुए थे।गली में देशभक्ति...

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स्त्री हूँ मैं By Chandni choudhary

स्त्री हूँ मैंस्त्री हूँ मैं, नारी हूँ मैं,देवी हूँ मैं, शक्ति हूँ मैं।महिला हूँ मैं इस धरा की,जग-जीवन की जननी हूँ मैं।कौन मुझे पराजित कर पाएगा?देख ले, हे मेरे पतन के अभिलाषी!मैं न...

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જૂનું સ્કૂટર By Aloka Patel

વર્ષો પછી આજે નિરવ પોતાના જૂના ઘરે પાછો આવ્યો હતો.શહેરની મોટી ઈમારતો, ચમકતી ગાડીઓ અને ભાગદોડભરી જિંદગી વચ્ચે ક્યાંક તે પોતાનું બાળપણ પાછળ છોડી આવ્યો હતો. નોકરી, પૈસા, જવાબદારીઓ અને...

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દોસ્ત - 2 By Surubha Jadeja

                           હા હું પણ અવીસ જ પણ ઘરેથી રજા લેવી પડે બોલી સાગર સુકેતુ સામે હસ્યો તુ કહે તો કાકા પાસે હું આવું સુકેતુ એ સાગર સામે જોયું એ હસવા લાગ્યો અરે ના આ ખાલી ફોર્...

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काज-प्रयोजन By Deepak sharma

  यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,” टेलिफ़ोन के दूसरे सिरे से आवाज़ आई, “आप के...

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जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है By Vandna Sharma

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस...

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आखिरी कोशिश - 1 By Subhan Khan

आखिरी कोशिशEpisode 1 — एक छोटा-सा सपनागाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।आरव बारहवीं कक्षा...

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લાકડાના પાટિયાંવાળા હીંચકાની કિંમત By Aloka Patel

ગામના છેવાડે એક જૂનું, પણ ખૂબ જ સુંદર ઘર હતું. ઘર મોટું નહોતું, પણ એની ઓસરી બહુ વિશાળ હતી. ઓસરીની વચ્ચે બે મજબૂત થાંભલા વચ્ચે એક જૂનો લાકડાના પાટિયાંવાળો હીંચકો લટકતો હતો.એ હીંચકો...

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शेवटची फेरी By DS The Writer

शेवटची फेरीएक रहस्यमय कादंबरी---अध्याय १ — मध्यरात्रीचा फोनरात्रीचे बारा वाजून सत्तावीस मिनिटे झाली होती.पुण्यात पाऊस जोरात कोसळत होता. खिडकीच्या काचेवर पडणाऱ्या थेंबांचा आवाज सोडल...

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ગંગામાં નાહવાથી પાપ નથી ધોવાતા By Aloka Patel

વારાણસીના ગંગા ઘાટ પર સવારનો સમય હતો. સૂર્યની કિરણો ગંગાના પાણી પર સોનેરી ચાદર પાથરી રહી હતી. ઘાટ પર ભક્તોની ભીડ હતી. કોઈ પૂજા કરતું હતું, કોઈ દીવો વહાવતું હતું અને કોઈ ગંગામાં ડૂબ...

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પોતાનો રસ્તો ખુદ બનાવવો By shifa

સમયનો અદભુત શિલ્પી: એક નવો ઈતિહાસએક નાના અને શાંત ગામમાં 'આયુષ' નામનો એક યુવાન રહેતો હતો. આયુષના વિચારો અને સપનાં આજના સમય કરતાં બિલકુલ અલગ હતા. એ હંમેશાં કંઈક એવું નવું અન...

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व्यापाराची नवी दिशा By Mayuresh Patki

जगाच्या अर्थव्यवस्थेत बदलाचे वारे वेगाने वाहत आहेत. एकेकाळी देशांतर्गत बाजारपेठेच्या बळावर विकास साधण्याचा प्रयत्न करणारा भारत आता जागतिक व्यापाराच्या केंद्रस्थानी स्थान निर्माण कर...

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പ്രാന്ത് By jijimol

ഒരു അലറിക്കരച്ചിലും, കാലിലെ ചങ്ങലയും ഇല്ലാതെ തന്നെ ‘പ്രാന്തി’ എന്ന് മുദ്രകുത്തപ്പെട്ടവളായിരുന്നു അവൾ.ആരോടും ഒന്നും മിണ്ടാതെ, എങ്ങോട്ടോ നോക്കി, കടലിലേക്ക് കണ്ണും നട്ടിരുന്ന അവളെ നോക...

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20 जुलाई 2026 - जंतर-मंतर की वह दोपहर By InkImagination

20 जुलाई 2026 — जंतर-मंतर की वह दोपहर"यह कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। पात्र और संवाद काल्पनिक हैं।"20 जुलाई 2026 सुबह 5:40 बजे वाराणसी जंक्शन"बेटा, वहाँ संभलकर रहना..."माँ...

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વડીલે જિંદગી કાઢી નાખી By Aloka Patel

હા, આ વિષય પર એક ભાવુક અને હૃદયસ્પર્શી વાર્તા લખું છું—જેમાં એક વડીલ આખી જિંદગી ઘર, માન-મર્યાદા અને પરિવાર માટે પોતાનું જીવન અર્પી દે છે, પરંતુ નવી પેઢી તેમના ત્યાગને સમજી શકતી નથી...

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भिकारी ( भाग १ ) By suchitra gaikwad Sadawarte

     सुहाला आज कॉलेज मधून निघताना नेहमीपेक्षा उशिर झाला होता. तिची बस निघून गेली होती . पुढील बस एक - दीड तासानंतर होती . इतका वेळ बसस्टॉप वर बसून वाट पाहण्यापेक्षा तिला स्टेशनवर ब...

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ઉધારનો બોજ - સ્વતંત્રતાની સવાર By Rainy Den

અમદાવાદ. શુક્રવારની રાત. વિહાન પાંત્રીસ વર્ષનો હતો. તે આઈટી કંપનીમાં સારી નોકરી કરતો હતો. દર મહિને પચાસ હજારનો પગાર આવતો હતો. ઑફિસમાં બધા તેને સફળ અને અનુભવી માણસ સમજતા હતા. બ્રૅન્...

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వర్షం కురిసిన రాత్రి - 2 By Abdul Sattar

ఎపిసోడ్ 1 ని అందరూ చదివేరు. అనగా ఎపిసోడ్ 1 కేశవ కుక్క పిల్లని పెంచుకోవాలని ఇంట్లో వాళ్ళ అందరిని చాలా బ్రతిమిలాడుతారు. తరువాత కేశవ కుక్క పిల్లని పెంచుకోవడం కోసం ఇంట్లో వాళ్ళు ఒప్పుక...

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महानगर में स्वर्ग की तालाश By Anant Dhish Aman

— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ सुना और पढ़ा ही है?— हाँ, सच कह रहा हूँ। महानगर में रहने आया हूँ—पढ़ने और खूब बड़ा इंसान बनन...

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खेल के पार By Deepak sharma

                 मेरे मन में उस डर का बीज शायद तभी रोपा गया था, जब पिछले दिनों पापा मेरे ग्यारहवें जन्मदिन पर मेरे लिए ‘क्लूडो&rs...

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माँ का प्यार By tanu

यह बात वर्ष 2021 की है। उन दिनों मैं बिहार में थी और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई के बीच जीवन बहुत साधारण ढंग से चल रहा था। तभी हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ शादी का निमंत्...

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सजा.....बिना कसूर की - 10 By Soni shakya

यह 13 साल पहले वाली भूमि नहीं थी।13 साल पहले वह मासूम थी किसी हैवान से लडने की ताकत नहीं थी उसमें पर अब...अब वह एक सशक्त  नारी है कोमल थी पर कमजोर नहीं थी।आकाश को  यु अपनी और झपटते...

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अधीन राज्य By Deepak sharma

                   इस मकान को उषा अपना अधीन राज्य मान कर चलती है और हम परिवार वालों को अपनी प्रजा।         &nb...

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ભાડે આપેલું સુખ - 4 By Aloka Patel

અધ્યાય ૪તો જે કોઈ આ ડાયરી વાંચે…”કાવ્યાને બચાવી લેજો.⸻કાવ્યાની આંખોમાંથી આંસુ વહેવા લાગ્યા.“એ મને ઓળખતી પણ નહોતી… છતાં મારી ચિંતા કરતી હતી.”એટલામાં…ડાયરીમાંથી એક નાનું કવર નીચે પડ્...

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औपचारिकता भरे रिश्ते By Vandna Sharma

औपचारिकता भरे रिश्तेसोहन ऑफिस जाते हुए उदास लग रहा था। उसकी आँखों में वो उदासी साफ झलक रही थी जिसे वो छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसकी धर्मपत्नी मीना एक अध्यापिका थी। पति-पत्नी का र...

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कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 By Anamika

एक बार की बात है। एक छोटे से शहर में रहता था एक परिवार। उनके घर में किसी भी चीज की कमी नहीं थी। वह एक छोटा सा परिवार था उसमें केवल पति-पत्नी और उनका एक बेटा रहा करता था । पति का ना...

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प्रेम धरो By Deepak sharma

                   वाराणसी से कोई मिलने आया? अपने अभिवादन के साथ ही उषा पिता से पूछ बैठी । बल्लियों उछल रहे अपने दिल को और संभालना...

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AVREE Kahan Gaya By Anmol Mishra

……कुछ लिखने का मन है पता नहीं क्या लिखूँ but लिखना है। — ohkkkkkk, अभी नींद आ रही है but आज रात सोना नहीं है और एक बात है कि I love myself the most butttttt मुझे नहीं पता क्यों मैं...

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શિક્ષક: ફરજનો યોદ્ધા કે આરોપી By Anuradha

આજનો મારો વિષય એક શિક્ષકની વ્યથા સાથે જોડાયેલો છે...ઘણા સમયથી સમાજના એક મોટા વર્ગ તરફથી શિક્ષકો અંગે વિવિધ પ્રકારની સમીક્ષાઓ અને ટિપ્પણીઓ સાંભળવા મળે છે. ક્યારેક એવું કહેવામાં આવે...

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दोस्ती By Vandna Sharma

बाजार की एक दुकान के शीशे में रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड चमक रहे थे। सीमा ठिठक गई। उसने दो सुंदर ब्रेसलेट खरीदे और बैग में रख लिए। घर जाने का मन नहीं था तो पास के पार्क में एक खाली...

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जैसी करनी वैसी भरनी By Devendra Kumar

जैसी करनी वैसी भरनी सुन कर बड़ा दुःख हुआ था कि  मेरा एक पुराना सहयोगी राकेश  सोलंकी  दिल्ली के मैक्स  हॉस्पिटल के आई सी यू में काफी सीरियस हालत में भर्ती कराया गया है . एक दूसरा  पु...

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એક ટીપું - એક જીવન By Rainy Den

એક ટીપું — એક જીવન  પહાડ ક્યારેય કોઈની રાહ જોતો નથી. વિક્રમ આ વાત જાણતો હતો. છતાં આજે એ ત્યાં હતો — થાકેલો, હારેલો, ખાલી. ત્રણ વર્ષની મહેનત, એક સ્વપ્ન, અને છેલ્લે — નિષ્ફળતા. બિઝને...

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कर्मपथ – आत्मा की पुकार By Skp divine

कर्मपथ – आत्मा की पुकारभाग–1 : एक नई सुबहसूरज की पहली किरणें गाँव के खेतों पर बिखर रही थीं। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू थी और मंदिर की घंटियों की ध्वनि वातावरण को पवित्र बना रही...

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અહંશૂન્ય By priyanshi bhuva

અહંશૂન્ય(અહંકાર ઓગળીને શૂન્ય થઈ જવો)કોઈપણ દેશમાં ભણતરનું મહત્વ શું હોય છે. તેની ચર્ચા કોલેજના કેમ્પસમાં થઈ રહી હતી. આ કેમ્પસમાં ફ્રેન્ડસનું એક ગ્રુપ હતું. આ ગ્રુપના કુલ 7 મેમ્બર હત...

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भूख By Rinki Singh

दिसंबर के अंतिम सप्ताह की वह रात हड्डियाँ जमा देने वाली थी। ठंड ऐसी कि लगता था नसों में दौड़ता हुआ खून भी कहीं रुक-रुक कर चल रहा हो। चारों ओर कोहरा इस तरह पसरा था, मानो धरती ने सफ़...

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