Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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  • करवाचौथ की शॉपिंग

    सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धू...

  • मुकम्मल

    पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म...

  • चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं

    चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स...

तुम हो तो सब कुछ है - भाग 3 By Ankit Khatri

नई नौकरी में आरव को लगभग दो हफ्ते हो चुके थे।अब कंपनी की बड़ी इमारत, वहां की भागदौड़ और रोज का काम उसके लिए पहले जैसा अनजान नहीं रहा था। जिस ऑफिस में पहले कदम रखते समय उसे हर चेहरा...

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खिड़की और बच्चें By Piyush Goel

प्रथम श्रेणी के रिटायर्ड ईमानदार सरकारी कर्मचारी के दो बेटे और एक बेटी थी.सभी बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से हुई थी. बड़ा बेटा सॉफ्टवेर इंजीनियर अमरीका में रहता था,बीटियाँ...

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સાથે હોવું એટલે સાથે સમય વિતાવવો - 5 By Aloka Patel

ભાગ ૫ — થોડો સમય… ફક્ત આપણા માટેસવારનો સમય હતો. બારીમાંથી આવતી સૂર્યની કિરણો રૂમમાં ધીમે ધીમે ફેલાઈ રહી હતી. કાવ્યા પથારી પર બેઠી હતી અને હાથમાં ચાનો કપ હતો. સામે રામ તૈયાર થઈ રહ્ય...

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टाटा समूहापुढील नवा पेच By Mayuresh Patki

१९९१ साली जे. आर. डी. टाटा यांनी रतन टाटांकडे समूहाचे नेतृत्व सोपवले, तेव्हा अनेकांना तो फक्त पिढीबदल वाटला. पण खरे तर तिथून एक मोठी संस्थात्मक उलथापालथ सुरू झाली. त्या वेळी टाटा स...

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द्वितिय महायुद्ध - भाग 21 By Siddhesh Chaudhari

डिसेंबर १९४१ मध्ये अमेरिकेने अधिकृतरीत्या दुसऱ्या महायुद्धात उडी घेतली होती. पण अमेरिकेला आपले अवाढव्य लष्कर उभे करण्यासाठी आणि ते युरोपमध्ये आणण्यासाठी काही महिन्यांचा वेळ लागणार...

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आप ऊपर ही बिराजिये By Neelam Kulshreshtha

[    नीलम कुलश्रेष्ठ    ]              ये कार्यालय आम सरकारी  कार्यालय  जैसा है। कौन  से प्रदेश का ? और कौन &n...

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बाबूजी की विपरीत सीख By Deepak sharma

               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह ज...

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એક પ્રેમ આવો પણ By ધબકાર...

એક પ્રેમ આવો પણ..."શાંતિ ઝંખતી જિંદગીમાં, ગમતો પણ એક ઘોંઘાટ છે,બકબક કરતી રહેતી, તોય લાગણીઓ એની ગાઢ છે." આવા જ કંઈક મનને ગમતા વિચારો વચ્ચે ક્ષિતિજ પોતાનુ કામ કરી રહ્યો હતો. ક્ષિતિજ...

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છૂટા છેડા By Bhayani Alkesh

સાંજનો સમય હતો. વરસાદ હમણાં જ અટક્યો હતો અને શહેરની ભીની સડકો પર સ્ટ્રીટલાઇટના પીળા પ્રકાશના લાંબા પ્રતિબિંબો પડ્યા હતા. શહેરના પશ્ચિમ છેડે આવેલા નાના એપાર્ટમેન્ટના બીજા માળે બેઠેલ...

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करवाचौथ की शॉपिंग By Vandna Sharma

सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपन...

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বিচ্ছেদের শুরু By Jalaluddin Faruque

প্রথম অধ্যায়যে সংসারে ভালোবাসা ছিল, বোঝাপড়া ছিল নাগ্রামের মেয়েদের জীবন অনেকটা নদীর মতো। শৈশবে তারা থাকে শান্ত, স্বচ্ছ, আপনজনের ভালোবাসায় ঘেরা; তারপর একদিন হঠাৎই সেই নদীর গতিপথ...

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पता बताते दिन By महेश रौतेला

पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" ...

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ड्राफ्ट में अटकी एक कहानी By Swagata Chakraborty

शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थी।एक दिन उसके मन में आया, क्यों न प्रतिलिपि के साथ-साथ अपनी कहानियाँ और भी कहीं ले जाऊँ? बस फिर क्या...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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રાહ હૃદયની - 1 By Harsh Jethva

પ્રસ્તાવના કેટલીક વાર્તાઓની શરૂઆત મુલાકાતથી થતી નથી. કેટલીક વાર્તાઓ તો એ ક્ષણથી શરૂ થાય છે, જ્યારે કોઈ અજાણી વ્યક્તિ ભીડમાં માત્ર એક નજર માટે તમારી સામે આવે... અને પછી આખી જિંદગી મ...

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பூங்கா நட்புகள் By Ramakrishnan Anantha

அந்த நகரத்தின் ஒரு பகுதியில்.... காலை சூரியன் உதயமாக காத்துக்கொண்டு இருக்கும் பறவைகள்... அந்த பகுதியை தூய்மை செய்யும் பணியாளர்கள்... வீட்டிற்கு பால் போடும் பால்காரர்... வீட்டு வேலை...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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भिकारी ( भाग ४) By suchitra gaikwad Sadawarte

ओम ? इथे काय करतोयस तू ? ते ही एकटाच ? ओम थोडा गोंधळून गेला होता , कदाचित घाबरला ही होता . त्याला इतका अंदाज होता सुहा ताई इकडेच कुठेतरी लपून बसली आहे . हा आवाज त्याच्या पप्पाचा हो...

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A Miracle of Gods Faithfulness By Mary Kondeti

It was 26 January 2022, at the peak of the COVID-19 pandemic. I was attending the online Republic Day flag-hoisting ceremony conducted by our school. It was a quiet morning, but wi...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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शेवटचा संदेश By Anuja Dharane

सीता लहानपणापासूनच सुखवस्तू कुटुंबात वाढली होती.ती तिच्या आई-वडिलांची एकुलती एक मुलगी होती. आई, बाबा, आजी, आजोबा आणि घरातील प्रत्येक व्यक्ती तिच्यावर खूप प्रेम करायची. तिच्या घरात...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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The Night of the Brahma Kamal By Deep Parekh

Kavya had walked for eleven days to reach Hemkund.Her grandmother used to say that the Brahma Kamal bloomed only once a year, only at night, and only for those patient enough to si...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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तुम हो तो सब कुछ है - भाग 3 By Ankit Khatri

नई नौकरी में आरव को लगभग दो हफ्ते हो चुके थे।अब कंपनी की बड़ी इमारत, वहां की भागदौड़ और रोज का काम उसके लिए पहले जैसा अनजान नहीं रहा था। जिस ऑफिस में पहले कदम रखते समय उसे हर चेहरा...

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खिड़की और बच्चें By Piyush Goel

प्रथम श्रेणी के रिटायर्ड ईमानदार सरकारी कर्मचारी के दो बेटे और एक बेटी थी.सभी बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से हुई थी. बड़ा बेटा सॉफ्टवेर इंजीनियर अमरीका में रहता था,बीटियाँ...

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સાથે હોવું એટલે સાથે સમય વિતાવવો - 5 By Aloka Patel

ભાગ ૫ — થોડો સમય… ફક્ત આપણા માટેસવારનો સમય હતો. બારીમાંથી આવતી સૂર્યની કિરણો રૂમમાં ધીમે ધીમે ફેલાઈ રહી હતી. કાવ્યા પથારી પર બેઠી હતી અને હાથમાં ચાનો કપ હતો. સામે રામ તૈયાર થઈ રહ્ય...

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टाटा समूहापुढील नवा पेच By Mayuresh Patki

१९९१ साली जे. आर. डी. टाटा यांनी रतन टाटांकडे समूहाचे नेतृत्व सोपवले, तेव्हा अनेकांना तो फक्त पिढीबदल वाटला. पण खरे तर तिथून एक मोठी संस्थात्मक उलथापालथ सुरू झाली. त्या वेळी टाटा स...

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द्वितिय महायुद्ध - भाग 21 By Siddhesh Chaudhari

डिसेंबर १९४१ मध्ये अमेरिकेने अधिकृतरीत्या दुसऱ्या महायुद्धात उडी घेतली होती. पण अमेरिकेला आपले अवाढव्य लष्कर उभे करण्यासाठी आणि ते युरोपमध्ये आणण्यासाठी काही महिन्यांचा वेळ लागणार...

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आप ऊपर ही बिराजिये By Neelam Kulshreshtha

[    नीलम कुलश्रेष्ठ    ]              ये कार्यालय आम सरकारी  कार्यालय  जैसा है। कौन  से प्रदेश का ? और कौन &n...

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बाबूजी की विपरीत सीख By Deepak sharma

               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह ज...

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એક પ્રેમ આવો પણ By ધબકાર...

એક પ્રેમ આવો પણ..."શાંતિ ઝંખતી જિંદગીમાં, ગમતો પણ એક ઘોંઘાટ છે,બકબક કરતી રહેતી, તોય લાગણીઓ એની ગાઢ છે." આવા જ કંઈક મનને ગમતા વિચારો વચ્ચે ક્ષિતિજ પોતાનુ કામ કરી રહ્યો હતો. ક્ષિતિજ...

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છૂટા છેડા By Bhayani Alkesh

સાંજનો સમય હતો. વરસાદ હમણાં જ અટક્યો હતો અને શહેરની ભીની સડકો પર સ્ટ્રીટલાઇટના પીળા પ્રકાશના લાંબા પ્રતિબિંબો પડ્યા હતા. શહેરના પશ્ચિમ છેડે આવેલા નાના એપાર્ટમેન્ટના બીજા માળે બેઠેલ...

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करवाचौथ की शॉपिंग By Vandna Sharma

सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपन...

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বিচ্ছেদের শুরু By Jalaluddin Faruque

প্রথম অধ্যায়যে সংসারে ভালোবাসা ছিল, বোঝাপড়া ছিল নাগ্রামের মেয়েদের জীবন অনেকটা নদীর মতো। শৈশবে তারা থাকে শান্ত, স্বচ্ছ, আপনজনের ভালোবাসায় ঘেরা; তারপর একদিন হঠাৎই সেই নদীর গতিপথ...

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पता बताते दिन By महेश रौतेला

पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" ...

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ड्राफ्ट में अटकी एक कहानी By Swagata Chakraborty

शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थी।एक दिन उसके मन में आया, क्यों न प्रतिलिपि के साथ-साथ अपनी कहानियाँ और भी कहीं ले जाऊँ? बस फिर क्या...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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રાહ હૃદયની - 1 By Harsh Jethva

પ્રસ્તાવના કેટલીક વાર્તાઓની શરૂઆત મુલાકાતથી થતી નથી. કેટલીક વાર્તાઓ તો એ ક્ષણથી શરૂ થાય છે, જ્યારે કોઈ અજાણી વ્યક્તિ ભીડમાં માત્ર એક નજર માટે તમારી સામે આવે... અને પછી આખી જિંદગી મ...

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பூங்கா நட்புகள் By Ramakrishnan Anantha

அந்த நகரத்தின் ஒரு பகுதியில்.... காலை சூரியன் உதயமாக காத்துக்கொண்டு இருக்கும் பறவைகள்... அந்த பகுதியை தூய்மை செய்யும் பணியாளர்கள்... வீட்டிற்கு பால் போடும் பால்காரர்... வீட்டு வேலை...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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भिकारी ( भाग ४) By suchitra gaikwad Sadawarte

ओम ? इथे काय करतोयस तू ? ते ही एकटाच ? ओम थोडा गोंधळून गेला होता , कदाचित घाबरला ही होता . त्याला इतका अंदाज होता सुहा ताई इकडेच कुठेतरी लपून बसली आहे . हा आवाज त्याच्या पप्पाचा हो...

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A Miracle of Gods Faithfulness By Mary Kondeti

It was 26 January 2022, at the peak of the COVID-19 pandemic. I was attending the online Republic Day flag-hoisting ceremony conducted by our school. It was a quiet morning, but wi...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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शेवटचा संदेश By Anuja Dharane

सीता लहानपणापासूनच सुखवस्तू कुटुंबात वाढली होती.ती तिच्या आई-वडिलांची एकुलती एक मुलगी होती. आई, बाबा, आजी, आजोबा आणि घरातील प्रत्येक व्यक्ती तिच्यावर खूप प्रेम करायची. तिच्या घरात...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

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The Night of the Brahma Kamal By Deep Parekh

Kavya had walked for eleven days to reach Hemkund.Her grandmother used to say that the Brahma Kamal bloomed only once a year, only at night, and only for those patient enough to si...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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