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विभाजन - 5
by Ankush Shingade

विभाजन (कादंबरी) (5) महात्मा गांधी हे देशाचे प्रेरणास्थान होते. त्यांना वाटत होतं की हिंदू आणि मुसलमान यांनी एकत्र अधिवास करायला हवा. भावाभावासारखं राहायला हवं. देशाचे विभाजन करू नये. विभाजनाला ...

प्रतिदान
by Raja Singh

प्रतिदान राजा सिंह साहेब का ट्रान्सफर हो गया था, उनके चेहरे से प्रसन्नता निकल-निकल रही थी। शारीरिक भाषा बया कर रही थी कि वह कितने प्रसन्न है। वह अपने ...

अपने-अपने इन्द्रधनुष - 8
by Neerja Hemendra

अपने-अपने इन्द्रधनुष (8) मैं समझ चुकी थी कि विक्रान्त मुझसे निकटता बढ़ाने के लिए ही ऐसा करता है। अपनी पत्नी को तलाक दे चुका है, संपन्न घर का है, ...

सुरतिया - 3
by vandana A dubey

आप सोच रहे होंगे कि हम इतना सब क्यों बता रहे? अरे भाई! न बतायें, तो आप बाउजी को जान पायेंगे? नहीं न? तो चुपचाप पढ़िये उनके बारे में.  ...

छल
by Pavitra Agarwal

छल पवित्रा अग्रवाल "दीदी मेरी एक सहेली मुसीबत में है। असल में वह एक धोखे का शिकार हो गई है। आपसे कुछ सलाह-मशवरा करना चाहती है। आपसे बिना पूछे ...

ચાલ જીવી લઈએ - 15
by Dhaval Limbani

                               ? ચાલ જીવી લઈએ - ૧૫ ?                  ધવલ અને લખન આખરે પોતપોતાના ઘરે જાય છે. આખા દિવસમાં ધવલને બર્થ ડે ના ઘણા ફોન ...

सड़क पार की खिड़कियाँ - 3
by Nidhi agrawal

सड़क पार की खिड़कियाँ डॉ. निधि अग्रवाल (3) स्वर मासूम है। मैं अपने द्वंद से स्वयं ही आहत। सपने भी हमें रुला सकते हैं। आभासी दुनिया यथार्थ से अधिक ...

गूगल बॉय - 8
by Madhukant

गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत खण्ड - 8 सुबह-सुबह गूगल माँ के साथ उठ बैठा। माँ की आदत थी सुबह साढ़े चार बजे से पाँच के ...

પતિ: પરમેશ્વર ?
by આનંદ જી.

એ સમયની વાત છે કે જયારે ૧૨ થી ૧૬ વર્ષની ઉંમરમાં એ કાચી વયની અર્ધ-યુવતીના લગ્ન થઇ જાય. પતિ ઉંમરમાં ૧૦-૧૫ વર્ષ મોટો હોય એટલે આર્થિક રીતે સધ્ધર, દુનિયાથી ...

एनीमल फॉर्म - 10 - अंतिम भाग
by Suraj Prakash

एनीमल फॉर्म जॉर्ज ऑर्वेल अनुवाद: सूरज प्रकाश (10) वर्ष़ों बीत गए। मौसम आए और गए। अल्पजीवी पशु अपनी जीवन-लीला समाप्त कर गए। एक ऐसा भी वक्त आया जब क्लोवर, ...

जिंदगी मेरे घर आना - 11
by Rashmi Ravija

जिंदगी मेरे घर आना भाग – ११ सर ने क्या पढ़ाया कुछ भी नहीं गया दिमाग तक... बेल लगते ही... डेस्क फलांगती पहुँच गई, अपनी पसंदीदा जगह पर। केमिस्ट्री ...

इक समंदर मेरे अंदर - 13
by Madhu Arora

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (13) बादल एक दूसरे को धकियाते हुए तैरते से लगते थे और उनसे जब पानी बरसता था, तो लगता था मानो वे मोती ...

गवाक्ष - 31
by Pranava Bharti

गवाक्ष 31== डॉ. श्रेष्ठी एक ज़हीन, सच्चरित्र व संवेदनशील विद्वान थे। वे कोई व्यक्ति नहीं थे, अपने में पूर्ण संस्थान थे 'द कम्प्लीट ऑर्गेनाइज़ेशन !'उनका चरित्र शीतल मस्तिष्क व गर्म ...

गूंगा गाँव - 14 समाप्त
by रामगोपाल तिवारी (भावुक)

                          चौदह गूंगा गाँव 14      जनजीवन से जुड़ी कथायें ही भारत की सच्ची तस्वीर है।’ यह बात हमारे मन-मस्तिष्क में उठती रही है। किन्तु इस प्रश्न को हल ...

मुक्ति-धाम
by Nisha chandra

मुक्ति-धाम कहते हैं, एक बार मुक्ति ने भगवान से प्रार्थना करते हुए प्रश्न किया कि ‘ हे गोपाल! हे कृष्ण ! मैं सबको मुक्ति दिलाती हूँ, लेकिन मेरी मुक्ति ...

लहराता चाँद - 1
by Lata Tejeswar renuka

लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' लहराता चाँद, (उपन्यास) सिर दर्द से फटा जा रहा था। आँखें भारी-भारी -सी लग रही थी। वह उठने की कोशिश कर रही थी पर ...

क्या नाम दूँ ..! - 2
by Ajay Shree

गातांक से आगे.... क्या नाम दूँ ..! अजयश्री द्वितीय अध्याय सूरज आज भी अपने समय और जगह पर था, बस दिन बदल गया| पण्डित जटाशंकर मिश्र की टन-टन घंटी ...

उलझन - 4
by Amita Dubey

उलझन डॉ. अमिता दुबे चार अंशिका बहुत दुविधा में है। यह बात वह सौमित्र को बताये या न बताये। यदि वह सौमित्र को बताती है तो कहीं वह मैम ...

बात बस इतनी सी थी - 13
by Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 13. उस दिन मैं पिछले दिन की तरह चाय-नाश्ता और दोपहर या रात के खाने के मुद्दे में अपनी जिंदगी को उलझाना नहीं चाहता ...

પગરવ - 38
by Dr Riddhi Mehta

પગરવ પ્રકરણ – ૩૮ સુહાનીએ બે ત્રણ પેનડ્રાઈવ ખોલી તો અંદર કંઈ જ ડેટા નહોતો. એને કંઈ સમજાયું નહીં. પછી એણે બીજી બે પેનડ્રાઈવ લગાવી તો એમાં પણ પાસવર્ડ ...

યોગ-વિયોગ - 47
by Kaajal Oza Vaidya

યોગ-વિયોગ કાજલ ઓઝા વૈદ્ય પ્રકરણ -૪૭ ત્રણ દિવસ પછી વસુમાનો અવાજ સાંભળીને સૂર્યકાંતનું ગળું ભરાઈ આવ્યું. એ, ‘‘વસુ...’’થી આગળ કશું બોલી જ ના શક્યા. ‘‘શું વાત છે કાન્ત ? ...

फैसला
by Sudha Adesh

फैसला         शीशे जैसे नाजुक दिल पर व्यंग्य बाणों के पत्थर बरसेंगेे तो किरचें उडेंगी ही । किरचें जख्मों को जन्म न दें, ऐसा संभव ही नहीं ...

हसरतें
by Dr Shilpi Jha

हसरतें पूरे घर में कोलाहल था. घर की नई आमद को चारों ओर से घेरे सारा परिवार इकठ्ठा था. शीशम की फिनिश और वेलवेट के गद्दों वाले आठ कुर्सियों ...

गौरव
by rajendra shrivastava

कहानी-- गौरव                                                       ...

लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा - 1
by Jitendra Shivhare

लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा जितेन्द्र शिवहरे (1) धरम की गिनती असामाजिक तत्वों में होने लगी थी। परिवार वाले उसकी मारपीट और गुंडागर्दी से तंग आ आ गये। ...

विभाजन - 4
by Ankush Shingade

विभाजन (कादंबरी) (4) राष्ट्रीय सभेच्या १९१६ च्या लखनौ अधिवेशनात टिळकांनी परत राष्ट्रीय सभेतील मतभेद मिटवण्याचा प्रयत्न केला. याच वर्षी भारतीय राष्ट्रसभा व मुस्लिम लीग यांच्यात समेट घडून आला. असे ...

अपने-अपने इन्द्रधनुष - 7
by Neerja Hemendra

अपने-अपने इन्द्रधनुष (7) ’’ दीदी.......दीदी....’’ .सहसा पीछे से आवाज आयी। कोई मुझे ही पुकार रहा था। कौन....? पीछे पलट कर देखा तो महुआ थी। मैं रूक गयी। वह मुस्कराती ...

શિવાંશ
by Rajeshwari Deladia

ખુશ્બુ ખૂબ જ પ્રેમાળ અને સંસ્કારી દિકરી.સ્વભાવે જેટલી સારી એટલી જ દેખાવે સુંદર.પણ એને એનાં રૂપનું બિલકુલ પણ અભિમાન નહીં.ખુશ્બુને બાળકો એટલા વ્હાલા કે તે આજુબાજુ તમામ બાળકો જોડે ...

आखा तीज का ब्याह - 11
by Ankita Bhargava

आखा तीज का ब्याह (11) आखिर श्वेता के वापस जाने के दिन पास आ गए थे। उसने काकाजी को कमरे का किराया देने की कोशिश की तो उन्होंने पैसे ...

दास्तानगो - 3
by Priyamvad

दास्तानगो प्रियंवद ३ जब दरवाजे पर दस्तक हुयी शाम का धुंधलका शुरू हो गया था। द्घर इतना बड़ा और खुला हुआ था कि दरवाजे की दस्तक पत्तियों के गिरने ...

आपकी आराधना - 4
by Pushpendra Kumar Patel

अतीत के कुछ अनसुलझे रहस्य जो बदल देंगे आराधना की जिन्दगी...