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1926 की अमावस की वो खौफनाक रात By RAAHULL SHARMA

भाग 1: देवपुर रियासत

सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था।

चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...

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આનંદનગર. By Rupen Patel

આનંદનગર એ માત્ર ઈંટ-સિમેન્ટથી બનેલી ચાર દીવાલો કે ફ્લેટોનું સરનામું નથી, પણ “મિની ભારત”નું જ્વલંત ઉદાહરણ છે. અહીં હિન્દુ, મુસ્લિમ, જૈન, શીખ, પારસી અને ખ્રિસ્તી પરિવારો છે. ગુજરાતી,...

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નિર્ભયા. By Mansi Desai Shastri

આ કોઈ કાલ્પનિક કથા નથી. આ કોઈ કવિની કલ્પનામાંથી જન્મેલું અશ્રુ નથી. આ એ કડવી, ભયાનક અને કાળી વાસ્તવિકતાનું આલેખન છે, જેણે હિન્દુસ્તાનના ઇતિહાસના પાનાઓને હંમેશ માટે લોહીથી ખરડી દીધા...

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अधूरापन By Falguni Dost

समर्पित

उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं।

प्रस्तावना

यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...

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छठी मैया का आशीर्वाद. By Aloka Patel

गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था।

सुबह के पाँच बजे थे।

आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...

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Possessed by her ( An untold story ) By Sonam Brijwasi

शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर पर उतर रहा था। आसमान में हल्की बैंगनी छटा थी और हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी।शैलजा सिंह ऑटो स...

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अँधेरे वाला स्टेशन By Shahroz Aslam

रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...

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मेरी जिंदगी का सफर. By Ankit Khatri

बचपन की पहली यादें

कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी भूल नहीं पाते।

वे यादें किसी तस्वीर की तरह हमारे मन में टंगी रहती हैं। वक्त गुजरता जाता है, उम्र बढ़ती जाती है,...

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ত্রিশক্তি : তিনজগতের রহস্য By SHIB SANKAR MAITRA

শীতের ভোর। পরিষ্কার নীল আকাশ। মেঘমুক্ত। সূর্যদেব সবে ঘুম ভেঙে উঠেছেন। ছড়াতে শুরু করেছেন নিজের দৃষ্টি আর সেই সুন্দর, স্বাস্থ্যকর উজ্জ্বল দৃষ্টিতে একে একে কেটে যাচ্ছে প্রকৃতির প্রাচ...

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શહેરની હવામાં ખોવાયેલું ગામ. By Anghad

રાતના સાડા અગિયાર વાગ્યા હતા.

અમદાવાદની ઊંઘતી ન હોય એવી સડક પર કારની હેડલાઇટ્સ સતત આગળ વધતી હતી. બહાર વરસાદ વરસી રહ્યો હતો અને કાચ પર પડતાં પાણીનાં ટીપાં જાણે કોઈ જૂની યાદને ધોઈ...

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1926 की अमावस की वो खौफनाक रात By RAAHULL SHARMA

भाग 1: देवपुर रियासत

सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था।

चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...

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આનંદનગર. By Rupen Patel

આનંદનગર એ માત્ર ઈંટ-સિમેન્ટથી બનેલી ચાર દીવાલો કે ફ્લેટોનું સરનામું નથી, પણ “મિની ભારત”નું જ્વલંત ઉદાહરણ છે. અહીં હિન્દુ, મુસ્લિમ, જૈન, શીખ, પારસી અને ખ્રિસ્તી પરિવારો છે. ગુજરાતી,...

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નિર્ભયા. By Mansi Desai Shastri

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छठी मैया का आशीर्वाद. By Aloka Patel

गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था।

सुबह के पाँच बजे थे।

आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...

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शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर पर उतर रहा था। आसमान में हल्की बैंगनी छटा थी और हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी।शैलजा सिंह ऑटो स...

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अँधेरे वाला स्टेशन By Shahroz Aslam

रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...

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मेरी जिंदगी का सफर. By Ankit Khatri

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ত্রিশক্তি : তিনজগতের রহস্য By SHIB SANKAR MAITRA

শীতের ভোর। পরিষ্কার নীল আকাশ। মেঘমুক্ত। সূর্যদেব সবে ঘুম ভেঙে উঠেছেন। ছড়াতে শুরু করেছেন নিজের দৃষ্টি আর সেই সুন্দর, স্বাস্থ্যকর উজ্জ্বল দৃষ্টিতে একে একে কেটে যাচ্ছে প্রকৃতির প্রাচ...

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શહેરની હવામાં ખોવાયેલું ગામ. By Anghad

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અમદાવાદની ઊંઘતી ન હોય એવી સડક પર કારની હેડલાઇટ્સ સતત આગળ વધતી હતી. બહાર વરસાદ વરસી રહ્યો હતો અને કાચ પર પડતાં પાણીનાં ટીપાં જાણે કોઈ જૂની યાદને ધોઈ...

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