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હું જ મારી ભાગ્યવિધાતા 8-રાકેશ ઠક્કરસૂર્યોદય આઠમો અનન્યા માટે પતિના અવસ...
उधर हॉल में बैठे बैठे स्वास्तिक बार बार घड़ी को निहारने में लगा रहता है तभी कॉल...
होटल का conference hall – दोपहरConference hall में कई clients और board members ब...
आता कुठे निघाला आहेस तू.... अंशुल आवरून खाली आला तर शांताई ने त्याला विचारल...आत...
ભાગ ૩ — પપ્પાની અપેક્ષાઓમિહિરે વિચાર્યું હતું કે ઘરમાં વાતાવરણ હવે થોડું હળવું બ...
మనం అమ్మ కోసం సీసన్ 2 ఫస్ట్ లైఫ్ ఎపిసోడ్ 1 శ్రీను కాలేజీ లైఫ్ గురించి అలాగే ఫ్రె...
मिस्टर मनी - भाग १०मुखीच्या मृत्यूनंतर तब्बल एक वर्ष उलटून गेले होते. या एका वर...
সম্পর্কের সুতোজীবনে কিছু সম্পর্ক শুধু রক্তের বন্ধনে তৈরি হয় না। ভালোবাসা, বিশ্ব...
'The Mystery of Death' — अध्याय 3तो दोस्तों, पिछले चैप्टर में हमने देखा...
(১)৫০ বছর আগে স্থান: গ্রাদারা, ইতালি ...
मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। म...
तकनीकी दृष्टि से नाटकों से अधिक सक्षम माध्यम आज उपलब्ध हैं। महान वृत्तान्तों के साथ स्थानीय चटकीले रंग, संयोजन-विखण्डन, रडार छवि- संस्कृति, अतियथार्थता के बीच नाटकों का स्थान कहाँ...
(चौराहे का एक दृश्य । एक तरफ डुग्गी पीटने वाला डुग्गी पीटता हुआ प्रवेश करता है।) डुग्गीवाला- कल से इस पूरे षहर में कोई नशा नहीं करेगा.....कल से इस पूरे षहर में कोई भी आदमी नशा न...
सरकारी बंगले का लान। चार कुर्सियाँ लगी हैं बगल में एक छोटी मेज पर फोन रखा है। बातुल और नायकम बात कर रहे हैं। वे कमाण्डर तथा उनके साथियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।) बातुल- समय तो हो...
જો તમે પ્રેમમાં પડી જાઓ તો પછી શું કરો? તમારા પ્રિયપાત્રને તમારા જીવનમાં લાવવા તમે કઈ હદ સુધી જઈ શકો? આ બે સવાલનો જવાબ નવલકથામાંના ત્રણેય પાત્રો, શોધી રહ્યાં છે. કેદારને લાગે...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
आरा, बिहार। सुबह का समय था। मोहल्ले में कहीं भजन चल रहा था, कहीं दूधवाला आवाज़ लगा रहा था। सिंह राजपूत परिवार के बड़े घर में भी रोज़ की तरह हलचल शुरू हो चुकी थी। आँगन में दादी...
पण्डित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ यह नाम उनका अपना दिया हुआ था। स्कूल का नाम सुर्ज कुमार घर पर भी चलता था या नहीं इसे कौन बताए? घर गढ़ाकोला उन्नाव में, पिता पंडित राम सहाय तिवारी।...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
"Enough!!! You can't do anything in your life! You're shame for us! We should've never let you come in this world! You're nothing but a disgrace for us! Now lea...
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