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  • એક ષડયંત્ર.... - ભાગ 42

    (સિયાના મનમાં ગિલ્ટ થાય છે કે તે તેના મમ્મી પપ્પા અને ઘરના બધાથી વાત છુપાવી રહી...

  • स्वयंवधू - 8

    उसने मुझे पूल के अंत तक धकेल दिया।"बस वही कह जो मैं पूछा जाएँ!", वह अभद्र थी। उस...

  • एक तरफा प्यार... - 2

    क्योंकि अब तो मुझे भी ये लग रहा था की कुछ दिनों बाद कॉलेज बंद हो जाएगा सभी की छु...

  • શ્રી તુલસીકૃત રામાયણ - ભાગ 1

    વર્ણમાળાના વર્ણો, તેનાથી થતા શબ્દો, તેના અર્થો, અને એ અર્થોમાંથી ઉત્પન્ન થતાં અન...

  • हमे तुमसे मोहब्बत है

    1. हां मुझे इश्क़ है...सुनो...तुम समझोगे नहीं लेकिन,फिर भी बता दूं तुम्हे ,कि हा...

  • Shadow Of The Packs - 1

    इस कहानी की शुरुवात होती है एक घनी अंधेरी रात से, जहाँ एक आदमी बड़ी तेजी से जंगल...

  • डेविल सीईओ की मोहब्बत - भाग 5

    वही अरु और जानवी भी हिमानी की ऐसी हालत देख हसने लगती हैं और वही अरु कुछ देर तक ह...

  • સમી સાંજના સાથી...

    " મમ્મી ક્યાં છે ? ત્યાં નથી તો ક્યાં ગયા છે.?તમે લોકો આટલું ધ્યાન નથી રાખતા ? ત...

  • द सिक्स्थ सेंस... - 27

    सुहासी को रोते देख राजवीर को इतना बुरा फील हुआ कि भावनाओं में बहकर उसने सुहासी स...

  • શ્રાપિત પ્રેમ - 10

    આજે રવિવાર હતો એટલે રાધા પાસે કરવા માટે કંઈ વિશેષ ન હતું. બાકીના કામ કર્યા બાદ ત...

वंश. By Prabodh Kumar Govil

यह कहानी जो हम आपको सुनाने जा रहे हैं यह हमारी लिखी हुई नहीं है। ऐसी कहानियाँ कोई लिख भी नहीं सकता। ऐसी कहानियाँ तो 'जी’ जाती हैं और उन्हें रचते हैं उनके पात्र, उन्हें गढ़ता है...

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प्यार हुआ चुपके से By Kavita Verma

जबलपुर शहर की तूफानी अंधेरी रात में, एक लड़की खुद को बचाने के लिए हाथ में चाकू लिए बेतहाशा भागे जा रही थी क्योंकि कुछ लोग हाथों में बंदूक लिए उसका पीछा कर रहे थे। तेज़ बारिश में भा...

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नक़ल या अक्ल By Swati

शाम का समय है, सूरज डूबने के लिए तैयार प्रतीत हो रहा है, उत्तरप्रदेश के मालपुरा गॉंव में खेतों की मुँडेर पर किशन और सोमेश बैठे हैं । किशन तो आराम से ढलते सूरज की तरफ देख रहा है तो...

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પીછાસ્ત્ર - ધ સ્ટોરી ઓફ વિરપરી By Harshika Suthar Harshi True Living

એક પરી, જેનું નામ વિરપરી, 6000 વર્ષ પહેલાંની પૃથ્વીની મનોદશા દર્શન માટે આવી છે. પરીએ સુંદર ચમકતા વસ્ત્રો પહેર્યા છે અને મોહિની જેવા ગળામાં મોતીનો હાર પહેરેલો છે. આ સુંદર વીરપરીના હ...

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फादर्स डे By Praful Shah

सोमवार, 29/11/1999

पिनकोडः 412801, श्रीवाल, खंडाला, जिला सातारा, महाराष्ट्र।

करीबी रेल्वे स्टेशनः दौन्दाज, 23.6 किलोमीटर।

करीबी हवाई अड्डाः हडपसर, 40.5 किलोमीटर।

आबादीः...

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उन्हीं रास्तों से गुज़रते हुए By Neerja Hemendra

मुझे अपना यह नया उपन्यास " उन्हीं रास्तों से गुज़रते हुए " पाठकों को समर्पित करते हुए अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है। मेरे इस उपन्यास का कथ्य यद्यपि समकालीन न होते हुए अब से लग...

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द्वारावती By Vrajesh Shashikant Dave

उस क्षण जो उद्विग्न मन से भरे थे उस में एक था अरबी समुद्र, दूसरा था पिछली रात्रि का चन्द्र और तीसरा था एक युवक।

समुद्र इतना अशांत था कि वह अपने अस्तित्व को समाप्त कर देना चाहता...

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फ़ाइनल डिसीज़न By Pradeep Shrivastava

आज वह फिर नस्लवादी कॉमेंट की बर्छियों से घायल होकर घर लौटी है। वह रास्ते भर कार ड्राइव करती हुई सोचती रही कि आख़िर ऐसे कॅरियर पैसे का क्या फ़ायदा जो सम्मान सुख-चैन छीन ले। क्या मैं ग...

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फागुन के मौसम By शिखा श्रीवास्तव

राघव और तारा, बचपन के पक्के दोस्त जिनकी दोस्ती का आधार बनी गेम पार्लर में खेली जाने वाली वीडियो गेम्स जिसके वो दोनों ही दीवाने थे। बचपन बीता और खेल की जगह ली कैरियर के प्रति उनकी च...

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साँसत में काँटे By Pradeep Shrivastava

उसकी आँखों में भर आए आँसू उसके गालों पर गिरने ही वाले थे। आँसुओं से भरी उसकी आँखों में भीड़ और उनके हाथों में लहराते तिरंगे के अक्स दिखाई दे रहे थे। ज़ीरो डिग्री टेम्प्रेचर वाली कड़...

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वंश. By Prabodh Kumar Govil

यह कहानी जो हम आपको सुनाने जा रहे हैं यह हमारी लिखी हुई नहीं है। ऐसी कहानियाँ कोई लिख भी नहीं सकता। ऐसी कहानियाँ तो 'जी’ जाती हैं और उन्हें रचते हैं उनके पात्र, उन्हें गढ़ता है...

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जबलपुर शहर की तूफानी अंधेरी रात में, एक लड़की खुद को बचाने के लिए हाथ में चाकू लिए बेतहाशा भागे जा रही थी क्योंकि कुछ लोग हाथों में बंदूक लिए उसका पीछा कर रहे थे। तेज़ बारिश में भा...

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પીછાસ્ત્ર - ધ સ્ટોરી ઓફ વિરપરી By Harshika Suthar Harshi True Living

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फादर्स डे By Praful Shah

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पिनकोडः 412801, श्रीवाल, खंडाला, जिला सातारा, महाराष्ट्र।

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करीबी हवाई अड्डाः हडपसर, 40.5 किलोमीटर।

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उस क्षण जो उद्विग्न मन से भरे थे उस में एक था अरबी समुद्र, दूसरा था पिछली रात्रि का चन्द्र और तीसरा था एक युवक।

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फ़ाइनल डिसीज़न By Pradeep Shrivastava

आज वह फिर नस्लवादी कॉमेंट की बर्छियों से घायल होकर घर लौटी है। वह रास्ते भर कार ड्राइव करती हुई सोचती रही कि आख़िर ऐसे कॅरियर पैसे का क्या फ़ायदा जो सम्मान सुख-चैन छीन ले। क्या मैं ग...

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