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उम्मीद की आखिरी लकीर शहर के शोर से दूर, एक टूटी-फूटी झोंपड़ी में दादाजी रहते थे।...
यह कहानी थोड़ी रियल और थोड़ी काल्पनिक है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और कहानी प्...
वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी जब संडीला के नवाब हैदर अली ने अपने इकलौत...
अध्याय 10: स्वादिष्ट सांप का सूपउसी क्षण, काओ शिंग को अपने कान के पास ‘गुड़-गुड़...
अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूँ तो यक़ीन ही नहीं होता क...
एपिसोड 11: कोर्ट का फैसलापटना की सेंट्रल कोर्ट में हंगामा मचा था। बाहर सैकड़ों क...
घर में हल्की हल्की सजावट… दीवारों पर दीये, फूल और मेहंदी की खूशबू फैली हुई है। श...
शहर के किनारे एक विशाल अनाज का गोदाम था।दिन में वहाँ सन्नाटा पसरा रहता, पर रात...
मनोरमा देवी ने अब बीच का रास्ता चुनने का मन बना लिया था। वे एक मँझी हुई खिलाड़ी क...
घृताच्याः महाकाव्यम् (प्रथम सर्गः)मंगलाचरणम्या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मा...
आइस सील एज ओपन बीटा शुरू होता है “कुल्हाड़ी से काटना, बड़ा भाई मर गया!” “उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर कुछ मजदूरों ने उसे पैसे उधार लेने के कारण पीट-पीटकर मार डाला!” ज़ि...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंज...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
मलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली किरणें धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
मुंबई का ताज महल पैलेस होटल आज रात किसी सपने की तरह चमक रहा था। ग्रैंड बॉलरूम को इतना शानदार सजाया गया था कि लग रहा था कोई बॉलीवुड की बड़ी फिल्म की शूटिंग चल रही है। छत से लटके क्र...
मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी। मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। कोई ऑफिस के लिए भाग रहा था, कोई कॉलेज के लिए, तो कोई बस अपने सपनों के पीछे दौड़ रहा था। आर्...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
साल 1540 की एक ठंडी सुबह। अरावली की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला अपने विशाल द्वारों और मजबूत दीवारों के साथ एक नए इतिहास का साक्षी बनने वाला था। किले के भीतर हलचल थी,...
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