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अधूरी किताब – सीजन एपिसोड 31 : दो रास्तों का निर्णयमौन कक्ष की अंतिम दीवार पर पड...
मौत की किताब और अतीत का पन्नासाल 2026, रात के 9 बजे। दिल्ली की नेशनल लाइब्रेरी म...
राधे राधे! "मैं नहीं आई थी तुम्हारी ज़िंदगी में... वो तुम थे जो मेरे पास आए थे!...
हम सब दिन-रात इस तलाश में भाग रहे हैं कि कहीं से हमें थोड़ा सुख और मन का सुकून म...
श्रावण मास का महत्व श्राव...
-----------------रात के ग्यारह बज चुके थे। रायदित मैंशन का मास्टर बेडरूम हमेशा...
चौहान हवेली के बाहर स्कूल बस आकर रुकी। काजल हमेशा की तरह विवान को लेने बाहर आई।...
बर्बाद इश्कएपिसोड 18 — राणा से आमना-सामनामुंबई में समुद्र का किनारा सुबह के वक़्...
स्थान बुलाता हैशारदा के पुत्र तरूण के ससुर के हृदयघात से मृत्यु कासमाचार जब से आ...
जंगल के बीचों-बीच गोदाम दूर से जितना शांत दिखाई देता था, पास से उतना ही खतरनाक थ...
एक अनजाना ईमेल दिल्ली की ठंडी शाम थी। नवंबर की हल्की हवा खिड़की से कमरे में आ रही थी। बाहर सड़क पर गाड़ियों का शोर था, लेकिन आरव की दुनिया उस छोटे-से कमरे और उसके लैपटॉप तक सीमि...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
देवक़ेड़ा का रहस्य छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
आज सुबह से ही आकाश में बादल छाए हुए थे, बस बरसात आने की देर थी। मां ने बोला इसलिए वह अपना सारा कामकाज छोड़कर छत पे सुखाए सारे कपड़े एक एक करके उतार रही थी। तभी मां ने आवाज लगाई, &...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
प्यार खेल नहीं एपिसोड 1 — वह रात जब सब कुछ बिखर गया मुंबई। एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं। यहाँ दिन में भी भीड़ होती है और रात में भी। यहाँ की सड़कें कभी खाली नहीं होतीं, यहाँ की...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके बीच से एक सँकरा कच्चा मार्ग निकल रहा था। उसी मार्ग के किनारे एक बड़...
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