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तकरीबन कुछ दो घंटे बाद घर की डोरबैल बजी जिससे त्रिशा की आंख खुली और बिस्तर से उठ...
रात 2 बजे तक पढ़ रही हो? आंखें लाल, कॉफी का कप हाथ में?रुक जाओ दी। ये टॉपर वाली...
"जो तुमने क्या है मिस आर्या इसका हर्जाना तुम्हे भुगतना पड़ेगा..." कहते हुए वह अ...
महाराणा प्रताप सिंह : बाल्यकाल व युवावस्था(1572-1597 ईसवी)बाल्यकाल एवं यौवनसांगा...
एक छोटी-सी गुज़ारिश...अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है जिससे बात बंद है, तो...
(तेज़, धड़कते हुए दिल की आवाज़। रात की खामोशी और खिड़की के बाहर से आती हुई अजीब...
परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन...
अध्याय 1: कलाई पर ठहरती कशमकश1.1 धुंध और धड़कनेंसुबह के ठीक पाँच बजे थे। उत्तर भ...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 5 : सफेद आँखों वाला आदमीबंगले की टूटी हुई खिड़की के ब...
अध्याय 11: पाठक का दरवाज़ाआर्या जैसे ही आगे बढ़ी, उसके सामने फैला अनगिनत रास्तों...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
(बैकग्राउंड में हल्की बारिश की आवाज़, धीरे-धीरे एक उदास पियानो म्यूजिक शुरू होता है) नरेटर (गहरी और शांत आवाज़): "इंसान की ज़िंदगी में कुछ लम्हे ऐसे आते हैं, जहाँ वो हार मान लेता...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
अध्याय 1: वीरान हवेली की पहली आहट पहाड़ों के बीच बसी वह जगह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही डरावनी भी। दूर-दूर तक फैली घनी चीड़ की जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—नीलगिरी हवेली। द...
उत्तर प्रदेश की वो सर्द रात और दिल में सुलगती नफरत... इकबाल राज के लिए अब अपना कहने को कुछ भी नहीं बचा था। सगी पत्नी के धोखे ने उसे रातों-रात बेघर और 'लावारिस' कर दिया। शहर...
रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों। एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...
धनबाद शहर , जहां के सड़को पर अशोक और राजबीर एक building से बाहर भागते हूए दिखता है । दोनो बाप बेटा शहर मे लड़कियों की smuggling और ड्रग्स का धंधा करता है , पर रुद्रा और एंथोनी जो अ...
त के ठीक 12 बजे…सड़क सुनसान थी… हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी… रिद्धि सिंह अपनी scooty पर घर लौट रही थी। हेलमेट के अंदर उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, जैसे उसे खुद नहीं पता कि वो...
बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार दादीअम्मा...
अजीब दास्तान है, मेरी, चाहता था, क्या बनना और किस्मत किस मोड़ पर ले आयी, उन दिनों, मै जोधपुर विश्व विद्यालय में बी एस सी में पढ़ रहा था। यह बात है, वर्ष 1969 की...
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