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Part 1രാവിലെ ഇളം സൂര്യപ്രകാശം മുറ്റത്താകെ സ്വർണനിറം വിതറിയിരുന്നു.മുറ്റത്തിന്റെ...
सिया को रातें हमेशा से पसंद थीं।दिन की भीड़, लोगों की आवाज़ें और शहर की भागदौड़...
अध्याय - 10गायत्री और मानस के बीच एक बार फिर प्यार का नया पुल बंध गया था। 'स...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे क...
उस दौर के बच्चे थे कुछ पीढ़ियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें इतिहास किताबों में पढ़ता ह...
इथन सोच में डूबा था उसने खुद गोदाम में कुबूल किया था कि 'रेड डैगर्स' को...
सूना गलियारा और वह पुरानी हवेलीसूरज डूब चुका था और आसमान पर काले बादलों ने ऐसा प...
निषादपर्व भाग २ पांथस्थाना अडवून, लुटमार करून उदरनिर्वाह करणाऱ्या दस्यूंबद...
लखनऊ की उस तेज़ दोपहर की धूप में भी आरव को अपने भीतर एक भयानक बर्फ़ीला सन्नाटा म...
सात फेरों की रस्म पूरी हो चुकी थी।अग्नि को साक्षी मानकर रुद्रांश राठौर और अन्विक...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
ఉషోదయాన భానుడి లేలేత కిరణాలు పడుతూ ఉండగా పొగ మంచు మెల్లమెల్లగా తెరతీస్తూ ఉంటే చుట్టూ మొక్కలు, చెట్లు కనిపించగా బస్సులో కిటికీ అద్దాలను కాస్త వెనక్కి జరిపి ఆ చుట్టూ ఉన్న పచ్చదనాన్...
अनंत के उस पार पति की रहस्यमयी मृत्यु के बाद मीरा नीलगढ़ लौटती है, लेकिन वहाँ उसे बदलती तस्वीरें, रहस्यमयी डायरी और ऐसे संकेत मिलते हैं जो उसकी पूरी पहचान पर सवाल खड़े कर देते ह...
ત્રીસ વરસની ઉંમર કેટલા વરસો પહેલા પસાર થઈ ગઈ એ યાદ કરવાનો પણ જેને ત્રાસ વરતાય એવા કોઈ કુંવારા યુવાનને આપ કદી મળ્યા છો? એની તકલીફ સમજવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે? આ નવલકથામાં આપનો...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಸೆಂಟ್ರಲ್ ಮ್ಯೂಸಿಯಂನ ಆ ಹಳೆಯ ಕಲ್ಲಿನ ಕಟ್ಟಡವು ರಾತ್ರಿಯ ಹೊತ್ತು ಒಂದು ಬೃಹತ್ ಸಮಾಧಿಯಂತೆ ಕಾಣುತ್ತಿತ್ತು. ಹೊರಗೆ ಮಳೆ ಬಿಡುವಿಲ್ಲದೆ ಸುರಿಯುತ್ತಿತ್ತು, ಮಿಂಚಿನ ಹೊಡೆತಕ್ಕೆ ಮ್ಯೂಸಿಯಂನ ಕಿಟಕಿಗಳು ಆಗಾಗ...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
આજના જમાનામાં લોકો હજારો અને કરોડો રૂપિયા કમાઈ લે છે, ધારે એવી મોટી ડીગ્રી, પદવી, ભૌતિક સુખ સગવડો આ તમામ વસ્તુઓ મેળવવામાં સફળ થાય છે. પરંતુ, તેમ છતાં માનસિક રીતે સુખી હોતા નથી. પોત...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके बीच से एक सँकरा कच्चा मार्ग निकल रहा था। उसी मार्ग के किनारे एक बड़...
अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...
रात्र... मुंबईच्या चमचमणाऱ्या दिव्यांपासून दूर... एक असा रस्ता होता, जिथे फक्त काळोखाचं राज्य होतं. आकाशात काळे ढग जमा झाले होते. पावसाचे छोटे छोटे थेंब काळ्या रस्त्याव...
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