Best children stories in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

चॉकलेट
by SAMIR GANGULY

चॉकलेट की मांग पूरी न होने पर नन्हें गोपू को बड़ा गुस्सा आता और वह अपना पेट फुलाकर गर्दन झटककर कहता-देखना एक दिन चुपके से जंगल में चला जाऊंगा.उसकी बात ...

બસ્સો ગ્રામ ચીઝ
by સંદિપ જોષી સહજ
  • 170

                               બસ્સો ગ્રામ ચીઝ             રીના આજે તેની દીકરી કવિતા માટે ભાવતી વાનગી બનાવી રહી છે ખાસ કવિતા ની ફરમાઈશ પર. રસોઈ માં વ્યસ્ત રીના ને અચાનક યાદ આવ્યું કે ...

राजकुमार ध्रुवल - भाग १
by vidya,s world
  • 384

राजा सूर्यभान दयाळू व न्यायप्रिय राजा होता.राजाची राणी चंद्रप्रभा ही सदगुणी होती...राजा ला एक पुत्र होता आर्यविर..आर्याविर ही वडीलांसारखाच ..दयाळू व न्याय प्रिय होता..सर्व गुणान मध्ये निपुण होता.. आर्य ...

एक शेर चाहिए
by SAMIR GANGULY
  • 135

जब पापा की लाडली शिशु का जन्मदिन नजदीक आने लगा तो पापा ने एक दिन उससे पूछा, ‘‘बेटे, जन्मदिन पर तुम्हें क्या चीज चाहिए.’’नटखट शिशु ने आंखें गोल-गोल करके कहा, ‘‘एक ...

ज़ेब्रा क्रासिंग
by Sandeep Shrivastava
  • 90

"रघुवन में दोपहर का समय था| झबरु ज़ेब्रा झाडिओं के बीच मजे से हरी हरी घास चर रहा था | टोनू तोता उसकी पीठ पे बैठा, अपनी चोंच से ...

पोस्टर पेस्टर
by SAMIR GANGULY
  • 183

 एक थर्राती आवाज गूंजी थी, ‘‘ अबे नीचे उतर.’’   अकबर ने पीछे मुड़ कर देखा. एकाएक यकीन न हुआ. पोस्टर का राक्षस सामनेसाक्षात खड़ा था.अकबर के थर-थर कांपने से सीढ़ी डगमगाने लगी थी और  हथेली से ...

कर्मफल
by Asha Saraswat
  • 498

       खेत में गेहूं काटने का समय था ।प्रतिदिन खेतों में किसान गेहूं काटते और इकट्ठे करके खेत में ही रख दिया करते ।जब खेत में गेहूं पड़े ...

शाकाहारी शेर
by Sandeep Shrivastava
  • 345

रघुवन के शेर, शेरसिंह का आजकल हाल बहुत बुरा था| एक तो बढ़ती आयु के कारण पहले जैसी चुस्ती फुर्ती नहीं रही, दूसरे एक दिन शिकार करते हुए उसके ...

नमक का क़र्ज़
by Sandeep Shrivastava
  • 255

रघुवन में नदी किनारे दो पदयात्री,अपना भोजन करने के लिए बैठे थे| उनके पास भोजन से भरा हुआ एक डिब्बा था| जैसे ही उनमें से एक ने वो डिब्बा ...

સત્યની જીત
by DIPAK CHITNIS
  • 1k

 ​ -સત્યની જીત- એક ગામમાં મંગલ નામનો એક સરળ અને ગરીબ છોકરો રહેતો હતો. તે દિવસભર જંગલમાં સુકા લાકડા કાપતો, અને સાંજે તેનો ભારો બાંધી બજારમાં જતો હતો. લાકડા વેચતાં તેને મળેલા પૈસામાંથી ...

शुभि (10) अंतिम भाग
by Asha Saraswat
  • 315

शुभि  अंतिम भाग            प्रार्थना में प्रधानाध्यापक जी ने बताया कि आज से तीन दिन का स्काउट शिविर लगेगा, जिन बच्चों के नाम बोले जा रहे ...

अन्तरिक्ष में पाखी
by RACHNA ROY
  • 789

पाखी एक बड़ी ही प्यारी सी चंचल लड़की थी। अपने मम्मी पापा की सबसे प्यारी बेटी। इकलौती संतान थी पर कभी कोई नखरे नहीं थे पाखी के। अपने ही ...

मीठे अंगूर - खट्टे अंगूर
by Sandeep Shrivastava
  • 498

रघुवन की छोटी पहाड़ी पर जो फूलों की बगिया है, उस पर पेड़ोंपर अंगूर के रसीले गुच्छे लगे हुए थे।अंगूर खाने के लालच में उधर कई जानवरों का आना ...

બાળ બોધકથાઓ - 2 - સાયકલ
by Yuvrajsinh jadeja
  • 1.6k

                                સાયકલ  ઉલ્લાસ પુર ગામમાં રહેતા એક નાનકડા પરિવારની આ વાત છે . પંખીના ...

मित्रता का कर्त्तव्य
by Sandeep Shrivastava
  • 681

रघुवन के दो बंदर, सोनू और मोनू बहुत अच्छे मित्र थे | दोनों हमेशा साथ साथ रहते थे| उनका खाना पीना, घूमना फिरना, सोना जागना सब साथ में ही ...

शुभि (9)
by Asha Saraswat
  • 453

        शुभि (9)       आज शुभि का मन बहुत ख़राब था ,पढ़ाई में भी उसका बिलकुल मन नहीं लगा ।बार-बार उसकी ऑंखें ऑंसुओं से गीली ...

मटियाली बकरी के दढ़ियल चाचा
by SAMIR GANGULY
  • 369

झाड़-जंगल में रहने वाली मटियाली बकरी को पत्थर-पहाड़ पर रहने वाले उसके दढ़ियल चाचा ने एक बार एक शीशी शैम्पू भिजवाई और भिजवाई एक चिट्‍ठी. चिट्‍ठी में लिखा था-खुश ...

दानी की कहानी - 4 - मूल से प्यारा ब्याज़
by Pranava Bharti
  • 504

दानी की कहानी(मूल से प्यारा ब्याज़ ) --------------------------------     समय के गुजरने के साथ दानी हमें तो और भी सचेत लगती हैं | मम्मी कहती हैं ; "हमने ...

खास हलवा
by SAMIR GANGULY
  • 420

 एक थी लड़की, नाम था सोना. एक दिन जब उसका जन्मदिन आया तो वह मां के पास आकर बोली, ‘‘ मां-मां मैं हलवा खाऊंगी.’’वैसे तो वे गरीब लोग थे और हलवा-पूरी ...

सोहबत
by padma sharma
  • 330

सोहबत पिताजी की आवाज नीरवता को भंग करती चली गई। वे जोर से चिल्ला रहे थे-"क्या कहा, तू आगे नहीं पढ़ेगा ? पढ़ेगा नहीं तो और क्या करेगा? तू ...

जुर्रत
by padma sharma
  • 321

जुर्रत कोठी कैम्पस का सन्नाटा बच्चों के शोरगुल से टूट गया। सारे बच्चे मजे करने के लिए कोठी की चहारदीवारी फांद के भीतर जा पहुँचे थेबच्चों की छुट्टियों के ...

मोर पंख
by Sandeep Shrivastava
  • 621

 रघुवन के मेरु मोर को जबसे पता चला है कि वो भारत देश का राष्ट्रीय पक्षी है तब से उसके स्वभाव की अकड़न कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी।हर ...

शुभि (8)
by Asha Saraswat
  • 498

    शुभि (8)        दादी जी..दादी जी..बाहर से आवाज़ आ रही थी शुभि ने बाहर जाकर देखा तो सुभाष भैया दरवाज़े पर खड़े थे ।भैया के ...

तहजीब
by padma sharma
  • 477

तहजीब शहर के प्रसिद्ध सिनेमा हॉल के सामने भीड़ जमा थी। सम्पूर्ण देशवासियों के प्रतीक के रूप में हर वर्ग, हर पेशे तथा हर धर्म के लोग यहाँ उपस्थित ...

भ्रम का भूत
by Asha Saraswat
  • 612

          भ्रम का भूत     सीमा का घर गली के अंत में था। जब कभी भी बिजली गुल हो जाती तो घर में बहुत गर्मी ...

भगवान की लाठी
by Sandeep Shrivastava
  • 645

“भगवान की लाठी “रघुवन में कीटु लकड़बग्घा की धृष्टता प्रतिदिन बढ़ती जा रहीं थीं। धृष्टता क्या, सच कहें तो अपराध बढ़ते जा रहे थे। दूसरों को हानि पहुंचा कर ...

जीवन का मूलमंत्र
by padma sharma
  • 441

जीवन का मूलमंत्र "ट्यूशन की फीस तो इतनी लेते हैं लेकिन स्कूल की तरह यहाँ भी न तो पूरा कोर्स कराते, न हरेक को ठीक से समझाते हैं।" गुंजन ...

બાળ બોધકથાઓ - 1
by Yuvrajsinh jadeja
  • 2.7k

                     નાનપણથી નાની નાની બોધવાર્તાઓ ખૂબ ગમતી . પછી ભલે એ પંચતંત્રની વાર્તાઓ હોય કે અકબર બીરબલની વાર્તાઓ . કે ...

હિંમતવાન બાળકો
by DIPAK CHITNIS
  • 1.3k

હિંમતવાન બાળકોDIPAK CHITNIS (dchitnis3@gmail.com) …………………………………………………………………………………………………….. ઘણાં સમય પહેલાની વાત છે. એક મોટું અને ગીચતા ધરાવતું જંગલ હતું. ગીચતા એટલી હતી કે, તેમાંથી દિવસે પસાર થવું હોય તો પણ ભય લાગે. એટલે જ આ ગીચતાથી ભરેલા ભરચક જંગલને ચોર-

भालू का अपहरण
by Sandeep Shrivastava
  • 519

रघुवन का भोलू भालू शिकारियों के जाल में फंस चुका था| जैसे ही शिकारियों के लगाए हुए जाल पर उसने पैर  रखा एक शिकारी ने अपनी बन्दुक से रंग ...