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गतांक से आगे...केस नंबर-2 फर्जी शेयर ट्रेडिंग से 94 लाख की साइबर ठगी-छग राज्य के...
मैं मायके जा रही हुं '️"'बिजली ' कहां जा रही हो इस समय इतनी तैयार ह...
सुबह हो चुकी थी…खिड़की से आती धूप कमरे में फैलरही थी…लेकिन उस रोशनी में भी एक अज...
வீரா & குழல்“குழந்தையைப் பெறுவது மட்டும் தாய்மையல்லஸ ஒரு குழந்தையை அன்போடு ஏற்று...
सुबह की हल्की धूप खिडकी से कमरे के अंदर आ रही थी.अंजलि रातभर ठीक से सो नहीं पाई...
झपाटलेला वाडा - भाग 1: पहिली रात्रआर्यन जेव्हा आरशात बघायचा तेव्हा त्याला लेखक न...
ભાગ ૪૮: લગ્નની શરણાઈઓ મેડિકલ કોલેજમાંથી ગ્રેજ્યુએટ થયાને બે મહિના વીતી ચૂક્યા હત...
#નિર્ભયા ભાગ. 5. નિર્ભયા' નામ અને ઇન્ડિયા ગેટની ક્રાંતિજ્યારે કોઈ રાષ્ટ્ર પો...
श्मशान घाट पर भीड़ लगी थी। मलखान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अर्थी से मलखान...
Episode 11બસ સ્ટેન્ડ પર ઊભા રહીને બસની રાહ જોતી વખતે, જાનવીના ભાઈની નજર થોડે દૂર...
यह कहानी है एक ऐसे लड़के की जो रहस्यम्यी में शक्तियों के साथ पैदा हुआ सन् 2002 सर्दियों का मौसम नवंबर महीना 11 तारीख सुबह सूर्य की किरण के साथ 10:30 बजे भारत की राजधानी दिल्ली के ए...
યજ્ઞેશ પોતાની ચેમ્બરમાં બેઠો હતો. ત્યાં જ ડોર ખોલીને એક સુંદરી અંદર પ્રવેશ કરે છે. તમે ચિંતા ન કરશો બધુ જ ઠીક થઈ જશે, આપણો સમય અત્યારે ખુબ જ ખરાબ છે તે હું જાણું છું પણ એક દિવસ આપ...
কলমে : রায়হানা ইয়াসমিন রায় কলেজের করিডোর দিয়ে দ্রুত পায়ে হেঁটে যাচ্ছে মেহুল। হাতে ফিজিক্সের মোটা বই,পরনে সাধারণ সুতির সালোয়ার কামিজ। মেহুল ধবধবে ফর্সা নয় কিন্তু ওর মুখে...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
वर्ष 4999 की बाद है, जब मानवता ने अपनी मानवता खो चुका था और मॉडर्न टेक्नोलॉजी की ताकत की नशे में चूर इंसानों ने खुद को भगवान से कमतर नही आक रहे थे और तभी इंसानों की हाथ लगा एक रहस्...
जशी आपल्या पृथ्वीवर जैव विविधता आहे तशी कुठेतरी, कोणत्यातरी आकाशगंगेत, कुठल्यातरी ग्रहावर नक्कीच सजीव असतील. कदाचित ते आपल्यापेक्षा जास्त प्रगत असतील. त्यांनी आपल्या ग्रहाची पूर्ण...
कही से भी शुरू कर लीजिये आप को समझ पड़ जायेगी। ये कोई भी नकल के आधारत नहीं है, मै जिम्मेदारी लेता हुँ कि ये उपन्यास कुछ हट के है, जज्बात और भाबुक से बढ़ के कुछ जो रब करता है, हम हमेश...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
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