एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर

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रात के ढाई बज रहे थे। कमरे में एकमात्र उजाला राघवन के लैपटॉप की स्क्रीन से आ रहा था, जिसकी ठंडी नीली रोशनी उसके चेहरे पर एक अजीब सा पीलापन और थकान उकेर रही थी। स्क्रीन पर कर्सर एकटक झपकी ले रहा था, मानो उसे भी कोई सुध न हो कि क्या टाइप करना है। बगल में रखी कॉफी का कप अब पूरी तरह ठंडा हो चुका था, जिसकी सतह पर जमी मलाई की परत आधुनिक महानगर की उस स्थिर ठहराव की गवाही दे रही थी, जिसमें गति तो बहुत थी, पर जीवन का वेग गायब था।

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 1

रात के ढाई बज रहे थे। कमरे में एकमात्र उजाला राघवन के लैपटॉप की स्क्रीन से आ रहा था, ठंडी नीली रोशनी उसके चेहरे पर एक अजीब सा पीलापन और थकान उकेर रही थी। स्क्रीन पर कर्सर एकटक झपकी ले रहा था, मानो उसे भी कोई सुध न हो कि क्या टाइप करना है। बगल में रखी कॉफी का कप अब पूरी तरह ठंडा हो चुका था, जिसकी सतह पर जमी मलाई की परत आधुनिक महानगर की उस स्थिर ठहराव की गवाही दे रही थी, जिसमें गति तो बहुत थी, पर जीवन का वेग गायब था।राघवन ने अपनी उंगलियों ...Read More

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 2

सुबह की पहली किरण जब खिड़की के उन मोटे पर्दों को चीरती हुई कमरे के भीतर दाखिल हुई, तो किसी स्वागत का संदेश देने के बजाय केवल इस बात की गवाही दी कि एक और लंबा, उलझनों से भरा दिन शुरू हो चुका है। राघवन की आँखें खुली थीं। वह पिछले कई घंटों से छत पर बने सीलिंग फैन के परों को घूमते हुए देख रहा था। उसके बगल में, बिस्तर के दूसरे हिस्से पर मीरा गहरी नींद में सो रही थी। उसके बिखरे हुए बाल और चेहरे पर छाई एक अनाम सी शांति इस बात का अहसास करा ...Read More

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 3

शहर की रफ्तार अपनी नियमित गति से आगे बढ़ रही थी, लेकिन राघवन और मीरा के जीवन में समय एक अनचाहे ठहराव पर आकर थम गया था। पिछले अध्याय की उस रात के बाद, दोनों के बीच की दूरियां अब केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी एक नए मुहाने पर आ खड़ी हुई थीं। आधुनिक महानगर की यह विडंबना ही है कि यहाँ इंसान के पास सब कुछ होने के बावजूद अपनों के लिए एक अदृश्य दीवार होती है, जिसे लांघने के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।दोपहर की ढलती धूप राघवन के उस ...Read More

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 4

कमरे में गूंजती हुई उस घंटी की आवाज़ ने जैसे किसी सोए हुए बवंडर को अचानक जगा दिया था। आवाज़ सिर्फ एक दरवाजे की दस्तक नहीं थी, बल्कि उस अदृश्य तलवार की तरह थी जो किसी भी वक्त एक्स्ट्रा-मेरिटल अफेयर के इस नाजुक और वर्जित ताने-बाने को चीरकर रख सकती थी। राघवन का दिल एक पल के लिए जैसे अपनी जगह से छिटक कर हलक में आ गया था। उसके हाथ में दबी सिगरेट की राख बिस्तर की सफेद चादर पर बिखर गई, और उसके चेहरे का रंग फीका पड़ गया।दूसरी तरफ, मीरा, जो कुछ पल पहले तक अपनी ...Read More

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 5

शालिनी के बेडरूम का दरवाजा बंद होने की आवाज़ राघवन के लिए किसी गिलोटीन की तरह थी, जो उसके संसार को दो हिस्सों में बांट चुकी थी। उस बंद दरवाजे के पीछे का सन्नाटा किसी भी शोर से ज्यादा डरावना था। लिविंग रूम में राघवन खड़ा था, उसका शरीर जड़वत हो चुका था, और दिमाग में विचारों का एक ऐसा बवंडर था जिसने उसे पूरी तरह बेबस कर दिया था। उसने मीरा को बाहर जाते देखा था, उसे रोकने का खयाल उसके मन में आया था, लेकिन उसके हाथ कांप रहे थे। यह सिर्फ डर नहीं था, यह उस ...Read More

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 6

सुबह की पहली धुंध जब खिड़की के शीशों पर जमी, तो राघवन ने उसे एक धुंधले धुएं की तरह जो उसकी अपनी जिंदगी की हकीकत थी। पिछले रात के उस फोन कॉल और उस अजीब सी खामोशी के बाद, जो शालिनी और उसके बीच में एक दीवार बनकर खड़ी थी, राघवन ने अपने वजूद का एक बड़ा हिस्सा खो दिया था। वह अब उस 'मैनेजमेंट वाली शादी' का हिस्सा था, जहाँ प्यार की जगह सिर्फ एक ठंडी, पेशेवर समझदारी ने ले ली थी। आधुनिक महानगर की यही त्रासदी है—हम यहाँ बड़ी-बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स तो मैनेज कर लेते हैं, ...Read More

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 7

बावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके बरसे रेबावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके रेआधे से अधूरे से बिन तेरे हम हुएफीका लगे है मुझको सारा जहाँबावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके बरसे रेयह कैसी खुशी हैजो मोम सी हैआँखों के रास्ते हँसके पिघलने लगीमन्नत के धागे ऐसे हैं बाँधेटूटे ना रिश्ता जुड़के तुझसे कभीटूटे ना रिश्ता जुड़के तुझसे कभीसौ बालाए ले गया तू सर से रेनैना ये मल्हार बनके बरसे रेमैं काग़ज़ की कश्ती तू बारिश का पानीऐसा है तुझसे अब ये रिश्ता मेरातू है तो मैं हूँ तू आए ...Read More