kuchh dur talak by Niyati Kapadia in Hindi Poems PDF

कुछ दूर तलक

by Niyati Kapadia Matrubharti Verified in Hindi Poems

कुछ दूर तलक आज यूं ही निकल पड़ी थीथोड़ी देर बाद में रुकीपिंछे मुड़कर देखा तो,वहां कोई नहीं था।कोई भी नहीं।कहा चले गए वो सब लोग?जिन्हे में जानती थीयहां तो कोई भी नहीं है!में थोड़ी देर और रुकी रहीशायद ...Read More