और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा )

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Poems

और ख़ामोशीबोल पड़ी(पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------ ख़ामोशीमनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर मन में है ,कभी उससे बात करके देखें तब कैसे ...Read More