Gavaksh - 45 by Pranava Bharti in Hindi Social Stories PDF

गवाक्ष - 45

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

गवाक्ष 45== वह एक सामान्य मनुष्य की भाँति चल रहा था। प्रोफ़ेसर व भक्ति प्रश्नचिन्ह बने एक-दूसरे की ओर अपलक निहारने लगे । कुछ पल पश्चात वह शिथिल चरणों से लौट आया । "बहुत गंभीर लग रहे हो ?" ...Read More