janjeevan - 11 by Rajesh Maheshwari in Hindi Poems PDF

जनजीवन - 11

by Rajesh Maheshwari Matrubharti Verified in Hindi Poems

जीवन का क्रम मेघाच्छादित नील-गगन गरजते मेघ और तड़कती विद्युत भी आकाश के अस्तित्व और अस्मिता को नष्ट नहीं कर पाते, वायु का प्रवाह छिन्न-भिन्न कर देता है मेघों को, आकाश वहीं रहता है लुप्त हो जाते हैं ...Read More