Novel Episodes Books in Gujarati, hindi, marathi and english language read and download PDF for free

    भदूकड़ा - 2
    by vandana A dubey Verified icon
    • (3)
    • 65

    उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे की कहानी है ये. कस्बा छोटा, लेकिन रुतबे वाला था. और उससे भी अधिक रुतबे वाले थे वहां के तहसीलदार साब - ...

    चिंटु - 27
    by V Dhruva Verified icon
    • (7)
    • 103

    चिंटू 27 सुबह से आसमान मै बूंदाबूंदी शुरू हो गई थी। पुनिश का माथा ठनक रहा था। इस वक्त वह पुलिस थाने में इंस्पेक्टर राजीव के साथ बैठा हुआ ...

    रिश्ते - ज़रूरत या ईश्वरीय देन (भाग-२)
    by A A Rajput
    • (1)
    • 27

    हमने भाग-१ में देखा कि रिश्तों का जन्म कैसे हुआ और किन परिस्थितियों में हुआ?अब हम रिश्तों के अलग आयाम को देखने का प्रयास करेंगे।आज कल के रिश्ते बस ...

    भदूकड़ा - 1
    by vandana A dubey Verified icon
    • (10)
    • 116

      जिज्जी….. हमें अपने पास बुला लो…” बस ये एक वाक्य कहते-कहते ही कुंती की आवाज़ भर्रा गयी थी. और इस भर्राई आवाज़ ने सुमित्रा जी को विचलित कर ...

    सत्या - 18
    by KAMAL KANT LAL
    • (2)
    • 65

    सत्या 18 देशी शराब के ठेके के बाहर औरतों की भीड़ खड़ी शोर कर रही थी. अधिकांश के हाथों में लाठियाँ थीं, जिसे वे बार-बार ज़मीन पर पटक कर ...

    निश्छल आत्मा की प्रेम पिपासा - 6
    by Anandvardhan Ojha
    • (3)
    • 74

    [निष्कम्प दीपक जलता रहा रात भर.... ] दूसरे दिन का दफ्तर का वक़्त मुश्किल से कटा। इतने-इतने प्रश्न, शंकाएं, जिज्ञासाएँ कि बस, राम कहिये ! मैं लगातार यही सोचता ...

    सुनो आएशा - 4
    by Junaid Chaudhary Verified icon
    • (6)
    • 70

    आयशा ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।मेरे रिंग पहनाते ही उसने खुशी से मुझे हग कर लिया।।उसका यूं हग करना मेरे लिए सरप्राइज था।।उसका फूल सा जिस्म कुछ देर ...

    निश्छल आत्मा की प्रेम पिपासा - 5
    by Anandvardhan Ojha
    • (4)
    • 92

    ['यह रूहों की सैरगाह है...!'] दो वर्षों के कानपुर प्रवास के वे दिन मौज-मस्ती से भरे दिन थे। दिन-भर दफ्तर और शाम की मटरगश्तियां, यारबाशियाँ। कुछ दिनों बाद मैंने ...

    चिंटु - 26
    by V Dhruva Verified icon
    • (14)
    • 235

    बेला दरवाजे पर खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी। फिर वह धीरे से रूम का दरवाजा बंद करती है जहां चिंटू और सुमति आराम से सो रहे थे। पर उस ...

    सत्या - 17
    by KAMAL KANT LAL
    • (5)
    • 108

    सत्या 17 शराब के नशे में लड़खड़ाता शंकर चला जा रहा था. अपनी गली में मुड़ते ही उसने सविता को घर के बाहर औरतों से घिरा हुआ देखा. उसे ...

    अस्वत्थामा (हो सकता है) - 4
    by Vipul Patel
    • (5)
    • 180

                      फिर थोडे ही दिनो मे मालती अपने मिलनसार स्वभाव और पढाई करवाने की अपनी बहेतरिन और अनोखी रीत से वो यूनिवर्सिटी के स्टाफ और स्टुडण्ट के साथ घुलमिल ...

    सत्या - 16
    by KAMAL KANT LAL
    • (3)
    • 143

    सत्या 16 रात में पढ़ाई ख़त्म होने के बाद जब बच्चे किताबें समेट रहे थे तो खुशी ने चुपके से सत्या के कान में कहा कि दो दिनों बाद ...

    बड़ी बाई साब - 19 (अंतिम)
    by vandana A dubey Verified icon
    • (30)
    • 353

    ओहो…. तो ये शीलू के लिये तैयारी चल रही है…. उससे पूछ लिया है न दादी?” “पूछना क्या? नीलू से पूछा था क्या? शादी के लायक़ उमर हो गयी ...

    निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 4
    by Anandvardhan Ojha
    • (4)
    • 141

    निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... (४) पूज्य पिताजी ने अपने एक लेख 'मरणोत्तर जीवन' में लिखा है--"मनुष्य-शरीर में आत्मा की सत्ता सभी स्वीकार करते हैं। शरीर मरणशील है, आत्मा अमर। ...

    सुनो आएशा - 3
    by Junaid Chaudhary Verified icon
    • (6)
    • 120

    सो फ़िल्म से कंसन्ट्रेट हटा कर मेने आयशा से इधर उधर की बातें शुरू कर दी।आयशा का पसंदीदा कलर.एक्टर. खाना.मूवी.हॉबी.ओर बर्थ डेट भी।।क्योंकि मुझे यही था कि वो पता ...

    निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 3
    by Anandvardhan Ojha
    • (2)
    • 166

    निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... (३) जब मैंने किशोरावस्था की दहलीज़ लांघी और मूंछ की हलकी-सी रेख चहरे पर उभर आई, तो चाचाजी मेरे प्रश्नों के संक्षिप्त और संतुलित उत्तर ...

    सत्या - 15
    by KAMAL KANT LAL
    • (6)
    • 174

    सत्या 15 20 वर्ष की अनिता सुबह आठ बजे अपने काम पर निकली थी. रास्ते में उसकी सविता से भेंट हो गई, जो अपने घर के आगे गेट पर ...

    अस्वत्थामा (हो सकता है) - 3
    by Vipul Patel
    • (6)
    • 250

                   अंतिमसंस्कार के बाद डी.सी.पि. प्रताप चौहाण ने अपने ड्राइवर को अपनी गाडी लेकर पुलिस स्टेशन पहोचने को कहा और अपने दोस्त जगदीशभाई से कहा मैं तेरे साथ तेरी ...

    जीनी का रहस्यमय जन्म - 4
    by Sohail Saifi
    • (7)
    • 125

    दोपहर की तिलमिलाती धुप मे एक चौदह पंद्रह वर्ष का बच्चा बेसूद भागे जा रहा हैँ, उसका बदन पसीने मे लतपत होकर उसको रुकने को कह रहा हैँ किन्तु किसी ...

    चिंटु - 25
    by V Dhruva Verified icon
    • (20)
    • 395

    आधी रात में सुमति की आंखें खुल जाती है, वजह थी ठंड। बारिश के साथ तेज हवाएं अब भी चल रही थी। वह कुछ समय तक यूहीं घुटने सिन ...

    बड़ी बाई साब - 18
    by vandana A dubey Verified icon
    • (17)
    • 338

    नीलू का जवाब सुन के गौरी के होश उड़ गये थे. नीलू बोली- “ मां, प्रताप और उसके घर वाले किसी भी हद तक उतर जाने वाले लोग हैं. ...

    सत्या - 14
    by KAMAL KANT LAL
    • (3)
    • 144

    सत्या 14 दोनों बच्चों का दाख़िला शहर के सबसे अच्छे इंगलिश मीडियम स्कूल में हो गया. नई किताबें, नया स्कूल ड्रेस, नए संगी-साथी. नया माहौल, पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स, ...

    बड़ी बाई साब - 17
    by vandana A dubey Verified icon
    • (20)
    • 331

    . दादी का ये नया रूप देख रही थी नीलू. अब तक तो पूरी दबंगई से बोलते और दमदारी से सारे काम करवाते देखा था उन्हें, लेकिन किसी ग़लत ...

    निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 2
    by Anandvardhan Ojha
    • (6)
    • 186

    मेरे रोने की आवाज़ जैसे ही वातावरण में गूंजी, चाचाजी और उस अज्ञात स्त्री की वार्ता अवरुद्ध हो गई। चाचाजी अपनी चौकी से उठकर मेरे पास आये और पूछने ...

    सुनो आएशा - 2
    by Junaid Chaudhary Verified icon
    • (9)
    • 192

    वादे के मुताबिक हिरा मुझे अगले दिन शाम में आयशा के घर ले गयी। ओर नसीब देखिए गेट भी आयशा ने ही खोला।।उसने काली ओर कत्थई धारियों वाला गाउन ...

    निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा ... 1
    by Anandvardhan Ojha
    • (7)
    • 364

    [मित्रो, ये चर्चाएं कई किस्तों में पूरी होंगी और क्रमशः एक उपन्यास की शक्ल अख्तियार कर लेंगी शायद। आप इन्हें किस्तों में पढ़ते जाने का अवकाश निकालेंगे तो मुझे ...

    अस्वत्थामा (हो सकता है) - 2
    by Vipul Patel
    • (9)
    • 391

    उसी दिन  सुबह किशनसिंहजी के राज्य गुजरात के अहमदाबाद में मनोविग्नान के  प्रोफेसर जगदिशभाई सुबह सुबह अपने बंगले में अपने कमरे को अंदर से बंध करके  बैठे बैठे भगवद् ...

    सत्या - 13
    by KAMAL KANT LAL
    • (4)
    • 173

    सत्या 13 सत्या की ज़िंदगी फिर से पटरी पर आ गई लगती थी. मीरा घर लौट आई थी. उस दिन सविता गुस्से में जितना खूँखार लग रही थी, अब ...

    बड़ी बाई साब - 16
    by vandana A dubey Verified icon
    • (23)
    • 344

    हद करती है लड़की! ये भी नहीं बताया कि कब आना चाहती है? रोहन को भेजें भी तो कब? फोन लगाया तो स्विच्ड ऑफ़ आने लगा. परेशान हो गयीं ...

    सत्या - 12
    by KAMAL KANT LAL
    • (7)
    • 207

    सत्या 12 सुबह का समय. एक ऑटोरिक्शा आकर रुकी. सत्या के साथ गोमती और एक और व्यक्ति उतरे. सत्या ने सविता को आवाज़ दी. वह बाहर आई. दोनों बच्चे ...