Tera Mera Ye Rishta - 1 books and stories free download online pdf in Hindi

तेरा मेरा ये रिश्ता - 1

मुंबई में,

सिघनिया मेंशन मे,

दुपहर का समय,

एक बहुत बड़े मेंशन में एक साथ दस ब्लैक Luxury Cars मुख्य द्वार पर आती हैं, तो जैसे ही वहा खड़े गार्ड्स देखते हैं तो जल्दी से मुख्य द्वार खोल देते हैं और उन Luxury Cars को अंदर आने देते हैं और साथ में कुछ गार्ड्स मेंशन में अंदर आ कर बता देते हैं की छोटे साहब आ गए हैं।

उन Luxury Cars मे से बहुत सारे ब्लैक ड्रेस में बॉडीगार्ड बाहर आते हैं और सब एक कार की तरफ मुंह करके खड़े होते हैं, जिस मे एक शख्स बैठा होता है। उन मे से उन का हेड और उस कार में बैठे शख्स का Parsonal बॉडीगार्ड होता है।

और उस का नाम राजवीर सिंह और उम्र 27 वर्ष, हाइट 6"2 होती हैं। जो है अपने मालिक का सबसे वफादार बॉडीगार्ड और साथ में जरूरत पड़ने या उस शख्स के कहने पर भी वो अपनी जान देने से भी नही कतराएगा ।

राजवीर, उस शख्स की कार का दरवाज़ा खोलता है जिस मे से वो शख्स बाहर आता है और उस कार में बैठे उस शख्स का पी ए जिसका नाम राजीव शुक्ला होता है और उस की उम्र 25 वर्ष, हाइट 5"9 होती हैं। और साथ में उस शख्स का वफादार ड्राइवर भी कार से बाहर निकल जाता है जिसका नाम लकी शर्मा होता है और उस की उम्र भी राजीव की ही उम्र के बराबर होती है पर उस की हाइट 6"0 होती हैं ।

उस शख्स का औरा बहुत खतरनाक होता है क्योंकि आज वो शख्स बहुत गुस्से में होता है इसलिए कोई भी उस से कुछ भी कहने की हिम्मत मे नही होते हैं साथ में उन सब बॉडीगार्ड्स और राजीव को उससे बहुत डर लग रहा होता है। फिर वो शख्स उस मैंशन में अंदर जाने लगता हैं।

वो शख्स सिंघानिया मेंसन में अंदर जा रहा होता है उस ने थ्री पीस फॉर्मल सूट पहना होता है और वो गुस्से में भी इतना हैंडसम लग रहा होता है की अगर कोई लड़की उस को देख ले तो उस पर फ़िदा ही हो जाए।

वो शख्स मैंशन में अंदर आते ही हॉल की तरफ सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे की तरफ जाने लगता हैं। यह आदमी और कोई नही हमारे हीरो मिस्टर अंश सिंघानिया है। और यह है सिंघानिया कम्पनी के सीईओ साथ में सिंघानिया परिवार के सबसे बड़े पोते है।

अंश दिखने में किसी से कम नहीं हैं, यह है मुंबई के सबसे हैंडसम और मोस्ट बैचलर बिजनेसमैन। अंश को कोई एक बार देख ले तो अपनी नजर ही हटाना भूल जाए। अंश की उम्र 29 वर्ष और हाइट 6"5 होती है।

अंश को तो बस अपने बिजनेस से ही प्यार है क्योंकि अंश को लगता हैं कि यह प्यार बस लोगो की कमजोरी ही बनती है और अंश सिंघानिया अपनी कोई भी कमजोरी नही बनाना चाहता है। अंश अपने कमरे मे जा ही रहा होता है....

अंश के दादा जी अंश को रोकते हुए कहते हैं, "तुम बिना लंच किए अपने कमरे की तरफ क्यो जा रहे हो और तुम इतने गुस्से में क्यो हो ?"

दादा जी, अंश से ऐसा इसलिए भी पूछ रहे होते हैं क्योंकि अंश जब भी सिंघानिया मेंशन में आता है तो पहले अपने दादा जी से बात किया करता है, जो अंश ने आज नही की होती है।

अंश के दादा जी का नाम रघुवीर सिंघानिया है इनकी उम्र लगभग 70 वर्ष होती हैं। अंश के दादा जी ने ही सिंघानिया परिवार की नीव रखी है और यह सिंघानिया परिवार के सबसे गुस्से वाले इंसान हैं और यह कहना गलत नही होगा कि अंश को गुस्सा अपने दादा जी से ही विरासत में मिला है।

अंश अपने दादा जी की बात सुन कुछ बोलने को होता ही है कि....

तभी अंश के पापा बीच में अंश से पूछने लग जाते हैं, "आज तो हमारी सिंघानिया कम्पनी को राजपुत कम्पनी से सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मिलने वाला था तो उस के बारे में तो कुछ बताओ ?

अंश अपने पापा की बात सुन वहा से गुस्से में अपने कमरे की तरफ चला जाता है और गुस्से से अपने कमरे का दरवाजा बहुत जोर से बंद करता है।

अंश के पापा का नाम विनोद सिंघानिया है इनकी उम्र लगभग 57 वर्ष होती हैं। अंश के पापा, सिंघानिया परिवार के बड़े बेटे है। और हां इनकी उम्र पर मत जायेगा, दिखने में यह अभी भी बहुत यंग और फिट है। और लगते तो बिलकुल 40 वर्ष के है।

अंश के पापा, अंश के दादा जी को देखते हुए कहते है, "इस लड़के का गुस्सा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है, देखा नही कैसे मेरे सवाल का जवाब दिए बिना ही अपने कमरे मे चला गया और तो और अपने कमरे का दरवाजा कितनी जोर से बंद करा जैसे तोड़ के ही मानेगा।"

अब अंश के दादा जी, अपने बड़े बेटे की बात सुन उस से कहते हैं, "मुझे तो समझ ही नही आ रहा हैं कि बात हुई क्या है क्योंकि आज सुबह तो अंश बहुत ज्यादा खुश नजर आ रहा था?"

अंश के दादा जी अपने बड़े बेटे से बात कर ही रहे होते हैं तभी सिंघानिया मैंशन में किसी और की भी आने की आहट सुनाई देती है। सब के सब सिंघानिया मेंसन के बाहर की और देख रहे होते हैं। क्योंकि अंश के आने पर ही सिंघानिया मेंशन में मौजूद हर इंसान सिंघानिया मैंशन के हॉल में खड़ा होता है।

सबसे पहले अंश का जुड़वा भाई, सिंघानिया मेंसन में अंदर आता है। इन का नाम अमृत सिंघानिया है और यह अंश की उम्र का ही होता है और हाइट 6"3 होती हैं साथ में यह भी दिखने में किसी से कम नही होता है पर अमृत, अंश से बिलकुल उलट स्वभाव का होता है जिसका मतलब है कि यह बहुत ही शांत स्वभाव का है।

अमृत, अंश की सिंघानिया कम्पनी के साथ साथ अपनी वकालत पर भी ध्यान देता है, क्योंकि अमृत मुंबई का सबसे अच्छा वकील है और सिंघानिया कम्पनी के सारे केस अमृत ही संभालता है।

अमृत के बाद, अंश का चचेरा भाई और अंश के चाचा जी का बड़ा बेटा सिंघानिया मेंसन में अंदर आता है। इन का नाम सिद्धार्थ सिंघानिया होता है और सिद्धार्थ की उम्र 25 वर्ष होती है और हाइट 6"1 होती हैं। सिद्धार्थ, अंश का छोटा भाई है पर गुस्से के मामले में गया पूरा अंश पर ही है और यह कहना गलत नही होगा कि सिद्धार्थ, अंश की ही कार्बन कॉपी है।

सिद्धार्थ के बाद, अंश का इकलौता दोस्त सिंघानिया मेंसन में अंदर आता है। जिसका नाम समीर भारद्वाज होता है। समीर की भी उम्र लगभग अंश के बराबर ही होती है और समीर की हाइट 6"2 होती हैं। समीर, भारद्वाज कम्पनी का सीईओ होता है और भारद्वाज कम्पनी, सिंघानिया कम्पनी के साथ मिलकर ही अपना बिजनेस कर रही होती है।

सिद्धार्थ, सिंघानिया मेंसन में अंदर आते हैं समझ जाता हैं कि सब परिवार वालो ने अंश भाई का गुस्सा देख ही लिया है तो.....

सिद्धार्थ, अपने दादा जी से कहता है, "सिंघानिया कम्पनी को जो प्रोजेक्ट मिलने वाला था, वो किसी और कम्पनी को मिल गया है जिस कारण ही आज अंश भाई बहुत गुस्से में है।

अब, अमृत अपनी मां से कहता है, "अब आप को ही अंश का गुस्सा शांत करवाना होगा।"

अंश और अमृत की मां का नाम संजना सिंघानिया होता है और इन की उम्र लगभग 50 वर्ष होती हैं साथ में यह सिंघानिया परिवार की सबसे बड़ी बहू भी होती हैं।

अमृत की बात सुन उन की मां कुछ कहने ही वाली होती है तभी.....

अंश की चाची जी, अंश की मां से कहती हैं, "दीदी अभी कुछ मत कहना क्योंकि अंश अभी बहुत गुस्से में होगा थोड़ी देर बाद बात करेंगे तो तब तक अंश का गुस्सा भी शांत हो जायेगा।"

अंश की चाची का नाम शिवानी सिंघानिया होता है और इन की उम्र लगभग 48 वर्ष होती है साथ में यह सिंघानिया परिवार की छोटी बहू भी है।

अंश की चाची की बात सुन, अंश की मां कहती हैं, "तुम ठीक कह रही हो शिवानी, मै अंश से बाद में ही बात करूंगी।"

अब अंश के चाचा जी, अपने बड़े बेटे की बात सुन कहते हैं, "सिद्धार्थ, तुम मुझे सीधे सीधे बताओगे की हुआ क्या है क्योंकि मुझे कुछ भी समझ में नही आ रहा है कि हमारे हाथो से इतना बड़ा प्रोजेक्ट कैसे निकल सकता है?"

अंश के चाचा जी का नाम संजीव सिंघानिया होता है और इन की उम्र लगभग 51 वर्ष होती है और यह सिंघानिया परिवार के छोटे बेटे होते हैं। साथ में इन्होंने शिवानी जी के साथ लव मैरिज की होती है।

अपने चाचा जी की बात सुन, अमृत कहता है, "हम जिस प्रोजेक्ट को पाने के लिए पिछले छ महीनो से तैयारी कर रहे थे साथ में सिंघानिया और भारद्वाज कम्पनी ने साथ में मिलकर Participate किया था और अंश ने इस प्रोजेक्ट के लिए बहुत मेहनत और अपना कीमती समय दिया था वो हमारे हाथो से निकल कर, किसी और को ही मिल गया है।"

अमृत की बात सुन, सिद्धार्थ कहता है, "भाई मुझे तो समझ नही आ रहा हैं की मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपूत ने एक beginner को कैसे इतना बड़ा प्रोजेक्ट दे सकते है?"

सिद्धार्थ की बात सुन, अंश के दादा जी कहते हैं, "सिद्धार्थ, तुम कहना क्या चाहते हो ? और किस की बात कर रहे हो तुम, बताओगे भी ?"

सिद्धार्थ, अपने दादा जी की बात सुन कुछ कहने को होता ही है कि....

अमृत बीच में ही सिद्धार्थ से कहने लगता हैं, "सिद्धार्थ, शांत हो जाओ यार, वैसे ही अंश का गुस्सा नही संभालता हैं और ऊपर से तुम भी शुरू मत हो जाना, मै मानता हूं कि तुम उस प्रोजेक्ट के चले जाने से परेशान हो, पर फिर भी अपने गुस्से को कंट्रोल में रखो !"

और तुम यह भी तो सोचने की कोशिश करो की जो कम्पनी सालो सालो तक नजर नही आई थी वो कम्पनी भी आज राजपुत कम्पनी से प्रॉजेक्ट लेने के लिए Participate कर रही थी फिर तुम कैसे सोच सकते हो कि वो कम्पनी इस प्रोजेक्ट को पाने की कोशिश नही करेगी।

और तो और तुम जानते ही हो कि राजपुत कम्पनी, भारत की सबसे शक्तिशाली और टॉप थ्री कंपनियों में से एक है साथ में राजपुत कम्पनी से प्रॉजेक्ट लेना बहुत बड़ी बात है और इस प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा प्रॉफिट भी तो है इसलिए हर कोई कम्पनी इस प्रोजेक्ट को पाना चाहती थी। और बिजनेस का मतलब ही यही होता है की जहां ज्यादा फायदा होगा बिजनेसमैन वही तो इन्वेस्ट करते हैं।

और अगर यह प्रोजेक्ट शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी को मिल गया है तो इस मे इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो ?

जबकि तुम अच्छे से जानते हो, यह प्रोजेक्ट किसी एक को ही तो मिलना था और मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपूत को जिस का प्रोजेक्ट आइडिया पसंद आएगा वो उस को ही अपना प्रोजेक्ट देंगे ।

और मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपूत को, शर्मा कॉर्पोरेशन कम्पनी की सीईओ का प्रोजेक्ट आइडिया पसंद आ गया तो इस मे कोई क्या ही कर सकता है? सिद्धार्थ बताओ तुम मुझे !

अमृत की बात सुन, सिद्धार्थ कहता है, "भाई मुझे तो समझ नही आ रहा हैं कि आप उस की साइड क्यो ले रहे हैं जबकि उस ने हम से हमारा इतना बड़ा प्रोजेक्ट ले लिया है!"

सिद्धार्थ की बात सुन, अमृत कहता है, "मै किसी की साइड नहीं ले रहा हु, मै तो बस तुझे समझा रहा हु कि अब इस बात को और मत बढ़ा बस यही खतम कर दे।"

अमृत की बात सुन, सिद्धार्थ कहता है, "ऐसे कैसे भाई, उस ने जो किया है न उस की वजह से अब वो अंश भाई के साथ साथ मेरी भी दुश्मन बन गई है ।"

सिद्धार्थ की बात सुन, समीर कहता है, "बस बहुत हो गया सिद्धार्थ !"

मैं मानता हूं कि हमारे हाथो से इतना बड़ा प्रोजेक्ट निकल गया है, पर शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी की सीईओ मे कुछ तो बात होगी ही ना तभी तो मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपूत ने उस के पहले ही प्रयास में उस को अपनी कंपनी का प्रोजेक्ट दे दिया और साथ में हम लोगो ने भी देखा न की कैसे उस ने प्रोजेक्ट से जुड़ी सब परेशानी को कितनी आसानी से Solve कर दिया था। जैसे वो पहले से ही इन सब के जवाब ढूंढ के बैठी हो!

समीर की बात सुन, अंश के चाचा जी कहते हैं, "हां, सिद्धार्थ बेटा तुम समीर की बात समझने की कोशिश करो।"

अब सब की बात सुन, अंश के दादा जी अपनी कड़क आवाज में कहते हैं, "यह शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी, कौन सी वाली कंपनी है क्योंकि मुझे जितना पता है कि यह कम्पनी मेरे जिगरी दोस्त की पत्नी के भाई की कंपनी का भी यही नाम है पर वो कम्पनी तो कब की बर्बाद हो चुकी हैं !"

दादा जी की बात सुन, समीर उन से कहता है, "हां आप ने ठीक कहा दादा जी यह उन की ही कंपनी है पर यह कम्पनी दो साल पहले फिर से स्टार्ट करी गई हैं और वो भी उन की पोती के द्वारा !"

और इसी वजह से हर न्यूज चैनल पर शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी का ही नाम आ रहा हैं क्योंकि इस कंपनी की नीव रखने वाले शर्मा परिवार की पोती ने बर्बाद हो चुकी कम्पनी को दो साल में टॉप फाइव में लाकर रख दिया है।

फिर अमृत, अपने दादा जी से कहता है, "और तो और आप को पता है कि अभी तक किसी ने भी शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी की सीईओ को नहीं देखा है। पर शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी की सीईओ का नाम मिस सौम्या शर्मा बताया जा रहा हैं और वही शर्मा कॉर्पोरेशन कंपनी को अपने दम पर टॉप फाइव में लेकर आई है। उस लड़की की उम्र महज 22 वर्ष बताई जा रही है !"

अमृत की बात सुन, अंश के पापा कहते हैं, "क्या इतनी छोटी उम्र में ही यह लड़की ने बर्बाद हो चुकी कम्पनी को टॉप फाइव में ला कर रख दिया है !"

अपने पापा की बात सुन, अमृत कहता है, "हां पापा, आप ने सही सुना है।"

और तो और खुद मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपूत ने भी नही देखा है मिस सौम्या को, आज भी प्रोजेक्ट मीटिंग रूम में मिस सौम्या के पी ए ने ही प्रोजेक्ट आइडिया, फाइल से लेकर सारी फॉर्मिलिटी पूरी करी। यहां तक जब मिस सौम्या को प्रोजेक्ट मिलने वाला था तब भी वो वहा मौजूद नहीं थी।

मिस सौम्या के पी ए ने ही मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपूत से प्रॉजेक्ट लिया जिस पर मिस्टर राजपुत गुस्सा भी हो रहे थे, तो मिस सौम्या के पी ए ने कहा कि उस बॉस, इंडिया से बाहर है जिस वजह से वो यहां नही आ पाई है और इस के लिए उन होने आप से माफी मांग ने को कहा है। पर इस प्रॉजेक्ट के लिए मेरी बॉस ने बहुत मेहनत की है।

मिस सौम्या के पी ए की बात सुन, मिस्टर धर्मवीर सिंह राजपुत कहते हैं, "यह तो मैं भी मान रहा हु कि तुम्हारी बॉस ने इस प्रोजेक्ट को पाने के लिए बहुत मेहनत की होगी क्योंकि आज तक मेरी कंपनी मे कोई भी पहली बार मे प्रोजेक्ट नही ले पाया है, पर फिर भी तुम्हारी बॉस ने यह कर दिखाया है।"

और तो और मैने यह भी सुना है कि तुम्हारी बॉस ने बहुत ही कम उम्र में ही सीईओ की पोस्ट संभाल ली थी और जो कम्पनी पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी थी, उस कंपनी को दो सालो में टॉप फाइव में लाकर रख दिया है, यह तो बहुत ही काबिले तारीफ़ है। अब तो मैं बस तुम्हारी बॉस से मिलना चाहता हूं।

अमृत की बात सुन, दादा जी कहते हैं, "अब तो मैं भी धर्मवीर की तरह, मिस सौम्या से मिलना चाहता हु। जो मेरे सबसे बड़े पोते को टकर देने के लिए बिजनेस के मैदान में उतरी है।"

सिंघानिया परिवार के सब लोग हॉल में बात कर ही रहे होते हैं कि तनवी अंश भी अपने कमरे से बाहर आ जाता हैं।

और अपने दादा जी की बात सुन ने के बाद, उन से कहता है, "दादा जी आप को मिस सौम्या से मिलने के लिए ज्यादा इंतजार नही करना पड़ेगा, और साथ में एक Devil Smile दे देता हैं।"

अंश की Devil Smile देख के सिद्धार्थ अपने मन में कहता है, "अब आएगा न मजा इस खेल को खेलने में, अब अंश भाई अपने तरीके से मिस सौम्या को बताएंगे की किसी की चीज को तब तक लेना नही चहिए जब तक वो खुद उस को देना न चाहे!"

सिद्धार्थ, अंश के हर इशारे को अच्छे से समझ जाता हैं क्योंकि वो इतने सालो से उस के साथ काम कर रहा है और यह कहना गलत नही होगा कि सिद्धार्थ है तो अंश की कार्बन कॉपी ही।

फिर दादा जी सब से कहते हैं, "चलो अब सब लंच करते हैं।"

और फिर दादा जी के कहने पर पूरा सिंघानिया परिवार साथ में बैठ कर लांच करने लगते हैं।

अब अंश क्या करेगा मिस सौम्या के साथ, क्योंकि मिस सौम्या ने ले लिया है अंश से उस का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट ?