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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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ఎవరు....? By Suresh Josyabhatla

ఆంధ్రరాష్ట్రానికి ఆర్ధిక కేంద్రంలాంటిది విజయవాడ నగరం.
ఆ నగరంలొ పెద్ద పెద్ద రాజకీయనాయకులు మరియు ప్రముఖ వ్యాపారవేత్తలు నివసించె ప్రాంతాలలొ ఒకటి "గురునానక్ కాలని"

ఈ కాలనిల...

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे.

मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...

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Safar e Raigah By Naheed Anis

Safar e raigah sirf shahmeer ki nahi balke ayat ki bhi kahani hai ek ameer zadi jo apne baap ki nafrat se tang aa kash mekash ki zindagi chor deti hai aur kashmir ki khamosh wadiyo...

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दीवाने की दिवानियत By kajal jha

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट
दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...

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THE CHURCH By Prisca Alpha

After sleeping with her last night, Pope Gabriel couldn’t focus. The memory of Elara’s hands, the heat of her body pressed against his, lingered like a sin he could not confess. He...

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Trikon - एक्शन सीरीज़ By Varun Vilom

दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है।

नदी के किनारे-किनारे।

रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है।

बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है।

पैरों में...

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અનોખી સફર - અમાવસ્યાથી પૂર્ણિમા સુધી By Dakshesh Inamdar

અંધારું હજી છવાયેલું હતું ઠંડી પણ પુરબહારમાં હતી.. સિડનીની સુમસામ સડકો.. નિઃશબ્દ
સ્ટ્રીટ..હજી સવારના છ વાગ્યા હતાં સિટીમાં જોબ કરવા જનારા તૈયાર થઇ ઘરની બહાર નીકળી રહ્યા હતાં.
સ...

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अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश By Irfan Khan

चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...

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प्रेम न हाट बिकाय By DrPranava Bharti

कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

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ఆంధ్రరాష్ట్రానికి ఆర్ధిక కేంద్రంలాంటిది విజయవాడ నగరం.
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मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...

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અંધારું હજી છવાયેલું હતું ઠંડી પણ પુરબહારમાં હતી.. સિડનીની સુમસામ સડકો.. નિઃશબ્દ
સ્ટ્રીટ..હજી સવારના છ વાગ્યા હતાં સિટીમાં જોબ કરવા જનારા તૈયાર થઇ ઘરની બહાર નીકળી રહ્યા હતાં.
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अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश By Irfan Khan

चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...

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प्रेम न हाट बिकाय By DrPranava Bharti

कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...

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