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Mr. Ms. Fake By kajal jha

शादी से बचने का आख़िरी रास्ता

सुबह के आठ बजे।

दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...

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తొలి పౌర్ణమి By sreelu

మనం భవిష్యత్తుని తరిమితే మనల్ని తరిమేదే గతం, ఇక్కడ గతం అంటే సమయం కాదు సందర్భం, మన మనస్సులో ఏదో ఒక మూలన నిలిచిపోయిన ఆలోచన మనల్ని ఎప్పుడూ వెంటాడుతూనే ఉంటుంది....

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ভাগ্যের লেখন By Sujata Mondal

আমাদের পাড়ারই এক ছেলের কথা নাম রিয়ান আমি হলাম পাখি আমি রিয়ানকে খুব ভালোবাসি। ও আমাকে ভালোবাসে, সেটাও আমি জানি। আমি যে ওকে কতটা পছন্দ করি তা ও জানে কিন্তু আমি যা ওকে কতটা ভালোবাস...

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Money Vs Me By fiza saifi

लोग कहते हैं कि जीवन में पैसा ही सब कुछ होता है। यह बात मैं नहीं कहता—मेरे आसपास के सभी लोग कहते हैं। बचपन से ही मैं यह सुनता आया था कि अगर आपके पास पैसा हो, तो जीवन की हर चीज आसान...

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ઓપરેશન સાગર મંથન By Rupen Patel

ઓપરેશન સાગર મંથન
૨૧,૦૦૦ કરોડના કાળા સામ્રાજ્યની રહસ્યમય સ્ટોરી
લેખક © રૂપેન પટેલ
## **મુખ્ય પાત્રોનો વિગતવાર પરિચય (Character Dossier)**
### **સુરક્ષા એજન્સીઓ (The Law):**
૧...

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प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता By RAAHULL SHARMA

कोलकाता: गुनाह का काला जश्न

कोलकाता की वह रात आम रातों जैसी नहीं थी। 'द वेलवेट अंडरग्राउंड' नाइट क्लब के बाहर महंगी गाड़ियों का काफिला लगा था,

और अंदर—शहर की चकाचौंध अ...

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ભૂલ છે કે નહીં ? By Mir

દોસ્તો,આજે બસમાં જવાનું થયું. મારી બાજુમાં એક બહેન બેઠા હતાં. કંઈક ગંભીર વિચારમાં હોય એવું લાગ્યું. એમની આંખો પાણી ભરતી હતી અને એ દુનિયાથી છુપાવતાં હતા. હું હજુ એમને કંઈ પૂછું એ પહ...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 By Sonam Brijwasi

रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी।
उम्र लगभग चालीस...

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तोतया वारसदार By Dilip Bhide

त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...

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अंतर्निहित By Vrajesh Shashikant Dave

आठ वर्ष पूर्व :-

दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...

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दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...

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మనం భవిష్యత్తుని తరిమితే మనల్ని తరిమేదే గతం, ఇక్కడ గతం అంటే సమయం కాదు సందర్భం, మన మనస్సులో ఏదో ఒక మూలన నిలిచిపోయిన ఆలోచన మనల్ని ఎప్పుడూ వెంటాడుతూనే ఉంటుంది....

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रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी।
उम्र लगभग चालीस...

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तोतया वारसदार By Dilip Bhide

त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...

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