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शहर के सबसे पुराने और वीरान रेलवे क्रॉसिंग के पास एक दोमंज़िला मकान था, जिसकी खि...
एक ऐसा सफर, जिसमें मंजिल से ज्यादा रास्ते ने सिखायापूरनपुर की सुबह में एक अलग ही...
अध्याय-२६राजेश ने अमृता को जो पिछली रात वचन दिया था, वह उस पर खरा उतरा। राजेश को...
घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ,...
Bank robbery - chapter 2 “मुझे अभी बेटे के अकाउंट में मनी ट्रांसफर करवानी है, ले...
ભાગ ૯ — ઘરની પહેલી ઈંટથોડા સમય પછી જમીન ખરીદાઈ.ઘરનું કામ શરૂ થયું.પહેલી ઈંટ મૂકવ...
માત્ર ટ્રાવેલ પેમ્ફલેટ્સ, ટીવી પર આવતી ટ્રાવેલ ચેનલ્સમાં ક્યારેક અને એક બે યુ ટ્...
Philosophy of Non-Finality / गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम वेदांत 2.0 — अंतिम...
भाग ८ — मैया की परीक्षालेखिका: अलोका पटेल“सुमित्रा की आखिरी मुलाकात माधव से हुई...
అర్ధరాత్రి దాటింది. పాత మేడ చుట్టూ గాలి భయంకరంగా అరుస్తోంది. చెట్ల కొమ్మలు కిట...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
મોહનલાલ દામોદરદાસ દરજી જ્યારે સવારના સમયે પોતાની આર્મીની યુનિફોર્મ પહેરતા, ત્યારે અરીસામાં તેમને માત્ર એક સૈનિક દેખાતો નહોતો. તેમને એક જવાબદાર પતિ દેખાતો. એક પિતા દેખાતો....
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
बचपन की पहली यादें कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी भूल नहीं पाते। वे यादें किसी तस्वीर की तरह हमारे मन में टंगी रहती हैं। वक्त गुजरता जाता है, उम्र बढ़ती जाती है,...
રાતના સાડા અગિયાર વાગ્યા હતા. અમદાવાદની ઊંઘતી ન હોય એવી સડક પર કારની હેડલાઇટ્સ સતત આગળ વધતી હતી. બહાર વરસાદ વરસી રહ્યો હતો અને કાચ પર પડતાં પાણીનાં ટીપાં જાણે કોઈ જૂની યાદને ધોઈ...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
कोहरे का पुराना पुल और अंदर की आवाज़" मैं खुद को अकेला, बेबस खड़ा समझ के आगे बढ़ रहा हूँ, मेरे कदमों के पर-कच्चे उड़ रहे हैं। कदमों की आहट में, मैं खुद को सुन रहा हूँ, चारो...
भाग 1 — कंस की भविष्यवाणी और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआत जय श्रीकृष्ण मथुरा नगरी में उस समय चारों ओर खुशियाँ थीं। राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह यदुवंशी वीर वसुदेव के साथ...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
जिस गाँव का रास्ता रात में खत्म हो जाता था बिहार के एक छोटे-से जिले में एक गाँव था—भैरवपुर।नक्शे में उसका नाम था।सरकारी कागजों में उसका नाम था।वहाँ रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, ज...
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