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पिंकू की परी. By Deepak Kumar Tiwari

बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर...

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Mr. Ms. Fake By kajal jha

शादी से बचने का आख़िरी रास्ता

सुबह के आठ बजे।

दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...

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આનંદનગર. By Rupen Patel

આનંદનગર એ માત્ર ઈંટ-સિમેન્ટથી બનેલી ચાર દીવાલો કે ફ્લેટોનું સરનામું નથી, પણ “મિની ભારત”નું જ્વલંત ઉદાહરણ છે. અહીં હિન્દુ, મુસ્લિમ, જૈન, શીખ, પારસી અને ખ્રિસ્તી પરિવારો છે. ગુજરાતી,...

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કુંવારો જેઠ By Vir jadeja

આખામાં ગામ મા જ્યારે પણ કોઈના લગનની શરણાઈ વાગતી, ત્યારે સુરજપર ગામના નાથુજીના ડેલામાં એક લાંબો નિસાસો નંખાતો. નાથુજીના ત્રણ દીકરા. મોટો જગાભાઈ (જગદીશ), વચલો ભગો (ભગવાન) અને નાનો દિ...

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प्यार भी तुमसे और टकरार भी By July Writes

मियां-बीवी की खट्टी-मीठी नोकझोंक से भरपूर कहानी -(प्यार भी तुमसे और टकरार भी )
( डॉक्टर बीवी और बेचारा मरीज पति )
️भाग–1
रात के ठीक ग्यारह बजे...पूरा मैरिज हॉल तालियों से गूंज...

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फ़ेक फ़िऑन्से चैलेंज By priyanka katiyar

बारिश की हल्की-हल्की बूंदें शहर को किसी फिल्म जैसा बना रही थीं।लेकिन उस खूबसूरत मौसम से बिल्कुल उलट थी अनन्या मिश्रा की हालत।"हे भगवान... आज ही लेट होना था!"वह एक हाथ में क...

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अफसर का अभिनन्दन By Yashvant Kothari

कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...

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Rebirth of a Bench By Amardeep Kumar

मैं, सतोशी नाकामोतो, और एक लकड़ी का फलसफ़ा
चारों तरफ घना अँधेरा।
मैं एक अजीब सी जगह पर था। मैंने अपने हाथों को देखने की कोशिश की, पर वहाँ कुछ था ही नहीं, सिर्फ घुप्प अँधेरा।
"...

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Potty Robbers and Me By BleedingTypewriter

किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमान

मकान का हाल: बरेली की सबसे तंग गली

बरेली के एक पुराने इलाके में, जहाँ गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकल जाएँ तो जगह कम पड़ जा...

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When silence learned my Name By Ashwini Dhruv Khanna

(New York, USA)

The conference center rose from the Manhattan street like a declaration—steel, glass, certainty. Inside, ambition moved with practiced ease. Badges flashed names...

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बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर...

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