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ಆದರ್ಶ್ ತನ್ನ ಹಣೆಯ ಮೇಲೆ ಮೊಳಕೆಯೊಡೆಯುತ್ತಿದ್ದ ಆ ಕೆಂಪು ಮಣಿಯಂತಹ ವಿಚಿತ್ರ ಗಾಯವನ್ನು ಕನ್ನಡಿ...
అధ్యాయం 5: విరిగిన కలల వారధి"అతన్ని లోపలికి రానివ్వు మీరా..." ఆరవ్ నోటి నుండి వచ...
कमरे में हल्की खामोशी थी। खिड़की से आती ठंडी हवा…और बिस्तर पर लेटी शानवी। टुक-टु...
आपले तारण हे आपल्या चांगल्या कार्यामुळे ( कर्म) नव्हे किंवा आपण किती धार्मिक आणि...
सुबह अर्जुन को ट्रैक किया। वो राव से जेल मिलने गया। ग्लास के पार। "पापा, अनन्या...
रविवार की सुबह। विक्रम के घर में एक शांत और आरामदायक माहौल था। उसके पिता अखबार प...
Hope for the Future#FinalLetter #HopePrevails #TimelessThingsIf you are reading...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ಪರದೆ ಸರಿಯುವ ಕ್ಷಣ. ಆಕಾಶದಿಂದ ಬೀಳುತ್ತಿದ್ದ ಮಳೆಯ ಹನಿಗಳು...
శిమ్లా ఆ రాత్రి అంత చలిగా ఉంది అంటే, గాలి కూడా గడ్డకట్టినట్టు అనిపించింది. ఆకాశం నల్లగా మసక మసగ్గా ఉంది, అందులో నక్షత్రాలు పగిలిన అద్దం పెంకుల్లా మెరుస్తున్నాయి. ఉష్ణోగ్రత సున్నా క...
शिजा एक शर्मीली, समझदार और चश्मा पहनने वाली लड़की थी। उसका चश्मा उसके लिए सिर्फ एक साधारण चीज नहीं था, बल्कि एक छुपा हुआ डर भी था। हर बार जब वह अपने दोस्तों के साथ कॉलेज में बैठती,...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
मलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली किरणें धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी दूर विंध्य पर्वत माला के दक्षिण में अवस्थित है। यह स्थान बलुआ पत्थर के चट्ट...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
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