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वेदांत 2.0 : प्रकृतिजीवी से यंत्रजीवी तकयदि आज की शिक्षा, सामाजिक व्यवस्था और त...
(शादी का हॉल सज चुका है। लाल जोड़े में सिमरन खड़ी है। उसका चेहरा दुःख और डर से फ...
नमक हरामसंध्या का समय, झीने धुंधलके के कारण वातावरण धूमिल था। देखते ही देखते सड़...
यहां का धनवान जौहरी चौधरी सारस राए गुरु गोबिंद सिंह जी का पहला सिख बना गुरू गोवि...
विधि ने जब वो पैकेज खोला तो उसमे वही टैडी था, जिसे माही ने लेने की जिद की थी। वि...
अभी तक आपने पढ़ा कि रितु ने किशन और उसके दोस्तों को बदले की राह पर जाने से रोक दि...
इसका कारण ये है, कि कभी जो हम सोचते नहीं वो हो जाता है। एक चोरी पैसो कि हो जाने...
**चैप्टर 2: धोखे की सीढ़ी और शैतानगढ़ का क्रूर सच**जैसा कि हमने देखा, रिया और आश...
किस्त 10: सच का सामना (The Unmasking)एली के हाथ में मौजूद वह लेंस कैप जैक की तरफ...
रूम नं. 407भाग – 2 : बंद दरवाज़े के पीछेआरोही का पूरा शरीर डर से काँप रहा था।उसक...
अपने महापुरुषों का स्मरण भारत में एक श्रेष्ठ परम्परा रही है। कथा-कहानियों से लगाकर पुस्तकों तक उनके कर्तृत्व और आदर्श जीवन का सजीव चित्रण किया गया है। यदा-कदा पर्वों के माध्यम से भ...
दिव्य जीवन की एक झलक हमारा सौभाग्य है कि हमारी वसुन्धरा कभी संतों से विरहित नहीं रही। संतों की चेष्टायें साधन काल में भी एवं सिद्धावस्था में भी विभिन्न प्रकार की होती हैं पर होती...
फिल्मी दुनिया की बेरुखी और हद दर्जे की खुदगर्जी को भी काफी गहराई से महसूस किया है मैने। चढ़ते सूरज को नमस्कार करना ही शहर की फितरत में हैं।गिरते हुए को धक्का मार कर जमीन पर लेटा द...
"क्या देख रही हो?" उन दिनों मैं साल 1966 की बात कर रहा हूँ।तब कालेज आज की तरह जगह जगह नही हुआ करते थे।मेरे पिता रेलवे में थे और उनके ट्रांसफर होते रहते थे।इसलिए मेरी शिक्ष...
छत्रपति शिवाजी महाराज अप्रतिम थे। उनका पराक्रम, कूटनीति, दूरदृष्टि, साहस व प्रजा के प्रति स्नेहभाव अद्वितीय है। सैन्य-प्रबंधन, रक्षा नीति, अर्थशास्त्र, विदेश नीति, वित्त, प्रबंधन —...
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। — श्रीमद्भगवद्गीता संसार में दो प्रकार के पुरुष होते हैं। एक तो वह जो संसार के पीछे चलते हैं और...
मीठी की माँ को गुजरे कुछ ही वक्त हुआ था, और उसके रिश्तेदार उसके पापा की दूसरी शादी के लिए रिश्ते लाने लगे। पिताजी की सरकारी नोकरी होने के कारण किसी को भी ज्यादा वक्त नहीं लगता था...
एक बुक है जिसका में जिक्र कर रहा हूं। गृहस्थ संन्यासी जो बहुत पोपुलर है, जिसका आज सेमिनार आयोजित किया गया है और उसमें उसके लेखक खुद प्रस्तुत होने वाले हैं, जो स्टेज पर जा कर बुक के...
मेरा जन्म कृषक परिवार में हुआ था।पुश्तेनी पेशा खेती था।लेकिन बाद में सर्विस में भी आने लगे थे।मेरे बड़े ताऊजी रेलवे में ड्राइवर थे।उनसे छोटे खेती सम्हालते थे।उनसे छोटे हेड मास्टर...
में खुद से अलग हुआ जब मुझे घर से निकाला गया। तब मे कुछ नहीं करता था, मे बस घूमता रहता था, इसीलिए मुझे अपने घर से निकला दिया था। घरवालों ने कहा, "घर से निकाल जाओ।" तो म...
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