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    Riya घर के अंदर जाती है। तभी उसकी माँ kitchen से बाहर आती है। वह Riya के साथ उसक...

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    बनारस – जिसे महादेव की नगरी भी कहा जाता है। जहां सुबह अलार्म से नही बल्कि 'ह...

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    Chapter 1: द अनप्लांड यू-टर्नघड़ी में रात के ठीक पौने बारह बज रहे थे। कमरे में प...

गरीब के बहते आंसु. By prem chand hembram

उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...

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अम्मा By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।

अब...

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