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'The Mystery of Death' — अध्याय 3तो दोस्तों, पिछले चैप्टर में हमने देखा...
** हीरो...!** **भाग 2 : पहली मुस्कान, पहली मदद**घंटी बजने के बाद कॉलेज की इमारत...
अध्याय - ११अमृता की समझदारी और चतुराई भरे निर्णय के कारण मानसकुमार और गायत्री के...
-------------स्टाफ रूम का माहोल अजीब सा हो गया था। चारू हैरत मु आर्दश को देख रहे...
फोन की स्क्रीन पर चमकते हुए रिया के नाम को देखकर आरव की उंगलियाँ एक पल के लिए जम...
एक आम सी प्रेम कहानी भाग - ११लेखिका "अनामिका" दृश्य : मलय का घर (खुशी और उत्साह...
अध्याय 7: दस साल की नींदट्रेन चल रही थी।लेकिन अंगद के लिए समय रुक चुका था।वह अपन...
मुन्ना मामा ने आदित्य के चेहरे पर छाई उलझन को पढ़ लिया। उन्होंने रिवॉल्वर का रुख...
संकल्प मां का , आसमान बेटी का रीना शहर में पली-बढ़ी आधुनिक विचारों की संस्कारी ल...
अन्विका जैसे ही झटके से संभलकर सीधी हुई, उसने हैरानी से सामने देखा।कुछ ही दूरी प...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...
(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...
यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं। हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...
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