counterfeit coin by prem chand hembram

खोटा सिक्का by prem chand hembram in Hindi Novels
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा...
खोटा सिक्का by prem chand hembram in Hindi Novels
चंद रुपयों से न तो पेट भर भोजन मिल सकता था और न ही रेल की टिकट खरीदी जा सकती थी। भूख, अपमान और अनिश्चित भविष्य की चिंता...