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किसन कुमार शिव नारायण के सामने हाथ जोड़ते है और कहते है --किसन कुमार: - संबंधी ज...
સવારના આઠ વાગ્યા હતા.ગઈ રાતના વરસાદ પછી આખી ખીણ જાણે નવી જ જન્મી હોય તેમ લાગી રહ...
40. चमड़ी का मोहजिसे तुम प्रेम कहते हो, वह बस एक बीमारी है,खाल के रंग-रूप पर, ये...
I. यादों की पोटली और पुष्कर मेलानवंबर का महीना था और दिवाली बीते कुछ ही दिन हुए...
वह देख रहा था कि सृष्टि का लॉकेट अब ठंडा पड़ने लगा था, क्योंकि उसका दिमाग अब इन स...
जैसे - जैसे रोहिणी के रूप - लावण्य का जादू टूटने लगा वैसे - वैसे हसीन रूमानी रात...
स्वागत है दोस्तों एपिसोड 6 में ! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि विक्रांत और आन्या...
तोतया वारसदार पात्र रचना निशांत शोधकर्ता. दिनकर ...
जिंदगी की दसरा पार्ट 26और वही असल दुनिया में डॉक्टर देव अब तलक वही अपने पेशेंट क...
બધીજ નદીઓને બે કિનારા હોય છે. બંને કિનારા એકબીજાને જોઈ શકે, પવનના સંદેશા મોકલી શ...
अध्याय 1: रणविजय शेखावत उसका नाम रणविजय शेखावत है। पूरी दुनिया उसे एक बेरहम, पत्थर दिल और 'कोल्ड प्रिंस' के नाम से जानती है। वह सिर्फ एक हैंडसम बैचलर ही नहीं, बल्कि अंडर...
શરીર પર એક મેલું પહેરણ હતું, જે વરસાદમાં પલળીને તેની ચામડી સાથે ચોંટી ગયું હતું. પગમાં જોડા નહોતા; ખુલ્લા પગે તે કાંટા, કાંકરા અને વીંછીના દરો ખૂંદતો હતો. માથે વરસાદથી બચવા માટે એક...
१. बंकरमधील शेवटची रात्र एप्रिल १९४५ चा शेवटचा आठवडा बर्लिनसाठी यमराजाचा पाश बनून आला होता. जमिनीच्या वर, लाल सैन्याच्या (Soviet Red Army) तोफांचे आवाज थेट काळजाचा थरकाप उडवत होते...
धनबाद शहर , जहां के सड़को पर अशोक और राजबीर एक building से बाहर भागते हूए दिखता है । दोनो बाप बेटा शहर मे लड़कियों की smuggling और ड्रग्स का धंधा करता है , पर रुद्रा और एंथोनी जो अ...
અમદાવાદ શહેરની સવાર રોજની જેમ વ્યસ્ત હતી. રસ્તાઓ પર વાહનોનો શોર, લોકોની દોડધામ અને મોબાઇલની રિંગટોન… આ બધાની વચ્ચે 28 વર્ષની આરોહી પોતાના ઓફિસ માટે તૈયાર થઈ રહી હતી. આરોહી એક...
1.प्रेम या व्यापार? जिसे तुम प्रेम कहते हो, ज़रा उसकी तह में जाकर देखो, क्या वो रूह का मिलन है, या बस एक गहरा समझौता? तुमने जिसे अपना कहा, क्या उसे सच में जाना है? या अपनी अध...
मुंबई का एक मशहूर कॉलेज, कैंटीन की भीड़ और दोस्तों की मस्ती। एग्जाम्स खत्म हो चुके थे और सभी के चेहरों पर छुट्टियों की खुशी थी। राम, विनोद, सृष्टि, अनामिका, सौरभ, मेहुल और मोनिक...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
"रात का गहरा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ तेज़ बारिश और बिजली की कड़क तोड़ रही थी। 8 साल की छोटी आन्या अपने रास्ते से भटक कर घने जंगल के बीचों-बीच खड़ी थी। उसके नन्हे पाँव कीचड़ में...
त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...
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