Mafia King - 1 in Hindi Love Stories by Sah Ankita books and stories PDF | Mafia King - 1

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Mafia King - 1

अध्याय 1: रणविजय शेखावत

उसका नाम रणविजय शेखावत है। पूरी दुनिया उसे एक बेरहम, पत्थर दिल और 'कोल्ड प्रिंस' के नाम से जानती है। वह सिर्फ एक हैंडसम बैचलर ही नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड का एक बेहद खूबसूरत और खूंखार माफिया भी है। उसकी ज़िंदगी का केवल एक ही नियम और एक ही लक्ष्य है—सिर्फ काम और कामयाबी।
शेखावत साम्राज्य का परिवार:
रणविजय के आलीशान घर में उसकी माँ मीरा शेखावत, पिता विनोद शेखावत और उसकी चुलबुली, चंचल बहन परी शेखावत रहते हैं। इस राजघराने जैसे परिवार के मार्गदर्शक उसके दादा-दादी, महेश और मोहिनी शेखावत हैं।
पूरे घर की कमान दादा जी (महेश शेखावत) के हाथों में है। वह इस खानदान के कड़े मुखिया हैं, जिनका खौफ ऐसा है कि उनके सामने किसी की आवाज़ नहीं निकलती। जो हुक्म उन्होंने एक बार दे दिया, घर का हर सदस्य बिना सवाल किए उसी काम में जुट जाता है।

वैसे तो रणविजय के कड़क मिज़ाज से पूरा घर थर-थर कांपता है (सिवाय उसके दादा जी के, जिनसे रणविजय खुद तमीज़ से पेश आता है), लेकिन उसकी माँ मीरा के दिल में अपने इस लाडले बेटे के लिए बेइंतहा मोहब्बत है। वह पूरे परिवार से प्यार करती है, पर रणविजय उनकी जान है।
अध्याय 2: अंकिता सिंह (मासूमियत का चेहरा)

अब रुख करते हैं कहानी की नायिका (Female Lead) की तरफ, जिसका नाम है अंकिता सिंह। अंकिता सादगी और मासूमियत की मूरत है। वह दिल की इतनी साफ और परवाह करने वाली लड़की है कि जो भी उससे मिलता है, उसका मुरीद हो जाता है।
अंकिता के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। उसके छोटे से परिवार में अब सिर्फ उसकी माँ शालिनी सिंह और उसका छोटा भाई ऋषभ हैं, जो अभी दसवीं क्लास में पढ़ता है। अपनी माँ और भाई की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए अंकिता हर छोटी-बड़ी मुश्किल का हंसकर सामना करती है।

अध्याय 3: 1000 करोड़ का दांव
दूसरी तरफ, रणविजय का काफिला सीधे उसके आलीशान होटल के सामने आकर रुका। गाड़ी से उतरते ही उसके तेवर सातवें आसमान पर थे। उसने बिना वक्त गंवाए तुरंत सारी ज़रूरी फाइलें हाथ में लीं और उनकी जांच शुरू कर दी।
जब रणविजय अपने मुख्य ऑफिस में दाखिल हुआ, तो वहां का सन्नाटा चीखने लगा। रणविजय एक बेहद सख्त और उसकी एक ही नज़र कर्मचारियों के पसीने छुड़ाने के लिए काफी थी। उसे देखते ही सब अपनी कटी-फटी सांसें रोककर वापस काम में डूब गए।
रणविजय प्राइवेट लिफ्ट में सवार हुआ और 100वें फ्लोर का बटन दबाया। लिफ्ट सीधे उसके बेहद आलीशान और लग्जरी केबिन पर जाकर रुकी। केबिन में कदम रखते ही वह सीधे अपनी चेयर पर जा बैठा और फाइलों में खो गया।
दरअसल, वह मुंबई के अब तक के सबसे भव्य और बड़े होटल की ओपनिंग की तैयारियों में जुटा था। यह 1000 करोड़ रुपये का एक मेगा प्रोजेक्ट था। रणविजय अपने काम में रत्ती भर भी कमी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं करता था, और इसी परफेक्शन के जूनून की वजह से इन दिनों उसका पारा हमेशा हाई रहता था और वह भयंकर फ्रस्ट्रेशन (तनाव) से गुजर रहा था। 
अध्याय 4: एक गलत नंबर और बढ़ा हुआ पारा
केबिन के सन्नाटे में रणविजय बेहद बारीकी से अपनी फाइलों को खंगाल रहा था, तभी टेबल पर रखे उसके फोन की स्क्रीन चमकी और एक अनजान नंबर फ्लैश होने लगा। रणविजय ने एक ठंडी नज़र फोन पर डाली, लेकिन उसे इग्नोर कर दिया। पहली घंटी पूरी बजने के बाद कट गई।
वह नहीं जानता था कि स्क्रीन के उस पार से कॉल करने वाली कोई और नहीं, बल्कि कहानी की नायिका अंकिता थी। अंकिता एक टेलीकॉम कॉल सेंटर में काम करती थी। दरसल, सिस्टम की खराबी या किसी लापरवाही की वजह से उसे जो नंबर मिला था, उसका आखिरी अंक गलत था। अंजाने में ही सही, उसकी उंगलियों ने देश के सबसे बड़े बिज़नेस टायकून और माफिया प्रिंस रणविजय शेखावत का नंबर डायल कर दिया था। अंकिता इस बात से बिल्कुल बेखबर थी। उसने दोबारा हिम्मत जुटाई और री-डायल किया। इस बार दूसरी ही रिंग में कॉल रिसीव हो गया।
रणविजय ने फोन कान से लगाया और उसकी गहरी, रूड आवाज़ केबिन में गूंजी— "हेलो।"
दूसरी तरफ से एक बेहद सुरीली, संस्कारी और प्रोफेशनल आवाज़ आई— "हेलो, गुड आफ्टरनून सर! क्या मेरी बात मिस्टर रणविजय से हो रही है?"
अजनबी के मुंह से सीधे अपना नाम सुनकर रणविजय की भौंहें सिकुड़ गईं। उसने तुरंत फोन कान से हटाकर स्क्रीन पर देखा— नंबर बिल्कुल साधारण 10 अंकों का था।
अंकिता उस वक्त अपनी डेस्क पर बैठी पूरी लगन से ड्यूटी निभा रही थी। नौकरी नई-नई थी, इसलिए वह कंपनी के प्रति वफादार थी और अपनी परफॉर्मेंस को बेस्ट बनाना चाहती थी। बिना वक्त गंवाए, वह अपने रटे-रटाए स्क्रिप्ट पर आ गई और बेहद मीठी आवाज़ में टीवी रिचार्ज ऑफर्स की बारीकियां समझाने लगी— "सर, हमारी कंपनी आपके लिए लाई है स्पेशल टीवी पैकेजेस। अगर आप 3 महीने, 6 महीने या पूरे 1 साल का रिचार्ज एक साथ कराते हैं, तो आपको मिलेंगे शानदार फायदे..."
वह बोले जा रही थी, और इधर रणविजय के माथे पर गुस्से की लकीरें गहरी होती जा रही थीं। उसका कीमती वक्त एक मामूली रिचार्ज ऑफर के लिए बर्बाद किया जा रहा था, वह भी तब जब उसका दिमाग 1000 करोड़ के प्रोजेक्ट के तनाव से फटा जा रहा था।...