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मारकेश कहता है, " तुम्हें पता भी है तुम किस तलवार का नाम ले रहे हो, और वह तुम्हा...
कविताओं का संग्रह-भाग:1 लेखिका ...
It was seven o'clock in the morning. The city streets were slowly coming to...
एपिसोड 30: अंधेरे की अंतिम परछाईशहर की बेचैनीशहर में शांति लौटती दिख रही थी, लेक...
"पिछले अध्यायों से हम यह समझ रहे हैं कि परमात्मा अपने वास्तविक स्वरूप में निराका...
ગઈકાલે રાતે જમ્યા પછી હું એકલો લટાર મારવા નીકળ્યો હતો. શહેરની બધી હલચલ શમી ગઈ હત...
अध्याय 16 उच्च लड़ाकू योद्धा का उदयदिव्य नीलामी कला केंद्र से निकलने के बाद, विर...
"હેલ્લો.. હેલ્લો.." નવનીત કહે છે."શું થયું? હું એમ.એલ.એ. જ વાત કરું છું." સામે થ...
હઠીસિંહ દરબાર ટેરી ગામના મુખી. ભલા અને દયાળુ સરપંચ માણસ. ગામમાં ક...
(हवेली के हॉल में भारी सन्नाटा, जिसे केवल आर्यन की तेज़ सांसें और दूर कहीं गिरती...
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम के बोझ, पैसों की चिंता, रिश्तों की उलझनों और हर समय फोन-इंटरनेट के इस्तेमाल के कारण लगभग हर व्यक्ति तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से जूझ रहा है जिससे...
આજે નિશાનો જન્મદિવસ છે. તે ખૂબ જ ખુશ છે. આજે તેના 21 વર્ષ પુરા થયા અને તે 22મા વર્ષ માં બેઠી. નિશા વહેલી સવારે જાગીને તૈયાર થઈ ગઈ, જોકે ઊંઘ ના નામે રાત્રે બે વાગ્યાથી પાંચ વાગ્યા સ...
यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक _समीर खान क़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूप शिकागो की शाम और ऊपर से गिर...
स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ?? क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं..... चलो जल्दी उठो जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...
ત્રીસ વરસની ઉંમર કેટલા વરસો પહેલા પસાર થઈ ગઈ એ યાદ કરવાનો પણ જેને ત્રાસ વરતાય એવા કોઈ કુંવારા યુવાનને આપ કદી મળ્યા છો? એની તકલીફ સમજવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે? આ નવલકથામાં આપનો...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की हर कड़क के साथ पूरा शहर काँप उठता, और उसी बारिश में श...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
પ્રસ્તાવનારવીન્દ્રનાથ ટાગોરની આ પહેલામાં પહેલી કવિતા છે. જ્યારે તેમની ઉંમર સોળ - સત્તર વર્ષ હશે. આ કાવ્ય ચાર સર્ગમાં વિભાજીત છે. કબિ-કાહિની કાવ્યનો ગુજરાતી અનુવાદ એટલે ‘કવિની કથા’...
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