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Pi(π) चा सिग्नल By Dr Phynicks

हिमशिखरावरील एकांत आणि दुर्लक्षित ज्ञान

हिमालयाच्या गोठवणाऱ्या एकाकी शांत कुशीत, १३,०८० फूट उंचीवर वसलेल्या एका जुन्या वेधशाळेत डॉ. अवंतिका जोशी या ज्येष्ठ खगोलशास्त्रज्ञ महिलेच...

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યાદોં ની સહેલગાહ - રંજન કુમાર દેસાઈ By Ramesh Desai

તે સમયે, હું ત્રણ વર્ષનો હતો, મારો મોટો ભાઈ સુખેશ પાંચ વર્ષનો હતો, અને મારી નાની બહેન ભાવિકા ફક્ત છ મહિનાની હતી. મારી માતા એક ગંભીર બીમારીનો ભોગ બની હતી.

તેણીને કાંદિવલી...

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दीवाने की दिवानियत By kajal jha

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट
दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...

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Unforgettable Voyage - Ranjan Desai By Ramesh Desai

At that time, I was three years old, my elder brother Sukhesh was five, and my younger sister Bhavika was only six months old. My mother had fallen victim to a terminal illness....

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तेरी मेरी कहानी By smita

ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्...

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यशस्विनी By Dr Yogendra Kumar Pandey

यशस्विनी 21वीं सदी में महिलाओं की बदलती भूमिकाविषय पर एक आलेख लेखन में व्यस्त है।अपने लैपटॉप पर हेडफोन से वॉइस टाइपिंग करने केसमय वह कई बार भावनाओं में डूबती- उतरती रही। उसने यह मह...

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नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई By Dr. Suryapal Singh

गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...

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ঝরাপাতা By Srabanti Ghosh

সন্ধ্যা নামার ঠিক আগের এই সময়টা খুব প্রিয় মণিকার। যখন স্কুল কলেজে পড়ত, এই সময়ে এককাপ চা নিয়ে মায়ের সঙ্গে বসত গোল বারান্দায়। মা বসতে চাইত না, সন্ধে দিতে হবে, জলখাবার করতে হবে,...

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उजाले की ओर By Pranava Bharti

मित्रों ! प्रणाम जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता है ,कुछ तिरोहित हो जाता है |हम एक आशा की प्रतीक्षा में खड़े...

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યાદોં ની સહેલગાહ - રંજન કુમાર દેસાઈ By Ramesh Desai

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मित्रों ! प्रणाम जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता है ,कुछ तिरोहित हो जाता है |हम एक आशा की प्रतीक्षा में खड़े...

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