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वैवाहिक जीवन में प्रेम कैसे बना रहे?परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं, “पूरी दुनिया...
एपिसोड 12: स्कूल की सफलता का जश्न और नई पहचान स्कूल की शुरुआत को अब एक साल बीत च...
STILL MY MITRONViha stayed late at the office, buried under files of work. By th...
तलवार अभी भी वर्धान की गर्दन पर थी।पारस की आँखें — गुस्से से भरी।वर्धान ने हिलने...
Episode 1: पहली रात… लेकिन वैसी नहींकमरे में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी…फूलों...
शिवाजी जूते पॉलिश कर रहा था। तभी एक गाड़ी आकर रुकी। उसमें से एक नौजवान लड़का उतर...
వెన్నెల పూలు ఏ స్పైసీ హాట్, రొమాంటిక్, సస్పెన్స్ అండ్ సైకలాజికల్ థ్రిల్లర్ కొట్ర...
16.एक ही गर्भ, एक ही लहूतुम ऊँचे सिंहासन पर बैठे, खुद को 'विधाता' मानते...
भाग - 3 *Tags:* #Dhoka #Talaak #EkTarfaPyaar #HusbandWife #EmotionalTwist #Myste...
હજી તો આર્યન અને તેનો મિત્ર વાવના કાંઠે ઊભા રહીને વાતો જ કરતા હતા, ત્યાં જ...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ಪರದೆ ಸರಿಯುವ ಕ್ಷಣ. ಆಕಾಶದಿಂದ ಬೀಳುತ್ತಿದ್ದ ಮಳೆಯ ಹನಿಗಳು...
*"सात फेरों का इंतज़ार, सौ सवालों की बरसात"* _ प्रेम कहानी - किरण और मधुकर_---किरण गाँव की सबसे भोली और सीधी-साधी लड़की थी। उसका स्वभाव इतना विनम्र था कि पूरा गाँव...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
Happiness (1) Pain or happiness, always smiling mom, whether night or day, always smiling mom sleeping in wet, keeping me dry, pampering mom, all year along, always smiling mom, wh...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
EPISODE 1: THE DAY EVERYTHING ENDS The sky above Neo-Terra was a bruised, synthetic purple, choked by the smog of a thousand industrial sectors and the invisible, suffocating fr...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
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