Best Comedy stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Comedy stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultu...Read More


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રોકડિયા સાહેબ By Haresh Trivedi

મારા પિતાજી પ્રાયમરી શાળાના શિક્ષક હતા અને હું તેમનીજ શાળામાં વિદ્યાર્થી હતો. છતાં મને જેતે સમયે ભણતર ન ચડયું તે નજ ચડ્યું. ભણતરના આ ભર્યા તળાવમાંથી ધો-૭ સુધી હું કોરો નીકળ્યો. પ્ર...

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મોજીસ્તાન - 13 By bharat chaklashiya

મોજીસ્તાન 13 હબાની દુકાને થયેલો ડખો જોઈને હુકમચંદ ઊભા રહ્યા. થોડા દિવસ પહેલા ધમૂડીએ ટેમુડાની દુકાને પોતાને સલવાડી દીધેલા એ હુકમચંદને યાદ આવ્યું. ધોળી ડોશીના હાથમાં રહેલી તેલની બરણી...

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માડે વાઘ ની ઠવું..! By bharat chaklashiya

માડે વાઘ ની ઠવું..! 1990 માં હું અમદાવાદ B Scપતાવીને સુરત આવ્યો હતો. જીવનની લડાઈમાં આ સાયન્સ ગ્રેજ્યુએશનની ડિગ્રીનું બુઠ્ઠું હથિયાર લઈને મારે લડવાનું હતું.શિક્ષક બનવાનું...

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टीके की कहानी By Anand M Mishra

टीका-टीका-टीका!! आज सभी जगह एक ही चर्चा है। आपने टीका लगवा लिया? जिसने लगवा लिया है वह अपनी बत्तीसी दिखाता है तथा जिसने नहीं लिया है वह मुंह फुलाया हुआ चेहरा दिखाता है। साथ ही में...

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મધપૂડામાં કાંકરીચાળો કરવો નહિ..! By Ramesh Champaneri

મધપૂડામાં કાંકરીચાળો કરવો નહિ..! અક્ષરથી અક્ષર મળે તો જ શબ્દ બને, પણ અઢી અક્ષરના અમુક શબ્દોની અડફટમાં આવ્યા તો, ક્યાં તો ન્યાલ કરે...

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प्रजातंत्र का इतिहास By Anand M Mishra

कुछ जानकार लोग कहते हैं - प्रजातंत्र की उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'डेमोस' से हुई है। डेमोस का अर्थ है 'जन साधारण' और क्रेसी का अर्थ है 'शासन'। लेकिन यह तथ्य वास्तविकता से कोसों दूर है। ऐ...

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हिन्दी या हिग्लिश By Alok Mishra

भाषाएं रस बदलती है, विलुपत होती है और परिष्कृत होती हैं। फिर हिंदी हिंगलाज क्यों होती जा रही है

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कवी असह्य. - 2 - असह्यांच झेंगाट. By टाकबोरू

चेकाळलेली दहशतवादी टोळी, बोकाळलेली महागाई व ढासळलेली अर्थव्यवस्था यापेक्षा चुरगळलेली प्रेमचिठ्ठी आणि त्यात मुरगळलेली मने ही आजच्या तरुणाईला जास्त जवळची वाटतात. शरीरात रसायनांच...

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बहस--परिचर्चा By Kishanlal Sharma

गांव की चौपालों और गली मोहल्लों के चबूतरों से निकलकर बहस टी वी चैनलो पर जा पहुंची है।आज कोई भी न्यूज़ चैनल बहस यानी परिचर्चा से अछूता नही है।धर्म,राजनीति,खेल,फ़िल्म, भ्रष्टचार, सरकार...

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अन्ना राजनीति में ‘‘मत’’ जाना .... By Alok Mishra

अन्ना राजनीति में ‘‘मत’’ जाना ....यह आलेख उस समय की तात्कालीन परिस्थितियो में व्यवस्था पर व्यंग्य के रूप में लिखा गया था जो अनेक अखबारों में प्रकाशित भी हुआ था । अन्ना आदरणीय है इस...

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बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? (व्यंग्य) By Sunil Jadhav

लेखक- डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव, नांदेड़ मो.९४०५३८४६७२ मास्टर जी ने कक्षा में एक लोकप्रिय पंक्ति सुनाते हुए कहा, बच्चों अब तुम्हारी बारी | तुम्हे एक कविता करके मुझे सुनानी हैं |”...

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ब्रेकिंग न्यूज - रामलाल देश छोड़ेगा (व्यंग्य) By Alok Mishra

ब्रेकिंग न्यूज - रामलाल देश छोड़ेगा अभी-अभी मिले समाचार के अनुसार रामलाल जी देश छोड़ने पर विचार कर रहे है । हमारे रामलाल जी आजकल बहुत परेशान है । आप रामलाल को तो जानत...

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११०१ By Sunil Jadhav

लेखक-डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव नांदेड,महाराष्ट्र मो-९४०५३८४६७२ एक रात सपने में बाबा गूगल द्वारा आकाशवाणी हुई, बेटा यूजर प्रो.बबन जी! सारी दुनिया वेबीनारा कर रही हैं और आप घ...

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ગરમી ગરમ ને માણસ નરમ..! By Ramesh Champaneri

ગરમી ગરમ માણસ નરમ ગરમી પણ કેવી બેફામ પડે શરીરમાં ઝરણ ફૂટ્યા કરે લપ્પૂક બની ગઈ લૂ ત્યારથી, રોજનું મરણ ફૂટ્યા કરે...

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गरीबी और झूठ ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

गरीबी और झूठ मंडी के पास एक हम्माल दीनू और ठेला चलाने वाला छोटू कुछ देर बैठे थे । दीनू बोला "आज तो मंडी में माल ही नहीं आया, काम है ही नहीं। है ....कि ...नहीं ।" छोटू ने...

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કોની ગાય કોનું ખાય..! By Ramesh Champaneri

કોની ગાય કોનું ખાય...! સમજમાં આવતું નથી કે, આ ગાવડાઓને ક્યાંથી ખબર પડી ગઈ, કે સરકાર પણ ‘આપને દ્વાર’ નામનો ઉદ્ધારક કાર્યક્રમ ચ...

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अभी तो ये अंगड़ाई है .. ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

अभी तो ये अंगड़ाई है .... एक दिन शहर की एक रैली में लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे ‘‘ अभी तो ये अंगड़ाई है.....आगे और लड़ाई है ।’’ सड़क के किनारे एक दुकान पर उतनी ही जोर से गान...

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कहानी भोला की - (अंतिम भाग ) By राज कुमार कांदु

पुलिस चौकी से निकल कर भोला एक पार्क के सामने लगे बेंच पर सो गया ।सुबह देर से नींद खुली थी । उठकर अब उसे कुछ काम धाम करने की चिंता सताने लगी । वहीँ बैठे हुए सोचने लगा ‘ अब हम क्या क...

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1992 The Magical Horror Mystery By Shamad Ansari

1992 {The Magical Horror Mystery} Chapter -1 The known and the unknown It is a manuscript called "The Festival of Forests' written by a sage by the name,Shiv Baba who unde...

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गरीबी सम्मेलन ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

गरीबी सम्मेलन शहर के एक आलीशान होटल में गरीबी सम्मेलन का आयोजन किया गया है । देश-विदेश से इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया । अधिकांश विशेषज्ञों ने गरीबों क...

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અવલ મંઝિલ By Shital Desai

અવલ મંઝિલ શીતલ દેસાઇ અવાશીઆ ‘જલ્દી કરો.. દોડો..’ એવા અવાજ સંભળાઈ રહ્યા હતાં. આ ૧૦૮ સાથે આવેલ ડોક્ટરે કહી દીધું કે કેસ ખલાસ છે.. પણ હું તો ત્યાં જ ખૂણામાં જ હતો. સાવ લપાઈને બેઠો હ...

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માણસ ચોમાસું બની ગયો..! By Ramesh Champaneri

માણસ ચોમાસું બની જાય ત્યારે..! વડવાઓ ખજાનો ભલે ના મૂકી ગયા હોય, પણ કહેવતો એવી મૂકી ગયેલા કે, જીવવા માટે ધર્મગ્રંથો નહિ ઉથલાવીએ તો પણ કંઈ લુંટાય નહિ...

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નૈના હૈ મોતીયાભરી...! By Ramesh Champaneri

નૈના હૈ મોતિયા ભરી..! કોઈપણ જાત-જાતી-પદાર્થ-વસ્તુ કે દેશ દેશાવરના કોઈને કોઈ પ્રકાર તો રહેવાના..! સાધુ સંતો ને ભગવાનના પ્રકારનો પણ ક્યાં તોટો છે દાદૂ..? આંખ સા...

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भैंस की उड़ान ( व्यंग्य) By Alok Mishra

भैंस की उड़ान कहावत तो सुनी होगी " अकल बड़ी या भैंस ।" हमारे आस पास बहुत से लोग हैं जिनके लिए भैंस ही बड़ी होती है । उनके लिए भैंस कहां और अकल कहां ? उन्हीं में से एक...

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ફેફસાં એક મંદિર By Ramesh Champaneri

ફેફસાં એક મંદિર આ તો એક મઝાક કે, ‘દિલ એક મંદિર’ ની જગ્યાએ ‘ફેફસાં એક મંદિર’ રાખીએ તો..? શબ્દો ક્યાં કોઈના ગુલામ છે..? શબ્દો ઉપ...

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જબરું લાયા  By Jatin Bhatt... NIJ

જતીન ભટ્ટ (નિજ) રચિત એક હાસ્ય રચના : અમારા આ જયેશ તુક્કા ને આઇડિયા આવ્યો કે, પહેલા તો તમને અમારા બધા ની ઓળખાણ આપી દઉં, અમે એટલે કે હું, ભગો એંગલ અને જયેશ તુક્કો....

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सब मिथ्या है By Anand M Mishra

सब मिथ्या है ईश्वर ने सृष्टि के निर्माण के समय लगता है कि अपना दिमाग बहुत चलाया होगा. यदि जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु को देखते हैं तो मन एकदम गुस्से से भर जाता है. वे क्षीरसागर म...

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રમૂજી રજાચિઠ્ઠી By Hardik Galiya

પ્રાર્થના પૂરી થયા પછી હાજરી લઈને રાવલ સાહેબે ગઈ કાલે ઘેરહાજર રહેલા વિદ્યાર્થીઓની રજાચિઠ્ઠી વાંચવાનું શરૂ કર્યું. ના ના વાંચવાનું નહિ પણ મશ્કરી કરવાનું શરુ કર્યું....

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कोई समाचार नहीं.. By Alok Mishra

कोई समाचार नहीं ... भोलाराम जी को समाचार देखे ,सुने और पढ़े बगैर चैन ही नहीं मिलता । यही कारण है देश ही नहीं पूरी दुनिया के घटनाक्रम पर हमेशा ही पकड़ बनाए रखते हैं । उ...

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ડોશીમા By mayur rathod

*ડોશીમા* રતનપર નામનું એક ગામ હતું. એ ગામમાં અંદાજે સો એક ખોરડા હશે! આખું ગામ એકબીજા જોડે હળીમળીને રહે. ગામના સીમાડે એક વૃદ્ધ વિધવા ડોશીમા રહેતા હતાં. તેમને એક દીકરી હતી. જેને લગ્ન...

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ईमानदारी का कीड़ा (व्यंग्य) By Alok Mishra

ईमानदारी का कीड़ा ( व्यंग्य ) हमारे आस-पास सामान्य लोगों की संख्या बहुत अधिक है । आज के समय में सामान्य वही है जो खुद खाता है औरों को खाने देता है। ले- दे के अपने और दूसरों क...

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नो गधा बनाइंग By Alok Mishra

गधा देश में यूं तो पूरे समय ही राजनीति की बहार रहती है परंतु चुनाव की आहट के साथ ही साथ गधों को गधा बनाने की पूरी राजनीति प्रारंभ हो जाती है । गधा देश के नेता अपने आप को जन...

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जुगाड़ (व्यंग्य) By Alok Mishra

जुगाड़ अरे.....आप शीर्षक पढ़कर क्या सोचने लगे? चलिए तो फिर आपकी और हमारी सोच को ही आगे बढ़ाते हैं । हमारा समाज कुछ खास नियमों से चलता है। इन नियमों से हट कर यदि आपको...

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सामाजिक देवी By राज कुमार कांदु

नमो नारायण की घोर तपस्या से गूगलेश्वर महाराज प्रसन्न हुए और उनसे वर माँगने को कहा।उनके समक्ष नतमस्तक होकर नमो नारायण बोला , " हे सर्वज्ञानी महाराज ! अगर आप मुझसे प्रसन्न हैं तो मुझ...

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समाज सेवक जी ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

"समाज सेवा का मजा मेवा जिसने चखा, उसकी जिंदगी धन्य हो गई।" यह वाक्य हमारा नहीं मेवालाल जी का है। मेवालाल वैसे तो एक व्यापारी हैं लेकिन उन्हें सब लोग समाज सेवक के नाम से जानते...

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हड़ासंखन गोत्र By Anand M Mishra

हमारे बाबा समाज में अपनी हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। गाँव में यदि किसी का मर्यादित मजाक उड़ाना है तो उस वक्त पूरे गाँव में वे बेजोड़ थे। गाँव की बात तो छोड़ ही दें, उनके जैसा पूरे...

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फाईल दौड़ (व्यंग्य ) By Alok Mishra

फाईल दौड़ (व्यंग्य ) हमारे बाबू साहब अपने ऑफिस में बैठे पान की जुगाली कर रहे थे कि बस अचानक चार फाईलें में अपने आरंभ स्थल यानी स्टार्टिंग प्वाइंट यानी टेबल पर पहुंचकर स...

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આદત સે પરેશાન By Viraj Pandya

आदत अच्छी हो तो इबादत बन जाती है। જીવન પ્રત્યેક ક્ષણ બદલાતું રહે છે. જીવનની કોઈ પણ બાબત એવી નથી જે સતત એક સરખી ચાલતી હોય. તમે રોજ એકજ સરખી સવાર જોતા હશો. પરંતુ આમાં પણ તમને કાયમ કશ...

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चोर (व्यंग्य ) By Alok Mishra

चोर (व्यंग्य ) नोखेलाल जी रोज ही शाम को टहलने निकलते हैं । कभी-कभी हम से उनकी मुलाकात हो जाती है । साठ की उम्र को पार करते अनोखेलाल अपने नाम को चरितार्थ करते हैं...

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छुट्टन लाल ..... जिंदाबाद  By Alok Mishra

छुट्टन लाल ..... जिंदाबाद "प्रणाम गुरुजी" कहते हुए उन्होंने हमारे घुटने छुए । आशीर्वाद के वचन के साथ ही वे सोफे पर अपनी तशरीफ रख चुके थे । हमारे घर आए हुए सज्जन को पू...

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वेलकम टू ड्रीम लैंड By Radha

कार्तिक ने हमेशा अपनी गर्लफ्रैंड से फ़ोन में ही बात की थीं। उसे कभी देखा नहीं था। आज वो अपनी गर्लफ्रैंड से मिलने गार्डन में जाता है, दोनों ने एक दूसरे को पहचानने का एक ड्रेस कोड रखा...

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कहानी सब्जीपुर की ( भाग -2 ) By राज कुमार कांदु

साथियों नमस्कार ! इससे पूर्व की कड़ी में आप सभी ने पढ़ा कि किस तरह आलूचन्द और कद्दू कुमारी की सगाई के मौके पर अचानक भिंडी कुमारी की वजह से अच्छा खासा बवाल हो गया और उनकी सगाई का मामल...

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चरणवंदन By Alok Mishra

चरणवंदन सोचता हूं सच कैसे बोलूं ? सच जो हमारे चारों ओर बिखरा है । सच जो मुझे दिखता है ,सच वह भी जो आपको दिखता है । मैं बोलने की कोशिश करता हूं और आप मौन रहते हैं । बहुत...

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हॉस्टल के किस्से By अनुराधा अनुश्री

होस्टल में शुरुआत के कुछ चट पटे से दिन और बिताई गई सबसे भयावह रात..एक भयावह रात हमारे कहानी का केंद्र है लेकिन उसके पहले मै हॉस्टल से जुड़ी कुछ खास यादें , कुछ खास बातें और वहां...

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રોકડિયા સાહેબ By Haresh Trivedi

મારા પિતાજી પ્રાયમરી શાળાના શિક્ષક હતા અને હું તેમનીજ શાળામાં વિદ્યાર્થી હતો. છતાં મને જેતે સમયે ભણતર ન ચડયું તે નજ ચડ્યું. ભણતરના આ ભર્યા તળાવમાંથી ધો-૭ સુધી હું કોરો નીકળ્યો. પ્ર...

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મોજીસ્તાન - 13 By bharat chaklashiya

મોજીસ્તાન 13 હબાની દુકાને થયેલો ડખો જોઈને હુકમચંદ ઊભા રહ્યા. થોડા દિવસ પહેલા ધમૂડીએ ટેમુડાની દુકાને પોતાને સલવાડી દીધેલા એ હુકમચંદને યાદ આવ્યું. ધોળી ડોશીના હાથમાં રહેલી તેલની બરણી...

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માડે વાઘ ની ઠવું..! By bharat chaklashiya

માડે વાઘ ની ઠવું..! 1990 માં હું અમદાવાદ B Scપતાવીને સુરત આવ્યો હતો. જીવનની લડાઈમાં આ સાયન્સ ગ્રેજ્યુએશનની ડિગ્રીનું બુઠ્ઠું હથિયાર લઈને મારે લડવાનું હતું.શિક્ષક બનવાનું...

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टीके की कहानी By Anand M Mishra

टीका-टीका-टीका!! आज सभी जगह एक ही चर्चा है। आपने टीका लगवा लिया? जिसने लगवा लिया है वह अपनी बत्तीसी दिखाता है तथा जिसने नहीं लिया है वह मुंह फुलाया हुआ चेहरा दिखाता है। साथ ही में...

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મધપૂડામાં કાંકરીચાળો કરવો નહિ..! By Ramesh Champaneri

મધપૂડામાં કાંકરીચાળો કરવો નહિ..! અક્ષરથી અક્ષર મળે તો જ શબ્દ બને, પણ અઢી અક્ષરના અમુક શબ્દોની અડફટમાં આવ્યા તો, ક્યાં તો ન્યાલ કરે...

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प्रजातंत्र का इतिहास By Anand M Mishra

कुछ जानकार लोग कहते हैं - प्रजातंत्र की उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'डेमोस' से हुई है। डेमोस का अर्थ है 'जन साधारण' और क्रेसी का अर्थ है 'शासन'। लेकिन यह तथ्य वास्तविकता से कोसों दूर है। ऐ...

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हिन्दी या हिग्लिश By Alok Mishra

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चेकाळलेली दहशतवादी टोळी, बोकाळलेली महागाई व ढासळलेली अर्थव्यवस्था यापेक्षा चुरगळलेली प्रेमचिठ्ठी आणि त्यात मुरगळलेली मने ही आजच्या तरुणाईला जास्त जवळची वाटतात. शरीरात रसायनांच...

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अन्ना राजनीति में ‘‘मत’’ जाना ....यह आलेख उस समय की तात्कालीन परिस्थितियो में व्यवस्था पर व्यंग्य के रूप में लिखा गया था जो अनेक अखबारों में प्रकाशित भी हुआ था । अन्ना आदरणीय है इस...

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बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? (व्यंग्य) By Sunil Jadhav

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ગરમી ગરમ ને માણસ નરમ..! By Ramesh Champaneri

ગરમી ગરમ માણસ નરમ ગરમી પણ કેવી બેફામ પડે શરીરમાં ઝરણ ફૂટ્યા કરે લપ્પૂક બની ગઈ લૂ ત્યારથી, રોજનું મરણ ફૂટ્યા કરે...

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गरीबी और झूठ ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

गरीबी और झूठ मंडी के पास एक हम्माल दीनू और ठेला चलाने वाला छोटू कुछ देर बैठे थे । दीनू बोला "आज तो मंडी में माल ही नहीं आया, काम है ही नहीं। है ....कि ...नहीं ।" छोटू ने...

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अभी तो ये अंगड़ाई है .. ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

अभी तो ये अंगड़ाई है .... एक दिन शहर की एक रैली में लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे ‘‘ अभी तो ये अंगड़ाई है.....आगे और लड़ाई है ।’’ सड़क के किनारे एक दुकान पर उतनी ही जोर से गान...

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1992 The Magical Horror Mystery By Shamad Ansari

1992 {The Magical Horror Mystery} Chapter -1 The known and the unknown It is a manuscript called "The Festival of Forests' written by a sage by the name,Shiv Baba who unde...

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गरीबी सम्मेलन ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

गरीबी सम्मेलन शहर के एक आलीशान होटल में गरीबी सम्मेलन का आयोजन किया गया है । देश-विदेश से इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया । अधिकांश विशेषज्ञों ने गरीबों क...

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અવલ મંઝિલ By Shital Desai

અવલ મંઝિલ શીતલ દેસાઇ અવાશીઆ ‘જલ્દી કરો.. દોડો..’ એવા અવાજ સંભળાઈ રહ્યા હતાં. આ ૧૦૮ સાથે આવેલ ડોક્ટરે કહી દીધું કે કેસ ખલાસ છે.. પણ હું તો ત્યાં જ ખૂણામાં જ હતો. સાવ લપાઈને બેઠો હ...

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માણસ ચોમાસું બની ગયો..! By Ramesh Champaneri

માણસ ચોમાસું બની જાય ત્યારે..! વડવાઓ ખજાનો ભલે ના મૂકી ગયા હોય, પણ કહેવતો એવી મૂકી ગયેલા કે, જીવવા માટે ધર્મગ્રંથો નહિ ઉથલાવીએ તો પણ કંઈ લુંટાય નહિ...

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નૈના હૈ મોતીયાભરી...! By Ramesh Champaneri

નૈના હૈ મોતિયા ભરી..! કોઈપણ જાત-જાતી-પદાર્થ-વસ્તુ કે દેશ દેશાવરના કોઈને કોઈ પ્રકાર તો રહેવાના..! સાધુ સંતો ને ભગવાનના પ્રકારનો પણ ક્યાં તોટો છે દાદૂ..? આંખ સા...

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भैंस की उड़ान ( व्यंग्य) By Alok Mishra

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ફેફસાં એક મંદિર By Ramesh Champaneri

ફેફસાં એક મંદિર આ તો એક મઝાક કે, ‘દિલ એક મંદિર’ ની જગ્યાએ ‘ફેફસાં એક મંદિર’ રાખીએ તો..? શબ્દો ક્યાં કોઈના ગુલામ છે..? શબ્દો ઉપ...

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જબરું લાયા  By Jatin Bhatt... NIJ

જતીન ભટ્ટ (નિજ) રચિત એક હાસ્ય રચના : અમારા આ જયેશ તુક્કા ને આઇડિયા આવ્યો કે, પહેલા તો તમને અમારા બધા ની ઓળખાણ આપી દઉં, અમે એટલે કે હું, ભગો એંગલ અને જયેશ તુક્કો....

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सब मिथ्या है By Anand M Mishra

सब मिथ्या है ईश्वर ने सृष्टि के निर्माण के समय लगता है कि अपना दिमाग बहुत चलाया होगा. यदि जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु को देखते हैं तो मन एकदम गुस्से से भर जाता है. वे क्षीरसागर म...

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રમૂજી રજાચિઠ્ઠી By Hardik Galiya

પ્રાર્થના પૂરી થયા પછી હાજરી લઈને રાવલ સાહેબે ગઈ કાલે ઘેરહાજર રહેલા વિદ્યાર્થીઓની રજાચિઠ્ઠી વાંચવાનું શરૂ કર્યું. ના ના વાંચવાનું નહિ પણ મશ્કરી કરવાનું શરુ કર્યું....

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कोई समाचार नहीं.. By Alok Mishra

कोई समाचार नहीं ... भोलाराम जी को समाचार देखे ,सुने और पढ़े बगैर चैन ही नहीं मिलता । यही कारण है देश ही नहीं पूरी दुनिया के घटनाक्रम पर हमेशा ही पकड़ बनाए रखते हैं । उ...

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ડોશીમા By mayur rathod

*ડોશીમા* રતનપર નામનું એક ગામ હતું. એ ગામમાં અંદાજે સો એક ખોરડા હશે! આખું ગામ એકબીજા જોડે હળીમળીને રહે. ગામના સીમાડે એક વૃદ્ધ વિધવા ડોશીમા રહેતા હતાં. તેમને એક દીકરી હતી. જેને લગ્ન...

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ईमानदारी का कीड़ा (व्यंग्य) By Alok Mishra

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नो गधा बनाइंग By Alok Mishra

गधा देश में यूं तो पूरे समय ही राजनीति की बहार रहती है परंतु चुनाव की आहट के साथ ही साथ गधों को गधा बनाने की पूरी राजनीति प्रारंभ हो जाती है । गधा देश के नेता अपने आप को जन...

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जुगाड़ (व्यंग्य) By Alok Mishra

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सामाजिक देवी By राज कुमार कांदु

नमो नारायण की घोर तपस्या से गूगलेश्वर महाराज प्रसन्न हुए और उनसे वर माँगने को कहा।उनके समक्ष नतमस्तक होकर नमो नारायण बोला , " हे सर्वज्ञानी महाराज ! अगर आप मुझसे प्रसन्न हैं तो मुझ...

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समाज सेवक जी ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

"समाज सेवा का मजा मेवा जिसने चखा, उसकी जिंदगी धन्य हो गई।" यह वाक्य हमारा नहीं मेवालाल जी का है। मेवालाल वैसे तो एक व्यापारी हैं लेकिन उन्हें सब लोग समाज सेवक के नाम से जानते...

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हड़ासंखन गोत्र By Anand M Mishra

हमारे बाबा समाज में अपनी हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। गाँव में यदि किसी का मर्यादित मजाक उड़ाना है तो उस वक्त पूरे गाँव में वे बेजोड़ थे। गाँव की बात तो छोड़ ही दें, उनके जैसा पूरे...

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फाईल दौड़ (व्यंग्य ) By Alok Mishra

फाईल दौड़ (व्यंग्य ) हमारे बाबू साहब अपने ऑफिस में बैठे पान की जुगाली कर रहे थे कि बस अचानक चार फाईलें में अपने आरंभ स्थल यानी स्टार्टिंग प्वाइंट यानी टेबल पर पहुंचकर स...

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આદત સે પરેશાન By Viraj Pandya

आदत अच्छी हो तो इबादत बन जाती है। જીવન પ્રત્યેક ક્ષણ બદલાતું રહે છે. જીવનની કોઈ પણ બાબત એવી નથી જે સતત એક સરખી ચાલતી હોય. તમે રોજ એકજ સરખી સવાર જોતા હશો. પરંતુ આમાં પણ તમને કાયમ કશ...

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चोर (व्यंग्य ) By Alok Mishra

चोर (व्यंग्य ) नोखेलाल जी रोज ही शाम को टहलने निकलते हैं । कभी-कभी हम से उनकी मुलाकात हो जाती है । साठ की उम्र को पार करते अनोखेलाल अपने नाम को चरितार्थ करते हैं...

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छुट्टन लाल ..... जिंदाबाद  By Alok Mishra

छुट्टन लाल ..... जिंदाबाद "प्रणाम गुरुजी" कहते हुए उन्होंने हमारे घुटने छुए । आशीर्वाद के वचन के साथ ही वे सोफे पर अपनी तशरीफ रख चुके थे । हमारे घर आए हुए सज्जन को पू...

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वेलकम टू ड्रीम लैंड By Radha

कार्तिक ने हमेशा अपनी गर्लफ्रैंड से फ़ोन में ही बात की थीं। उसे कभी देखा नहीं था। आज वो अपनी गर्लफ्रैंड से मिलने गार्डन में जाता है, दोनों ने एक दूसरे को पहचानने का एक ड्रेस कोड रखा...

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कहानी सब्जीपुर की ( भाग -2 ) By राज कुमार कांदु

साथियों नमस्कार ! इससे पूर्व की कड़ी में आप सभी ने पढ़ा कि किस तरह आलूचन्द और कद्दू कुमारी की सगाई के मौके पर अचानक भिंडी कुमारी की वजह से अच्छा खासा बवाल हो गया और उनकी सगाई का मामल...

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चरणवंदन By Alok Mishra

चरणवंदन सोचता हूं सच कैसे बोलूं ? सच जो हमारे चारों ओर बिखरा है । सच जो मुझे दिखता है ,सच वह भी जो आपको दिखता है । मैं बोलने की कोशिश करता हूं और आप मौन रहते हैं । बहुत...

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हॉस्टल के किस्से By अनुराधा अनुश्री

होस्टल में शुरुआत के कुछ चट पटे से दिन और बिताई गई सबसे भयावह रात..एक भयावह रात हमारे कहानी का केंद्र है लेकिन उसके पहले मै हॉस्टल से जुड़ी कुछ खास यादें , कुछ खास बातें और वहां...

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