Best Comedy stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Comedy stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultu...Read More


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मैं कोरोनावायरस बोल रहा हूं By Alok Mishra

मैं कोरोनावायरस बोल रहा हूं हाँ तो साहब मैं बोल रहा हूं । मैं यानी कौन ? मैं वही हूं ,जिसने पूरी दुनिया को परेशान किया हुआ है। मैं वही हूं जो आप लोगों का सर दर्द बन गया...

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बातों बातों में By Alok Mishra

बातों बातों में ----000---- - आप कौन है ? - नहीं पहचाना ? - नहीं तो ! - अपना नाम तो बताइए ? - दिमाग पर जोर डालिए। - आप कौन ......................... कौन .......

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ચાલો ઠીઠીયા કાઢીએ - 11 - જવાબદારીના ધાઢ જંગલમાં By Shailesh Joshi

ભાગ અગીયારવાચક મિત્રો, આગળના ભાગમાં આપણે જાણ્યું કે,આજે પ્યુન અશોક, ઉંચી Krain પર ચડી ગયેલ અડવીતરાને પકડી, એને ફેદોડી, એના ઘાભા ને ડૂચા કાઢી, વર્ષો જૂનો બદલો લેવા આટલો ઉતાવડો કેમ થ...

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आत्महत्या के अभिनव प्रयोग By Alok Mishra

आत्महत्या के अभिनव प्रयोग जमाना बदल रहा है, हम सब आधुनिक हो रहे है। इस आधुनिकता की दौड में हमारी खाना-पान, रहन-सहन के साथ ही साथ सोच-विचार भी बदल रहे है। मज़ावादी आधुनिक संस्कृ...

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બાળકો By Yuvrajsinh jadeja

બાળકો આજનો વિષય છે 'બાળકો' . કદાચ આ લેખ શરૂ કરતી વખતે મારા મોઢા પર આવતું ચમકદાર સ્મિત હું તમને બતાવી શકતો હોત . ખરેખર બાળકો બહું જ અદભુત વિષય છે હો . દુનિયાભરના...

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अंकल By Kishanlal Sharma

"अंकल जी कुर्ला की एम एस टी बना दो।"खूबसूरत बाला अपना परिचय पत्र देते हुए बोली।उस युवा सुंदरी के मुंह से अंकल सुनकर तन बदन में आग लग गई।पर बोले कुछ नही।मन मसोसकर रह गए।लल्लू की बुक...

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मैं नेता बनुंगा By Alok Mishra

मैं नेता बनुंगा आज तो मैं भौचक्का ही रह गया । उसने बस इतना ही कहा ‘‘ सर मैं नेता बनना चाहता हुॅ । ’’ सच कहुॅ तो शिक्षा विभाग में मेरा थट्टी ईयर का एक्सपीरियन्स धरा का ध...

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लाल  - हरी लाईट By Alok Mishra

लाल - हरी लाईट हम तो ठहरे छोटे से कस्बे में रहने वाले छोटे से आदमी । जब हमारे कस्बे में कोई कालेज खुल जाये , कोई अस्पताल दस से बीस बिस्तर का हो जाए या किसी चौक पर किसी...

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લોકડાઉનના કરતૂત By Bhavesh

ડરતાં ડરતાં આમથી તેમ દસ ડગલા ને ફરી તેમથી આમ દસ ડગલા. કંઈક અલગજ મુંઝવણ ફીલ થતી હતી...એ મૂંઝવણ પણ સ્વાભાવિક હતી. ચાલતા ચાલતા નજર કરી તો હજુ સવારના સાડા પાંચ જ થયા હતા ને જીવનમાં આજે...

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હસતા નહીં હો! - 20 - આળસ : એક વરદાન By પ્રથમ પરમાર

એક જમાનો હતો જ્યારે નિશાળના અને શિક્ષકોના દુર્ભાગ્ય હું પણ ભણવા જતો. લગભગ મારા ભીરુ સ્વભાવને ધ્યાનમાં રાખીને જ 'ચિત્રલેખા' દેવીએ મારા નસીબમાં એક જ શાળામાં અભ્યાસ કરવાનું...

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तबादलोत्सव By Anand M Mishra

उत्सव का नाम बहुत सुना था। देखा था। भाग लिया था। रंगोत्सव, फागोत्सव, दीपोत्सव, नववर्ष उत्सव। बीच-बीच में महोत्सव भी देखता-सुनता था। लेकिन यहाँ चर्चा “तबादलोत्सव” की कर रहे हैं। यह...

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छोटा सट्टा-बड़ा सट्टा By Alok Mishra

छोटा सट्टा-बड़ा सट्टा एक छोटे से चाय के टपरे के पास खड़े एक आदमी को एक बच्चा पैसे देकर ‘‘ओपन और क्लोज लगाने’’ के लिए कहता है । बस दूसरे दिन वो बच्चा किसी अखबार के कोने में अलग...

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एक जानवर का सच (व्यंग्य) By Alok Mishra

 एक जानवर का सच  एक सर्वे के अनुसार इन्टरनेट और मोबाइल के कारण अपराध और परिवारों का टूटना बढ़ा है इसके पीछे क्या कारण हो सकते है ? इसे जानने के लिए कृपा करके आप...

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पाक स्थान (व्यंग्य) By Alok Mishra

पाक स्थान (व्यंग्य) आपने शीर्षक तो ध्यान से पढा है न ? यहाँ हम अपने उस पडोसी की बात नहीं कर रहे है जिसे लाख कोशिशों के बाद भी हम बदल नही सके । हमारा पडोसी पाकिस्तान हमे...

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કેરી By Yuvrajsinh jadeja

ઉનાળો આવી ગયો છે . આખો દિવસ ફરી ફરીને છત પરના પંખા પણ હવે થાકવા લાગ્યા છે . સૌરાષ્ટ્રનો રહેવાસી છું એટલે ઉનાળામાં કેરીની વાત કર્યા વગર નથી રહી શકતો . આજે ઘરમાં મોસમની પહેલ...

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भगवान फॅस गए.....( व्यंग्य) By Alok Mishra

भगवान फॅस गए..... हमारे रामलाल जी हमेशा ही परेशानियों में रहते है । कुछ लोगों कहते है कि उनका और परेशानियों का चोली-दामन का साथ है तो कुछ लोग रामलाल को पैदायशी परेशान आदमी मा...

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त्याची बायको By वैशाली बनकर

"मी करेल त्याच्याशी लग्न"........... असे शब्द कानी पडताच कार्यालयातील सगळ्यांच्या माना आपसुक च मागे वळल्या.. एक 23 वर्षाची मुलगी मोठ्या आत्मविश्वास आणि आनंदात नवऱ्या मुलाकडे (अभिर...

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નિંદર By Yuvrajsinh jadeja

આજ અચાનક મને નિંદર ઉપર લખવાનું મન થયું એ પણ એટલે કે રાતના બાર વાગ્યા છે પણ નિંદર નથી આવતી . નિંદર રોજિંદી અને સહજ ક્રિયા છે એટલે કદાચ આપણને વિચાર નહીં આવતો હોય કે નિંદર ક...

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किरदारों की दुकान ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

किरदारों की दुकान अमा यार ................. आप क्या सोचने लगे, ज्यादा ना सोचो, सोचने से लोगों का सिर दुखने लगता है और फिर ........... आपका ये नाचिज खिजमतदार आखिर किस दिन...

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એક મુલાકાત.... દરિયાકિનારે... By Bhumi Gohil

(સવાર ના 8 વાગ્યે)"અરે રાધુ કેટલો ટાઈમ જલ્દી આવ યાર...""અરે બાબા આવું છું તારે ક્યાં ટ્રેન છૂટી જાય છે શાંતી રાખને,"(અરે ભઈ એક મિનીટ intro કરાવી દવ?)(આ છે આપણી bestie માધવી સવાર સવ...

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आत्‍मसम्‍मान By rajendra shrivastava

कहानी--- आत्‍मसम्‍मान राजेन्‍द्र कुमार श्रीवास्‍तव,...

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आज मतगणना है.......(व्यंग्य) By Alok Mishra

आज मतगणना है....... आजकल एक हंगामा सा बरपा है । पिछले कुछ दिनों से जिसे देखिए एक ही बात करता है और बात है .... चुनाव की । चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता में प्रशासकीय...

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પ્રેમની કબૂલાત By Bhumi Gohil

પ્રેમ ની કબૂલાત? અરે વાહ!? આજે તો કંઈક વધારે જ શાંતિ છે નઈ મારા ઘરમાં... ઓ મેડમ...ક્યાં ગયા...રાધુ...... ક્યાં છે...યાર...? અમારા સાહેબે ઘરમાં પગ મુકતા જ બોલવાનું ચાલુ કરી દીધું. બ...

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जूता पुराण  By Alok Mishra

जूता पुराण आज खबरों में रोज ही जूतों की महिमा का गुणगान हो रहा है । जहाॅ देखिए वहीं निर्भीक भाव से जूते चलाए जा रहे है । जूते खाने वाले अक्सर ही ऐसे लोग होते...

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ફાંકડી By SUNIL ANJARIA

ફાંકડીડોક્ટરનું દવાખાનું ખુલી ગયેલું પણ ડોક્ટર હજુ આવ્યા ન હતા. ફાસ્ટ ફરતા પંખા સાથે ડેટોલની વાસ તાજા કરેલા પોતાં સાથે વેઇટિંગ લાઉન્જમાં ફરતી હતી. અત્યારે ન હોય પણ નાક દવાની કલ્પિત...

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सियासत के हवाले से By Satyadeep Trivedi

सियासत के हवाले सेजिस प्रकार आत्मा मरती नहीं है, केवल पुराने शरीर को छोड़कर नये शरीर में प्रवेश कर जाती है। ठीक वैसे ही नेता भी नहीं मरता है। वो पुरानी पार्टी को छोड़कर नयी पार्टी मे...

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અને મેં હા કહી દીધી... By Bhumi Gohil

તો મીત્રો... તૈયાર થઈ જાવ પ્રેમની અનોખી સફર માટે...સીટ બેલ્ટ બાંધી લો... ચા પાણી થેપલા સાથે રાખો....વાંચતા વાંચતા પેટ પકડીને હસવું પણ આવી શકે છે.... તો વાત છે ત્રણ વર્ષ પહેલાં ની જ...

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पाठलाग By संदिप खुरुद

दोन दिवसांपासून एक माणूस अजयचा पाठलाग करत होता. त्याच्यावर पाळत ठेवत होता. पहिल्या दिवशी अजयच्या एवढं लक्षात आलं नाही. पण दुसऱ्या दिवशी त्याला ते चांगलंच जाणवलं. तो...

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आभार (व्यंग्य ) By Alok Mishra

आभार (व्यंग्य ) हमारे यहाॅ कोई भी मंचीय कार्यक्रम हो बहुत ही पारंपरिक तरीके से ही होता है । पूरे कार्यक्रम के पश्चात् जब लोग उठ कर जाने लगते है, अतिथी अपना स्थान छोड़ कर स्व...

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ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ-ગમ્મત સાથે - 6 By Yuvrajsinh jadeja

(1) અવળા ગણેશ બેસવા...● ભીખુએ નવી સવી ઝેરોક્ષ & લેમીનેશનની દુકાન કરી હોય . બધી તૈયારીઓ જોરશોરથી થઈ ગઈ હોય . મશીનો દુકાનમાં ગોઠવાઈ ગયા હોય . સગા વ્હાલા , દોસ્ત મિત્રોને ઉદ્ઘાટન ના ક...

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स्वयम्की (व्यंग्य ) By Alok Mishra

स्वयम्की ( व्यंग्य ) आप सोच रहे होंगे मुझे ‘‘स्वयम् की’’ लिखना चाहिये था। लेकिन नहीं सहाब मैं ‘‘स्वयम्की’’ ही लिखना चाहता था और वही लिखा है। अब आजकल जमाना बद...

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परिचय या पहचान पत्र (व्यंग्य) By Alok Mishra

परिचय या पहचान पत्र एक दिन बेचारे शर्मा जी से हमारी मुलाकत एक चैराहे पर हो गई। बेचारे वो... और उनकी बेचारगी का कारण यह है कि वे इस युग में भी सभी काम नियमानुसार करने पर...

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प्रवक्ता जी By Alok Mishra

प्रवक्ता जी हाँ तो साहब बात को प्रारम्भ से ही प्रारम्भ करते है , हम आप से पूछना चाहते है कि क्या आप सखाराम को जानते है ? हमने इतना कठिन प्रश्न तो नहींं पूछा ...... अरे....

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R का बटन By Amulya Sharma

गांव में उत्साह का माहौल था क्योकि मेरे गांव में फोन लगने वाला था और यह बहुत ही बड़ी बात थी। गांव में बहुत सालों से फोन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी और सभी गांव वालों को किसी बाहरी व्य...

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Seven Days of Love By SHAMIM MERCHANT

"Aree…. All this is nothing, but foolish timepass for youngsters like you. There were no such extravagant days back then, when I was of your age."Grandma scolded me. I laughed and...

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गधादेश का मंत्रीमण्‍ड़ल By Alok Mishra

गधादेश का मंत्रीमण्‍ड़ल गधादेश में अभी-अभी चुनाव हुआ है । जैसा की आप तो जाते ही है, आज कल अल्‍पमत सरकारों का जमाना है । इसी से पता चलता है कि जनता को किसी पर भी भरोसा नहीं है...

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सेब क्यों गिरा By Alok Mishra

सेब क्यों गिरा एक दिन मैं यूॅ ही स्कूल के गलियारे में टहल रहा था । छुट्टी का समय होने के कारण छात्र-छात्राएँ भी कक्षाओं से बाहर यहाॅं-वहाॅं टहल रहे थे । एक कक्षा में बैठे...

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क्यों लिखूं....? By Alok Mishra

क्यों लिखूं....? आपका ये नाचीज कभी-कभार अपने मन की बात लिखकर आप तक पहुंचा कर अपने मन के बोझ को कम करता रहता है, इस लिखने के चक्कर में कभी प्रशंसा मिली तो कभी आलोचना, कभ...

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चोलबे ना - 9 - इज्जतदार लेखक By Rajeev Upadhyay

लेखक नामक प्रजाति के सदस्य अक्सर अकादमियों और मंत्रालय के अधिकारियों को कोसते रहते हैं। ये उनकी स्पष्ट राय है कि ये अधिकारी लेखकों को उनके जीते-जी सम्मान नहीं देते हैं। ये अधिकार...

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रामलाल का सन्यास By Alok Mishra

रामलाल का सन्यास अभी -अभी प्राप्त समाचार के अनुसार रामलाल जी ने राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है । रामलाल जी को तो आप जानते ही है । ये वे ही रामलाल है जिन्होंने अप...

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कस्बे का आई.सी.यू. By Alok Mishra

कस्बे का आई.सी.यू. ये एक छोटा सा कस्बा है । इस कस्बे में एक सरकारी अस्पताल भी है । जहॉं कुछ डॅ़ाक्टर केवल इसलिए आ जाया करते है कि उनकी तनख्वाह के साथ-साथ घरेलू दवाखाना भी...

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पंछी उवाच By Alok Mishra

पंछी उवाच ये जंगल बहुत ही अच्छा और सुंदर था । कल-कल करती नदियॉ , हरे-भरे पेड़ों से लदे पहाड़ और जानवरों की बहुतायत । हम जानवरों को सब कुछ इसी जंगल से ही मि...

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पुतला (व्यंग्य ) By Alok Mishra

‘‘पुतला’’ मैं पुतला हूँ। यदि आप न समझें हो तो मैं वही पुतला हूँ, जो दशहरे में रावण के रूप में और होली में होलिका के रूप में अनेक वर्षों से जलता रहा हूँ। मेरे अंगों के रूप में...

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मैं कोरोनावायरस बोल रहा हूं By Alok Mishra

मैं कोरोनावायरस बोल रहा हूं हाँ तो साहब मैं बोल रहा हूं । मैं यानी कौन ? मैं वही हूं ,जिसने पूरी दुनिया को परेशान किया हुआ है। मैं वही हूं जो आप लोगों का सर दर्द बन गया...

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बातों बातों में By Alok Mishra

बातों बातों में ----000---- - आप कौन है ? - नहीं पहचाना ? - नहीं तो ! - अपना नाम तो बताइए ? - दिमाग पर जोर डालिए। - आप कौन ......................... कौन .......

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ચાલો ઠીઠીયા કાઢીએ - 11 - જવાબદારીના ધાઢ જંગલમાં By Shailesh Joshi

ભાગ અગીયારવાચક મિત્રો, આગળના ભાગમાં આપણે જાણ્યું કે,આજે પ્યુન અશોક, ઉંચી Krain પર ચડી ગયેલ અડવીતરાને પકડી, એને ફેદોડી, એના ઘાભા ને ડૂચા કાઢી, વર્ષો જૂનો બદલો લેવા આટલો ઉતાવડો કેમ થ...

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आत्महत्या के अभिनव प्रयोग By Alok Mishra

आत्महत्या के अभिनव प्रयोग जमाना बदल रहा है, हम सब आधुनिक हो रहे है। इस आधुनिकता की दौड में हमारी खाना-पान, रहन-सहन के साथ ही साथ सोच-विचार भी बदल रहे है। मज़ावादी आधुनिक संस्कृ...

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બાળકો By Yuvrajsinh jadeja

બાળકો આજનો વિષય છે 'બાળકો' . કદાચ આ લેખ શરૂ કરતી વખતે મારા મોઢા પર આવતું ચમકદાર સ્મિત હું તમને બતાવી શકતો હોત . ખરેખર બાળકો બહું જ અદભુત વિષય છે હો . દુનિયાભરના...

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अंकल By Kishanlal Sharma

"अंकल जी कुर्ला की एम एस टी बना दो।"खूबसूरत बाला अपना परिचय पत्र देते हुए बोली।उस युवा सुंदरी के मुंह से अंकल सुनकर तन बदन में आग लग गई।पर बोले कुछ नही।मन मसोसकर रह गए।लल्लू की बुक...

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मैं नेता बनुंगा By Alok Mishra

मैं नेता बनुंगा आज तो मैं भौचक्का ही रह गया । उसने बस इतना ही कहा ‘‘ सर मैं नेता बनना चाहता हुॅ । ’’ सच कहुॅ तो शिक्षा विभाग में मेरा थट्टी ईयर का एक्सपीरियन्स धरा का ध...

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लाल  - हरी लाईट By Alok Mishra

लाल - हरी लाईट हम तो ठहरे छोटे से कस्बे में रहने वाले छोटे से आदमी । जब हमारे कस्बे में कोई कालेज खुल जाये , कोई अस्पताल दस से बीस बिस्तर का हो जाए या किसी चौक पर किसी...

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લોકડાઉનના કરતૂત By Bhavesh

ડરતાં ડરતાં આમથી તેમ દસ ડગલા ને ફરી તેમથી આમ દસ ડગલા. કંઈક અલગજ મુંઝવણ ફીલ થતી હતી...એ મૂંઝવણ પણ સ્વાભાવિક હતી. ચાલતા ચાલતા નજર કરી તો હજુ સવારના સાડા પાંચ જ થયા હતા ને જીવનમાં આજે...

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હસતા નહીં હો! - 20 - આળસ : એક વરદાન By પ્રથમ પરમાર

એક જમાનો હતો જ્યારે નિશાળના અને શિક્ષકોના દુર્ભાગ્ય હું પણ ભણવા જતો. લગભગ મારા ભીરુ સ્વભાવને ધ્યાનમાં રાખીને જ 'ચિત્રલેખા' દેવીએ મારા નસીબમાં એક જ શાળામાં અભ્યાસ કરવાનું...

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तबादलोत्सव By Anand M Mishra

उत्सव का नाम बहुत सुना था। देखा था। भाग लिया था। रंगोत्सव, फागोत्सव, दीपोत्सव, नववर्ष उत्सव। बीच-बीच में महोत्सव भी देखता-सुनता था। लेकिन यहाँ चर्चा “तबादलोत्सव” की कर रहे हैं। यह...

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छोटा सट्टा-बड़ा सट्टा By Alok Mishra

छोटा सट्टा-बड़ा सट्टा एक छोटे से चाय के टपरे के पास खड़े एक आदमी को एक बच्चा पैसे देकर ‘‘ओपन और क्लोज लगाने’’ के लिए कहता है । बस दूसरे दिन वो बच्चा किसी अखबार के कोने में अलग...

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एक जानवर का सच (व्यंग्य) By Alok Mishra

 एक जानवर का सच  एक सर्वे के अनुसार इन्टरनेट और मोबाइल के कारण अपराध और परिवारों का टूटना बढ़ा है इसके पीछे क्या कारण हो सकते है ? इसे जानने के लिए कृपा करके आप...

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पाक स्थान (व्यंग्य) By Alok Mishra

पाक स्थान (व्यंग्य) आपने शीर्षक तो ध्यान से पढा है न ? यहाँ हम अपने उस पडोसी की बात नहीं कर रहे है जिसे लाख कोशिशों के बाद भी हम बदल नही सके । हमारा पडोसी पाकिस्तान हमे...

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કેરી By Yuvrajsinh jadeja

ઉનાળો આવી ગયો છે . આખો દિવસ ફરી ફરીને છત પરના પંખા પણ હવે થાકવા લાગ્યા છે . સૌરાષ્ટ્રનો રહેવાસી છું એટલે ઉનાળામાં કેરીની વાત કર્યા વગર નથી રહી શકતો . આજે ઘરમાં મોસમની પહેલ...

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भगवान फॅस गए.....( व्यंग्य) By Alok Mishra

भगवान फॅस गए..... हमारे रामलाल जी हमेशा ही परेशानियों में रहते है । कुछ लोगों कहते है कि उनका और परेशानियों का चोली-दामन का साथ है तो कुछ लोग रामलाल को पैदायशी परेशान आदमी मा...

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त्याची बायको By वैशाली बनकर

"मी करेल त्याच्याशी लग्न"........... असे शब्द कानी पडताच कार्यालयातील सगळ्यांच्या माना आपसुक च मागे वळल्या.. एक 23 वर्षाची मुलगी मोठ्या आत्मविश्वास आणि आनंदात नवऱ्या मुलाकडे (अभिर...

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નિંદર By Yuvrajsinh jadeja

આજ અચાનક મને નિંદર ઉપર લખવાનું મન થયું એ પણ એટલે કે રાતના બાર વાગ્યા છે પણ નિંદર નથી આવતી . નિંદર રોજિંદી અને સહજ ક્રિયા છે એટલે કદાચ આપણને વિચાર નહીં આવતો હોય કે નિંદર ક...

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किरदारों की दुकान ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

किरदारों की दुकान अमा यार ................. आप क्या सोचने लगे, ज्यादा ना सोचो, सोचने से लोगों का सिर दुखने लगता है और फिर ........... आपका ये नाचिज खिजमतदार आखिर किस दिन...

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એક મુલાકાત.... દરિયાકિનારે... By Bhumi Gohil

(સવાર ના 8 વાગ્યે)"અરે રાધુ કેટલો ટાઈમ જલ્દી આવ યાર...""અરે બાબા આવું છું તારે ક્યાં ટ્રેન છૂટી જાય છે શાંતી રાખને,"(અરે ભઈ એક મિનીટ intro કરાવી દવ?)(આ છે આપણી bestie માધવી સવાર સવ...

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आत्‍मसम्‍मान By rajendra shrivastava

कहानी--- आत्‍मसम्‍मान राजेन्‍द्र कुमार श्रीवास्‍तव,...

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आज मतगणना है.......(व्यंग्य) By Alok Mishra

आज मतगणना है....... आजकल एक हंगामा सा बरपा है । पिछले कुछ दिनों से जिसे देखिए एक ही बात करता है और बात है .... चुनाव की । चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता में प्रशासकीय...

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પ્રેમની કબૂલાત By Bhumi Gohil

પ્રેમ ની કબૂલાત? અરે વાહ!? આજે તો કંઈક વધારે જ શાંતિ છે નઈ મારા ઘરમાં... ઓ મેડમ...ક્યાં ગયા...રાધુ...... ક્યાં છે...યાર...? અમારા સાહેબે ઘરમાં પગ મુકતા જ બોલવાનું ચાલુ કરી દીધું. બ...

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जूता पुराण  By Alok Mishra

जूता पुराण आज खबरों में रोज ही जूतों की महिमा का गुणगान हो रहा है । जहाॅ देखिए वहीं निर्भीक भाव से जूते चलाए जा रहे है । जूते खाने वाले अक्सर ही ऐसे लोग होते...

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ફાંકડી By SUNIL ANJARIA

ફાંકડીડોક્ટરનું દવાખાનું ખુલી ગયેલું પણ ડોક્ટર હજુ આવ્યા ન હતા. ફાસ્ટ ફરતા પંખા સાથે ડેટોલની વાસ તાજા કરેલા પોતાં સાથે વેઇટિંગ લાઉન્જમાં ફરતી હતી. અત્યારે ન હોય પણ નાક દવાની કલ્પિત...

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सियासत के हवाले से By Satyadeep Trivedi

सियासत के हवाले सेजिस प्रकार आत्मा मरती नहीं है, केवल पुराने शरीर को छोड़कर नये शरीर में प्रवेश कर जाती है। ठीक वैसे ही नेता भी नहीं मरता है। वो पुरानी पार्टी को छोड़कर नयी पार्टी मे...

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અને મેં હા કહી દીધી... By Bhumi Gohil

તો મીત્રો... તૈયાર થઈ જાવ પ્રેમની અનોખી સફર માટે...સીટ બેલ્ટ બાંધી લો... ચા પાણી થેપલા સાથે રાખો....વાંચતા વાંચતા પેટ પકડીને હસવું પણ આવી શકે છે.... તો વાત છે ત્રણ વર્ષ પહેલાં ની જ...

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पाठलाग By संदिप खुरुद

दोन दिवसांपासून एक माणूस अजयचा पाठलाग करत होता. त्याच्यावर पाळत ठेवत होता. पहिल्या दिवशी अजयच्या एवढं लक्षात आलं नाही. पण दुसऱ्या दिवशी त्याला ते चांगलंच जाणवलं. तो...

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आभार (व्यंग्य ) By Alok Mishra

आभार (व्यंग्य ) हमारे यहाॅ कोई भी मंचीय कार्यक्रम हो बहुत ही पारंपरिक तरीके से ही होता है । पूरे कार्यक्रम के पश्चात् जब लोग उठ कर जाने लगते है, अतिथी अपना स्थान छोड़ कर स्व...

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ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ-ગમ્મત સાથે - 6 By Yuvrajsinh jadeja

(1) અવળા ગણેશ બેસવા...● ભીખુએ નવી સવી ઝેરોક્ષ & લેમીનેશનની દુકાન કરી હોય . બધી તૈયારીઓ જોરશોરથી થઈ ગઈ હોય . મશીનો દુકાનમાં ગોઠવાઈ ગયા હોય . સગા વ્હાલા , દોસ્ત મિત્રોને ઉદ્ઘાટન ના ક...

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स्वयम्की (व्यंग्य ) By Alok Mishra

स्वयम्की ( व्यंग्य ) आप सोच रहे होंगे मुझे ‘‘स्वयम् की’’ लिखना चाहिये था। लेकिन नहीं सहाब मैं ‘‘स्वयम्की’’ ही लिखना चाहता था और वही लिखा है। अब आजकल जमाना बद...

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परिचय या पहचान पत्र (व्यंग्य) By Alok Mishra

परिचय या पहचान पत्र एक दिन बेचारे शर्मा जी से हमारी मुलाकत एक चैराहे पर हो गई। बेचारे वो... और उनकी बेचारगी का कारण यह है कि वे इस युग में भी सभी काम नियमानुसार करने पर...

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प्रवक्ता जी By Alok Mishra

प्रवक्ता जी हाँ तो साहब बात को प्रारम्भ से ही प्रारम्भ करते है , हम आप से पूछना चाहते है कि क्या आप सखाराम को जानते है ? हमने इतना कठिन प्रश्न तो नहींं पूछा ...... अरे....

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R का बटन By Amulya Sharma

गांव में उत्साह का माहौल था क्योकि मेरे गांव में फोन लगने वाला था और यह बहुत ही बड़ी बात थी। गांव में बहुत सालों से फोन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी और सभी गांव वालों को किसी बाहरी व्य...

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Seven Days of Love By SHAMIM MERCHANT

"Aree…. All this is nothing, but foolish timepass for youngsters like you. There were no such extravagant days back then, when I was of your age."Grandma scolded me. I laughed and...

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गधादेश का मंत्रीमण्‍ड़ल By Alok Mishra

गधादेश का मंत्रीमण्‍ड़ल गधादेश में अभी-अभी चुनाव हुआ है । जैसा की आप तो जाते ही है, आज कल अल्‍पमत सरकारों का जमाना है । इसी से पता चलता है कि जनता को किसी पर भी भरोसा नहीं है...

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सेब क्यों गिरा By Alok Mishra

सेब क्यों गिरा एक दिन मैं यूॅ ही स्कूल के गलियारे में टहल रहा था । छुट्टी का समय होने के कारण छात्र-छात्राएँ भी कक्षाओं से बाहर यहाॅं-वहाॅं टहल रहे थे । एक कक्षा में बैठे...

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क्यों लिखूं....? By Alok Mishra

क्यों लिखूं....? आपका ये नाचीज कभी-कभार अपने मन की बात लिखकर आप तक पहुंचा कर अपने मन के बोझ को कम करता रहता है, इस लिखने के चक्कर में कभी प्रशंसा मिली तो कभी आलोचना, कभ...

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चोलबे ना - 9 - इज्जतदार लेखक By Rajeev Upadhyay

लेखक नामक प्रजाति के सदस्य अक्सर अकादमियों और मंत्रालय के अधिकारियों को कोसते रहते हैं। ये उनकी स्पष्ट राय है कि ये अधिकारी लेखकों को उनके जीते-जी सम्मान नहीं देते हैं। ये अधिकार...

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रामलाल का सन्यास By Alok Mishra

रामलाल का सन्यास अभी -अभी प्राप्त समाचार के अनुसार रामलाल जी ने राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है । रामलाल जी को तो आप जानते ही है । ये वे ही रामलाल है जिन्होंने अप...

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कस्बे का आई.सी.यू. By Alok Mishra

कस्बे का आई.सी.यू. ये एक छोटा सा कस्बा है । इस कस्बे में एक सरकारी अस्पताल भी है । जहॉं कुछ डॅ़ाक्टर केवल इसलिए आ जाया करते है कि उनकी तनख्वाह के साथ-साथ घरेलू दवाखाना भी...

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पंछी उवाच By Alok Mishra

पंछी उवाच ये जंगल बहुत ही अच्छा और सुंदर था । कल-कल करती नदियॉ , हरे-भरे पेड़ों से लदे पहाड़ और जानवरों की बहुतायत । हम जानवरों को सब कुछ इसी जंगल से ही मि...

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पुतला (व्यंग्य ) By Alok Mishra

‘‘पुतला’’ मैं पुतला हूँ। यदि आप न समझें हो तो मैं वही पुतला हूँ, जो दशहरे में रावण के रूप में और होली में होलिका के रूप में अनेक वर्षों से जलता रहा हूँ। मेरे अंगों के रूप में...

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