Free Best trending stories in gujarati, hindi, marathi and english language

    संदली दरवाज़ा
    by Sudha Om Dhingra

    संदली दरवाज़ा सुधा ओम ढींगरा बस में चढ़ते ही उसने महसूस किया, बस पूरी तरह से भरी हुई है। वह बस का डंडा पकड़ कर, सँभल कर खड़ी हो ...

    19 जुलाई द लास्ट लैटर - 1
    by saurabh dixit manas
    • 120

    #19_जुलाई “#द_लास्ट_लैटर”...........#मानस#भाग-1 “सौरभ! अगर हम कभी रात में किसी जंगल से गुजरें और शेर आ जाय तो.....” टीना के रोमांटिक होकर कहते ही सौरभ उसकी आँखों में आँखें डालकर ...

    जल्दबाजी
    by Kamal Maheshwari
    • 123

     बारिश की सुबह का मौसम बहुत सुहावना होता है, यूं तो मैं सुबह जल्दी उठ जाता हूं पर मैं उस दिन कुछ ज्यादा देर तक सोता रहा । मोबाइल ...

    तानाबाना - 14
    by Sneh Goswami
    • 441

      तानाबाना 14   प्रसन्नमन से घर लौटे प्रीतम ने जब यह खुशखबरी घर आ बाकी परिवार के लोगों को दी तो हर तरफ खुशियाँ छा गयी । औरतों ...

    सच्चाई - 1
    by Asmita Madhesiya
    • 987

    कहानी को कहानी  उसके किरदार बनाते हैं। ठीक उसी तरह इस कहानी के किरदार भी हैं। कुछ हो ना हो इन किरदारो में आप अपने आप को जरूर तलाशेंगे।कहानी ...

    उलझन - 2
    by Amita Dubey
    • 135

    उलझन डॉ. अमिता दुबे दो शाम को मम्मी-पापा अनुज अंकल से मिलने उनके घर गये। सौमित्र किताब खोलकर बालकनी में बैठ गया लेकिन उसका पढ़ने में मन नहीं लग ...

    प्राचीन खजाना और डायनासोर का बच्चा - 3
    by Kirtipalsinh Gohil
    • 144

    प्राचीन खजानाऔरडायनासोर का बच्चाभाग ३--२ दिन पहले--शहर की सबसे बड़ी लाइब्रेरीशान लाइब्रेरी में कपाट घाटी पर लिखी किताब पढ़ रहा है। एक एक करके उसने तकरीबन ३-४ किताबे पढ़ ...

    इक समंदर मेरे अंदर - 11
    by Madhu Arora
    • 87

    इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (11) जब उनका परिवार पारस नगर पहुंचा और पिताजी बिल्डर के कार्यालय में गये तो उसने हंसकर कहा – ‘वेलकम सर जी ..वो ...

    वो भूली दास्तां - भाग-१८
    by Saroj Prajapati
    • 150

    शादी के लिए विशाल व चांदनी की रजामंदी मिलते ही दोनों परिवारों की खुशी का ठिकाना ना रहा। दोनों ही परिवारों में शादी की तैयारियां होने लगी और 1 ...

    राम रचि राखा - 6 - 4
    by Pratap Narayan Singh
    • 93

    राम रचि राखा (4) सवेरे जब मुन्नर द्वार पर नहीं दिखे तो पहले माई ने सोचा कि दिशा-फराकत के लिए गए होंगे। परन्तु जब सूरज ऊपर चढ़ने लगा फिर ...

    वापसी.
    by Ranjana Prakash
    • 516

    वापसी अभी सूरज देवता प्रकट भी नहीं हुए थे के पूरा घर ॐकार के दिव्य स्वर से निनादित होने लगा था इस घर की भोर ऐसी ही सुरीली होती ...

    आदमी का शिकार - 14
    by Abha Yadav
    • 150

        "नुप्पू, सुरंग तो ढे़र लम्बी निकली."मनकी ने नूपर को बताया. "कितनी लम्बी?"नूपर ने पूँछा."बहुत लम्बी. एकदम जंगल में जाकर खुली.""तुम मुझे वहां ले चलो.""चलो.""मैं भी तुम्हारे साथ चलूं?"योका ...

    मासूम की बद्दुआ अंतिम भाग
    by S Sinha
    • 240

       Part 2 अंतिम भाग  - कहानी के अंतिम भाग में पढ़िए शिखा को क्यों लगा कि उसे मासूम की बद्दुआ लग गयी है  ...       कहानी -  मासूम की बद्दुआ  ...

    जिंदगी मेरे घर आना - 9
    by Rashmi Ravija
    • 279

    जिंदगी मेरे घर आना भाग – ९ और अभी कैसे घूर रहा है, खा ही जाएगा जैसे। मन नहीं था तो क्यों आया? नहीं ले आता, तो कोई मर ...

    दह--शत - 36
    by Neelam Kulshreshtha
    • 135

    एपीसोड ---36      एम डी बड़े बड़े डग रखते अपने ऑफ़िस के पीछे के दरवाज़े से निकल चुके हैं. वह खिसियाई सी, रुआँसी एम डी के चैम्बर में सोचती रह जाती है, ...

    मीता एक लड़की के संघर्ष की कहानी - अध्याय - 12
    by Bhupendra Kuldeep
    • 180

    अध्याय-12होश में आने के बाद वो अस्पताल के बिस्तर पर पड़े पड़े रो रहा था उसका बड़ा भाई सामने ही बैठा था।उसने मुझे धोखा दे दिया है भैया। वो ...

    सलाखों के पीछे
    by SHAMIM MERCHANT
    • 655

    आज बोहोत दिनों बाद, सुकून से सोऊंगा,आज बड़े दिनों बाद, अच्छी नींद आएगी।जेल में वो सुकून कहां?सलाखों के पीछे वो आराम कहां?एक ऐसी बात के लिए अंदर हुआ था,जिसमे ...

    जय हिन्द की सेना - 12
    by Mahendra Bhishma
    • 93

    जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म ग्यारह नीले आकाश के नीचे अपने हवेलीनुमा घर की सबसे ऊँची छत पर श्वेत साड़ी में दरी के ऊपर बैठी शृंगार रहित होने ...

    भ्रुगू मुनि की कथा
    by राजनारायण बोहरे
    • 141

    भ्रुगू मुनि की कथा  एक बार मंदराचल पर्वत पर यज्ञ हो रहा था और यज्ञ के दौरान वहां उपस्थित ऋषि-मुनियों में यह चर्चा चली कि सर्वाेच्च रूप् से किन ...

    रूस के पत्र - 14
    by Rabindranath Tagore
    • 1.1k

    इस बीच में दो-एक बार मुझे दक्षिण द्वार से सट कर जाना पड़ा है, वह द्वार मलय समीर का दक्षिण-द्वार नहीं था, बल्कि जिस द्वार से प्राण-वायु अपने निकलने के ...

    निपुणनिका-- - 5(अंतिम भाग)
    by Saroj Verma
    • (11)
    • 540

    फिर एक रात उस महल में एक खूनी खेल हुआ, अपारशक्ति चेहरा ढ़ककर आधी रात के वक्त निपुणनिका के कमरे में गया और तलवार से श्रवन का गला काट ...

    मिले जब हम तुम - 32
    by Komal Talati
    • 345

    ...भाग - ३२                 देव के आँसू उसके गालो को छुकर आद्रिती के गालो पर टपकने लगे थे... गिरने की वजहसे आद्रिती को चोट तो लगी थी पर वह ...

    पके फलों का बाग़ - 5
    by Prabodh Kumar Govil
    • 195

    मुझे अपने जीवन के कुछ ऐसे मित्र भी याद आते थे जो थोड़े- थोड़े अंतराल पर लगातार मुझसे फ़ोन पर संपर्क तो रखते थे किन्तु उनका फ़ोन हमेशा उनके ...

    मुखौटा - 12
    by S Bhagyam Sharma
    • 147

    मुखौटा अध्याय 12 "आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की ?", अचानक मैंने पूछ लिया। "आपके साथ भी कोई धोखा हुआ?", लगता है मेरी अक्ल सचमुच में मेरे बस ...

    बड़े बाबू का प्यार - भाग 5 14: पुराने यार
    by Swapnil Srivastava Ishhoo
    • 141

    भाग 5/14: पुराने यारअब तक दिवाकर पूरे सुरूर में आ चुके थे, बोले, “अबे कहाँ चल दिए...पूरा खाना बन गया है....शाम जवाँ हैं ....हमारे अन्दर आग लगा कर कहाँ ...

    30 शेड्स ऑफ बेला - 16
    by Jayanti Ranganathan
    • 183

    30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Day 16 by Harish Pathak हरीश पाठक ठहरी हुई शाम बेला के कदम आगे बढ़ने से इंकार कर ...

    बात बस इतनी सी थी - 11
    by Dr kavita Tyagi
    • 330

    बात बस इतनी सी थी 11. अगले दिन मैं निर्धारित समय से पहले एयरपोर्ट पर पहुँच गया । मंजरी एयरपोर्ट से बाहर आई, तो मैंने बाँहें फैलाकर उसका स्वागत ...

    29 Step To Success - 2
    by Wr.MESSI
    • (15)
    • 297

    Chapter - 2Take advantage of ....The opportunity immediatelyतुरंत मौके का फायदा उठाएं ।सफलता पाने के लिए हर व्यक्ति के जीवन में सही अवसर बहुत महत्वपूर्ण है।  हम सही मौके ...

    गवाक्ष - 29
    by Pranava Bharti
    • 87

    गवाक्ष 29== स्वरा बंगाल की निवासी थी और बंबई में कार्यरत थी । सत्यनिष्ठ के संस्कार व व्यवहारों के प्रति आकर्षित हो वह उससे प्रेम करने लगी थी । संगीत की ...

    पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 24
    by Pragati Gupta
    • (14)
    • 669

    पूर्ण-विराम से पहले....!!! 24. अब शिखा को समीर के जुड़े हुए सभी काम पूरे करने थे| सबसे पहले उसने समीर के अलमारियों में लगे हुए कपड़ों को जगह-जगह पर ...