Free Best trending stories in gujarati, hindi, marathi and english language

    गुमनाम : मर्डर मिस्ट्री - 11
    by Kamal Patadiya

    रात के 3:00 बजने को आए थे। प्रिया, मुस्कान, रोशनी और आलिया अपने कमरे में पूजा और लड़को का इंतजार करते करते सो चुके थे। प्रिया ने अजय को ...

    छुट-पुट अफसाने - 25
    by Veena Vij
    • 57

    एपिसोड---25 अतीत से जो नजरें मिलाईं, तो मुस्कुराहट भी मुस्कुराने लगी है। चलो जानेमन अतीत ! कुछ घड़ियां तुम्हारे साए में बिताते हैं आज। होता तो यही है कि ...

    रामलाल का सन्यास
    by Alok Mishra

    रामलाल का सन्यास          अभी -अभी प्राप्त समाचार के अनुसार रामलाल जी ने राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है । रामलाल जी को ...

    चैट बॉक्स.… - 4
    by Anju Choudhary Anu
    • 489

    भाग 4 २७ की उम्र में भी मेरी हर हरकत अब मुझे १७-१८ साल की लकड़ी जैसी लगती थी पर मेरी सब शंकाएँ,नितिन को लेकर मेरा लंबा सा इंतज़ार ...

    इश्क़ जुनून - 6
    by Mehul Pasaya
    • 132

    " हा ये सही रहेगा विवान बेटा इस बात पे हम भी अग्री करते है "" ओके सो फिलहाल तक हम अपना एन्जॉयमेनट कंटिन्यू रखे क्या "" हा भाई ...

    फ़ौजी
    by Vipin Prajapati ‍️‍️‍️‍️‍️‍
    • 348

    फ़ौजी एक आम लड़का जब फौजी बनने के सपने देखता है तभी से देश के सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने को वह तैयार हो जाता है समाज सेवा के लिए ...

    जब ही मेट मौसी
    by S Sinha
    • 246

                                               कहानी - जब ही   मेट  मौसी    प्रकृति की लीला भी कभी समझ से परे होती है . एक ही माँ के गर्भ से एक ही समय ...

    छुट-पुट अफसाने - 21
    by Veena Vij
    • 207

    एपिसोड--21 ढेरों एपिसोड्स उमड़-घुमड़ कर बाहर निकलने की जद्दोजहद कर रहे हैं। लेकिन मैंने तो पंजाब-दर्शन आरम्भ किया है पिछली बार, तो हम पहले अमृतसर का चक्कर लगा लें, ...

    चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 - 3
    by Lajpat Rai Garg
    • 126

    11 " काम भला, परिणाम...? "   रमणीक अपनी कार से पटियाला जाने के लिये घर से निकला। हाईवे पर थोड़ी दूर ही गया था कि सामने कई गाड़ियाँ ...

    आधार - 9 - अहिंसा, महानता का प्रथम चरण है।
    by Krishna
    • 78

    अहिंसा, महानता का प्रथम चरण है। अहिंसा का हमारे व्यक्तित्व निर्माण में सबसे प्रमुख स्थान है। सामान्यतः अहिंसा का अर्थ किसी निरपराध प्राणी को सताने अथवा शारीरिक कष्ट न पहुंचाने तक ...

    विनाशकाले.. - भाग 4
    by Rama Sharma Manavi
    • 114

      चतुर्थ अध्याय---------------गतांक से आगे ….   रेवती के जीवन में छाए उदासी के बादलों की परछाई उसके मन के साथ- साथ चेहरे पर भी नजर आती थी।दमकता चेहरा अब ...

    विश्वासघात--भाग(१७)
    by Saroj Verma
    • 408

    जब सबने सुना कि साधना बुझी बुझी सी रहती है तो ये सुनकर किसी को अच्छा नहीं लगा,रात को जब लीला और शक्तिसिंह जी अपने कमरें थे तब उनके ...

    बागवानी
    by Anita Sinha
    • 315

    आइए वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। प्रर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अत्यंत महत्वपूर्ण है। वृक्षारोपण कार्यक्रम को बढ़ावा देने हेतु फूलों की बागवानी करते हैं। हमारे घर के आंगन ...

    एनकाउंटर
    by Satyadeep Trivedi
    • 279

    सँझवाती का समय है। बाज़ार में घुसने से पहले एक मोड़ पड़ता है, उस मोड़ पर पैंतालीस-छियालीस साल की एक औरत; एक टोकरी में तरकारी बेच रही है। औरत ...

    मैं तो ओढ चुनरिया - 13
    by Sneh Goswami
    • 165

    मैं तो ओढ चुनरिया  अध्याय - 13      सहारनपुर मुसलमानों का शहर । सहारनपुर रिफ्यूजी शरणार्थियों का शहर । शहर के बीचोबीच मुसलमानों के मौहल्ले । और शहर ...

    शामियाना
    by Chaya Agarwal
    • 1.2k

    कहानी- शामियाना"रिश्तों की समझ नही है तुम्हें या रिश्तों की माँग से अनभिज्ञ हो तुम, उठा लेते हो बीच में अपनेपन की खुशबूदार अनुभूति जो पहले ही पीछे छूट ...

    कल्कि - एक न्यायोद्धा
    by Vijeta Maru
    • 1k

    'कल्कि - एक न्यायोद्धा' - विजेता मारु यह एक काल्पनिक कृति है। नाम, वर्ण, व्यवसाय, स्थान, और घटनाएं या तो लेखक की कल्पना के उत्पाद हैं या काल्पनिक तरीके ...

    छुट-पुट अफसाने - 6
    by Veena Vij
    • 660

    एपिसोड -६ ज़िन्दगी की खाली स्लेट पर जो इबारत सबसे पहली लिखी गई यानि कि "तबूला रासा" (लेटिन में ख़ाली स्लेट) पर अंकित मेरे इस जीवन की पहली याद ...

    लव या अरेंज्ड
    by Aditi Jain
    • 165

    "सिएस्ता की बीच", यहीं तो आना चाहता था वो हमेशा से। कितना ख़ूबसूरत नज़ारा, साफ़ पानी, सफ़ेद रेत, अपनी मस्ती में मगन लोग। चारों ओर खुशियाँ ही खुशियाँ, और ...

    तांत्रिक मसाननाथ - 6
    by Rahul Haldhar
    • 429

            तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 6 ) 20 साल पहले की इस घटना को सोचते हुए नरेंद्र कहीं खो गया था । उसे होश आया मसाननाथ ...

    विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 5
    by S Bhagyam Sharma
    • 240

    अध्याय 5 विवेक के पूरे चेहरे पर सदमे की रेखाएं फैल गई। "आप क्या बोल रहे हैं ? ए.बी.सी.डी. का मर्डर? कैसे सर?" दूसरी तरफ से सी.पी.जी. शर्मन बोल ...

    विश्वासघात--भाग(१८)
    by Saroj Verma
    • 261

    साधना और मधु की मोटर शक्तिसिंह जी के बँगलें के सामने रूकी,दोनों माँ बेटी ने ड्राइवर से कहा कि पहले दरबान से पूछकर आओ कि ये शक्तिसिंह जी का ...

    हंसने वाला हमारा पल
    by Amit J.
    • 477

         सुबह की किरण लाजवाब थी आंखों में गजब से चमक थी चांद सितारों को पीछे छोड़कर सूरज की किरणों से आगे भाग रही थी जिंदगी.      ...

    अतीत के चल चित्र - (8)
    by Asha Saraswat
    • 291

        अतीत के चलचित्र (8)          पड़ौस में रहने वाली मौसीजी के यहाँ उनके बेटे के टीके का कार्यक्रम था ।हमारे परिवार को भी निमंत्रित ...

    मोर पंख
    by Sandeep Shrivastava
    • 201

     रघुवन के मेरु मोर को जबसे पता चला है कि वो भारत देश का राष्ट्रीय पक्षी है तब से उसके स्वभाव की अकड़न कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी।हर ...

    अनकही दर्दनाक प्रेम कहानी
    by Joshi Shivani
    • 384

    यह कहानी है एक लड़का और एक लड़की की जिसमें लड़का था दिवेश  लड़की के शिवांगी लड़का लड़की एक दूसरे से अनजान थे रहता था वह अलग गांव में ...

    खौलते पानी का भंवर - 3 - दिहाड़ी
    by Harish Kumar Amit
    • 510

    दिहाड़ी उसकी घड़ी पौने दस बजा रही है जब वह अपने दफ़्तर के भवन में दाखिल हुआ है. हालाँकि दफ़्तर लगने का वक़्त नौ बजे है, मगर उसके चेहरे ...

    रिस्की लव - 14
    by Ashish Kumar Trivedi
    • 264

              (14) पंकज जिस कमरे में घुसा था उसमें मीरा कैद थी। उसे देखते ही मीरा गुस्से से उबलने लगी। लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती ...

    समय का दौर - 6
    by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"
    • 645

    काव्य संकलन -                   समय का दौर                           वेदराम प्रजापति मनमस्त                                                        सम्पर्क  सूत्र.    गायत्री शक्ति                           पीठ रोड़ गुप्ता पुरा डबरा                         

    गांव की तलाश - 5
    by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"
    • 105

    गांव की तलाश 5            काव्‍य संकलन-                                  वेदराम प्रजापति ‘’मनमस्‍त’’    - समर्पण –        अपनी मातृ-भू के,       प्‍यारे-प्‍यारे गांवों को,        प्‍यार करने ...