aaj fir ek ummid mit gai by Krishna Kaveri K.K. in Hindi Short Stories PDF

आज फिर एक उम्मीद मिट गई

by Krishna Kaveri K.K. in Hindi Short Stories

उस दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी। मैं अपनी लोकल ट्रेन में कॉलेज के एक ट्रेनिंग प्रोग्राम से वापस लौट रही थी। मेरे सामने की सीट पर एक 23 - 24 साल कानौजवान युवक बैठा था। उसने फॉर्मल ...Read More