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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ By Dr. Pradeep Kumar Sharma

(1) लाइक एंड कॉमेंट्स

रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...

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गवाक्ष By DrPranava Bharti

गवाक्ष बसंत पंचमी दिनांक-12 2 2016 (नमस्कार मित्रो ! यह उपन्यास ‘गवाक्ष’ एक फ़िक्शन है जिसे फ़िल्म के लिए तैयार किया जा रहा था किन्तु इसके प्रेरणास्त्रोत 'स्व. इंद्र स्वरूप माथुर...

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प्रायश्चित. By Devika Singh

यह कहानी चोर की है जिसका नाम राज है।

अपने दोस्त के साथ रह रहा है उसके दोस्त का नाम अंकित है। जिंदगी से उसे खास उम्मीद तो नही है। उसे पता है। जिंदगी से क्या मिलने वाला है। और जिं...

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Mafiya Boss By PAYAL PARDHI

" एक माफिया लव स्टोरी की शुरुआत, एक अनाथ लड़की जिसके बचपन में सब कुछ छीन लिया गया हो, एक ऐसा हादसा जिसने उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी हो ,एक ऐसा माफिया जिससे हमेशा नफरत करती आ...

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चुनिंदा लघुकथाएँ By Lajpat Rai Garg

माँ, माँ होती है आज राकेश जल्दी तैयार होकर वृद्धाश्रम पहुँचा। आज उसकी माँ का 80वाँ जन्मदिन है। उसने माँ के चरर्णस्पर्श किये, उनका मुँह मीठा करवाया। आशीर्वाद लिया। पूछा - ‘माँ, कोई...

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पर्दाफाश By Ratna Pandey

14 वर्ष की आहुति ने अपना पूरा मन बना लिया था कि अब वह घर में नहीं रहेगी, उसे अपने इस प्यारे से घर को छोड़कर जाना ही होगा। लेकिन कहाँ...? कैसे...? यह चिंता उसे सता रही थी। वह अपनी म...

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वारलॉक - इतिहास का सबसे निर्मम तांत्रिक और सीरियल किलर By Vikkram Dewan

वारलॉक (अंग्रेजी) की प्रशंसा “ एक रोचक किताब! दिलचस्प, जानकारीपूर्ण और विश्वसनीय। " - डेक्कन क्रॉनिकल अख़बार “वॉरलॉक भारतीय तांत्रिक गतिविधियों की जड़ों में ले जाता हैं। -...

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मुक्म्मल मोहब्बत By Abha Yadav

कहीं संवेदनाएं जुड़ी. कुछ महसूस हुआ. अंदर जजबातों का धुआं घुमड़ने लगा.फिर जजबात इस कदर मचले कि एक गुबार सा फूटा.जजबात छिटके,बिखरे ,फिर जुड़ते चले गए. बनने लगी कोई दांस्ता और खु...

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मैं सौतन नहीं हूँ By S Sinha

“ शेखर , हमारी पढ़ाई खत्म हुई और आज हमदोनों को डिग्री भी मिल गयी . इसके बाद न जाने तुम कहाँ होगे और मैं कहाँ रहूंगी . तुम जानते हो हमारा रिश्ता मुमकिन नहीं है . इसलिए अब हमें...

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सुरजू छोरा By Kusum Bhatt

..... तो एक ठहरी जिद के तहत सुरजू ने निर्णय लिया और गांव में मुनादी पिटा दी....
भूकंप आ गया गांव में.....! गोया सुरजू ने पृथ्वी तल पर घुस कर धीरे से खिसका दी हो प्लेट...., गांव के...

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प्रेम विवाह By Rajesh Rajesh

जिस रेलवे जंक्शन पर मधु अपनी मां और छोटे भाई के साथ अपने गांव के लिए रेल पकड़ने आती है, उस रेलवे जंक्शन पर हमेशा सन्नाटा छाया रहता था उस छोटे रेलवे जंक्शन पर यात्री नाम मात्र के लि...

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एक ही भूल By Saroj Prajapati

तुम्हारी इस नौकरी ने तो हमे खानाबदोश बनाकर रख दिया है। हर तीन चार साल बाद उठाओ समान और चल दो दूसरी जगह । ये भी कोई जिंदगी है?" सीमा सामान खोलते हुए बोली। "अरे भई अब काम ही ऐसा है त...

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जनजीवन By Rajesh Maheshwari

इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,

मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम।

रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,

विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।

कर...

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जी हाँ, मैं लेखिका हूँ By Neerja Hemendra

सायमा का घर जैसे-जैसे समीप आता जा रहा था, उसके मन-मस्तिष्क में विचारों का प्रवाह गतिमान होता जा रहा था। रेलवे स्टेशन के बाहर आ कर उसने चारों ओर दृष्टि घुमाई। बसें, टैम्पों, आॅटो रि...

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गुनहगार By Kishanlal Sharma

अंततः माया मर गयी।उसकी लाश दो दिन तक अस्पताल में लावारिस पड़ी रही। लेकिन उसे लेने के लिए कोई नही आया।आखिर अस्पताल वालों को ही उसके क्रियाकर्म की व्यस्था करनी पड़ी।
माया अनाथ नही थी।...

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मनस्वी By Dr. Suryapal Singh

'मनस्वी' एक शोकगाथा है एक करुण उपन्यासिका (Elegiac Novelette) । शोकगीत लिखने की परम्परा अँग्रेजी, पर्शियन, उर्दू में अधिक रही है। शोकगीत किसी प्रिय के अवसान, निधन पर लिखे ज...

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D J By Writer Digvijay Thakor

इस कहानी में ,

एक लड़की एक लड़के से बहुत प्यार करती है मगर उन दोनों के बीच एक रावण आ जाता है और दोनों के बीच इतनी गलत फेमिया भर देता है , इतनी गलत फेमिया भर देता...

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रूस के पत्र By Rabindranath Tagore

सोवियत शासन के प्रथम परिचय ने मेरे मन को खास तौर से आकर्षित किया है, यह मैं पहले ही कह चुका हूँ। इसके कई विशेष कारण हैं और वे आलोचना के योग्य हैं।
रूस की जिस तसवीर ने मेरे हृदय मे...

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बड़ी माँ By Kishore Sharma Saraswat

‘हमारी पृथ्वी सौर-मण्डल का एक बहुत ही विचित्र ग्रह है। इसकी संरचना भगवान ने मानो स्वयं अपने हाथों से प्राणी जगत की उत्पति एवं उत्थान हेतु की है। इस ग्रह की सुन्दर संरचना में प्रकृत...

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प्रेम का पूर्वाभास By Rakesh Rakesh

छ वर्ष का आदित्य अपनी मां से कहता है "अभी मम्मी घर से बाहर नहीं जाना आंगन में एक पागल कुत्ता घूम रहा है, वह आपको काट खाएगा।"

और जब पागल कुत्ता आदित्य की मां को काट लेता...

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सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा का काव्‍य संग्रह By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

श्री सुरेश पाण्‍डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्‍म प्रे...

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Mafia's Obsessed Love By Priyanka Saini

वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर।

इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...

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Schoolmates to Soulmates By Guddi

" इश्क की ऐसी दास्तान, जहा मोहोब्बत की शुरुवात नफ़रत और बदले की आग से होती है। किसी के दिल में पनप रही है मोहोब्बत, तो किसी के मन में है नफरत का तूफान। एक जुनून भरी कहानी जो कि...

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गृहस्थ संन्यासी By PARIKH MAULIK

एक बुक है जिसका में जिक्र कर रहा हूं। गृहस्थ संन्यासी जो बहुत पोपुलर है, जिसका आज सेमिनार आयोजित किया गया है और उसमें उसके लेखक खुद प्रस्तुत होने वाले हैं, जो स्टेज पर जा कर बुक के...

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गुजराती-हिंदी भाषाई नोंक-झोंक By Manju Mahima

सन १९८०-८१ में हम जयपुर राजस्थान से अहमदाबाद गुजरात में आए। मेरे पति होटल लाइन में थे और उनका जयपुर रामबाग़ पेलेस होटेल से स्थान्तरण कामा होटेल अहमदाबाद में होगया था, पहले यह दोन...

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अधूरा सच By Gaurav Pathak

अजीब रात

रात का सन्नाटा कुछ अलग ही था। शहर की गलियों में हल्की धुंध तैर रही थी। स्ट्रीट लाइट की टिमटिमाती पीली रोशनी इस धुंध को और रहस्यमयी बना रही थी। हवा ठंडी थी, लेकिन उस ठंड...

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तन्हा सफ़र: जज़्बातों की छांव में भीगा इश्क़ By Babul haq ansari

बारिश की पहली बूँद और एक अधूरा नाम

रचयिता: बाबुल हक़ अंसारी

उस रोज़ बारिश कुछ अलग थी…

ना ज़ोर से बरसी, ना आहिस्ता गिरी — बस जैसे किसी की यादों को छूने आई हो।...

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शिव बोल मेरी रसना घड़ी घड़ी By vandana A dubey

दूर, झुरमुट के बीच में जो खण्डहर दिखाई दे रहा है न, असल में वो खन्डहर नहीं है. पुरानी हवेली है. लेकिन लोग उसे खण्डहर ही कहते हैं. हवेली यानि बड़ा सा घर. बड़ा सा बंगला. बहुत पुराना बं...

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इस रिश्ते को क्या नाम दूँ ? By Kalpana Sahoo

में जो अब लिखने जा रही हुं वो कोई काल्पनीक Story नहीं है । वो एक बास्तबिक घटणा है । जिसे में जब भी याद करती हुं तो मेरी अन्दर एक अजीब सी सबाल पैदा होती है । पता नहीं क्युं ?...

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दतिया की बुंदेला क्षत्राणी रानी सीता जू By Ravi Thakur

विंध्याचल पर्वत की लघु एवं उच्च श्रृंखलाओं, वनोपवन, अरण्यक उपत्यकाओं में विस्तारित, गंगा , यमुना, सिंध , नर्मदादि , पावन सलिलाओं की पुण्य धाराओं से आप्लावित पुलिंद धरा, अनादि काल स...

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बेटी By Anil Sainger

मेरी शादी हुए पाँच साल हो गए हैं लेकिन मैं आजतक न तो अपने पति को और न ससुराल वालों को समझ पाई हूँ | सब कहते हैं कि दुनिया बदल रही है साथ ही हमारे देश की सोच भी बदल रही है | मगर मुझ...

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MUZE जब तू मेरी कहानी बन गई By Chaitanya Shelke

मुंबई की वो सुबह बाकी दिनों से कुछ अलग थी। समंदर की लहरें वैसे ही किनारों से टकरा रही थीं, पर हवा में एक अजीब सी बेचैनी थी — जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो।

आरव, एक मामूली सा लड़का,...

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समरादित्य महाकथा By Kapil Jain

समरादित्य महाकथा एक 2 आत्माओ की कहानी है कि कैसे 2 जीव अपने अपने व्यवहार में बदल जाते है और सिर्फ एक छोटी गलतफहमी के कारण दोनो आत्माओ को 9 भव का सफर करना पड़ता है उसमे से एक आत्मा अ...

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प्रेम और युद्ध By Anand Tripathi

आर्या एक छोटे से गाँव में रहती थी, जो कि एक बड़े शहर से कुछ दूरी पर स्थित था। वह एक साधारण लड़की थी, जो कि अपने परिवार के साथ समय बिताना पसंद करती थी।

आर्या के पिता एक किसान थे,...

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विचित्र मोहब्बत अरुंधति कि...! By Yashoda Yashoda

रात में चांद अपने पूरे आकार में चमक रहा था, और आज की ये रात अमावस की काली अंधेरी रात थी! मिर्ज़ा पुर रेलवे फाटक के उस पार एक स्टेशन है, और उस स्टेशन से कुछ एक दो घंटे की दूरी पे कब...

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होप इस हेल By kuldeep vaghela

होप इस हेलये एक काल्पनिक कथा है। जिसे रोचक बनाने के लिए कुछ वर्तमान प्रवाह, स्थान, संस्था, देश और अन्य उचित वस्तुओं का प्रयोग किया गया है। जिसका वस्तावमे हो रही घटनाओं के साथ संब...

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A Secret Letter By Hardik Chande

DISCLAIMERप्रस्तुत कथा संपूर्ण: काल्पनिक है। इसका किसी भी घटना, व्यक्ति, स्थान, समय, जाति, लिंग, धर्म से कोई संबंध नहीं है। ये कथा का उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँचाना नह...

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यारबाज़ By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (1) उन तमाम बेरोजगार वह कलाकार साथियों को जो अपनी मंजिल ना पा सके जिसके वे हकदार थे युवा कथाकार विक्रम सिंह ने हाल‌ के वर्षों में हिंदी कहानी लेखन में अपनी एक स...

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एक लड़की सबके साथ वो सब करती By Mister Rakesh

एक लड़की की, जो सबकी नज़रों में कुछ और थी... लेकिन खुद के लिए कुछ और।

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दिल्ली की तंग गलियों के बीच, जहां लोग दूसरों की ज़िंदगी को अपने खाली वक्त का मज़ा समझते हैं, वहीं रह...

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आखा तीज का ब्याह By Ankita Bhargava

सपनों को पूरा करने निकली वासंती अपने रिश्तों को ही खो बैठी। जब फिर से अतीत की गलियों ने उसे पुकारा तो वह अनिष्ट की आशंका से घबरा गई। मगर प्रतीक ने आश्वासन दिया कि कोई है वहां उसकी...

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त्रिधा By आयुषी सिंह

मेरी प्यारी त्रिधा,कैसी हो ? उम्मीद है पहले से बेहतर होगी। समझ नहीं आ रहा इतने सालों बाद क्या बोलूं, क्या लिखूं, क्या पूछूं...... तुम्हारा फोन नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट सब बन्...

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पलायन By Kishanlal Sharma

उसका मन अजीब सा हो रहा था।दिल उदास था।मन मे एक के बाद एक उटपटांग ख्याल आ रहे थे।दिन भर निठल्ला इधर उधर घूमने के बाद वह घर लौटा था।कमरे में आते ही उसे सालू की याद आने लगी
सालू आज...

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मृगतृष्णा तुम्हें देर से पहचाना By Ranjana Jaiswal

मैं जब भी आपके बारे में सोचती हूँ तो महात्मा गाँधी की शक्ल सामने आ जाती है। बुढ़ापे में आप लगभग उन्हीं की तरह लगते थे। खल्वाट सिर, लम्बी नासिका, छोटी आँखें, पतले होंठ और लम्बा दुबला...

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मुझे तुम याद आएं... By Saroj Verma

अरी,भाग्यवान! सत्या कहाँ है?नाश्ते का समय हो गया है और साहबजादे अभी तक फरार हैं,सेठ जानकी दास जी बोले.....
अरे,सुबह-सुबह निकल गया था,पता नहीं क्यों नहीं लौटा अब तक?,कल्याणी ने टेब...

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Reborn to be Loved By Mini

Let's begin…

आरवी ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों को पूरा करने में गुज़ार दी थी। सात साल की करी मेहनत के बाद, वो आखिरकार एक सक्सेसफुल डॉक्टर बन गई थी। उसकी लाईफ एकदम सही चल...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

नरेन्‍द्र उत्‍सुक एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्‍य सत्‍ता से साक्षात्‍कार होता रहा। परमहंस सन्‍तों की जिन पर अपार कृपा रही।

सोमवती 7 सितम्‍बर 1994 को मैं...

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कामनाओं के नशेमन By Husn Tabassum nihan

दरवाजे बहुत होते हैं, कुछ सहजता के साथ खुल जाने वाले और कुछ दरवाजे बहुत खटखटाने के बाद खुलने वाले। उतना अर्थ दरवाजे का नहीं होता जितना अर्थ चौखट का होता है। चौखट लांघ कर भीतर आना औ...

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अधूरे संवाद ( अतुकांत ) By Alok Mishra

कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।

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ये हम आ गए कहां!!! By दुःखी आत्मा जलीभूनी

पूरे आठ साल बाद लौटा था वह, वापस अपने शहर, अपने देश में! फिर से उन्हीं हवाओं उन्हीं गलियों में जहां वापस ना आने की कसम खाई थी उसने। लेकिन जिंदगी हमारे हिसाब से कहां चलती है! मजबूरी...

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आँच By Dr. Suryapal Singh

आँच अठारह सौ सत्तावन के संघर्ष की पृष्ठभूमि को उकेरता उपन्यास यह उपन्यास ? इक्कीसवीं सदीं का दूसरा दशक। उदारीकरण के बढ़ते क़दम। भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण एशियाई बाज़ारों को आच्छादित करन...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ By Dr. Pradeep Kumar Sharma

(1) लाइक एंड कॉमेंट्स

रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...

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गवाक्ष By DrPranava Bharti

गवाक्ष बसंत पंचमी दिनांक-12 2 2016 (नमस्कार मित्रो ! यह उपन्यास ‘गवाक्ष’ एक फ़िक्शन है जिसे फ़िल्म के लिए तैयार किया जा रहा था किन्तु इसके प्रेरणास्त्रोत 'स्व. इंद्र स्वरूप माथुर...

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प्रायश्चित. By Devika Singh

यह कहानी चोर की है जिसका नाम राज है।

अपने दोस्त के साथ रह रहा है उसके दोस्त का नाम अंकित है। जिंदगी से उसे खास उम्मीद तो नही है। उसे पता है। जिंदगी से क्या मिलने वाला है। और जिं...

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Mafiya Boss By PAYAL PARDHI

" एक माफिया लव स्टोरी की शुरुआत, एक अनाथ लड़की जिसके बचपन में सब कुछ छीन लिया गया हो, एक ऐसा हादसा जिसने उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी हो ,एक ऐसा माफिया जिससे हमेशा नफरत करती आ...

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चुनिंदा लघुकथाएँ By Lajpat Rai Garg

माँ, माँ होती है आज राकेश जल्दी तैयार होकर वृद्धाश्रम पहुँचा। आज उसकी माँ का 80वाँ जन्मदिन है। उसने माँ के चरर्णस्पर्श किये, उनका मुँह मीठा करवाया। आशीर्वाद लिया। पूछा - ‘माँ, कोई...

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पर्दाफाश By Ratna Pandey

14 वर्ष की आहुति ने अपना पूरा मन बना लिया था कि अब वह घर में नहीं रहेगी, उसे अपने इस प्यारे से घर को छोड़कर जाना ही होगा। लेकिन कहाँ...? कैसे...? यह चिंता उसे सता रही थी। वह अपनी म...

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वारलॉक - इतिहास का सबसे निर्मम तांत्रिक और सीरियल किलर By Vikkram Dewan

वारलॉक (अंग्रेजी) की प्रशंसा “ एक रोचक किताब! दिलचस्प, जानकारीपूर्ण और विश्वसनीय। " - डेक्कन क्रॉनिकल अख़बार “वॉरलॉक भारतीय तांत्रिक गतिविधियों की जड़ों में ले जाता हैं। -...

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मुक्म्मल मोहब्बत By Abha Yadav

कहीं संवेदनाएं जुड़ी. कुछ महसूस हुआ. अंदर जजबातों का धुआं घुमड़ने लगा.फिर जजबात इस कदर मचले कि एक गुबार सा फूटा.जजबात छिटके,बिखरे ,फिर जुड़ते चले गए. बनने लगी कोई दांस्ता और खु...

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मैं सौतन नहीं हूँ By S Sinha

“ शेखर , हमारी पढ़ाई खत्म हुई और आज हमदोनों को डिग्री भी मिल गयी . इसके बाद न जाने तुम कहाँ होगे और मैं कहाँ रहूंगी . तुम जानते हो हमारा रिश्ता मुमकिन नहीं है . इसलिए अब हमें...

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सुरजू छोरा By Kusum Bhatt

..... तो एक ठहरी जिद के तहत सुरजू ने निर्णय लिया और गांव में मुनादी पिटा दी....
भूकंप आ गया गांव में.....! गोया सुरजू ने पृथ्वी तल पर घुस कर धीरे से खिसका दी हो प्लेट...., गांव के...

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प्रेम विवाह By Rajesh Rajesh

जिस रेलवे जंक्शन पर मधु अपनी मां और छोटे भाई के साथ अपने गांव के लिए रेल पकड़ने आती है, उस रेलवे जंक्शन पर हमेशा सन्नाटा छाया रहता था उस छोटे रेलवे जंक्शन पर यात्री नाम मात्र के लि...

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एक ही भूल By Saroj Prajapati

तुम्हारी इस नौकरी ने तो हमे खानाबदोश बनाकर रख दिया है। हर तीन चार साल बाद उठाओ समान और चल दो दूसरी जगह । ये भी कोई जिंदगी है?" सीमा सामान खोलते हुए बोली। "अरे भई अब काम ही ऐसा है त...

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जनजीवन By Rajesh Maheshwari

इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,

मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम।

रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,

विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।

कर...

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जी हाँ, मैं लेखिका हूँ By Neerja Hemendra

सायमा का घर जैसे-जैसे समीप आता जा रहा था, उसके मन-मस्तिष्क में विचारों का प्रवाह गतिमान होता जा रहा था। रेलवे स्टेशन के बाहर आ कर उसने चारों ओर दृष्टि घुमाई। बसें, टैम्पों, आॅटो रि...

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गुनहगार By Kishanlal Sharma

अंततः माया मर गयी।उसकी लाश दो दिन तक अस्पताल में लावारिस पड़ी रही। लेकिन उसे लेने के लिए कोई नही आया।आखिर अस्पताल वालों को ही उसके क्रियाकर्म की व्यस्था करनी पड़ी।
माया अनाथ नही थी।...

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मनस्वी By Dr. Suryapal Singh

'मनस्वी' एक शोकगाथा है एक करुण उपन्यासिका (Elegiac Novelette) । शोकगीत लिखने की परम्परा अँग्रेजी, पर्शियन, उर्दू में अधिक रही है। शोकगीत किसी प्रिय के अवसान, निधन पर लिखे ज...

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D J By Writer Digvijay Thakor

इस कहानी में ,

एक लड़की एक लड़के से बहुत प्यार करती है मगर उन दोनों के बीच एक रावण आ जाता है और दोनों के बीच इतनी गलत फेमिया भर देता है , इतनी गलत फेमिया भर देता...

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रूस के पत्र By Rabindranath Tagore

सोवियत शासन के प्रथम परिचय ने मेरे मन को खास तौर से आकर्षित किया है, यह मैं पहले ही कह चुका हूँ। इसके कई विशेष कारण हैं और वे आलोचना के योग्य हैं।
रूस की जिस तसवीर ने मेरे हृदय मे...

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बड़ी माँ By Kishore Sharma Saraswat

‘हमारी पृथ्वी सौर-मण्डल का एक बहुत ही विचित्र ग्रह है। इसकी संरचना भगवान ने मानो स्वयं अपने हाथों से प्राणी जगत की उत्पति एवं उत्थान हेतु की है। इस ग्रह की सुन्दर संरचना में प्रकृत...

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प्रेम का पूर्वाभास By Rakesh Rakesh

छ वर्ष का आदित्य अपनी मां से कहता है "अभी मम्मी घर से बाहर नहीं जाना आंगन में एक पागल कुत्ता घूम रहा है, वह आपको काट खाएगा।"

और जब पागल कुत्ता आदित्य की मां को काट लेता...

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सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा का काव्‍य संग्रह By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

श्री सुरेश पाण्‍डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्‍म प्रे...

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Mafia's Obsessed Love By Priyanka Saini

वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर।

इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...

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Schoolmates to Soulmates By Guddi

" इश्क की ऐसी दास्तान, जहा मोहोब्बत की शुरुवात नफ़रत और बदले की आग से होती है। किसी के दिल में पनप रही है मोहोब्बत, तो किसी के मन में है नफरत का तूफान। एक जुनून भरी कहानी जो कि...

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गृहस्थ संन्यासी By PARIKH MAULIK

एक बुक है जिसका में जिक्र कर रहा हूं। गृहस्थ संन्यासी जो बहुत पोपुलर है, जिसका आज सेमिनार आयोजित किया गया है और उसमें उसके लेखक खुद प्रस्तुत होने वाले हैं, जो स्टेज पर जा कर बुक के...

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गुजराती-हिंदी भाषाई नोंक-झोंक By Manju Mahima

सन १९८०-८१ में हम जयपुर राजस्थान से अहमदाबाद गुजरात में आए। मेरे पति होटल लाइन में थे और उनका जयपुर रामबाग़ पेलेस होटेल से स्थान्तरण कामा होटेल अहमदाबाद में होगया था, पहले यह दोन...

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अधूरा सच By Gaurav Pathak

अजीब रात

रात का सन्नाटा कुछ अलग ही था। शहर की गलियों में हल्की धुंध तैर रही थी। स्ट्रीट लाइट की टिमटिमाती पीली रोशनी इस धुंध को और रहस्यमयी बना रही थी। हवा ठंडी थी, लेकिन उस ठंड...

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तन्हा सफ़र: जज़्बातों की छांव में भीगा इश्क़ By Babul haq ansari

बारिश की पहली बूँद और एक अधूरा नाम

रचयिता: बाबुल हक़ अंसारी

उस रोज़ बारिश कुछ अलग थी…

ना ज़ोर से बरसी, ना आहिस्ता गिरी — बस जैसे किसी की यादों को छूने आई हो।...

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शिव बोल मेरी रसना घड़ी घड़ी By vandana A dubey

दूर, झुरमुट के बीच में जो खण्डहर दिखाई दे रहा है न, असल में वो खन्डहर नहीं है. पुरानी हवेली है. लेकिन लोग उसे खण्डहर ही कहते हैं. हवेली यानि बड़ा सा घर. बड़ा सा बंगला. बहुत पुराना बं...

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इस रिश्ते को क्या नाम दूँ ? By Kalpana Sahoo

में जो अब लिखने जा रही हुं वो कोई काल्पनीक Story नहीं है । वो एक बास्तबिक घटणा है । जिसे में जब भी याद करती हुं तो मेरी अन्दर एक अजीब सी सबाल पैदा होती है । पता नहीं क्युं ?...

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दतिया की बुंदेला क्षत्राणी रानी सीता जू By Ravi Thakur

विंध्याचल पर्वत की लघु एवं उच्च श्रृंखलाओं, वनोपवन, अरण्यक उपत्यकाओं में विस्तारित, गंगा , यमुना, सिंध , नर्मदादि , पावन सलिलाओं की पुण्य धाराओं से आप्लावित पुलिंद धरा, अनादि काल स...

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बेटी By Anil Sainger

मेरी शादी हुए पाँच साल हो गए हैं लेकिन मैं आजतक न तो अपने पति को और न ससुराल वालों को समझ पाई हूँ | सब कहते हैं कि दुनिया बदल रही है साथ ही हमारे देश की सोच भी बदल रही है | मगर मुझ...

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MUZE जब तू मेरी कहानी बन गई By Chaitanya Shelke

मुंबई की वो सुबह बाकी दिनों से कुछ अलग थी। समंदर की लहरें वैसे ही किनारों से टकरा रही थीं, पर हवा में एक अजीब सी बेचैनी थी — जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो।

आरव, एक मामूली सा लड़का,...

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समरादित्य महाकथा By Kapil Jain

समरादित्य महाकथा एक 2 आत्माओ की कहानी है कि कैसे 2 जीव अपने अपने व्यवहार में बदल जाते है और सिर्फ एक छोटी गलतफहमी के कारण दोनो आत्माओ को 9 भव का सफर करना पड़ता है उसमे से एक आत्मा अ...

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प्रेम और युद्ध By Anand Tripathi

आर्या एक छोटे से गाँव में रहती थी, जो कि एक बड़े शहर से कुछ दूरी पर स्थित था। वह एक साधारण लड़की थी, जो कि अपने परिवार के साथ समय बिताना पसंद करती थी।

आर्या के पिता एक किसान थे,...

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विचित्र मोहब्बत अरुंधति कि...! By Yashoda Yashoda

रात में चांद अपने पूरे आकार में चमक रहा था, और आज की ये रात अमावस की काली अंधेरी रात थी! मिर्ज़ा पुर रेलवे फाटक के उस पार एक स्टेशन है, और उस स्टेशन से कुछ एक दो घंटे की दूरी पे कब...

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होप इस हेल By kuldeep vaghela

होप इस हेलये एक काल्पनिक कथा है। जिसे रोचक बनाने के लिए कुछ वर्तमान प्रवाह, स्थान, संस्था, देश और अन्य उचित वस्तुओं का प्रयोग किया गया है। जिसका वस्तावमे हो रही घटनाओं के साथ संब...

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A Secret Letter By Hardik Chande

DISCLAIMERप्रस्तुत कथा संपूर्ण: काल्पनिक है। इसका किसी भी घटना, व्यक्ति, स्थान, समय, जाति, लिंग, धर्म से कोई संबंध नहीं है। ये कथा का उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँचाना नह...

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यारबाज़ By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (1) उन तमाम बेरोजगार वह कलाकार साथियों को जो अपनी मंजिल ना पा सके जिसके वे हकदार थे युवा कथाकार विक्रम सिंह ने हाल‌ के वर्षों में हिंदी कहानी लेखन में अपनी एक स...

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एक लड़की सबके साथ वो सब करती By Mister Rakesh

एक लड़की की, जो सबकी नज़रों में कुछ और थी... लेकिन खुद के लिए कुछ और।

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दिल्ली की तंग गलियों के बीच, जहां लोग दूसरों की ज़िंदगी को अपने खाली वक्त का मज़ा समझते हैं, वहीं रह...

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आखा तीज का ब्याह By Ankita Bhargava

सपनों को पूरा करने निकली वासंती अपने रिश्तों को ही खो बैठी। जब फिर से अतीत की गलियों ने उसे पुकारा तो वह अनिष्ट की आशंका से घबरा गई। मगर प्रतीक ने आश्वासन दिया कि कोई है वहां उसकी...

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त्रिधा By आयुषी सिंह

मेरी प्यारी त्रिधा,कैसी हो ? उम्मीद है पहले से बेहतर होगी। समझ नहीं आ रहा इतने सालों बाद क्या बोलूं, क्या लिखूं, क्या पूछूं...... तुम्हारा फोन नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट सब बन्...

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पलायन By Kishanlal Sharma

उसका मन अजीब सा हो रहा था।दिल उदास था।मन मे एक के बाद एक उटपटांग ख्याल आ रहे थे।दिन भर निठल्ला इधर उधर घूमने के बाद वह घर लौटा था।कमरे में आते ही उसे सालू की याद आने लगी
सालू आज...

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मृगतृष्णा तुम्हें देर से पहचाना By Ranjana Jaiswal

मैं जब भी आपके बारे में सोचती हूँ तो महात्मा गाँधी की शक्ल सामने आ जाती है। बुढ़ापे में आप लगभग उन्हीं की तरह लगते थे। खल्वाट सिर, लम्बी नासिका, छोटी आँखें, पतले होंठ और लम्बा दुबला...

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मुझे तुम याद आएं... By Saroj Verma

अरी,भाग्यवान! सत्या कहाँ है?नाश्ते का समय हो गया है और साहबजादे अभी तक फरार हैं,सेठ जानकी दास जी बोले.....
अरे,सुबह-सुबह निकल गया था,पता नहीं क्यों नहीं लौटा अब तक?,कल्याणी ने टेब...

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Reborn to be Loved By Mini

Let's begin…

आरवी ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों को पूरा करने में गुज़ार दी थी। सात साल की करी मेहनत के बाद, वो आखिरकार एक सक्सेसफुल डॉक्टर बन गई थी। उसकी लाईफ एकदम सही चल...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

नरेन्‍द्र उत्‍सुक एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्‍य सत्‍ता से साक्षात्‍कार होता रहा। परमहंस सन्‍तों की जिन पर अपार कृपा रही।

सोमवती 7 सितम्‍बर 1994 को मैं...

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कामनाओं के नशेमन By Husn Tabassum nihan

दरवाजे बहुत होते हैं, कुछ सहजता के साथ खुल जाने वाले और कुछ दरवाजे बहुत खटखटाने के बाद खुलने वाले। उतना अर्थ दरवाजे का नहीं होता जितना अर्थ चौखट का होता है। चौखट लांघ कर भीतर आना औ...

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अधूरे संवाद ( अतुकांत ) By Alok Mishra

कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।

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ये हम आ गए कहां!!! By दुःखी आत्मा जलीभूनी

पूरे आठ साल बाद लौटा था वह, वापस अपने शहर, अपने देश में! फिर से उन्हीं हवाओं उन्हीं गलियों में जहां वापस ना आने की कसम खाई थी उसने। लेकिन जिंदगी हमारे हिसाब से कहां चलती है! मजबूरी...

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आँच By Dr. Suryapal Singh

आँच अठारह सौ सत्तावन के संघर्ष की पृष्ठभूमि को उकेरता उपन्यास यह उपन्यास ? इक्कीसवीं सदीं का दूसरा दशक। उदारीकरण के बढ़ते क़दम। भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण एशियाई बाज़ारों को आच्छादित करन...

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