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स्वाभिमानी By Ivan Turgenev

बुढ़ापा आ गया है, बीमार भी हूं और अब मेरे विचार अक्‍सर मृत्‍यु की ओर ही जाया करते हैं जो दिन-ब-दिन मेरे पास आ रही है। कदाचित् ही मैं भूतकाल के संबंध में सोचता हूं और शायद ही कभी मै...

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श्री बप्पा रावल श्रृंखला - खण्ड-दो By The Bappa Rawal

कहानी शुरू होती है मेवाड़ के एक नगर नागदा से जहाँ भीलों के एक कबीले को घेरकर गुहिलवंशी शिवादित्य भीलों के सरदार भीलराज बलेऊ को द्वन्द की चुनौती देता है। वो बलेऊ को हराकर उसे मारने व...

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बना रहे यह अहसास By Sushma Munindra

घटना सिर्फ एक बार घटती है जब अपनी प्रामाणिकता में वस्तुतः घट रही होती है। वही घटना स्मृति में बार-बार घटती है। विचारों में भिन्न तरह से घटती है। विचारों के अनुसार घटना को महसूस करन...

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क्या तुझे भी इश्क है? By R.K.S. 'Guru'

अपनी अनूठी कनपुरिया भाषा के लिए जाना जाने वाले शहर कानपुर में अभी सुबह के सात बज रहे हैं. छोटी इमारतों की छतों पर भी सूरज अब दस्तक दे चुका है. दीपावली आने वाली है इस वजह से सुबह-सु...

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आवारा अदाकार By Vikram Singh

आवारा अदाकार विक्रम सिंह (1) ’’मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर,ठोकरें इन्सान को चलना सिखाती हैं। (रामधारी सिंह...

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बीते न रैना By Neeraj Sharma

कुछ हटकर जो हो रहा साहब, हम उसके बारे कहने का दूसहास किया है, इस के लिए कुछ भी घटिकत हो जाए। होने दो। भूमिका सोचते हो पता चल गयी हरगिज नहीं।कहने का तातपर्य कुछ ये है। बम्बे जाना ही...

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त्रिकाल - रहस्य की अंतिम शिला By WordsbyJATIN

अपने लापता पिता की खोज में आरव एक निषिद्ध वैदिक पांडुलिपि तक पहुँचता है जिसमें "त्रिकाल" नामक एक मुहर का वर्णन है - जिसके बारे में कहा जाता है कि वह काल (समय), आकाश (स्थान)...

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किस्से वीर बुन्देलों के - राज धर्म By Ravi Thakur

बुंदेलखंड की धरा, अद्भुत, अभूतपूर्व किस्से-कहानियों से अटी पड़ी है। यहाँ जन्म लेने वाले साधु-संत, कवि-साहित्यकार, रणबांकुरे, त्यागी- बलिदानी नर-नारियों के चरित्र आख्यान, अब तक छुटप...

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खेल खेल में - जादूई By Kaushik Dave

"खेल खेल में - जादूई"जिंदगी एक खेल है ऐसा कुछ लोग मानते हैं।लेकिन जिंदगी को सिरीयस में लेना चाहिए।एक ऐसी कहानी है जिसमें नायक को एक जादूई किताब मिलती है और उस किताब के जरिए...

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इंतजार दूसरा By Kishanlal Sharma

दामोदर गर्दन झुकाये हुए मन ही मन मे कुछ सोचता हुआ चला जा रहा था।तभी उसे हंसने की आवाज सुनाई पड़ी।खनखनाती हंसी सुनकर उसे ऐसा लगा, मानो किसी ने सुराई नुमा गर्दन से सारी की सारी शराब ए...

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भूत सम्राट By OLD KING

मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...

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मेल By jitin tyagi

आज एक बार फिर उसका मेल आया है। मरहम का रूप धरकर, पर जिस घाव के लिए आया है।, कृति उस घाव के दर्द से कब का निजात पा चुकी है।… पिछले तीन महीनों में ये उसका बारहवाँ मेल आया है।

कृ...

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करोड़ों-करोड़ों बिजलियां By S Bhagyam Sharma

इस तमिल के उपन्यास के मूल लेखक राजेश कुमार हैं । अनुवाद एस. भाग्यम शर्मा ने किया है।

यह उपन्यास नारी प्रधान है। इस उपन्यास की नायिका वैगई है। जो हजारों मुश्किलों से नहीं डरती। उ...

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 By InkImagination

ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...

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एहसास By Vartika reena

वो एक कॉलेज का एंट्रेंस था । सारे स्टुडेंट कॉलेज से बाहर आ रहे थे । एक लड़का और लड़की दोनों साथ में बाहर आ रहे थे । लड़की के चेहरे पर कुछ परेशानी थी और लड़का! वो तो कहीं खोया हुआ थ...

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प्यार की जीत By Kishanlal Sharma

अरुण ऑफिस में था तभी फोन आया।उसने उठाया उसकी माँ का था

"हां माँ।"

"तू घर आ जा।"

"क्यो माँ?"

"तुझसे बात करनी है।"

"तो कर ले।"...

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समता के पथिक: भीमराव By mood Writer

गाँव के बाहर, महू छावनी के शांत किनारे पर एक छोटा सा घर था। 14 अप्रैल 1891 की भोर, जब सूरज की पहली किरणें पहाड़ियों के पार से झांक रही थीं, उस घर में रोने की मधुर आवाज़ गूँज उठी। य...

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उजाले की ओर By Jaishree Roy

उजाले की ओर जयश्री रॉय (1) दोपहर का धूल भरा आकाश इस समय पीला दिख रहा है। सूरज एकदम माथे पर- एक फैलता-सिकुड़ता हुआ बड़ा-सा सफेद धब्बा! हवा अब रह-रह कर आंच देने लगी है! रूना चेहरे पर द...

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फोकटिया By DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR

वो जो दोस्त था

राजीव की ज़िंदगी में कोई बड़ी बात नहीं थी। वह न कोई बड़ा बिज़नेसमैन था, न सेलिब्रिटी, और न ही किसी खास खानदान से ताल्लुक रखता था। लेकिन फिर भी, उसमें कुछ खास था—व...

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हम फिर से मिले मगर इस तरह By MASHAALLHA KHAN

इंसान की किस्मत मे जो लिखा वो उसे मिलकर ही रहेता है, चाहे मौहब्बत हो या हो अश्क.ये कहानी है अरुण और रूपाली की जो कॉलेज मे मिले फिर अच्छे दोस्त बने , रूपाली जो अरुण से प्यार कर बैठी...

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ग़ज़ल, शेर By Kota Rajdeep

न था इंतज़ार कीसुका फ़िर भी उम्र भर इंतज़ार में रहें

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पी कहाँ? By Ratan Nath Sarshar

पी कहाँ! पी कहाँ! पी कहाँ! पी कहाँ!; मंगल का दिन और अँधेरी रात, बरसात की रात। दो बज के सत्‍ताईस मिनट हो आए थे। तीन का अमल। सब आराम में। सोता संसार, जागता पाक परवरदिगार। सन्‍नाटा पड...

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पहाडिन By Jayesh Gandhi

निवाड़ी, नंदादेवी पर्वत के निचले इलाके में बसा एक छोटा सा गांव। गांव के चारो और छोटीछोटी पहाड़िया,-घने पेड़ो के झुरमुट थे। गांव के पास में अलकनंदा नदी अपना निर्मल ओर पवित्र जल बहाती...

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ब्रह्मचर्य की अग्निपरीक्षा By Bikash parajuli

बरसों पहले की बात है। गंगा किनारे बसे छोटे से गाँव नवग्राम में एक लड़का रहता था – नाम था अर्जुन। उम्र मुश्किल से पंद्रह–सोलह वर्ष, लेकिन चेहरे पर मासूमियत और आँखों में अजीब-सी गहरा...

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घुसपैठिए से आखिरी मुलाक़ात के बाद By Pradeep Shrivastava

पिछली तीन बार की तरह इस बार भी मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही निकली कि लखनऊ में मानसून करीब हफ्ते भर देर से पहुंचेगा। मानसून विभाग द्वारा बताए गए संभावित समय को बीते दो दिन नहीं हुए...

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दिलरस By Priyamvad

पतझर आ गया था।

उस पेड़ पर एक भी पत्ता नहीं बचा था। बाजरे की कलगी के एक-एक दाने को जैसे तोता निकाल लेता है, उसी तरह पतझर ने हर पत्ते को अलग कर दिया था। पेड़ की पूरी कत्थई शाखाएं...

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वंश. By Prabodh Kumar Govil

यह कहानी जो हम आपको सुनाने जा रहे हैं यह हमारी लिखी हुई नहीं है। ऐसी कहानियाँ कोई लिख भी नहीं सकता। ऐसी कहानियाँ तो 'जी’ जाती हैं और उन्हें रचते हैं उनके पात्र, उन्हें गढ़ता है...

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खामोश ज़िंदगी के बोलते जज़्बात By Babul haq ansari

सड़कों पर रोज़ की तरह भीड़ दौड़ रही थी।

हर कोई कहीं पहुंचने की जल्दी में था।

लेकिन उन्हीं चेहरों के बीच एक चेहरा ऐसा भी था, जो न दौड़ रहा था, न रुक रहा था — बस चल रहा था... अ...

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सुपर जीन By Aniket Mehara

एक घाटी में पथरीली धारा के किनारे, काले कपड़े पहने एक युवक ने एक काले रंग का भृंग पकड़ रखा था, जिस पर धातु जैसी चमक थी और जो देखने में केकड़े और हरक्यूलिस भृंग के मिश्रण जैसा लग रह...

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असली आज़ादी वाली आज़ादी By devendra kushwaha

देश को आज़ाद कराना आसान नही था बहुत त्याग और संघर्ष के बाद इस देश को आज़ादी नसीब हुई। आजादी बेशकीमती थी क्योंकि लाखों लोगों ने इसे पाने के लिए बिना कुछ सोंचे समझें अपनी जान न्योछावर...

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धनिया By Govardhan Yadav

भिनसारे उठ बैठती धनिया और बाउण्ड्री वाल से चिपकर खड़ी हो जाती। उसकी खोजी नजरें, पहाड़ों की गहराइयों में अपना गाँव खोजने में व्यस्त हो जातीं। गहरे नीले-भूरे रंग के धुंधलके की चादर त...

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Reborn Agent Queen ka By Dark Queen

अमेज़न के घने जंगलो को चिरती हुई एक लड़की अपनी विशेष एजेंटो की टीम के साथ आगे बढ़ी जा रही थी। आज वह एक बहुत बढे मिशन को अंजाम देने जा रही थी।

वो आगे बढ़ ही रही थी, तभी उसे अपने...

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सन्नाटे में शनाख़्त By Pradeep Shrivastava

उसने अचानक ही उस पर घूँसे-लात बरसा कर, उसे बेड से नीचे धकेल दिया। टाइल्स लगे फ़र्श पर अकस्मात्‌ गिरने से उसके सिर में गहरी चोट आ गई है। ख़ून के धब्बे पड़ने लगे हैं। उसने पेट पर लात इत...

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अपने-अपने इन्द्रधनुष By Neerja Hemendra

आज न जाने क्यों मुझे घर के अन्दर अच्छा नही लग रहा था। बार-बार मन में उठ रही व्याकुलता व अपने आस-पास फैली उदासी से निजात पाने के लिए मैं छत पर आ गई। खुली हवा में, विस्तृत आसमान के न...

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वेलेंटाइंस डे By Vaidehi Vaishnav

साँझ ढलने को थीं। जाड़ो में दिन छोटे औऱ रात लंबी हो जाती हैं , उतनी ही लंबी जितनी ऑफिस से घर को जाती सड़क। दूधिया स्ट्रीट लाइट से रोशन होता शहर बेहद खूबसूरत लगता हैं। सत्रह किलोमीटर...

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Falling for my Heart Criminal By simran

हैदराबाद ........

शाम 5 बजे

कोर्ट के बहार .........

एक लड़की रोते हुए एक आदमी से हाथ जोड़कर कुछ कह रही थी "पापा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है सब मन्नत ने किया है मुझे वो...

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आधा मुद्दा (सबसे बड़ा मुद्दा) By DILIP UTTAM

"अर्धांगिनी"----- कहने को अर्धांगिनी कहा जाता है परंतु आधा हिस्सा दिया किसने, आधा हक दिया किसने, और आधा अधिकार/मान-सम्मान दिया किसने, आधा तो क्या उसे हर मोड़ पर छला जाता...

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मीत By Vaidehi Vaishnav

मुझें गाने सुनते हुए काम करने की आदत हैं । आज भीं जब मैं अपने कमरें की सफ़ाई कर रहीं थीं तब आदतन मैंने रेडियो ऑन कर लिया था।

उम्र का दौर था या इश्क़ का जोर तय करना मुश्किल था पर ज...

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श्री गुरु नानक देव जी By Singh Pams

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रमी समवत् 1526के अनुसार 20

अक्तूबर 1469ईस्वी तलवंडी राई भोइ जिला शेखापूर पाकिस्तान में हुआ उस भाग्यशाली नगर तलवंडी का नाम तदुप...

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लोक डाउन एंड कोचिंग सिटी कोटा By Rekha Pancholi

अचानक जिंदगी कुछ ऐसे ही बदल गई थी, मानो हर-हराता झरना एक ही रात में बर्फ में तब्दील हो गया हो। सड़के, बाजार, स्कूल, कॉलेज, मॉल, बसें- ट्रेनें सब मुंह बाएं खड़े थे, स्तब्ध से, हर जग...

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जवान लड़का By Katha kunal

हर्ष एक 17 साल का सामान्य सा लड़का था, जो अभी 12वीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई में ठीक-ठाक और स्वभाव से थोड़ा शांत था, लेकिन उसकी संगत उसके स्वभाव से मेल नहीं खाती थी। हर्ष की दोस्त...

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मृत आत्मा की पुकार By Sai Sesya

वह आवाज़ जो वापस आई

शमशेरपुर ऐसा गाँव था जहाँ कहानियाँ सिर्फ सुनी नहीं जाती थीं, बल्कि हवा में घुलकर हर सांस के साथ महसूस की जाती थीं। पहाड़ों के बीच बसा यह गाँव दिन में साधारण...

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यादों का सफ़र By VANDANA VANI SINGH

मै वंदना सिंह पहले भी बहुत सी कहानी पढ़ी है, जैसा कि आप जानते है, की मै हर किरदार को जीती एसा ही इस कहानी मे भी होगा इस कहानी में भी मै एक एक किरदार को अच्छे से वेक्त करना चाहूंगी...

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नागिन और रहस्यमयि दुनिया By Neha Hooda

देविका, एक सरल और मासूम लड़की है, जो शांतिपूर्ण जीवन जीती है। हालाँकि, पाँच साल की उम्र में, एक जीवन-परिवर्तनकारी घटना घटती है, जो भविष्य में उसके नागिन (नागिन देवी) में बदलने की भ...

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Zom-Bai By Tabish Sultan

"लेफ्ट राईट, लेफ्ट राईट लेफ्ट …..पापा मेरे कदमताल सही जा रहें हैं ना….क्या मैं भी आपकी तरह मेजर बन पाउँगा",

8 साल का रुहान अपने पापा मेजर अक्षय सिंह राठौर की तरह ही आर्म...

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जो कहा नहीं गया By W.Brajendra

(एक प्रेम, जो राज्य का नहीं… आत्मा का था)

विरक्त राजकुमार

राजकुमार विष्णु का जन्म राजघराने में हुआ था, लेकिन मन उसका वन और वेदांत में बसता था। बचपन से ही उसके भीतर एक अलग चं...

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AI का खेल... By Nirali patel

लैब की बत्तियाँ धीरे-धीरे झपकती हैं, और बाहर तूफान का शोर और तेज़ हवाओं का अहसास भीतर भी होने लगता है। लैब का वातावरण ठंडा और सन्नाटे से भरा हुआ है। आरव, अपने कंप्यूटर के पास, बिना...

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हुआंग चाउ की बेटी By Sax Rohmer

पब्लिक हाउस के एक सलून बार में, जो चाइनाटाउन की आधिकारिक सीमा से कुछ ही दूरी पर स्थित था, एक कोने में एक छोटे से टेबल पर दो लोग बैठे थे और गंभीर चर्चा में व्यस्त थे। दोनों में कड़ा...

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कजरी By anushka swami

श्यामाप्रसाद ने क्या जवाब दिया आपका ? ' जानकी देवी ने अपने पति रघुनाथ से पूछा ।
'तुम जानती हो जवाब क्या आएगा ,मेरी मानो तो उम्मीद छोड़ दो '। रघुनाथ् ने अपने घर के सामने...

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बीस्ट: ए टेल ऑफ़ लव एंड रिवेंज By Rituraj Joshi

कहानी शुरु होती हैं----------------

एक लड़की गुस्से में अपने सामने खड़े एक लड़के को देखी हुई जोर से चीखीं . उसकी आवाज सुनकर उस लड़के के माता-पिता भी उस कमरे में आ गए थे , जिस कम...

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स्वाभिमानी By Ivan Turgenev

बुढ़ापा आ गया है, बीमार भी हूं और अब मेरे विचार अक्‍सर मृत्‍यु की ओर ही जाया करते हैं जो दिन-ब-दिन मेरे पास आ रही है। कदाचित् ही मैं भूतकाल के संबंध में सोचता हूं और शायद ही कभी मै...

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श्री बप्पा रावल श्रृंखला - खण्ड-दो By The Bappa Rawal

कहानी शुरू होती है मेवाड़ के एक नगर नागदा से जहाँ भीलों के एक कबीले को घेरकर गुहिलवंशी शिवादित्य भीलों के सरदार भीलराज बलेऊ को द्वन्द की चुनौती देता है। वो बलेऊ को हराकर उसे मारने व...

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बना रहे यह अहसास By Sushma Munindra

घटना सिर्फ एक बार घटती है जब अपनी प्रामाणिकता में वस्तुतः घट रही होती है। वही घटना स्मृति में बार-बार घटती है। विचारों में भिन्न तरह से घटती है। विचारों के अनुसार घटना को महसूस करन...

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क्या तुझे भी इश्क है? By R.K.S. 'Guru'

अपनी अनूठी कनपुरिया भाषा के लिए जाना जाने वाले शहर कानपुर में अभी सुबह के सात बज रहे हैं. छोटी इमारतों की छतों पर भी सूरज अब दस्तक दे चुका है. दीपावली आने वाली है इस वजह से सुबह-सु...

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आवारा अदाकार By Vikram Singh

आवारा अदाकार विक्रम सिंह (1) ’’मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर,ठोकरें इन्सान को चलना सिखाती हैं। (रामधारी सिंह...

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बीते न रैना By Neeraj Sharma

कुछ हटकर जो हो रहा साहब, हम उसके बारे कहने का दूसहास किया है, इस के लिए कुछ भी घटिकत हो जाए। होने दो। भूमिका सोचते हो पता चल गयी हरगिज नहीं।कहने का तातपर्य कुछ ये है। बम्बे जाना ही...

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त्रिकाल - रहस्य की अंतिम शिला By WordsbyJATIN

अपने लापता पिता की खोज में आरव एक निषिद्ध वैदिक पांडुलिपि तक पहुँचता है जिसमें "त्रिकाल" नामक एक मुहर का वर्णन है - जिसके बारे में कहा जाता है कि वह काल (समय), आकाश (स्थान)...

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किस्से वीर बुन्देलों के - राज धर्म By Ravi Thakur

बुंदेलखंड की धरा, अद्भुत, अभूतपूर्व किस्से-कहानियों से अटी पड़ी है। यहाँ जन्म लेने वाले साधु-संत, कवि-साहित्यकार, रणबांकुरे, त्यागी- बलिदानी नर-नारियों के चरित्र आख्यान, अब तक छुटप...

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खेल खेल में - जादूई By Kaushik Dave

"खेल खेल में - जादूई"जिंदगी एक खेल है ऐसा कुछ लोग मानते हैं।लेकिन जिंदगी को सिरीयस में लेना चाहिए।एक ऐसी कहानी है जिसमें नायक को एक जादूई किताब मिलती है और उस किताब के जरिए...

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इंतजार दूसरा By Kishanlal Sharma

दामोदर गर्दन झुकाये हुए मन ही मन मे कुछ सोचता हुआ चला जा रहा था।तभी उसे हंसने की आवाज सुनाई पड़ी।खनखनाती हंसी सुनकर उसे ऐसा लगा, मानो किसी ने सुराई नुमा गर्दन से सारी की सारी शराब ए...

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भूत सम्राट By OLD KING

मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...

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मेल By jitin tyagi

आज एक बार फिर उसका मेल आया है। मरहम का रूप धरकर, पर जिस घाव के लिए आया है।, कृति उस घाव के दर्द से कब का निजात पा चुकी है।… पिछले तीन महीनों में ये उसका बारहवाँ मेल आया है।

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करोड़ों-करोड़ों बिजलियां By S Bhagyam Sharma

इस तमिल के उपन्यास के मूल लेखक राजेश कुमार हैं । अनुवाद एस. भाग्यम शर्मा ने किया है।

यह उपन्यास नारी प्रधान है। इस उपन्यास की नायिका वैगई है। जो हजारों मुश्किलों से नहीं डरती। उ...

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 By InkImagination

ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...

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एहसास By Vartika reena

वो एक कॉलेज का एंट्रेंस था । सारे स्टुडेंट कॉलेज से बाहर आ रहे थे । एक लड़का और लड़की दोनों साथ में बाहर आ रहे थे । लड़की के चेहरे पर कुछ परेशानी थी और लड़का! वो तो कहीं खोया हुआ थ...

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प्यार की जीत By Kishanlal Sharma

अरुण ऑफिस में था तभी फोन आया।उसने उठाया उसकी माँ का था

"हां माँ।"

"तू घर आ जा।"

"क्यो माँ?"

"तुझसे बात करनी है।"

"तो कर ले।"...

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समता के पथिक: भीमराव By mood Writer

गाँव के बाहर, महू छावनी के शांत किनारे पर एक छोटा सा घर था। 14 अप्रैल 1891 की भोर, जब सूरज की पहली किरणें पहाड़ियों के पार से झांक रही थीं, उस घर में रोने की मधुर आवाज़ गूँज उठी। य...

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उजाले की ओर By Jaishree Roy

उजाले की ओर जयश्री रॉय (1) दोपहर का धूल भरा आकाश इस समय पीला दिख रहा है। सूरज एकदम माथे पर- एक फैलता-सिकुड़ता हुआ बड़ा-सा सफेद धब्बा! हवा अब रह-रह कर आंच देने लगी है! रूना चेहरे पर द...

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फोकटिया By DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR

वो जो दोस्त था

राजीव की ज़िंदगी में कोई बड़ी बात नहीं थी। वह न कोई बड़ा बिज़नेसमैन था, न सेलिब्रिटी, और न ही किसी खास खानदान से ताल्लुक रखता था। लेकिन फिर भी, उसमें कुछ खास था—व...

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हम फिर से मिले मगर इस तरह By MASHAALLHA KHAN

इंसान की किस्मत मे जो लिखा वो उसे मिलकर ही रहेता है, चाहे मौहब्बत हो या हो अश्क.ये कहानी है अरुण और रूपाली की जो कॉलेज मे मिले फिर अच्छे दोस्त बने , रूपाली जो अरुण से प्यार कर बैठी...

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ग़ज़ल, शेर By Kota Rajdeep

न था इंतज़ार कीसुका फ़िर भी उम्र भर इंतज़ार में रहें

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पी कहाँ? By Ratan Nath Sarshar

पी कहाँ! पी कहाँ! पी कहाँ! पी कहाँ!; मंगल का दिन और अँधेरी रात, बरसात की रात। दो बज के सत्‍ताईस मिनट हो आए थे। तीन का अमल। सब आराम में। सोता संसार, जागता पाक परवरदिगार। सन्‍नाटा पड...

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पहाडिन By Jayesh Gandhi

निवाड़ी, नंदादेवी पर्वत के निचले इलाके में बसा एक छोटा सा गांव। गांव के चारो और छोटीछोटी पहाड़िया,-घने पेड़ो के झुरमुट थे। गांव के पास में अलकनंदा नदी अपना निर्मल ओर पवित्र जल बहाती...

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ब्रह्मचर्य की अग्निपरीक्षा By Bikash parajuli

बरसों पहले की बात है। गंगा किनारे बसे छोटे से गाँव नवग्राम में एक लड़का रहता था – नाम था अर्जुन। उम्र मुश्किल से पंद्रह–सोलह वर्ष, लेकिन चेहरे पर मासूमियत और आँखों में अजीब-सी गहरा...

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घुसपैठिए से आखिरी मुलाक़ात के बाद By Pradeep Shrivastava

पिछली तीन बार की तरह इस बार भी मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही निकली कि लखनऊ में मानसून करीब हफ्ते भर देर से पहुंचेगा। मानसून विभाग द्वारा बताए गए संभावित समय को बीते दो दिन नहीं हुए...

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दिलरस By Priyamvad

पतझर आ गया था।

उस पेड़ पर एक भी पत्ता नहीं बचा था। बाजरे की कलगी के एक-एक दाने को जैसे तोता निकाल लेता है, उसी तरह पतझर ने हर पत्ते को अलग कर दिया था। पेड़ की पूरी कत्थई शाखाएं...

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वंश. By Prabodh Kumar Govil

यह कहानी जो हम आपको सुनाने जा रहे हैं यह हमारी लिखी हुई नहीं है। ऐसी कहानियाँ कोई लिख भी नहीं सकता। ऐसी कहानियाँ तो 'जी’ जाती हैं और उन्हें रचते हैं उनके पात्र, उन्हें गढ़ता है...

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खामोश ज़िंदगी के बोलते जज़्बात By Babul haq ansari

सड़कों पर रोज़ की तरह भीड़ दौड़ रही थी।

हर कोई कहीं पहुंचने की जल्दी में था।

लेकिन उन्हीं चेहरों के बीच एक चेहरा ऐसा भी था, जो न दौड़ रहा था, न रुक रहा था — बस चल रहा था... अ...

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सुपर जीन By Aniket Mehara

एक घाटी में पथरीली धारा के किनारे, काले कपड़े पहने एक युवक ने एक काले रंग का भृंग पकड़ रखा था, जिस पर धातु जैसी चमक थी और जो देखने में केकड़े और हरक्यूलिस भृंग के मिश्रण जैसा लग रह...

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असली आज़ादी वाली आज़ादी By devendra kushwaha

देश को आज़ाद कराना आसान नही था बहुत त्याग और संघर्ष के बाद इस देश को आज़ादी नसीब हुई। आजादी बेशकीमती थी क्योंकि लाखों लोगों ने इसे पाने के लिए बिना कुछ सोंचे समझें अपनी जान न्योछावर...

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धनिया By Govardhan Yadav

भिनसारे उठ बैठती धनिया और बाउण्ड्री वाल से चिपकर खड़ी हो जाती। उसकी खोजी नजरें, पहाड़ों की गहराइयों में अपना गाँव खोजने में व्यस्त हो जातीं। गहरे नीले-भूरे रंग के धुंधलके की चादर त...

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Reborn Agent Queen ka By Dark Queen

अमेज़न के घने जंगलो को चिरती हुई एक लड़की अपनी विशेष एजेंटो की टीम के साथ आगे बढ़ी जा रही थी। आज वह एक बहुत बढे मिशन को अंजाम देने जा रही थी।

वो आगे बढ़ ही रही थी, तभी उसे अपने...

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सन्नाटे में शनाख़्त By Pradeep Shrivastava

उसने अचानक ही उस पर घूँसे-लात बरसा कर, उसे बेड से नीचे धकेल दिया। टाइल्स लगे फ़र्श पर अकस्मात्‌ गिरने से उसके सिर में गहरी चोट आ गई है। ख़ून के धब्बे पड़ने लगे हैं। उसने पेट पर लात इत...

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अपने-अपने इन्द्रधनुष By Neerja Hemendra

आज न जाने क्यों मुझे घर के अन्दर अच्छा नही लग रहा था। बार-बार मन में उठ रही व्याकुलता व अपने आस-पास फैली उदासी से निजात पाने के लिए मैं छत पर आ गई। खुली हवा में, विस्तृत आसमान के न...

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वेलेंटाइंस डे By Vaidehi Vaishnav

साँझ ढलने को थीं। जाड़ो में दिन छोटे औऱ रात लंबी हो जाती हैं , उतनी ही लंबी जितनी ऑफिस से घर को जाती सड़क। दूधिया स्ट्रीट लाइट से रोशन होता शहर बेहद खूबसूरत लगता हैं। सत्रह किलोमीटर...

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Falling for my Heart Criminal By simran

हैदराबाद ........

शाम 5 बजे

कोर्ट के बहार .........

एक लड़की रोते हुए एक आदमी से हाथ जोड़कर कुछ कह रही थी "पापा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है सब मन्नत ने किया है मुझे वो...

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आधा मुद्दा (सबसे बड़ा मुद्दा) By DILIP UTTAM

"अर्धांगिनी"----- कहने को अर्धांगिनी कहा जाता है परंतु आधा हिस्सा दिया किसने, आधा हक दिया किसने, और आधा अधिकार/मान-सम्मान दिया किसने, आधा तो क्या उसे हर मोड़ पर छला जाता...

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मीत By Vaidehi Vaishnav

मुझें गाने सुनते हुए काम करने की आदत हैं । आज भीं जब मैं अपने कमरें की सफ़ाई कर रहीं थीं तब आदतन मैंने रेडियो ऑन कर लिया था।

उम्र का दौर था या इश्क़ का जोर तय करना मुश्किल था पर ज...

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श्री गुरु नानक देव जी By Singh Pams

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रमी समवत् 1526के अनुसार 20

अक्तूबर 1469ईस्वी तलवंडी राई भोइ जिला शेखापूर पाकिस्तान में हुआ उस भाग्यशाली नगर तलवंडी का नाम तदुप...

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लोक डाउन एंड कोचिंग सिटी कोटा By Rekha Pancholi

अचानक जिंदगी कुछ ऐसे ही बदल गई थी, मानो हर-हराता झरना एक ही रात में बर्फ में तब्दील हो गया हो। सड़के, बाजार, स्कूल, कॉलेज, मॉल, बसें- ट्रेनें सब मुंह बाएं खड़े थे, स्तब्ध से, हर जग...

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जवान लड़का By Katha kunal

हर्ष एक 17 साल का सामान्य सा लड़का था, जो अभी 12वीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई में ठीक-ठाक और स्वभाव से थोड़ा शांत था, लेकिन उसकी संगत उसके स्वभाव से मेल नहीं खाती थी। हर्ष की दोस्त...

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मृत आत्मा की पुकार By Sai Sesya

वह आवाज़ जो वापस आई

शमशेरपुर ऐसा गाँव था जहाँ कहानियाँ सिर्फ सुनी नहीं जाती थीं, बल्कि हवा में घुलकर हर सांस के साथ महसूस की जाती थीं। पहाड़ों के बीच बसा यह गाँव दिन में साधारण...

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यादों का सफ़र By VANDANA VANI SINGH

मै वंदना सिंह पहले भी बहुत सी कहानी पढ़ी है, जैसा कि आप जानते है, की मै हर किरदार को जीती एसा ही इस कहानी मे भी होगा इस कहानी में भी मै एक एक किरदार को अच्छे से वेक्त करना चाहूंगी...

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नागिन और रहस्यमयि दुनिया By Neha Hooda

देविका, एक सरल और मासूम लड़की है, जो शांतिपूर्ण जीवन जीती है। हालाँकि, पाँच साल की उम्र में, एक जीवन-परिवर्तनकारी घटना घटती है, जो भविष्य में उसके नागिन (नागिन देवी) में बदलने की भ...

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Zom-Bai By Tabish Sultan

"लेफ्ट राईट, लेफ्ट राईट लेफ्ट …..पापा मेरे कदमताल सही जा रहें हैं ना….क्या मैं भी आपकी तरह मेजर बन पाउँगा",

8 साल का रुहान अपने पापा मेजर अक्षय सिंह राठौर की तरह ही आर्म...

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जो कहा नहीं गया By W.Brajendra

(एक प्रेम, जो राज्य का नहीं… आत्मा का था)

विरक्त राजकुमार

राजकुमार विष्णु का जन्म राजघराने में हुआ था, लेकिन मन उसका वन और वेदांत में बसता था। बचपन से ही उसके भीतर एक अलग चं...

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AI का खेल... By Nirali patel

लैब की बत्तियाँ धीरे-धीरे झपकती हैं, और बाहर तूफान का शोर और तेज़ हवाओं का अहसास भीतर भी होने लगता है। लैब का वातावरण ठंडा और सन्नाटे से भरा हुआ है। आरव, अपने कंप्यूटर के पास, बिना...

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हुआंग चाउ की बेटी By Sax Rohmer

पब्लिक हाउस के एक सलून बार में, जो चाइनाटाउन की आधिकारिक सीमा से कुछ ही दूरी पर स्थित था, एक कोने में एक छोटे से टेबल पर दो लोग बैठे थे और गंभीर चर्चा में व्यस्त थे। दोनों में कड़ा...

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कजरी By anushka swami

श्यामाप्रसाद ने क्या जवाब दिया आपका ? ' जानकी देवी ने अपने पति रघुनाथ से पूछा ।
'तुम जानती हो जवाब क्या आएगा ,मेरी मानो तो उम्मीद छोड़ दो '। रघुनाथ् ने अपने घर के सामने...

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बीस्ट: ए टेल ऑफ़ लव एंड रिवेंज By Rituraj Joshi

कहानी शुरु होती हैं----------------

एक लड़की गुस्से में अपने सामने खड़े एक लड़के को देखी हुई जोर से चीखीं . उसकी आवाज सुनकर उस लड़के के माता-पिता भी उस कमरे में आ गए थे , जिस कम...

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