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यादों का सफ़र By VANDANA VANI SINGH

मै वंदना सिंह पहले भी बहुत सी कहानी पढ़ी है, जैसा कि आप जानते है, की मै हर किरदार को जीती एसा ही इस कहानी मे भी होगा इस कहानी में भी मै एक एक किरदार को अच्छे से वेक्त करना चाहूंगी...

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चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 By Lajpat Rai Garg

रात के बारह बजने वाले थे। करीबी रिश्तेदारों तथा वर-वधू परिवारों के लोगों को छोड़कर विवाह समारोह में आमंत्रित लगभग सभी लोग खा-पीकर तथा बधाई-शुभकामनाएँ देने का फ़र्ज़ निभाकर जा चुके...

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आजाद-कथा - खंड 2 By Munshi Premchand

मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन हुई,...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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जीने के लिए By Rama Sharma Manavi

प्रथम अध्याय----------- शोक संवेदना की औपचारिकता के निर्वहन हेतु आसपास के परिचित एवं रिश्तेदार आ-जा रहे थे।सामाजिक रूप से कल रात्रि आरती के पति विक्रम जी का देहावसान हो गया था...

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नासाज़ By Srishtichouhan

अध्याय एकपेपरमेंट की मीठी जन्नतदुनिया एक पागल कुत्ते की तरह आपको काट खाएगी और आप बस उसका निवाला बन जाना, मुझे अब किसी की प्रतिक्रिया से कोई भी फ़र्क़ नहीं पड़ता था, बिल्कुल भी नही...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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जो मिले तुमसे By M K

" मरहम बनकर जख्म गहरे दिए क्यों ?
आसान नहीं होता है किसी को दिल से भुला जाना "

थके हारे से एक नव युवक सड़क किनारे खड़ा था , रात के 8 बज रहे थे । आस पास से कई गाड़ियां ग...

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SUDESH By ANKIT YADAV

भुमिका :- उपन्यास में वर्णिन चरित, घटना, स्थान पूरी तरह काल्पनिक हैं। चरित्र का जीवित या मृत व्यक्ति से जुड़ाव, घटनाओ का सत्य प्रतीत, होना स्थानों का यर्थाथवादी स्थान लगना केवल संय...

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गुनाहों का शहर By Ravi

सालों से चल रहे एक हाई प्रोफाइल चरस स्कैण्डल की जब नव-नियुक्त एस.आई ने जांच पड़ताल शुरू की तो सारे शहर की पुलिस उसके खिलाफ हो गई। लेकिन फिर पुरुषोत्तम अपने कर्तव्य का पालन करता रहा।...

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मेरी कविता संग्रह By Prahlad Pk Verma

?????????????? अब हम भी इश्क दोबारा करेंगे उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगेहम कभी तो फिर से मोहब्बत करेंगेमाना दिल में जख्म अभी ताजा हैकभी तो ये जख्म भी भरेंगेअब हम भी इश्क...

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बेगम पुल की बेगम उर्फ़ By Pranava Bharti

घुँघरुओं की छनछनहाट क्यों और कहाँ से उसके कानों में पिघलने लगी थी, वहाँ वह गिरजाघर के प्राँगण में खड़ा था, कॉलेज का नया लेक्चरर अपने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ इस गिरजाघर की ज़मी...

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हूफ प्रिंट By Ashish Kumar Trivedi

माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम By Brijmohan sharma

यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I

२ स्वतत्रता सेनानी द्वारा हरिजन उत्थान का प्रयास करने पर जाति वा...

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हुक्म और हसरत By Diksha mis kahani

हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।"
"प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...

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संस्कृतियो  का अनोखा मिलन  By Akshika Aggarwal

दोस्तों आज हम एक ऐसी प्रेम कहानी के साक्षी बन ने जा रहे है जो अपने आप मे अनोखा है। इस कहाँनी में दो विभिन संस्कृतियो का मिलन है। भारत देश के गुलाबी जयपुर में रौनक का जन्म 21 दि...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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अन सुना इश्क़ By Mehul Pasaya

एक शहर मे एक बुढ़ी माँ जी रह्ती थी. और उस शहर मे दुसरे व्यक्ति या इन्सान नाम का कोई नही रह्ता था. क्यू की वहा के सारे लोग मारे जा चुके थे. बस वो बुढ़ी माँ जी और दुसरे उसके साथ एक कुत...

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क्या तुझे भी इश्क है? By R.K.S. 'Guru'

अपनी अनूठी कनपुरिया भाषा के लिए जाना जाने वाले शहर कानपुर में अभी सुबह के सात बज रहे हैं. छोटी इमारतों की छतों पर भी सूरज अब दस्तक दे चुका है. दीपावली आने वाली है इस वजह से सुबह-सु...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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हक है सिर्फ मेरा By simran

एक नई कहानी , नए किरदार बस प्यार वही जो हर किसी के नसीब में नहीं !

अब इस कहानी में प्यार की कोई जगह है या नही ये जानने के लिए हम एक सफर शुरू करते है " हक है सिर्फ मेरा "...

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चौथा नक्षत्र By Kandarp

पहली एनीवर्सरी“हैलो कमल कहाँ हो ? ....ऑफिस से निकले क्या ? ”, फोन पर झुँझलाये स्वर में, लगभग डाँटते हुए सुरभि ने कहा । “निकल गया हूँ मेरी सोना ”, लाड भरी आवाज में कमल का जवाब आय...

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We Meet again! By Anjali Lingayat

प्यार प्रेरणा की भावना है। दो व्यक्तियों की कहानी जो पूरी तरह से अलग है और ये स्थिति, जीवन शैली के बारे में है जिसे भी उनके लाइफ में फर्क पड़ता है लेकिन उनमें से दो एक घटना के साथ...

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गुमनाम राजा By Harshit Ranjan

हमारे देश आदि काल से अपनी कला-कृति, ज्ञान, औषधियों, योद्धाओं आदि के लिए संपूर्ण विश्य मे प्रसिद्ध रहा है । इन सभी के साथ-साथ एक और चीज़ है जिसके लिए हमारा देश संपूर्ण विश्व मे ं जा...

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संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि By Manoj kumar shukla

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (1) हे माँ वीणा वादिनी ..... हे माँ वीणा वादिनी, शत् शत् तुझे प्रणाम । हम तेरे सब भक्त हैं, जपते तेरा नाम ।। शांत सौम्य आभा लिए, मुख में है मुस्कान । ग...

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सलाखों से झाँकते चेहरे By Pranava Bharti

जैसे ही इशिता ने उस कमरे में प्रवेश किया उसकी साँसें ऊपर की ऊपर ही रह गईं | एक अजीब सी मनोदशा में वह जैसे साँस लेना भूल गई, लड़खड़ा गई जैसे चक्कर से आने लगे |

"व्हाट हैपेंड म...

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खून का टीका By Priyanka Singh

शादी... एक ऐसा बंधन जिसे हर लड़की सपनों में संजोती है।

लेकिन क्या हो जब यही शादी एक जाल बन जाए?

क्या हो जब सिंदूर के पीछे छुपा हो खून का व्यापार?

और क्या एक सीधी-साधी लड़क...

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खाली हाथ By Ratna Pandey

सूरज और नताशा का इकलौता बेटा अरुण विवाह के दस वर्ष के पश्चात नताशा के गर्भ में आया था। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर भगवान के आगे माथा टेका था, ना जाने कितनी मानता रखी थीं। तब...

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पुर्णिमा By Soni shakya

मां _मां_ ओ __मां !!

देखो मेरा रिजल्ट पुरे 95 पर्सेंट मिले से मुझे।

मां मैं बहुत खुश हूं आज कहते हुए झुमने लगी पुर्णिमा ।

उसकी बातों में खनक और आंखों मे चमक थी।

आज वो स...

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जुआरी फिल्मप्रोड्यूसर By Brijmohan sharma

शेयरबाजार व फिल्मनिर्माण के व्यवसाय में तूफानी उतार चढाव की लोमहर्षक दास्तान

जुऐं की लत से परिवार के बर्बाद व फिर से आबाद होने की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी

लेखक : ब्रजमोहन श...

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धनिया By Govardhan Yadav

भिनसारे उठ बैठती धनिया और बाउण्ड्री वाल से चिपकर खड़ी हो जाती। उसकी खोजी नजरें, पहाड़ों की गहराइयों में अपना गाँव खोजने में व्यस्त हो जातीं। गहरे नीले-भूरे रंग के धुंधलके की चादर त...

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कैक्टस के जंगल By Sureshbabu Mishra

श्री सुरेश बाबू मिश्रा हिन्दी कथा साहित्य का जाना-पहचाना नाम है। आपकी अनेक रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होती रहती हैं। आपका नया कहानी संग्रह ‘कैक्टस के जंगल’ न...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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सियाह हाशिए By BALRAM AGARWAL

‘सियाह हाशिये’ पाकिस्तान में बस जाने के बाद मंटो की तीसरी किताब थी जो ‘मकतबा-ए-जदीद’ से प्रकाशित हुई। सन् 1951 तक यह उनकी सातवीं किताब थी। वीभत्सता, उलझन, बेज़ारी, नफ़रत, दुख और क्...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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शरणागति By S Bhagyam Sharma

इस लघु उपन्यास के प्रसिद्ध लेखक इंदिरा सौंदर्राजन हैं। यह तमिल के बहुत बड़े लेखक हैं। इन्होंने करीब 500 उपन्यास और 800 कहानियां लिखी है। आपने चार हजार के करीब लेख लिखे हैं।

आप क...

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पहाडिन By Jayesh Gandhi

निवाड़ी, नंदादेवी पर्वत के निचले इलाके में बसा एक छोटा सा गांव। गांव के चारो और छोटीछोटी पहाड़िया,-घने पेड़ो के झुरमुट थे। गांव के पास में अलकनंदा नदी अपना निर्मल ओर पवित्र जल बहाती...

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रहस्यों की परछाई By Diksha Dhone

रात का अंधेरा शहर की संकरी गलियों में गहराता जा रहा था। आसमान में बादल थे, जिनसे रुक-रुककर हल्की बारिश की बूंदें टपक रही थीं। बूंदें जब पत्थर की फर्श से टकरातीं, तो एक अजीब-सी गूँज...

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गुलकंद By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

मैं, एक लेखिका, श्रुत कीर्ति अग्रवाल, आज पहली बार आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से नहीं, स्वयं अपने-आप को माध्यम बना आपके समक्ष हूँ। अभी तक मुझे लगता था कि अगर मैं अपनी सारी बातें...

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मोनालिसा: एक रहस्यमयी कृति की अद्भुत गाथा By Lokesh Dangi

मोनालिसा (Mona Lisa) विश्व की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग्स में से एक है, जिसे महान इतालवी कलाकार लियोनार्डो दा विंची ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया था। यह पेंटिंग आज फ्रांस के पेर...

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अनसुनी यात्राओं की नायिकाएं By Pradeep Shrivastava

ढेरों रंग-गुलाल से भरी होली एकदम सामने अठखेलियां करने लगी थी. फाल्गुन में फगुनहट जोर-शोर से बह रही थी. पेशे से तेज़-तर्रार वकील, मेरे एक पारिवारिक मित्र 'दरभंगा' से वापस &#3...

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यह बंधन नही है By Kishanlal Sharma

नारी के लिए विवाह बंधन है या जरूरत
पढ़िए यह कहानी
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"आखिर तेरी शादी हो ही गयी।तू एक मर्द की दासी बन ही गयी,"रूपा बोली,"तूने एक आदमी की गुलामी स...

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महत्वाकांक्षा By Shashi Ranjan

साक्षात्कार के बाद कोलकाता से खुशी खुशी मैं वापस लौट रहा था । राजधानी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के जिस केबिन में मैं चढा, उसमें पहले से एक और आदमी मौजूद था । जल्दी ही पता चला कि वह...

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दिलरस By Priyamvad

पतझर आ गया था।

उस पेड़ पर एक भी पत्ता नहीं बचा था। बाजरे की कलगी के एक-एक दाने को जैसे तोता निकाल लेता है, उसी तरह पतझर ने हर पत्ते को अलग कर दिया था। पेड़ की पूरी कत्थई शाखाएं...

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बुरी औरत हूँ मैं By Vandana Gupta

बुरी औरत हूँ मैं (1) झुरमुटी शामों में उदास पपीहे की पीहू पीहू कौंच रही थी सीना और नरेन हर लहर से लड़ रहा था, समेट रहा था खुद को जब भी किसी दरीचे में कोई न कोई लहर आकर छेड़ जाती सुप्...

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चिरयुवा बूटी By Brijmohan sharma

मित्रों यह अत्यंत रोमांचक कहानी एक ऐसे आयुर्वेदिक वैद्य की दास्तान है जो हिमालय के जंगलों में मनुष्य के सभी दुखो व बुढ़ापे की समस्याओं को दूर करने वाली बूटी की खोज करता है | वह हिमा...

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मीत By Vaidehi Vaishnav

मुझें गाने सुनते हुए काम करने की आदत हैं । आज भीं जब मैं अपने कमरें की सफ़ाई कर रहीं थीं तब आदतन मैंने रेडियो ऑन कर लिया था।

उम्र का दौर था या इश्क़ का जोर तय करना मुश्किल था पर ज...

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स्वाभिमानी By Ivan Turgenev

बुढ़ापा आ गया है, बीमार भी हूं और अब मेरे विचार अक्‍सर मृत्‍यु की ओर ही जाया करते हैं जो दिन-ब-दिन मेरे पास आ रही है। कदाचित् ही मैं भूतकाल के संबंध में सोचता हूं और शायद ही कभी मै...

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चैट बॉक्स... By Anju Choudhary Anu

आज फिर से स्वाति को नींद नहीं आ रही थी, वो बैचेनी से अपने बिस्तर पर करवटे बदलते बदलते थक गई तो, अपने बेड की साइड की लाइट को ऑन कर दी और उठ कर पानी का गिलास एक ही घूँट में खत्म कर द...

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किर_दार By sk hajee

एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...

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यादों का सफ़र By VANDANA VANI SINGH

मै वंदना सिंह पहले भी बहुत सी कहानी पढ़ी है, जैसा कि आप जानते है, की मै हर किरदार को जीती एसा ही इस कहानी मे भी होगा इस कहानी में भी मै एक एक किरदार को अच्छे से वेक्त करना चाहूंगी...

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चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 By Lajpat Rai Garg

रात के बारह बजने वाले थे। करीबी रिश्तेदारों तथा वर-वधू परिवारों के लोगों को छोड़कर विवाह समारोह में आमंत्रित लगभग सभी लोग खा-पीकर तथा बधाई-शुभकामनाएँ देने का फ़र्ज़ निभाकर जा चुके...

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आजाद-कथा - खंड 2 By Munshi Premchand

मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन हुई,...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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जीने के लिए By Rama Sharma Manavi

प्रथम अध्याय----------- शोक संवेदना की औपचारिकता के निर्वहन हेतु आसपास के परिचित एवं रिश्तेदार आ-जा रहे थे।सामाजिक रूप से कल रात्रि आरती के पति विक्रम जी का देहावसान हो गया था...

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नासाज़ By Srishtichouhan

अध्याय एकपेपरमेंट की मीठी जन्नतदुनिया एक पागल कुत्ते की तरह आपको काट खाएगी और आप बस उसका निवाला बन जाना, मुझे अब किसी की प्रतिक्रिया से कोई भी फ़र्क़ नहीं पड़ता था, बिल्कुल भी नही...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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जो मिले तुमसे By M K

" मरहम बनकर जख्म गहरे दिए क्यों ?
आसान नहीं होता है किसी को दिल से भुला जाना "

थके हारे से एक नव युवक सड़क किनारे खड़ा था , रात के 8 बज रहे थे । आस पास से कई गाड़ियां ग...

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SUDESH By ANKIT YADAV

भुमिका :- उपन्यास में वर्णिन चरित, घटना, स्थान पूरी तरह काल्पनिक हैं। चरित्र का जीवित या मृत व्यक्ति से जुड़ाव, घटनाओ का सत्य प्रतीत, होना स्थानों का यर्थाथवादी स्थान लगना केवल संय...

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गुनाहों का शहर By Ravi

सालों से चल रहे एक हाई प्रोफाइल चरस स्कैण्डल की जब नव-नियुक्त एस.आई ने जांच पड़ताल शुरू की तो सारे शहर की पुलिस उसके खिलाफ हो गई। लेकिन फिर पुरुषोत्तम अपने कर्तव्य का पालन करता रहा।...

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मेरी कविता संग्रह By Prahlad Pk Verma

?????????????? अब हम भी इश्क दोबारा करेंगे उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगेहम कभी तो फिर से मोहब्बत करेंगेमाना दिल में जख्म अभी ताजा हैकभी तो ये जख्म भी भरेंगेअब हम भी इश्क...

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बेगम पुल की बेगम उर्फ़ By Pranava Bharti

घुँघरुओं की छनछनहाट क्यों और कहाँ से उसके कानों में पिघलने लगी थी, वहाँ वह गिरजाघर के प्राँगण में खड़ा था, कॉलेज का नया लेक्चरर अपने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ इस गिरजाघर की ज़मी...

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हूफ प्रिंट By Ashish Kumar Trivedi

माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम By Brijmohan sharma

यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I

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हुक्म और हसरत By Diksha mis kahani

हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।"
"प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...

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संस्कृतियो  का अनोखा मिलन  By Akshika Aggarwal

दोस्तों आज हम एक ऐसी प्रेम कहानी के साक्षी बन ने जा रहे है जो अपने आप मे अनोखा है। इस कहाँनी में दो विभिन संस्कृतियो का मिलन है। भारत देश के गुलाबी जयपुर में रौनक का जन्म 21 दि...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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अन सुना इश्क़ By Mehul Pasaya

एक शहर मे एक बुढ़ी माँ जी रह्ती थी. और उस शहर मे दुसरे व्यक्ति या इन्सान नाम का कोई नही रह्ता था. क्यू की वहा के सारे लोग मारे जा चुके थे. बस वो बुढ़ी माँ जी और दुसरे उसके साथ एक कुत...

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क्या तुझे भी इश्क है? By R.K.S. 'Guru'

अपनी अनूठी कनपुरिया भाषा के लिए जाना जाने वाले शहर कानपुर में अभी सुबह के सात बज रहे हैं. छोटी इमारतों की छतों पर भी सूरज अब दस्तक दे चुका है. दीपावली आने वाली है इस वजह से सुबह-सु...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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हक है सिर्फ मेरा By simran

एक नई कहानी , नए किरदार बस प्यार वही जो हर किसी के नसीब में नहीं !

अब इस कहानी में प्यार की कोई जगह है या नही ये जानने के लिए हम एक सफर शुरू करते है " हक है सिर्फ मेरा "...

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चौथा नक्षत्र By Kandarp

पहली एनीवर्सरी“हैलो कमल कहाँ हो ? ....ऑफिस से निकले क्या ? ”, फोन पर झुँझलाये स्वर में, लगभग डाँटते हुए सुरभि ने कहा । “निकल गया हूँ मेरी सोना ”, लाड भरी आवाज में कमल का जवाब आय...

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We Meet again! By Anjali Lingayat

प्यार प्रेरणा की भावना है। दो व्यक्तियों की कहानी जो पूरी तरह से अलग है और ये स्थिति, जीवन शैली के बारे में है जिसे भी उनके लाइफ में फर्क पड़ता है लेकिन उनमें से दो एक घटना के साथ...

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गुमनाम राजा By Harshit Ranjan

हमारे देश आदि काल से अपनी कला-कृति, ज्ञान, औषधियों, योद्धाओं आदि के लिए संपूर्ण विश्य मे प्रसिद्ध रहा है । इन सभी के साथ-साथ एक और चीज़ है जिसके लिए हमारा देश संपूर्ण विश्व मे ं जा...

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संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि By Manoj kumar shukla

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (1) हे माँ वीणा वादिनी ..... हे माँ वीणा वादिनी, शत् शत् तुझे प्रणाम । हम तेरे सब भक्त हैं, जपते तेरा नाम ।। शांत सौम्य आभा लिए, मुख में है मुस्कान । ग...

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सलाखों से झाँकते चेहरे By Pranava Bharti

जैसे ही इशिता ने उस कमरे में प्रवेश किया उसकी साँसें ऊपर की ऊपर ही रह गईं | एक अजीब सी मनोदशा में वह जैसे साँस लेना भूल गई, लड़खड़ा गई जैसे चक्कर से आने लगे |

"व्हाट हैपेंड म...

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खून का टीका By Priyanka Singh

शादी... एक ऐसा बंधन जिसे हर लड़की सपनों में संजोती है।

लेकिन क्या हो जब यही शादी एक जाल बन जाए?

क्या हो जब सिंदूर के पीछे छुपा हो खून का व्यापार?

और क्या एक सीधी-साधी लड़क...

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खाली हाथ By Ratna Pandey

सूरज और नताशा का इकलौता बेटा अरुण विवाह के दस वर्ष के पश्चात नताशा के गर्भ में आया था। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर भगवान के आगे माथा टेका था, ना जाने कितनी मानता रखी थीं। तब...

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पुर्णिमा By Soni shakya

मां _मां_ ओ __मां !!

देखो मेरा रिजल्ट पुरे 95 पर्सेंट मिले से मुझे।

मां मैं बहुत खुश हूं आज कहते हुए झुमने लगी पुर्णिमा ।

उसकी बातों में खनक और आंखों मे चमक थी।

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जुआरी फिल्मप्रोड्यूसर By Brijmohan sharma

शेयरबाजार व फिल्मनिर्माण के व्यवसाय में तूफानी उतार चढाव की लोमहर्षक दास्तान

जुऐं की लत से परिवार के बर्बाद व फिर से आबाद होने की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी

लेखक : ब्रजमोहन श...

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धनिया By Govardhan Yadav

भिनसारे उठ बैठती धनिया और बाउण्ड्री वाल से चिपकर खड़ी हो जाती। उसकी खोजी नजरें, पहाड़ों की गहराइयों में अपना गाँव खोजने में व्यस्त हो जातीं। गहरे नीले-भूरे रंग के धुंधलके की चादर त...

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कैक्टस के जंगल By Sureshbabu Mishra

श्री सुरेश बाबू मिश्रा हिन्दी कथा साहित्य का जाना-पहचाना नाम है। आपकी अनेक रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होती रहती हैं। आपका नया कहानी संग्रह ‘कैक्टस के जंगल’ न...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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सियाह हाशिए By BALRAM AGARWAL

‘सियाह हाशिये’ पाकिस्तान में बस जाने के बाद मंटो की तीसरी किताब थी जो ‘मकतबा-ए-जदीद’ से प्रकाशित हुई। सन् 1951 तक यह उनकी सातवीं किताब थी। वीभत्सता, उलझन, बेज़ारी, नफ़रत, दुख और क्...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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शरणागति By S Bhagyam Sharma

इस लघु उपन्यास के प्रसिद्ध लेखक इंदिरा सौंदर्राजन हैं। यह तमिल के बहुत बड़े लेखक हैं। इन्होंने करीब 500 उपन्यास और 800 कहानियां लिखी है। आपने चार हजार के करीब लेख लिखे हैं।

आप क...

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पहाडिन By Jayesh Gandhi

निवाड़ी, नंदादेवी पर्वत के निचले इलाके में बसा एक छोटा सा गांव। गांव के चारो और छोटीछोटी पहाड़िया,-घने पेड़ो के झुरमुट थे। गांव के पास में अलकनंदा नदी अपना निर्मल ओर पवित्र जल बहाती...

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रहस्यों की परछाई By Diksha Dhone

रात का अंधेरा शहर की संकरी गलियों में गहराता जा रहा था। आसमान में बादल थे, जिनसे रुक-रुककर हल्की बारिश की बूंदें टपक रही थीं। बूंदें जब पत्थर की फर्श से टकरातीं, तो एक अजीब-सी गूँज...

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गुलकंद By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

मैं, एक लेखिका, श्रुत कीर्ति अग्रवाल, आज पहली बार आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से नहीं, स्वयं अपने-आप को माध्यम बना आपके समक्ष हूँ। अभी तक मुझे लगता था कि अगर मैं अपनी सारी बातें...

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मोनालिसा: एक रहस्यमयी कृति की अद्भुत गाथा By Lokesh Dangi

मोनालिसा (Mona Lisa) विश्व की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग्स में से एक है, जिसे महान इतालवी कलाकार लियोनार्डो दा विंची ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया था। यह पेंटिंग आज फ्रांस के पेर...

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अनसुनी यात्राओं की नायिकाएं By Pradeep Shrivastava

ढेरों रंग-गुलाल से भरी होली एकदम सामने अठखेलियां करने लगी थी. फाल्गुन में फगुनहट जोर-शोर से बह रही थी. पेशे से तेज़-तर्रार वकील, मेरे एक पारिवारिक मित्र 'दरभंगा' से वापस &#3...

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यह बंधन नही है By Kishanlal Sharma

नारी के लिए विवाह बंधन है या जरूरत
पढ़िए यह कहानी
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"आखिर तेरी शादी हो ही गयी।तू एक मर्द की दासी बन ही गयी,"रूपा बोली,"तूने एक आदमी की गुलामी स...

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महत्वाकांक्षा By Shashi Ranjan

साक्षात्कार के बाद कोलकाता से खुशी खुशी मैं वापस लौट रहा था । राजधानी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के जिस केबिन में मैं चढा, उसमें पहले से एक और आदमी मौजूद था । जल्दी ही पता चला कि वह...

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दिलरस By Priyamvad

पतझर आ गया था।

उस पेड़ पर एक भी पत्ता नहीं बचा था। बाजरे की कलगी के एक-एक दाने को जैसे तोता निकाल लेता है, उसी तरह पतझर ने हर पत्ते को अलग कर दिया था। पेड़ की पूरी कत्थई शाखाएं...

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बुरी औरत हूँ मैं By Vandana Gupta

बुरी औरत हूँ मैं (1) झुरमुटी शामों में उदास पपीहे की पीहू पीहू कौंच रही थी सीना और नरेन हर लहर से लड़ रहा था, समेट रहा था खुद को जब भी किसी दरीचे में कोई न कोई लहर आकर छेड़ जाती सुप्...

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चिरयुवा बूटी By Brijmohan sharma

मित्रों यह अत्यंत रोमांचक कहानी एक ऐसे आयुर्वेदिक वैद्य की दास्तान है जो हिमालय के जंगलों में मनुष्य के सभी दुखो व बुढ़ापे की समस्याओं को दूर करने वाली बूटी की खोज करता है | वह हिमा...

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मीत By Vaidehi Vaishnav

मुझें गाने सुनते हुए काम करने की आदत हैं । आज भीं जब मैं अपने कमरें की सफ़ाई कर रहीं थीं तब आदतन मैंने रेडियो ऑन कर लिया था।

उम्र का दौर था या इश्क़ का जोर तय करना मुश्किल था पर ज...

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स्वाभिमानी By Ivan Turgenev

बुढ़ापा आ गया है, बीमार भी हूं और अब मेरे विचार अक्‍सर मृत्‍यु की ओर ही जाया करते हैं जो दिन-ब-दिन मेरे पास आ रही है। कदाचित् ही मैं भूतकाल के संबंध में सोचता हूं और शायद ही कभी मै...

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चैट बॉक्स... By Anju Choudhary Anu

आज फिर से स्वाति को नींद नहीं आ रही थी, वो बैचेनी से अपने बिस्तर पर करवटे बदलते बदलते थक गई तो, अपने बेड की साइड की लाइट को ऑन कर दी और उठ कर पानी का गिलास एक ही घूँट में खत्म कर द...

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किर_दार By sk hajee

एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...

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