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कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँग...
नाटक ? तकनीकी दृष्टि से नाटकों से अधिक सक्षम माध्यम आज उपलब्ध हैं। महान वृत्तान्...
एक प्यार की अधूरी कहानी / एक किराएदार ऐसा भीलेखक: मुकुल तिवारी ...
आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में, टेंशन और डिप्रेशन सामान्य होते जा रहे हैं। काम...
-१-" माँ, आज मेरा लंच पैक नहीं करना। " मैंने शीशे के...
आज दोपहर को घर के आंगन मे बैठा में आराम कर रहा था। अचानक दिमाग में कुछ लिखने का...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान...
अलविदा आनंद ! जीवन में कुछ चीजें आकस्मिक हो कर बुरी तरह से झकझोर जाती हैं, जैस...
अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर...
मुंबई...एक ऐसा शहर जो कभी नहीं सोता। यहाँ कुछ लोग सपने लेकर आते हैं और कुछ लोगों...
मृणाल पंत शिमला के ले जोसफिन कैफे में कोने की टेबल पर बैठा कॉफी एंजॉय रहा था। लंबे-छरहरे शरीरवाला वह सांवला सा लड़का पेशे से पेंटर है। उम्र यही कोई 30 के आसपास की होगी। इंस्टाग्राम...
उत्तर भारत के एक छोटे से गांव में एक अजीब सी खामोशी थी, जिसमें किसी प्रकार के बदलाव की कोई संभावना दिखाई नहीं देती थी। यह गांव अपनी पारंपरिक संस्कृति और मान्यताओं के कारण जाना जाता...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
रश्मि अपने घर में बैठी अपनी फैमिली के साथ खाना खा रही थी। खाना खाते समय रश्मि अपनी फैमिली से बात करते हुए हंसी मजाक कर रही थी। रश्मि अपनी फैमिली के साथ खुश थी और उसे कल का भी बे...
गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत समर्पण : श्री बाँके बिहारी जी के उपासक श्री रामजी व बुआ माया देवी (बेरी वालों) को सादर समर्पित भूमिका सुबह-सुबह सब्ज़ी ख़रीदने जा...
अर्थ पथ प्रस्तावना हमें परमात्मा ने एक निश्चित समय सीमा प्रदान कर अनंत शुभ कर्मो को करने के लिए धरती पर भेजा है। यह हम पर निर्भर करता है कि सीमित...
कहते हैं किस्मत ऐसी चीज़ हैं जिसे हर रोज़ खुद ही लिखना पड़ता हैं, खुद की मेहनत से उसे अपने जीवन में लाना पड़ता हैं, यूँ कहे हमारा आज का किया हुआ कार्य कल किस्मत के रूप में हमारे सामने...
नवंबर का महीना था। आसमान से हल्की-हल्की बारिश गिर रही थी। बूंदों की नमी में ठंड और भी तेज़ लग रही थी। चारों ओर हरियाली छाई हुई थी, जैसे धरती ने हरे रंग की चादर ओढ़ ली हो।...
ढ़लती दोपहर को अपने कमरे की खिड़की के पास बैठे हुए श्रेया बाहर बरसती बारिश की बूंदो को अपलक निहार रही थी । पास रखे उसके मोबाइल पर जगजीत और चित्रा सिंह की आवाजें गूंज रही थी । ‘ये...
वंदना एक बहुत ही कुशल प्रेरक वक्ता थी। वह अपने प्रेरणात्मक भाषणों से समाज को एक नई दिशा देने की जवाबदारी लेना उसका कर्तव्य समझती थी। लोगों को उसकी कही बातें बहुत अच्छी लगती थीं। ले...
गांव के बिलकुल बीचों बीच प्रतीक का घर था। जब भी कोई दूर के रिश्तेदार आते "कितना बड़ा हो गया है" कहते। ये उनके सबसे पसंदीदा वाक्यों में से एक था, पर प्रदीप को इन सब से चिढ़...
" मरहम बनकर जख्म गहरे दिए क्यों ? आसान नहीं होता है किसी को दिल से भुला जाना " थके हारे से एक नव युवक सड़क किनारे खड़ा था , रात के 8 बज रहे थे । आस पास से कई गाड़ियां ग...
' हमारी फैमिली के मेम्बर्स भी कमल करते है जो करना चाहिये वो तो करते नही और जो नही करना चाहिये वो कर देते है पता नही कब सुधरेंगे ये लोग हद है ' " अरे मेहुल क्यू गुस्स...
दिल्ली, दोपहर के 3 बजे... एक नौजवान लड़का अपनी hf deluxe बाइक से कहीं जा रहा होता है की तभी उसका ध्यान उसके पीछे चल रही कार पर जाता है। वो नोटिस करता है की वो कार बहुत देर से उस...
पूर्णता की चाहत रही अधूरी लाजपत राय गर्ग समर्पण स्मृति शेष मामा श्री वज़ीर चन्द मंगला को जो कॉलेज के समय में मेरी छुट-पुट रचनाओं के प्रथम श्रोता रहे तथा जिनकी प्रेरणा सफलता की सीढ़...
’नमस्ते बाउजी. कैसे हैं?’बाहर बरामदे में बैठे बाउजी यानी रामस्वरूप शर्मा जी, सुधीर के दोस्त आलोक के इस सम्बोधन और उसके पैर छूने के उपक्रम से गदगद हो गये. ’ठीक ही हूं बेटा. अब बुढ़ाप...
वह उस बार में रोज़ ही देर शाम को बैठ कर घंटे भर तक व्हिस्की पीती है, जो शहर का एक ठीक-ठाक बार कहा जाता है। जगह ज़्यादा बड़ी होने के कारण शान्ति से देर तक बैठ कर पीने वालों का वह पसंद...
स्थान: उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों के बीच छुपा एक अजीबोगरीब घाटी — “त्रि-गह्वर” काल: कलियुग का वह समय जब धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था… हिमालय की गोद में एक घाटी थी, जो न त...
बुरी औरत हूँ मैं (1) झुरमुटी शामों में उदास पपीहे की पीहू पीहू कौंच रही थी सीना और नरेन हर लहर से लड़ रहा था, समेट रहा था खुद को जब भी किसी दरीचे में कोई न कोई लहर आकर छेड़ जाती सुप्...
परिंदों का झुंड सर के ऊपर से फड़फड़ाते हुए गुज़र रहा था। कड़ाके की ठंड में घने धुंध में वे उड़ते हुए तो नहीं दिख रहे थे लेकिन उनके पंखों की आवाज़ बेला को अपने सिपाही साथ होने का और...
दोस्तों प्यार बहोत अनमोल होता है। जब यह होता है तो जिंदगी बदल जाती है। दिल मे प्यार के फूल खिल जाते है। पर कभी कभी प्यार का यह कमल नफ़रत की कीचड़ में भी खिलता है। आज की यह कहानी बहोत...
दिल्ली परिवहन निगम की बस में बैठा सत्यम ना जाने अपनी किस चिंता में मग्न था, पहली बार दिल्ली आया था न तो बहुत सारी चीजों के बारे में जानकारी थी नहीं । और साथ में कई अलग प्रकार की च...
मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी दूर विंध्य पर्वत माला के दक्षिण में अवस्थित है। यह स्थान बलुआ पत्थर के चट्ट...
बहुत बड़ी बिल्डिंग जिसके बाहर बहुत बड़ा बड़ा खुराना हॉस्पिटल लिखा हुआ था। हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर के बाहर कुछ आदमी आपस में बात कर रहे थे ,"तुम टेंशन मत लो जे डॉक्टर इंडिया के...
यहां... वहाँ... कहाँ ? मूल लेखक राजेश कुमार राजेश कुमार इस उपन्यास के मूल तमिल लेखक राजेश कुमार है। आपने 50 वर्षों में डेढ़ हजार उपन्यास लिखे और 2000 कहानियां लिखी। आपकी उपन्यास और...
कहीं दूर एक गांव में, शाम का समय,सूरज डूबने जा रहा है,सूरज की हल्की रोशनी से आकाश का रंग गहरे नारंगी रंग का हो गया है, पंक्षियो के झुंड भी दिनभर टहलकर अपने अपन आशियाने की ओर लौट रह...
इन्सान सरलता से झूठी हंँसी हँस तो सकता है, लेकिन बिना बात के बड़े बड़े आंँसुओं के साथ उसके लिए रोना लगभग कठिन सा हो जाता है,अगर आपसे कोई कहे कि अब रोने लगो, तो शायद आपके लिए ऐसा कर प...
एक वैल एजुकेटेड रिप्यूटेड सिंघानिया परिवार, जिसके सभी सदस्य किसी हायर पोस्ट पर हैं। सोसाइटी में अच्छी रेपुटेशन के साथ हस्ता खेलता सुखी परिवार जिसका छोटा बेटा कार्निश जो एक राइटर बन...
शाम हों चली थी, सूरज वसुंधरा को कल आने का वादा करके जा चूका था.. शहर की सड़कों पर दिन की अपेक्षा शाम कुछ ज्यादा ही रंगीन दिखाई देने लगी थी... कहते हैं किसी के जीवन में जिंदगी भी दिन...
रात के 12 बज चुके थे, एक टेबल लैंप जल रहा था और रिया अभी भी पढ़ाई में व्यस्त थी; क्योंकि कल से उसके बीकॉम के फाइनल ईयर के एग्जाम्स शुरू होने वाले थे, रिया की मां सुनीता और छोटा भाई...
एक नई कहानी , नए किरदार बस प्यार वही जो हर किसी के नसीब में नहीं ! अब इस कहानी में प्यार की कोई जगह है या नही ये जानने के लिए हम एक सफर शुरू करते है " हक है सिर्फ मेरा "...
यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं। हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...
शायद ही कोई ऐसा धंधा करने वाला दुकानदार होगा जिसे लोग कई नामों से पुकारते हों। उसे हेय दृष्टि से देखते हों। नाम सुनकर मुँह बिचका देते हों। लेकिन मेरे धंधे पर ये सब बातें लागू होती...
‘आठ हज़ार तो आप अब दे दीजिए और बाकी के आठ हज़ार आख़िरी सुनवाई से पहले दे देना.’’ कल शाम से यह वाक्य उसके दिमाग़ पर हथौड़े की तरह बज रहा था. कहाँ से लाए वह आठ हज़ार रुपए? उस जैसे पन्द...
भुमिका :- उपन्यास में वर्णिन चरित, घटना, स्थान पूरी तरह काल्पनिक हैं। चरित्र का जीवित या मृत व्यक्ति से जुड़ाव, घटनाओ का सत्य प्रतीत, होना स्थानों का यर्थाथवादी स्थान लगना केवल संय...
दोस्ती थी... लेकिन प्यार नहीं। शादी थी... मगर असली नहीं। आख़िर क्यों करनी पड़ी शौबो को एक नकली शादी? क्या था राज़ जिमी और शौबो के बीच? और कौन था वो... जिसके आने से सब कुछ बदल ग...
आजा, मर गया तू? मैं बरसों से चुप हूं। कुछ नहीं बोली। बोलती भी क्या? न जाने ये सब कैसे हो गया। मैं मर ही गई। मैं यहां परलोक में आ गई। तू वहीं रह गया था दुनिया में। मैं अभागी तो रो...
शांतिपूर्ण बाग के बीच में लगे हुए झूलों पर हवा का हल्का-हल्का झोंका आ रहा था। आस-पास के पेड़-पौधे अपनी हरी-हरी पत्तियों को झटकते हुए इस खुशनुमा मौसम का स्वागत कर रहे थे। बाग में दू...
“एक तो सुबह की भागादौड़ी दूसरे तुम... बच्चों की तरह हर तीसरे दिन शर्ट का बटन तोड़ लाते हो.” झल्लाती मिताली पति की शर्ट पर बटन टाँकने के लिए सुई में मैचिंग धागा पिरोने लगी. “मुझे भ...
यास्मिन ने देखा कि उसके चारों ओर बहुत डरावने चेहरे हैं । सभी लाल-काल-पीले मुँह वाले लोग उसकी तरफ बढ़ रहें हैं और उसके आसपास घेरा-सा बनता जा रहा हैं। वह ज़ोर से चिल्लाई बचाओं!!!! तभी...
उस छोटी क्यूट सी सफ़ेद फ़िएट कार का दरवाज़ा खोलते हुये मीना देवी की बगल में बैठते हुये उसे रोमांच हो आया था। ये किसी राजपूती रजवाड़े की भूतपूर्व राजकुमारी एक लोकल चैनल की पी आर ओ थी। द...
बेसहारा, गरीब और अनाथ ये तीनों शब्द आराधना को चुभ गये। उसके अंदर सिहरन सी पैदा हो गयी और उसके होंठ कंपकपाने लगे, मानो किसी ने उसे तीर मार दिया हो। आखिर क्या हुआ था उसके साथ? क्या ह...
मर गया पत्थर-दिल इन्शान( यह लेख लेखक के जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं , लेखक के भीतर व्याप्त भय और भ्रम के विभिन्न दृश्यों को चित्रत करता है । लेखक का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या स...
काव्य संकलन - समय का दौर वेदराम प्रजापति मनमस्त सम्पर्क सूत्र. गायत्री शक्ति...
(ऐक बेवफा पत्नि द्वारा अनेकों प्रकार से अपने सीधे सादे पति को धोखा देना लेकिन फिर एक दिन जब उसके षड्यंत्र का पर्दाफाश होता है तब ....) समर्पण : भगवान शिव के श्री चरणों में समर्प...
रामरज शर्मा अभी अपना स्कूटर ठीक तरह से स्टैंड पर टिका भी नहीं पाए थे कि उनकी प्रतीक्षा में बैठा भगोना-चपरासी खड़ा हो, चलकर निकट पहुँच गया-'मालिक आपकी बाट देख रहे हैं ....बहुत जर...
जल्दी करो बहुत देर हो रही है पाता नहीं सुबह से क्या कर रहे थे जो अब इतना समय लग रहा है अरे आज ही हमें बारात लेकर निकलना है,,, और कितना समय लगाओगे जल्दी करो सुबह समझा रहीं हूं अपनी...
ये कहानी समर्पित है उन सभी लोगों को जो ईश्वर में आस्था रखते हैं, उन्हें पूजते हैं, लेकिन साथ साथ ही जाने अंजाने कुछ ऐसा भी करते हैं जिससे हमारे धर्म के साथ साथ कर्म की भी हानि होती...
दोस्तों.. नमस्कार.. ?आपके सामने एक फिर प्यार की कहानी के साथ मौजूद हूं... मेरा हमेशा से मकसद यहीं रहा हैं कि प्यार को समझें एक दूसरे की भावनाओं को समझें आप कितने खुश नसीब हैं कि आप...
ब्लैक कार अपनी पूरी तेज रफ्तार में, खाली और काली सडक पर दौड रही थी. इंजन की गडगडाहट और टायरों की आवाज रात की खामोशी को चीर रही थी. कार के अंदर म्यूजिक फुल वॉल्यूम पर बज रहा था—सैंग...
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