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అలా కొన్ని రోజులు వెన్నెల, కిషోర్ మధ్య మౌనమైనా, మనసులకి చేరువైన స్నేహం ఎంతో అందం...
तोतया वारसदार पात्र रचना निशांत - शोधकर्ता व्यंकटेश, सौमि...
भाग 4: रूपा: एक रहस्यमयी पहेलीभार्गव के लिए रूपा एक ऐसी किताब थी जिसे वह बार-बार...
अखेर बरेच दिवस सहन केल्यावर शेवटी माझ्या मनाचा सुद्धा तोल सुटला आणि मी ठरवले आता...
दोहा:१३अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप...
अनय :- अरे शमिका ये तुमसे झुट बोला है , ये मेरे कंपनी का मामुली सा एम्पलाई है ,...
सच, झूठ और फैसलासुबह का समय था।शिवाय बालकनी में खड़ा था। भोपाल की हल्की ठंडी हवा...
ரமேஷுடைய கல்யாண நிச்சயதார்த்தமும், தீபாவின் வளைகாப்பு விழாவிற்கும் முன்பாக பிரேம...
“অজানা টান, অস্বস্তির শুরু”সকালটা আজ একটু অদ্ভুত লাগছিল ঈশার কাছে।কেন যেন মনে হচ...
My mother will have a hard time hearing this. She'll roll her eyes when I sa...
அந்த நாளை எப்படி துவங்குவது என்பது பிரேமுக்கு தெரியவில்லை. எப்போதும் போல இருந்து விட முடியவில்லை. வேலையில்லா நாட்கள் பெரும் சுமையாய் இருந்தன. படிப்பு முடிந்து 2 வருஷம் ஓடி விட்டது....
“প্রথম দেখা, অজানা টান”কলেজের প্রথম দিন।সকালের হালকা ঠান্ডা হাওয়া, আকাশে একটু মেঘলা ভাব—যেন প্রকৃতিও আজ নতুন কিছু শুরু হওয়ার অপেক্ষায়।ঈশা ধীরে ধীরে কলেজের গেটের সামনে এসে দাঁড়াল।নত...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ಪರದೆ ಸರಿಯುವ ಕ್ಷಣ. ಆಕಾಶದಿಂದ ಬೀಳುತ್ತಿದ್ದ ಮಳೆಯ ಹನಿಗಳು...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
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