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कमरे के भीतर फैली सन्नाटे की चादर को सिर्फ बाहर के तूफान का शोर चीर रहा था। इंस्...
अवनि ने अपनी चोटिल उंगली पर पट्टी बाँधते हुए कान्हा की मूरत को निहारा। उसकी आँखो...
*ભાગ 1: જુલિયા કાકી - 1942, બ્રિટન*પ્રારંભમાં પોલ કાકાએ જુલિયા કાકીને ખૂબ મદ કરી...
“পূর্ণ ছায়ার শেষ চাল”শেষ চাল কখনো হঠাৎ আসে না।ওটা আসে তখনই—যখন তুমি ভাবোসবচেয়ে ক...
नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के ज...
वैध उस जीवन बूटी के लेप को राघव के जख्मी हाथ पर लगाता है. और फिर उसके शरीर के ता...
पंजाब मेलने आता चांगलाच वेग घेतला होता. कल्याण स्टेशनचा प्लॅटफॉर्म वेगाने मागे स...
दिल्ली जिमखाना क्लब दिल्ली के बड़े बड़े लोगों की जान और शान इस दिल्ली जिमखाना...
इतना सुनते ही सुभश्री मैम एक पल के लिए आरी की ओर मुड़ीं, और अगले ही पल अपनी स्कू...
ట్రైనింగ్ ముగించి వచ్చిన ప్రభ అమ్మకు తాను కూడా సాయం చేయాలని ఆలోచించి ఏదైనా పని చ...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
ভুল পথের শুরু, নতুন কারো আগমনের গন্ধ সারা দিনটা অদ্ভুত রকমের ভারী গিয়েছিল ইরার। ক্লাসগুলো শেষ হয়েছিল বিকেল চারটায়, কিন্তু মনটা যেন কোনোকিছুতে ঠিকমতো লাগছিল না। সহপাঠীরা সবাই ক্য...
यह कहानी है राघव की…. जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...
डोंबिवली स्टेशनच्या प्लॅटफॉर्म नंबर ३ वर सकाळी ९:१५ वाजता पाय ठेवायलाही जागा नव्हती. मध्य रेल्वेची ही सर्वात भयानक वेळ. प्लॅटफॉर्मवर उसळलेला तो मानवी समुद्र पाहून कोणाही नवख्या माण...
मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेह...
ఉషోదయాన భానుడి లేలేత కిరణాలు పడుతూ ఉండగా పొగ మంచు మెల్లమెల్లగా తెరతీస్తూ ఉంటే చుట్టూ మొక్కలు, చెట్లు కనిపించగా బస్సులో కిటికీ అద్దాలను కాస్త వెనక్కి జరిపి ఆ చుట్టూ ఉన్న పచ్చదనాన్...
ઈતિહાસ જ્યાં પથ્થરો બનીને થીજી જાય છે, ત્યાં રહસ્યો આપોઆપ જન્મે છે. શાંતિવન ચોકમાં આવેલો ‘વિરાજ પેલેસ’ એવો જ એક ભયાનક અને અજીબોગરીબ મહેલ છે. આસપાસના વિસ્તારમાં એની સ્તબ્ધતા જ એનો ખ...
अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
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