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कुछ दिन बाद कुछ लकड़हारे उसी घाटी में लकड़ियाँ काटने गए। वहाँ उनकी नजर जमीन से न...
अधूरी चूड़ियों की आख़िरी आवाज़बरसात की वह रात आज भी गाँव के लोगों की रूह कंपा दे...
------ काल कोठरी ----एक रहस्य था या वो केस गेंदा राम के भय से भयवीत हो जाना था।...
दिन बीतते गए और अंकिता व परी की बचपन की दोस्ती फिर से परवान चढ़ने लगी। अंकिता अक्...
68. अलविदा वृषाली...खून से लतपथ कमरे में दोनों लहू में रेम एक दूसरे के आलिंगन मे...
सफलता के 24 अध्यायसोनू शर्मा की पुस्तक 'सफलता के 24 अध्याय' (24 Chapter...
अभिराम - पांडे (ड्राइवर) ,जिप्सी को पहले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की तरफ ले...
"तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा खूबसूरत था। क्योंकि मौसम अच्छा था, क्योंकि मौसम खर...
बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)मनुष्य...
: ' पुस्तकें ' विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर"जिस घर में क...
प्रस्तुत हास्य व्यंग्य के धारावाहिक में एक आम नागरिक मामा मौजी राम और उनके शिष्य सवालीराम के किस्से हैं।अपने पास-पड़ोस में बिखरे हास्य के प्रसंगों को एक दीर्घ कथा सूत्र में पिरो कर...
विनोद को फ़िल्में देखने का बहुत शौक़ था । उसका बस चलता, तो रोज़ एक फ़िल्म देख लेता । लेकिन तब, यानी १९७० के दशक में तो कई फ़िल्में छोटे शहरों और कस्बों तक में भी चार-छः हफ्ते चल ही जाती...
सूचना - ये एक काल्पनिक कहानी है और इसका जीवित यां मृत किसी व्यक्ति से कोई लेनादेना नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो ये महज़ एक संयोग है। इस कहानी को केवल पाठकों के मनोरंजन हेतु लिखा गया ह...
नाम सुनते ही आप सोचने लगेे होंगे । केसरिया वस्त्र , बड़ी बड़ी जटा, हाथ मे कमंडल और चिमटा या किसी नंग धड़ंग शरीर पर भभूत लगाए या किसी इसी तरह के बाबा के बारे में आपको बताने जा र...
भोला सत्रह साल का एक ग्रामीण युवक था । अपने नाम के अनुरूप ही सीधा सादा और भोला या यूँ भी कह सकते हैं नाम से भी ज्यादा भोला । उसके पिताजी बचपन में ही गुजर गए थे । शोषित जाति का होन...
सब्जीपुर के युवराज ‘ आलू चंद ‘ की विवाह योग्य उम्र होते ही राज्य के सभी मंत्री , दरबारी उनके लिए सुयोग्य नायिका की खोज में लग गए ।सब्जी पुर की कई यौवनाएँ मन ही मन आलूचन्द के सपने...
चच्चा खीस से एकमुस्त लाल-पीला हो भुनभुनाए जा रहे थे मगर बोल कुछ भी नहीं रहे थे। मतलब एकदम चुप्प! बहुत देर तक उनका भ्रमर गान सुनने के बाद जब मेरे अन्दर का कीड़ा कुलबुलाने लगा। अन्त म...
इस कहानी का मुख्य पात्र अक्षिता नाम की लड़की हैं, वह १२ वीं कक्षा में पढ़ती हैं।इस कहानी का शीर्षक आपको थोड़ा सा अजीब लगा होगा! यह कहानी वैसे तो थोड़ी सी न...
इस बार महाशिवरात्री और वेलेन्टाइन-डे लगभग साथ-साथ आ गये। युवा लोगों ने वेलेन्टाइन-डे मनाया। कुछ लड़कियों ने मनाने वालों की धज्जियां उड़ा दी और बुजुर्गों व घरेलू महिलाओं ने शिवरात्री...
प्रस्तावना : 20वीं सदी की शुरुआत में हमारे जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। हॉस्टल लाइफ का अनुभव मेरे जीवन में नया था और मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित था। मैंने Graduation किया और Post...
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