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बिसात का आखिरी मोहरा By Aarti Garval

रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...

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अवनि एक अटूट विश्वास By RAAHULL SHARMA

कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है।

यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...

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ভুল পথে পেলাম তোমাকে By MOU DUTTA

ভুল পথের শুরু, নতুন কারো আগমনের গন্ধ

সারা দিনটা অদ্ভুত রকমের ভারী গিয়েছিল ইরার। ক্লাসগুলো শেষ হয়েছিল বিকেল চারটায়, কিন্তু মনটা যেন কোনোকিছুতে ঠিকমতো লাগছিল না। সহপাঠীরা সবাই ক্য...

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महिमा: शक्तिशाली तलवार By Ashish Taak

यह कहानी है राघव की….

जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...

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डोंबिवली फास्ट कोड ६० By Siddhesh Chaudhari

डोंबिवली स्टेशनच्या प्लॅटफॉर्म नंबर ३ वर सकाळी ९:१५ वाजता पाय ठेवायलाही जागा नव्हती. मध्य रेल्वेची ही सर्वात भयानक वेळ. प्लॅटफॉर्मवर उसळलेला तो मानवी समुद्र पाहून कोणाही नवख्या माण...

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WAIT FOR WET By Ren Remag

मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेह...

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ప్రణయ గీతిక By sreelu

ఉషోదయాన భానుడి లేలేత కిరణాలు పడుతూ ఉండగా పొగ మంచు మెల్లమెల్లగా తెరతీస్తూ ఉంటే చుట్టూ మొక్కలు, చెట్లు కనిపించగా బస్సులో కిటికీ అద్దాలను కాస్త వెనక్కి జరిపి ఆ చుట్టూ ఉన్న పచ్చదనాన్...

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વિરાજ પેલેસ By its MD

ઈતિહાસ જ્યાં પથ્થરો બનીને થીજી જાય છે, ત્યાં રહસ્યો આપોઆપ જન્મે છે. શાંતિવન ચોકમાં આવેલો ‘વિરાજ પેલેસ’ એવો જ એક ભયાનક અને અજીબોગરીબ મહેલ છે. આસપાસના વિસ્તારમાં એની સ્તબ્ધતા જ એનો ખ...

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तेरी मेरी खामोशियां। By Mystic Quill

अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...

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MTNL की घंटी By kalpita

नवंबर की हल्की ठंड...
और मीठी-सी धूप में...
आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी।

तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई...

? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...

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बिसात का आखिरी मोहरा By Aarti Garval

रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...

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अवनि एक अटूट विश्वास By RAAHULL SHARMA

कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है।

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ভুল পথে পেলাম তোমাকে By MOU DUTTA

ভুল পথের শুরু, নতুন কারো আগমনের গন্ধ

সারা দিনটা অদ্ভুত রকমের ভারী গিয়েছিল ইরার। ক্লাসগুলো শেষ হয়েছিল বিকেল চারটায়, কিন্তু মনটা যেন কোনোকিছুতে ঠিকমতো লাগছিল না। সহপাঠীরা সবাই ক্য...

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महिमा: शक्तिशाली तलवार By Ashish Taak

यह कहानी है राघव की….

जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...

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डोंबिवली फास्ट कोड ६० By Siddhesh Chaudhari

डोंबिवली स्टेशनच्या प्लॅटफॉर्म नंबर ३ वर सकाळी ९:१५ वाजता पाय ठेवायलाही जागा नव्हती. मध्य रेल्वेची ही सर्वात भयानक वेळ. प्लॅटफॉर्मवर उसळलेला तो मानवी समुद्र पाहून कोणाही नवख्या माण...

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WAIT FOR WET By Ren Remag

मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेह...

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ప్రణయ గీతిక By sreelu

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વિરાજ પેલેસ By its MD

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तेरी मेरी खामोशियां। By Mystic Quill

अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...

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MTNL की घंटी By kalpita

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आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी।

तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई...

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